इन्सिजनल हर्निया (Incisional Hernia): सर्जरी के पुराने निशान पर बनने वाला हर्निया
परिचय
पेट की सर्जरी के बाद कई लोगों को ऑपरेशन के निशान के आसपास एक उभार या गांठ दिखाई देने लगती है। शुरू में यह छोटी होती है और लेटने पर गायब हो जाती है, इसलिए लोग इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं। यह उभार अक्सर इन्सिजनल हर्निया होता है, जिसे आम भाषा में “चीरे के निशान पर हर्निया” कहा जाता है। यह पेट की सर्जरी की सबसे आम दीर्घकालिक जटिलताओं में से एक है। समय पर पहचान और सही इलाज से इसे सुरक्षित तरीके से ठीक किया जा सकता है।
इन्सिजनल हर्निया क्या है?
हमारे पेट की दीवार मांसपेशियों और उनके ऊपर चढ़ी मज़बूत झिल्ली (फेशिया) से बनी होती है। यह दीवार पेट के अंदर की आंतों और अन्य अंगों को सुरक्षित रखती है। जब पेट की सर्जरी में चीरा लगाया जाता है, तो ऑपरेशन के अंत में इस परत को टांकों से जोड़ा जाता है। यदि यह जोड़ कमज़ोर पड़ जाए या टांके ढीले हो जाएँ, तो निशान की जगह पर एक कमज़ोर हिस्सा बन जाता है। पेट के अंदर का दबाव इस कमज़ोर हिस्से से आंत या चर्बी की परत को बाहर धकेल देता है। इसी उभार को इन्सिजनल हर्निया कहते हैं।
इसे “वेंट्रल हर्निया” का एक प्रकार भी माना जाता है, क्योंकि यह पेट के अगले हिस्से की दीवार पर होता है।
यह कितना आम है?
पेट की बड़ी (खुली) सर्जरी के बाद लगभग 10 से 15 प्रतिशत मरीज़ों में इन्सिजनल हर्निया विकसित हो सकता है। कुछ अधिक जोखिम वाले समूहों में यह आँकड़ा और ऊँचा हो सकता है। अधिकतर मामले सर्जरी के पहले दो-तीन वर्षों में सामने आते हैं, लेकिन कभी-कभी यह कई साल बाद भी दिख सकता है।
यह उन सर्जरी के बाद ज़्यादा होता है जिनमें पेट के बीचोंबीच लंबा चीरा लगाया गया हो, जैसे:
- आंतों की सर्जरी
- पित्त की थैली या अग्न्याशय की खुली सर्जरी
- सिज़ेरियन डिलीवरी
- हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय निकालने की सर्जरी)
- आपातकालीन पेट की सर्जरी
इन्सिजनल हर्निया के कारण
सर्जरी के बाद घाव ठीक से न जुड़ पाना इसका मूल कारण है। इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं।
1. घाव में संक्रमण: सर्जरी के घाव में संक्रमण होने पर टांकों की पकड़ ढीली पड़ जाती है और घाव कमज़ोर ठीक होता है।
2. मोटापा: अधिक वज़न से पेट के अंदर दबाव बढ़ता है, जिससे घाव पर लगातार खिंचाव रहता है।
3. धूम्रपान: तंबाकू और धूम्रपान से घाव तक ऑक्सीजन और रक्त का प्रवाह घटता है, जिससे घाव धीरे और कमज़ोर ठीक होता है।
4. मधुमेह: अनियंत्रित शुगर घाव भरने की क्षमता और संक्रमण से लड़ने की शक्ति दोनों को कम करती है।
5. पेट पर अत्यधिक दबाव: पुरानी खांसी, लंबे समय तक कब्ज़ और मल त्याग में ज़ोर लगाना, पेशाब में रुकावट (बढ़ा हुआ प्रोस्टेट) और भारी वज़न उठाना सर्जरी के बाद के शुरुआती दिनों में घाव पर ज़ोर डालते हैं।
6. कुपोषण और कमज़ोरी: प्रोटीन और विटामिन की कमी से घाव भरने की प्रक्रिया बिगड़ती है।
7. स्टेरॉयड या इम्यूनिटी घटाने वाली दवाएँ: ये दवाएँ घाव भरने की गति धीमी कर देती हैं।
8. बार-बार एक ही जगह सर्जरी: जिस निशान पर पहले भी ऑपरेशन हो चुके हों, वहाँ हर्निया की संभावना अधिक होती है।
9. आपातकालीन सर्जरी: आपातकाल में तैयारी का समय कम होता है और संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।
10. बढ़ती उम्र: उम्र के साथ ऊतक कमज़ोर होते जाते हैं।
इसके अलावा सर्जरी के बाद बहुत जल्दी भारी काम शुरू कर देना और गर्भावस्था भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।
लक्षण
इन्सिजनल हर्निया का सबसे प्रमुख लक्षण निशान पर या उसके पास उभार है। इसके अन्य लक्षण ये हैं:
- खड़े होने, खांसने, छींकने या ज़ोर लगाने पर उभार का बढ़ जाना और लेटने पर कम हो जाना या गायब हो जाना
- उभार वाली जगह पर खिंचाव, भारीपन या हल्का दर्द
- लंबे समय तक खड़े रहने या काम करने पर दर्द का बढ़ना
- पेट में बेचैनी, कब्ज़ या पेट फूलना
- समय के साथ उभार का आकार बढ़ते जाना
छोटे हर्निया में दर्द बिल्कुल न हो, यह भी संभव है। लेकिन दर्द न होने का मतलब यह नहीं कि समस्या गंभीर नहीं है।
खतरे के संकेत: कब तुरंत अस्पताल जाएँ?
हर्निया की सबसे गंभीर जटिलताएँ इन्कारसरेशन (आंत का फंस जाना) और स्ट्रैंगुलेशन (फंसी आंत का रक्त प्रवाह रुक जाना) हैं। इस स्थिति में आंत के ऊतक मरने लग सकते हैं, जो जानलेवा हो सकता है। इन लक्षणों पर तुरंत अस्पताल पहुँचें:
- उभार का अचानक सख्त हो जाना और दबाने पर अंदर न जाना
- उभार पर तेज़ और लगातार बढ़ता दर्द
- उभार वाली जगह की त्वचा का लाल, बैंगनी या गहरे रंग का हो जाना
- उल्टी या जी मचलाना
- मल या गैस का न निकलना
- पेट का तेज़ी से फूलना
- बुखार
ये आपातकालीन संकेत हैं। इनमें इंतज़ार करना खतरनाक हो सकता है।
जाँच और निदान
अधिकतर मामलों में डॉक्टर शारीरिक जाँच से ही हर्निया पहचान लेते हैं। वे मरीज़ को खड़ा करके और लिटाकर देखते हैं और खांसने को कहते हैं। आवश्यकता पड़ने पर ये जाँचें की जाती हैं:
- अल्ट्रासाउंड: छोटे या मोटापे के कारण स्पष्ट न दिखने वाले हर्निया के लिए उपयोगी
- सीटी स्कैन (CT Scan): हर्निया का आकार, उसके अंदर मौजूद अंग और कई जगह के दोष (multiple defects) देखने के लिए। बड़े और जटिल मामलों में ऑपरेशन की योजना के लिए यह सबसे उपयोगी है।
इलाज
इन्सिजनल हर्निया अपने आप ठीक नहीं होता और दवाओं या व्यायाम से बंद नहीं होता। इसका निश्चित इलाज सर्जरी ही है। हर मरीज़ में तुरंत ऑपरेशन ज़रूरी नहीं होता। डॉक्टर हर्निया के आकार, लक्षणों, जटिलता के खतरे और मरीज़ की सेहत देखकर निर्णय लेते हैं।
निगरानी (Watchful Waiting)
छोटे, बिना लक्षण वाले हर्निया में, या जब मरीज़ अन्य बीमारियों के कारण सर्जरी के लिए फिट न हो, तो डॉक्टर कुछ समय निगरानी की सलाह दे सकते हैं। इस दौरान नियमित जाँच ज़रूरी है।
सर्जरी के प्रकार
1. ओपन सर्जरी: पुराने निशान के पास चीरा लगाकर हर्निया की थैली को अंदर किया जाता है और कमज़ोर हिस्से को मज़बूत किया जाता है।
2. लैप्रोस्कोपिक (दूरबीन) सर्जरी: छोटे छेदों से कैमरा और उपकरण डालकर ऑपरेशन किया जाता है। इसमें घाव छोटे होते हैं और रिकवरी तेज़ हो सकती है। यह सभी मामलों के लिए उपयुक्त नहीं होती।
3. रोबोटिक सर्जरी: कुछ केंद्रों पर रोबोट-सहायता से भी यह सर्जरी की जाती है।
जाली (Mesh) का उपयोग
आधुनिक सर्जरी में आमतौर पर मेश नामक चिकनी जाली लगाई जाती है। केवल टांके लगाकर किया गया मरम्मत कार्य (सिंपल सिवनी रिपेयर) में हर्निया के दोबारा होने की संभावना काफ़ी अधिक रहती है। मेश कमज़ोर हिस्से को मज़बूत सहारा देती है, जिससे दोबारा होने का खतरा काफ़ी घटता है। मेश अलग-अलग परतों में रखी जा सकती है और सही स्थान का चुनाव सर्जन मरीज़ की स्थिति देखकर करते हैं।
बहुत बड़े हर्निया में कभी-कभी विशेष तकनीकों (जैसे कंपोनेंट सेपरेशन) की ज़रूरत पड़ती है, ताकि पेट की दीवार को बिना अधिक तनाव के जोड़ा जा सके। कुछ जटिल मामलों में ऑपरेशन से पहले वज़न घटाने या अन्य तैयारी की सलाह दी जाती है।
आपातकालीन सर्जरी
आंत फंस जाने की स्थिति में तुरंत ऑपरेशन करना पड़ता है। यदि आंत का कोई हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया हो, तो उसे काटकर निकालना पड़ सकता है। आपातकाल में जोखिम और जटिलताएँ नियोजित सर्जरी की तुलना में अधिक होती हैं, इसलिए जिन मरीज़ों को हर्निया है, उन्हें लक्षण बिगड़ने से पहले ही डॉक्टर से मिलकर योजना बना लेनी चाहिए।
सर्जरी की तैयारी
- धूम्रपान और तंबाकू बंद करें, आदर्श रूप से सर्जरी से कई हफ़्ते पहले
- मधुमेह और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखें
- मोटापा हो तो डॉक्टर की देखरेख में वज़न घटाएँ
- पुरानी खांसी या कब्ज़ का इलाज कराएँ
- प्रोटीन युक्त संतुलित भोजन लें
- अपनी सभी दवाओं की जानकारी डॉक्टर को दें
सर्जरी के बाद देखभाल
- डॉक्टर के निर्देशानुसार दर्द की दवा और एंटीबायोटिक लें
- घाव को साफ़ और सूखा रखें, और लालिमा, सूजन, मवाद या बुखार दिखे तो तुरंत बताएँ
- शुरुआती हफ़्तों में भारी वज़न न उठाएँ, इसकी अवधि डॉक्टर बताएँगे
- कब्ज़ से बचने के लिए फाइबर और पानी भरपूर लें
- खांसी या छींक आने पर हाथ या तकिए से पेट को सहारा दें
- हल्की सैर जल्दी शुरू करें, क्योंकि चलना रक्त संचार और रिकवरी के लिए अच्छा है
- डॉक्टर के बताए अनुसार फ़ॉलो-अप में जाएँ
सामान्यतः कुछ हफ़्तों में दैनिक कामकाज शुरू हो जाता है, पर पूरी तरह भारी काम पर लौटने में अधिक समय लग सकता है।
क्या हर्निया दोबारा हो सकता है?
हाँ, इसकी संभावना रहती है। खासकर मोटापा, धूम्रपान, मधुमेह, संक्रमण और बड़े आकार के हर्निया में जोखिम अधिक होता है। लेकिन सही तकनीक, मेश के उपयोग और सर्जरी के बाद की सावधानी से यह जोखिम काफ़ी कम किया जा सकता है। अनुभवी सर्जन का चुनाव भी परिणाम पर असर डालता है।
बचाव के उपाय
हर मामले में बचाव संभव नहीं, लेकिन जोखिम काफ़ी घटाया जा सकता है:
- पेट की सर्जरी से पहले और बाद में स्वस्थ वज़न बनाए रखें।
- धूम्रपान छोड़ें।
- डायबिटीज़ पर नियंत्रण रखें।
- सर्जरी के बाद डॉक्टर द्वारा बताए गए समय तक भारी वज़न न उठाएँ।
- कब्ज़ और पुरानी खांसी का समय पर इलाज कराएँ।
- घाव की साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखें और संक्रमण के लक्षण दिखते ही उपचार कराएँ।
- संतुलित, प्रोटीन-समृद्ध आहार लें।
- नियमित फ़ॉलो-अप कराएँ।
कुछ मरीज़ डॉक्टर की सलाह पर पेट की पट्टी (एब्डॉमिनल बाइंडर) पहनते हैं, जो अस्थायी राहत दे सकती है। लेकिन यह हर्निया का इलाज नहीं है और इसे डॉक्टर की सलाह के बिना लंबे समय तक नहीं पहनना चाहिए।
निष्कर्ष
इन्सिजनल हर्निया पेट की सर्जरी के बाद होने वाली एक आम लेकिन गंभीर हो सकने वाली समस्या है। निशान पर उभार दिखे तो उसे मामूली समझकर टालना नहीं चाहिए। समय पर जाँच और उचित सर्जरी से इसका सफल इलाज संभव है, और आंत फंसने जैसी आपात स्थिति से भी बचा जा सकता है। यदि आपने पहले पेट की सर्जरी करवाई है और निशान पर कोई उभार, दर्द या असामान्य बदलाव दिखे, तो जनरल सर्जन से परामर्श लें। और यदि अचानक तेज़ दर्द, सख्त उभार या उल्टी हो, तो बिना देर किए नज़दीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग पहुँचें।
नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, यह किसी चिकित्सक की सलाह का विकल्प नहीं है। उपचार का निर्णय हमेशा योग्य सर्जन से जाँच के बाद ही लें।
