पर्टेजियम (Pterygium): आंख में जाला बनना – कारण, लक्षण और इलाज
पर्टेजियम क्या है?
पर्टेजियम आंख की एक आम समस्या है, जिसमें आंख की सफेद सतह (कंजंक्टाइवा) पर एक गुलाबी, मांसल और त्रिकोणाकार ऊतक की परत बन जाती है। यह परत धीरे-धीरे बढ़कर आंख की काली पुतली (कॉर्निया) की ओर फैलने लगती है। आम बोलचाल की भाषा में इसे “आंख में जाला”, “आंख में मांस बढ़ना” या “नाखूना” भी कहा जाता है। अंग्रेज़ी में इसे “Surfer’s Eye” भी कहते हैं, क्योंकि धूप, हवा और पानी के संपर्क में रहने वाले सर्फर्स में यह अधिक देखा जाता है।
“पर्टेजियम” शब्द ग्रीक भाषा के “pterygion” से आया है, जिसका अर्थ है “छोटा पंख”। इस ऊतक की आकृति पंख जैसी दिखती है, इसलिए यह नाम पड़ा।
यह कोई कैंसर नहीं है और आमतौर पर खतरनाक भी नहीं होता। लेकिन यदि इसे अनदेखा किया जाए और यह कॉर्निया के बीच तक पहुंच जाए, तो दृष्टि प्रभावित हो सकती है।
पर्टेजियम कहां बनता है?
यह आमतौर पर आंख के नाक की तरफ वाले हिस्से (नेज़ल साइड) में बनता है, हालांकि कभी-कभी कान की तरफ भी हो सकता है। यह एक आंख में भी हो सकता है और दोनों आंखों में भी। कई मामलों में दोनों आंखों में एक साथ विकसित होता है।
पर्टेजियम के मुख्य कारण
पर्टेजियम का सटीक कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन शोध बताते हैं कि कुछ कारक इसके जोखिम को काफी बढ़ा देते हैं:
1. पराबैंगनी किरणों (UV Rays) का संपर्क
यह सबसे प्रमुख कारण माना जाता है। सूर्य की तेज़ अल्ट्रावायलेट किरणें आंख की सतह की कोशिकाओं को क्षति पहुंचाती हैं, जिससे असामान्य ऊतक वृद्धि होती है। भारत जैसे गर्म और धूप वाले देशों में यह समस्या अधिक पाई जाती है।
2. धूल, धुआं और हवा
रेगिस्तानी या शुष्क इलाकों, निर्माण स्थलों और खेतों में काम करने वाले लोगों की आंखें लगातार धूल, रेत और हवा के संपर्क में रहती हैं। इससे आंख में जलन और सूजन बनी रहती है, जो पर्टेजियम को बढ़ावा देती है।
3. आंखों का सूखापन
जिन लोगों की आंखों में आंसू कम बनते हैं या आंखें बार-बार सूखती हैं, उनमें इसका खतरा बढ़ जाता है।
4. पेशे से जुड़ा जोखिम
किसान, मजदूर, ड्राइवर, मछुआरे, निर्माण कार्य करने वाले और खुले में काम करने वाले अन्य लोग अधिक जोखिम में रहते हैं।
5. आयु और लिंग
यह समस्या अक्सर 20 से 50 वर्ष की उम्र के बीच दिखाई देती है। बच्चों में यह कम होती है। कुछ अध्ययनों में पुरुषों में अधिक मामले देखे गए हैं, जिसका कारण बाहर अधिक समय बिताना माना जाता है।
6. आनुवंशिक कारण
कुछ परिवारों में यह समस्या अधिक देखी जाती है, जिससे संकेत मिलता है कि आनुवंशिकता की भी भूमिका हो सकती है।
पर्टेजियम के लक्षण
शुरुआती अवस्था में कई लोगों को कोई खास लक्षण महसूस नहीं होता। बाद में निम्न लक्षण दिख सकते हैं:
- आंख की सफेद सतह पर गुलाबी या लाल मांसल उभार
- आंख में लालिमा, खासकर उस हिस्से में
- आंख में जलन, चुभन या किरकिरी महसूस होना
- आंखों में खुजली
- आंख का सूखा लगना या बार-बार पानी आना
- ऐसा महसूस होना कि आंख में कुछ गिरा हुआ है
- धुंधला दिखाई देना
- धूप या तेज़ रोशनी में परेशानी
- कंटेक्ट लेंस पहनने में असुविधा
जब पर्टेजियम बढ़कर कॉर्निया के बीच के हिस्से तक पहुंच जाता है या कॉर्निया की आकृति को बिगाड़ देता है (जिसे अस्टिग्मैटिज़्म कहते हैं), तब दृष्टि में स्पष्ट कमी आने लगती है।
पर्टेजियम और पिंग्यूकुला में अंतर
पर्टेजियम को अक्सर पिंग्यूकुला (Pinguecula) से भ्रमित कर लिया जाता है। पिंग्यूकुला आंख की सफेद सतह पर बनने वाला पीला-सा उभार है, जो कॉर्निया तक नहीं फैलता। इसके विपरीत, पर्टेजियम में रक्त वाहिकाएं अधिक दिखती हैं और यह कॉर्निया पर चढ़ने लगता है। दोनों के कारण मिलते-जुलते हैं, लेकिन पर्टेजियम अधिक गंभीर हो सकता है।
निदान (जांच) कैसे होता है?
नेत्र रोग विशेषज्ञ (Ophthalmologist) आमतौर पर स्लिट लैंप माइक्रोस्कोप से आंख की जांच करके पर्टेजियम की पहचान कर लेते हैं। जरूरत पड़ने पर निम्न जांचें भी की जा सकती हैं:
- विज़ुअल एक्विटी टेस्ट: यह देखने के लिए कि दृष्टि कितनी प्रभावित हुई है
- कॉर्नियल टोपोग्राफी: कॉर्निया की सतह की आकृति में बदलाव जांचने के लिए
- फोटोग्राफी: समय के साथ वृद्धि की निगरानी के लिए
इलाज के विकल्प
इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि पर्टेजियम कितना बड़ा है और कितनी परेशानी दे रहा है।
1. निगरानी और घरेलू देखभाल
यदि पर्टेजियम छोटा है और कोई खास लक्षण नहीं हैं, तो डॉक्टर केवल नियमित निगरानी की सलाह दे सकते हैं।
2. दवाइयां और आई ड्रॉप्स
- ल्यूब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स (कृत्रिम आंसू): सूखापन और जलन कम करने के लिए
- स्टेरॉयड आई ड्रॉप्स: सूजन और लालिमा अधिक होने पर, डॉक्टर की निगरानी में थोड़े समय के लिए
- एंटी-एलर्जिक ड्रॉप्स: खुजली और एलर्जी में
ध्यान रखें कि ये दवाइयां केवल लक्षणों से राहत देती हैं। ये पर्टेजियम को खत्म नहीं करतीं। स्टेरॉयड ड्रॉप्स बिना डॉक्टर की सलाह के कभी इस्तेमाल न करें, क्योंकि इनके दुष्प्रभाव गंभीर हो सकते हैं।
3. सर्जरी (शल्य चिकित्सा)
सर्जरी तब की जाती है जब:
- पर्टेजियम कॉर्निया पर तेज़ी से बढ़ रहा हो
- दृष्टि प्रभावित हो रही हो
- लगातार जलन और सूजन बनी रहती हो
- आंख की बनावट के कारण सौंदर्य संबंधी चिंता हो
- पर्टेजियम पुतली को ढकने के करीब पहुंच गया हो
सर्जरी की प्रक्रिया:
यह एक छोटी और आमतौर पर सुरक्षित प्रक्रिया है, जो लोकल एनेस्थीसिया (आंख को सुन्न करके) के तहत की जाती है। इसमें लगभग 20 से 30 मिनट लगते हैं और मरीज को उसी दिन घर भेज दिया जाता है। सर्जन असामान्य ऊतक को हटाते हैं।
पुनरावृत्ति (Recurrence) की समस्या:
सिर्फ ऊतक हटाने पर पर्टेजियम के दोबारा बढ़ने की संभावना अधिक रहती है। इसलिए आधुनिक तकनीकों में निम्न विधियां अपनाई जाती हैं:
- कंजंक्टिवल ऑटोग्राफ्ट: मरीज की अपनी आंख के ऊपरी हिस्से से स्वस्थ ऊतक का छोटा टुकड़ा लेकर हटाई गई जगह पर लगाया जाता है। इसमें दोबारा होने की संभावना काफी कम हो जाती है।
- एमनियोटिक मेम्ब्रेन ग्राफ्ट: कुछ मामलों में इस विशेष झिल्ली का उपयोग किया जाता है।
- फाइब्रिन ग्लू का उपयोग: टांकों की जगह मेडिकल ग्लू से ग्राफ्ट चिपकाने की तकनीक, जिससे सर्जरी के बाद असुविधा कम होती है।
- एंटी-मेटाबोलाइट दवाइयां: जैसे माइटोमाइसिन-C, जो कुछ जटिल या बार-बार होने वाले मामलों में डॉक्टर के विवेक पर इस्तेमाल होती हैं।
सर्जरी के बाद देखभाल
- डॉक्टर द्वारा बताई गई आई ड्रॉप्स समय पर डालें
- आंख को रगड़ें या छुएं नहीं
- कुछ दिनों तक धूल, धुएं और पानी से बचाएं
- धूप का चश्मा पहनें
- तय समय पर फॉलो-अप के लिए जाएं
- सर्जरी के बाद कुछ दिनों तक हल्की लालिमा, जलन और पानी आना सामान्य है
संभावित जटिलताएं
यदि पर्टेजियम का इलाज न हो, तो निम्न समस्याएं हो सकती हैं:
- कॉर्निया पर निशान पड़ना, जिससे स्थायी धुंधलापन आ सकता है
- अस्टिग्मैटिज़्म के कारण दृष्टि विकृत होना
- पुतली तक फैलने पर गंभीर दृष्टि हानि
- लगातार जलन और असुविधा
सर्जरी के बाद के जोखिम दुर्लभ हैं, लेकिन इनमें संक्रमण, ग्राफ्ट का खिसकना, दोबारा पर्टेजियम बनना और टांकों से जलन शामिल हैं।
बचाव के उपाय
पर्टेजियम से बचाव अपेक्षाकृत आसान है और ये उपाय दोबारा होने की संभावना भी घटाते हैं:
- UV प्रोटेक्शन वाला धूप का चश्मा पहनें। बाहर निकलते समय हमेशा 100% UV सुरक्षा वाला चश्मा लगाएं। साइड कवरेज वाले रैप-अराउंड चश्मे अधिक उपयोगी होते हैं।
- चौड़ी किनारी वाली टोपी पहनें, जिससे चेहरे और आंखों पर सीधी धूप कम पड़े।
- धूल और हवा से बचाव करें। बाइक चलाते समय या निर्माण स्थल पर काम करते समय सुरक्षात्मक चश्मे का उपयोग करें।
- आंखों को नम रखें। यदि आंखें सूखी रहती हैं, तो डॉक्टर की सलाह से ल्यूब्रिकेटिंग ड्रॉप्स डालें।
- आंखों को बार-बार न रगड़ें।
- एयर कंडीशनर और पंखे की सीधी हवा से बचें।
- नियमित नेत्र जांच कराएं, खासकर यदि आप खुले में काम करते हैं।
- धूम्रपान से दूर रहें, क्योंकि धुआं आंखों में जलन बढ़ाता है।
घरेलू नुस्खों के बारे में सावधानी
आंख में जाला बनने पर लोग अक्सर घरेलू नुस्खे आज़माते हैं, जैसे शहद, गुलाब जल, नींबू का रस या अन्य पदार्थ डालना। इनसे बचना चाहिए। आंख एक अत्यंत नाज़ुक अंग है और कोई भी अनजान पदार्थ डालने से संक्रमण, जलन या कॉर्निया को स्थायी नुकसान हो सकता है। बाज़ार में मिलने वाली “जाला हटाने” की दवाइयों पर भी भरोसा न करें, क्योंकि कोई भी दवा या ड्रॉप पर्टेजियम को जड़ से खत्म नहीं कर सकती। इसका प्रभावी इलाज केवल योग्य नेत्र चिकित्सक की देखरेख में ही संभव है।
डॉक्टर से कब मिलें?
निम्न स्थितियों में तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें:
- आंख में गुलाबी या सफेद उभार दिखाई दे और बढ़ता हुआ लगे
- दृष्टि धुंधली होने लगे
- आंख में लगातार लालिमा, दर्द या जलन हो
- आंख में किरकिरी जैसा एहसास बना रहे
- सर्जरी के बाद अचानक दर्द बढ़ जाए, दृष्टि घटे या मवाद जैसा स्राव दिखे
निष्कर्ष
पर्टेजियम एक आम और ज्यादातर मामलों में गैर-खतरनाक नेत्र समस्या है, लेकिन इसे नज़रअंदाज़ करना ठीक नहीं। प्रारंभिक अवस्था में पहचान, सही देखभाल और धूप से बचाव के उपायों से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। यदि यह बढ़कर दृष्टि को प्रभावित करने लगे, तो आधुनिक सर्जिकल तकनीकों से सुरक्षित और प्रभावी इलाज उपलब्ध है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपनी आंखों को सूरज की हानिकारक किरणों, धूल और हवा से बचाएं। UV सुरक्षा वाला चश्मा पहनना एक छोटी सी आदत है, जो आपकी आंखों की रोशनी को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकती है।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है और चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। आंख से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए कृपया योग्य नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श करें।
