अम्बिलिकल हर्निया (नाभि का हर्निया): कारण, लक्षण, निदान और उपचार
परिचय
नाभि के आसपास पेट की दीवार की मांसपेशियों में कमज़ोरी आ जाए, तो अंदर की आंत या वसा (चर्बी) का कुछ हिस्सा उस कमज़ोर जगह से बाहर की ओर उभर आता है। इसी स्थिति को अम्बिलिकल हर्निया या नाभि का हर्निया कहते हैं। यह नाभि के पास एक नरम गांठ या उभार के रूप में दिखता है, जो खांसने, छींकने, रोने या ज़ोर लगाने पर और स्पष्ट हो जाता है।
यह समस्या नवजात शिशुओं में काफ़ी आम है, लेकिन वयस्कों, विशेषकर महिलाओं और अधिक वज़न वाले लोगों में भी देखी जाती है। अधिकांश मामलों में यह गंभीर नहीं होता, परंतु कुछ परिस्थितियों में इसका समय पर इलाज ज़रूरी हो जाता है।
नाभि का हर्निया क्या है?
गर्भ में पल रहे शिशु को माँ से पोषण नाभि-नाल (umbilical cord) के ज़रिए मिलता है। यह नाल पेट की दीवार में बने एक छोटे छिद्र से गुज़रती है। जन्म के बाद यह छिद्र धीरे-धीरे बंद हो जाता है और मांसपेशियाँ जुड़ जाती हैं। यदि यह छिद्र पूरी तरह बंद न हो, या वयस्क अवस्था में वह हिस्सा कमज़ोर पड़ जाए, तो पेट के भीतर का दबाव आंत या वसा को बाहर धकेल देता है। यही हर्निया बनता है।
प्रकार
1. शिशुओं में जन्मजात नाभि हर्निया: यह जन्म के कुछ सप्ताह बाद दिखाई देता है। समय से पहले जन्मे और कम वज़न वाले बच्चों में इसकी संभावना अधिक होती है।
2. वयस्कों में अर्जित (acquired) नाभि हर्निया: यह जीवन के बाद के वर्षों में पेट पर लगातार दबाव पड़ने से विकसित होता है।
3. पैरा-अम्बिलिकल हर्निया: इसमें हर्निया ठीक नाभि पर नहीं, बल्कि उसके ऊपर या नीचे की कमज़ोर जगह से निकलता है। यह वयस्कों में अधिक पाया जाता है।
कारण
शिशुओं में
- नाभि का छिद्र पूरी तरह बंद न होना
- समय से पहले जन्म
- जन्म के समय कम वज़न
- कुछ आनुवंशिक या विकास संबंधी स्थितियाँ
वयस्कों में
- मोटापा: पेट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है
- गर्भावस्था: बढ़ता गर्भाशय पेट की दीवार को खींचता है। एक से अधिक बार गर्भधारण करने वाली महिलाओं में जोखिम ज़्यादा होता है
- लंबे समय से कब्ज़: शौच के समय बार-बार ज़ोर लगाना
- पुरानी खांसी: धूम्रपान करने वालों या फेफड़ों के रोगियों में
- भारी वज़न उठाना
- पेट में तरल जमा होना (ascites): लिवर की बीमारियों में
- पेट की पिछली सर्जरी: जिससे दीवार कमज़ोर हो गई हो
- बढ़ती उम्र: मांसपेशियों की ताकत कम होना
लक्षण
शिशुओं में
- नाभि पर नरम उभार, जो रोने, खांसने या ज़ोर लगाने पर बड़ा हो जाता है
- शांत लेटने पर उभार अक्सर दब जाता है या कम हो जाता है
- आमतौर पर बच्चे को दर्द नहीं होता
वयस्कों में
- नाभि के पास या आसपास उभार या गांठ
- खड़े होने, खांसने या वज़न उठाने पर उभार का बढ़ना
- उस जगह हल्का दर्द, खिंचाव या भारीपन
- कभी-कभी असुविधा या जलन महसूस होना
ख़तरे के संकेत: तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ
कभी-कभी हर्निया में फँसी आंत वापस अंदर नहीं जा पाती। इसे इनकार्सरेटेड (फँसा हुआ) हर्निया कहते हैं। यदि उस हिस्से का रक्त संचार रुक जाए, तो इसे स्ट्रैंगुलेटेड हर्निया कहते हैं, जो चिकित्सकीय आपात स्थिति है। इन लक्षणों पर तुरंत अस्पताल जाएँ:
- उभार का अचानक सख्त, तनावपूर्ण और बहुत दर्दनाक हो जाना
- उभार का लाल, बैंगनी या गहरा रंग का दिखना
- उभार का दबाने पर भी अंदर न जाना
- तेज़ पेट दर्द के साथ उल्टी या मतली
- बुखार
- मल या गैस का बंद हो जाना
इन स्थितियों में देरी करने से आंत को स्थायी नुकसान हो सकता है।
निदान
शारीरिक जाँच: अधिकांश मामलों में डॉक्टर केवल जाँच करके हर्निया पहचान लेते हैं। वे आपको खड़े होकर खांसने या ज़ोर लगाने को कह सकते हैं ताकि उभार स्पष्ट दिखे।
अल्ट्रासाउंड: यदि स्थिति स्पष्ट न हो, या मोटापे के कारण जाँच कठिन हो, तो अल्ट्रासाउंड से हर्निया का आकार और उसमें मौजूद सामग्री देखी जाती है।
सीटी स्कैन या एमआरआई: जटिल या दोबारा हुए हर्निया में, या जब अन्य समस्याओं की आशंका हो, तब ये जाँचें करवाई जा सकती हैं।
उपचार
शिशुओं में
बच्चों में नाभि का हर्निया अक्सर अपने आप ठीक हो जाता है। अधिकांश मामलों में नाभि का छिद्र 1 से 2 वर्ष की आयु तक, और कई बार 4 से 5 वर्ष तक, स्वतः बंद हो जाता है। इसलिए डॉक्टर आमतौर पर प्रतीक्षा करने और निगरानी रखने की सलाह देते हैं।
ध्यान रखें:
- नाभि पर सिक्का, पट्टी या कोई कसकर बाँधने वाली चीज़ न लगाएँ। यह घरेलू प्रथा लाभदायक नहीं है और त्वचा में संक्रमण या परेशानी पैदा कर सकती है।
- उभार का आकार समय-समय पर देखते रहें।
सर्जरी की आवश्यकता तब पड़ सकती है जब:
- 4 से 5 वर्ष की आयु के बाद भी हर्निया बना रहे
- हर्निया बहुत बड़ा हो
- हर्निया फँस जाए या दर्द और उल्टी जैसे लक्षण हों
वयस्कों में
वयस्कों में हर्निया अपने आप ठीक नहीं होता। समय के साथ यह धीरे-धीरे बड़ा हो सकता है। इसका निश्चित इलाज सर्जरी ही है।
1. ओपन सर्जरी (खुली शल्य चिकित्सा): नाभि के पास एक छोटा चीरा लगाकर बाहर निकली आंत या वसा को अंदर किया जाता है। फिर कमज़ोर जगह को टाँकों से बंद किया जाता है। अक्सर मज़बूती के लिए सर्जिकल जाली (मेश) लगाई जाती है, जिससे हर्निया दोबारा होने की संभावना कम हो जाती है।
2. लैप्रोस्कोपिक सर्जरी (दूरबीन विधि): इसमें पेट में कुछ छोटे छेद किए जाते हैं और कैमरे की मदद से मरम्मत की जाती है। इसमें दर्द कम होता है, घाव छोटे रहते हैं और रिकवरी जल्दी होती है। हर मरीज़ के लिए कौन सी विधि उपयुक्त है, यह डॉक्टर तय करते हैं।
अधिकांश नाभि हर्निया की सर्जरी डे-केयर प्रक्रिया होती है, यानी मरीज़ उसी दिन या अगले दिन घर जा सकता है।
क्या बिना लक्षण वाले हर्निया में भी सर्जरी ज़रूरी है?
यदि हर्निया छोटा है और कोई तकलीफ़ नहीं देता, तो डॉक्टर कुछ समय निगरानी की सलाह दे सकते हैं। लेकिन चूँकि वयस्कों में यह धीरे-धीरे बढ़ सकता है और फँसने का जोखिम रहता है, इसलिए अधिकांश सर्जन सर्जरी कराने की सलाह देते हैं। निर्णय आपके डॉक्टर के साथ मिलकर लें।
सर्जरी के बाद देखभाल
- डॉक्टर की बताई दवाइयाँ समय पर लें
- कुछ सप्ताह तक भारी वज़न न उठाएँ
- खांसते या छींकते समय पेट को हाथ से हल्का सहारा दें
- कब्ज़ से बचने के लिए रेशेदार भोजन और पर्याप्त पानी लें
- घाव को साफ़ और सूखा रखें
- हल्की सैर धीरे-धीरे शुरू करें, पर कठोर व्यायाम डॉक्टर की अनुमति के बाद ही करें
- लालिमा, सूजन, मवाद, बुखार या बढ़ता दर्द दिखे तो तुरंत डॉक्टर से मिलें
जटिलताएँ
सर्जरी के बाद सामान्यतः जटिलताएँ कम होती हैं, फिर भी कुछ संभावनाएँ रहती हैं:
- घाव में संक्रमण
- सूजन या तरल जमा होना (सेरोमा)
- हर्निया का दोबारा होना
- जाली से संबंधित समस्या (दुर्लभ)
अनुभवी सर्जन से इलाज और डॉक्टर के निर्देशों का पालन इन जोखिमों को काफ़ी कम कर देता है।
बचाव के उपाय
हर तरह का हर्निया रोका नहीं जा सकता, लेकिन जोखिम घटाने के लिए ये बातें मददगार हैं:
- वज़न नियंत्रित रखें: मोटापा पेट पर दबाव बढ़ाता है
- कब्ज़ से बचें: फल, सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज और भरपूर पानी लें
- सही तरीके से वज़न उठाएँ: पीठ से नहीं, घुटनों को मोड़कर उठाएँ
- धूम्रपान छोड़ें: इससे पुरानी खांसी और मांसपेशियों की कमज़ोरी दोनों घटती हैं
- पुरानी खांसी का इलाज कराएँ
- पेट की मांसपेशियाँ मज़बूत करें: डॉक्टर की सलाह से उपयुक्त व्यायाम करें
- गर्भावस्था के बाद पेट की मांसपेशियों को धीरे-धीरे सशक्त बनाएँ
आम भ्रांतियाँ
भ्रांति 1: नाभि पर पट्टी या सिक्का बाँधने से हर्निया ठीक हो जाता है।
सच्चाई: इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। शिशुओं में हर्निया स्वयं ठीक होता है और वयस्कों में केवल सर्जरी ही स्थायी इलाज है।
भ्रांति 2: बच्चे के रोने से हर्निया हो जाता है।
सच्चाई: रोने से उभार दिखता है, परन्तु इसका कारण नाभि के छिद्र का पूरी तरह बंद न होना है।
भ्रांति 3: हर्निया हमेशा खतरनाक होता है।
सच्चाई: शिशुओं में अधिकांश मामले हानिरहित होते हैं। वयस्कों में भी समय पर इलाज से परिणाम अच्छे रहते हैं।
भ्रांति 4: सर्जरी के बाद हर्निया ज़रूर लौट आता है।
सच्चाई: जाली के उपयोग और सही देखभाल से दोबारा होने की संभावना काफ़ी कम रहती है।
डॉक्टर से कब मिलें?
- नाभि के पास कोई नया उभार या गांठ दिखे
- उभार धीरे-धीरे बड़ा हो रहा हो
- शिशु का हर्निया 4-5 वर्ष की आयु के बाद भी बना रहे
- उस जगह लगातार दर्द या असुविधा हो
- ऊपर बताए गए ख़तरे के कोई भी संकेत दिखें (ऐसी स्थिति में बिना देरी आपातकालीन सेवा लें)
निष्कर्ष
अम्बिलिकल हर्निया एक सामान्य स्थिति है, जो शिशुओं और वयस्कों दोनों में हो सकती है। शिशुओं में यह अधिकतर समय के साथ अपने आप ठीक हो जाता है, जबकि वयस्कों में इसका स्थायी समाधान सर्जरी है। आधुनिक तकनीकों जैसे लैप्रोस्कोपिक सर्जरी और मेश के उपयोग से यह ऑपरेशन सुरक्षित, सरल और कम कष्टदायक हो गया है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें। नाभि के पास किसी भी असामान्य उभार की जाँच किसी योग्य डॉक्टर से अवश्य करवाएँ, और अचानक तेज़ दर्द, उल्टी या उभार के सख्त हो जाने पर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा लें। सही समय पर निदान और उपचार से इस समस्या से पूरी तरह छुटकारा पाया जा सकता है।
नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी उपचार से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।
