पोस्टपार्टम (डिलीवरी के बाद) कोर स्ट्रेंथनिंग और डायस्टेसिस रेक्टी का इलाज
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पोस्टपार्टम (डिलीवरी के बाद) कोर स्ट्रेंथनिंग और डायस्टेसिस रेक्टी का इलाज

गर्भावस्था और प्रसव (डिलीवरी) के दौरान महिला के शरीर में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं। इनमें पेट की मांसपेशियों का फैलना, पेल्विक फ्लोर की कमजोरी और शरीर के संतुलन में बदलाव शामिल हैं। कई महिलाओं में डिलीवरी के बाद पेट के बीच की मांसपेशियों में गैप बन जाता है, जिसे डायस्टेसिस रेक्टी (Diastasis Recti) कहा जाता है। यह स्थिति सामान्य है, लेकिन यदि समय पर सही व्यायाम और फिजियोथेरेपी न की जाए तो कमर दर्द, पेट का बाहर निकलना, कमजोरी और दैनिक कार्यों में कठिनाई जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

पोस्टपार्टम कोर स्ट्रेंथनिंग (Postpartum Core Strengthening) का उद्देश्य केवल पेट कम करना नहीं होता, बल्कि पेट की गहरी मांसपेशियों, पेल्विक फ्लोर और कमर को मजबूत बनाकर शरीर की कार्यक्षमता को वापस सामान्य करना होता है।


Table of Contents

डायस्टेसिस रेक्टी क्या है?

डायस्टेसिस रेक्टी वह स्थिति है जिसमें पेट की दोनों Rectus Abdominis मांसपेशियाँ बीच से अलग हो जाती हैं। गर्भावस्था के दौरान बढ़ते हुए गर्भाशय के कारण यह गैप बन सकता है। अधिकांश महिलाओं में यह डिलीवरी के बाद धीरे-धीरे कम हो जाता है, लेकिन कुछ मामलों में यह लंबे समय तक बना रहता है।

यदि गैप लगभग 2 सेंटीमीटर या उससे अधिक हो तो फिजियोथेरेपी मूल्यांकन आवश्यक माना जाता है।


डायस्टेसिस रेक्टी के कारण

  • गर्भावस्था के दौरान पेट पर अधिक दबाव
  • जुड़वाँ या एक से अधिक गर्भ
  • बड़ा शिशु
  • बार-बार गर्भधारण
  • कमजोर कोर मसल्स
  • गलत तरीके से भारी वजन उठाना
  • गर्भावस्था के दौरान गलत व्यायाम

प्रमुख लक्षण

  • पेट का बीच से बाहर की ओर उभरना
  • पेट के बीच में गैप महसूस होना
  • कमर दर्द
  • शरीर का संतुलन कमजोर होना
  • भारी वस्तु उठाने में कठिनाई
  • पेट में कमजोरी महसूस होना
  • लंबे समय तक खड़े रहने पर दर्द

डायस्टेसिस रेक्टी की जांच कैसे की जाती है?

फिजियोथेरेपिस्ट मरीज को पीठ के बल लिटाकर हल्का सिर उठाने को कहते हैं। इसके बाद उंगलियों की सहायता से पेट की मध्य रेखा (Linea Alba) पर गैप की जांच की जाती है।

आजकल अल्ट्रासाउंड द्वारा भी मांसपेशियों के बीच की दूरी का अधिक सटीक आकलन किया जा सकता है।


पोस्टपार्टम कोर स्ट्रेंथनिंग क्यों जरूरी है?

डिलीवरी के बाद सही समय पर किए गए व्यायाम कई लाभ देते हैं—

  • पेट की गहरी मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं।
  • कमर दर्द कम होता है।
  • शरीर का संतुलन सुधरता है।
  • पेल्विक फ्लोर मजबूत होता है।
  • भविष्य में हर्निया का खतरा कम हो सकता है।
  • दैनिक गतिविधियाँ आसान हो जाती हैं।
  • आत्मविश्वास बढ़ता है।

व्यायाम कब शुरू करें?

सामान्य (Normal) डिलीवरी

यदि कोई जटिलता नहीं है तो हल्के श्वसन एवं पेल्विक फ्लोर व्यायाम डिलीवरी के कुछ दिनों बाद फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से शुरू किए जा सकते हैं।

सी-सेक्शन (Cesarean Delivery)

सी-सेक्शन के बाद व्यायाम शुरू करने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ और फिजियोथेरेपिस्ट की अनुमति आवश्यक होती है। सामान्यतः 6–8 सप्ताह बाद प्रोग्रेसिव एक्सरसाइज शुरू की जाती हैं।


सुरक्षित कोर स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज

1. डायफ्रामेटिक ब्रीदिंग

सबसे पहले गहरी सांस लेने का अभ्यास करें।

कैसे करें?

  • पीठ के बल लेटें।
  • एक हाथ पेट पर रखें।
  • धीरे-धीरे नाक से सांस लें।
  • पेट को हल्का ऊपर उठने दें।
  • मुंह से धीरे-धीरे सांस छोड़ें।

10–15 बार दोहराएँ।


2. ट्रांसवर्स एब्डोमिनिस एक्टिवेशन

यह पोस्टपार्टम रिकवरी का सबसे महत्वपूर्ण व्यायाम माना जाता है।

कैसे करें?

  • सामान्य सांस लेते रहें।
  • नाभि को धीरे-धीरे रीढ़ की ओर खींचें।
  • 5–10 सेकंड तक बनाए रखें।
  • सांस न रोकें।

10–15 बार करें।


3. पेल्विक टिल्ट

यह कमर और कोर दोनों को मजबूत करता है।

  • पीठ के बल लेटें।
  • घुटने मोड़ें।
  • कमर को हल्का जमीन की ओर दबाएँ।
  • 5 सेकंड रोकें।
  • आराम करें।

10–15 बार करें।


4. हील स्लाइड

  • एक पैर धीरे-धीरे आगे सीधा करें।
  • वापस प्रारंभिक स्थिति में लाएँ।
  • पेट को अंदर सक्रिय रखें।
  • दोनों पैरों से करें।

10–10 बार दोहराएँ।


5. मार्चिंग एक्सरसाइज

  • घुटनों को मोड़कर लेटें।
  • एक पैर हल्का ऊपर उठाएँ।
  • वापस रखें।
  • दूसरे पैर से दोहराएँ।

इस दौरान पेट को बाहर न निकलने दें।


6. ब्रिजिंग

  • घुटने मोड़कर लेटें।
  • धीरे-धीरे कूल्हों को ऊपर उठाएँ।
  • 5 सेकंड रोकें।
  • वापस नीचे आएँ।

10–15 बार करें।


7. बर्ड-डॉग (उन्नत स्तर)

जब शुरुआती व्यायाम आसानी से होने लगें तभी यह करें।

  • हाथ और घुटनों के बल आएँ।
  • एक हाथ और विपरीत पैर सीधा करें।
  • संतुलन बनाए रखें।
  • वापस आएँ।

पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज (केगल)

डिलीवरी के बाद केवल पेट ही नहीं, पेल्विक फ्लोर भी कमजोर हो जाता है।

केगल एक्सरसाइज करने से—

  • यूरिन लीकेज कम हो सकता है।
  • पेल्विक अंगों को बेहतर सहारा मिलता है।
  • कोर स्थिरता बढ़ती है।

दिन में 3–4 बार 10–15 संकुचन करें।


किन व्यायामों से शुरुआत में बचना चाहिए?

डायस्टेसिस रेक्टी होने पर शुरुआती चरण में निम्न व्यायाम नहीं करने चाहिए—

  • क्रंचेस
  • सिट-अप्स
  • डबल लेग रेज
  • भारी प्लैंक
  • हाई-इंटेंसिटी जंपिंग
  • भारी वजन उठाना
  • अचानक पेट पर अधिक दबाव डालने वाले व्यायाम

फिजियोथेरेपी की भूमिका

एक प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट मरीज की स्थिति के अनुसार व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार करता है।

इसमें शामिल हो सकते हैं—

  • पोस्टुरल करेक्शन
  • कोर स्टेबिलाइजेशन ट्रेनिंग
  • पेल्विक फ्लोर रिहैबिलिटेशन
  • श्वसन तकनीक
  • मैनुअल थेरेपी (यदि आवश्यक हो)
  • सुरक्षित प्रोग्रेसिव एक्सरसाइज प्रोग्राम
  • दैनिक गतिविधियों की सही तकनीक

रिकवरी के दौरान महत्वपूर्ण सावधानियाँ

  • धीरे-धीरे व्यायाम की तीव्रता बढ़ाएँ।
  • अचानक भारी वजन न उठाएँ।
  • पर्याप्त पानी पिएँ।
  • प्रोटीन और संतुलित आहार लें।
  • पर्याप्त नींद लेने का प्रयास करें।
  • व्यायाम के दौरान सांस न रोकें।
  • यदि पेट बीच से उभरने लगे (Doming या Coning) तो व्यायाम रोक दें।
  • किसी भी दर्द या असामान्य लक्षण पर विशेषज्ञ से संपर्क करें।

डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

यदि निम्न समस्याएँ हों तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें—

  • गैप लगातार बढ़ रहा हो।
  • गंभीर कमर दर्द हो।
  • पेट में असामान्य सूजन हो।
  • हर्निया की आशंका हो।
  • व्यायाम के दौरान तेज दर्द हो।
  • यूरिन या मल नियंत्रण में समस्या हो।

क्या डायस्टेसिस रेक्टी पूरी तरह ठीक हो सकता है?

अधिकांश महिलाओं में सही फिजियोथेरेपी, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और धैर्य के साथ डायस्टेसिस रेक्टी में उल्लेखनीय सुधार देखा जाता है। कुछ गंभीर मामलों में, जहाँ गैप बहुत अधिक हो या हर्निया जैसी जटिलताएँ हों, सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि, अधिकांश मरीजों के लिए शुरुआती और नियमित पुनर्वास (Rehabilitation) पर्याप्त लाभकारी होता है।


निष्कर्ष

पोस्टपार्टम अवधि हर महिला के लिए शारीरिक और भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण होती है। डायस्टेसिस रेक्टी एक सामान्य लेकिन उपचार योग्य स्थिति है। सही समय पर फिजियोथेरेपी, सुरक्षित कोर स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज, पेल्विक फ्लोर प्रशिक्षण और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर पेट की मांसपेशियों की मजबूती वापस पाई जा सकती है। याद रखें कि हर महिला की रिकवरी अलग होती है, इसलिए किसी भी व्यायाम कार्यक्रम को शुरू करने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ और अनुभवी फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेना सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। नियमित अभ्यास, धैर्य और सही मार्गदर्शन से आप अपनी शक्ति, संतुलन और आत्मविश्वास को फिर से प्राप्त कर सकती हैं।

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