पेरोनी रोग (Peyronie's Disease - लिंग के अंदर स्कार टिशू बनना)
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पेरोनी रोग (Peyronie’s Disease): लिंग के अंदर स्कार टिशू बनने की समस्या

परिचय

पुरुषों की यौन और प्रजनन संबंधी समस्याओं पर खुलकर बात करना हमारे समाज में आज भी आसान नहीं है। इसी झिझक के कारण कई लोग वर्षों तक तकलीफ सहते रहते हैं और सही इलाज नहीं करा पाते। पेरोनी रोग ऐसी ही एक स्थिति है, जिसमें लिंग के भीतर स्कार टिशू (कठोर गांठ या प्लाक) बन जाता है। इससे इरेक्शन के समय लिंग टेढ़ा हो जाता है और कई बार दर्द भी होता है। यह जानलेवा बीमारी नहीं है, लेकिन यह पुरुष के आत्मविश्वास, यौन जीवन और रिश्तों को गहराई से प्रभावित कर सकती है। सही जानकारी और समय पर इलाज से इसे काफी हद तक संभाला जा सकता है।

पेरोनी रोग क्या है?

इस रोग का नाम 18वीं सदी के फ्रांसीसी सर्जन फ्रांस्वा जिगो दे ला पेरोनी के नाम पर पड़ा, जिन्होंने इसका विस्तृत वर्णन किया था।

लिंग के अंदर स्पंजी ऊतक की दो बेलनाकार संरचनाएं होती हैं, जिन्हें कॉर्पोरा कैवर्नोसा कहते हैं। इनके चारों ओर एक लचीली झिल्ली होती है, जिसे ट्यूनिका अल्बुगिनिया कहते हैं। इरेक्शन के समय जब इन संरचनाओं में रक्त भरता है, तो यह झिल्ली समान रूप से खिंचती है। पेरोनी रोग में इस झिल्ली में कठोर, रेशेदार स्कार टिशू की गांठ या पट्टी बन जाती है। यह हिस्सा लचीला नहीं रहता और खिंच नहीं पाता। नतीजा यह होता है कि इरेक्शन के समय लिंग उसी तरफ मुड़ जाता है जहां प्लाक है।

अनुमान है कि लगभग 3 से 9 प्रतिशत पुरुषों में यह समस्या पाई जा सकती है। यह आमतौर पर 40 से 70 वर्ष की उम्र में होती है, लेकिन युवाओं में भी देखी गई है। बहुत से पुरुष शर्म के कारण डॉक्टर के पास नहीं जाते, इसलिए वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है।

पेरोनी रोग के कारण

इस रोग का एकमात्र निश्चित कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है। माना जाता है कि यह कई कारकों के मेल से होता है।

1. बार-बार होने वाली सूक्ष्म चोट: यौन संबंध, हस्तमैथुन या किसी दुर्घटना के दौरान इरेक्शन की अवस्था में लिंग पर लगने वाली छोटी-छोटी चोटें ट्यूनिका में सूक्ष्म दरारें पैदा कर सकती हैं। सामान्यतः शरीर इन्हें ठीक कर लेता है। लेकिन कुछ पुरुषों में उपचार की प्रक्रिया असामान्य हो जाती है और अत्यधिक स्कार टिशू बन जाता है। कई मरीजों को किसी विशेष चोट की याद ही नहीं होती।

2. आनुवंशिक कारण: जिन पुरुषों के परिवार में पेरोनी रोग या डुप्यूट्रेन कॉन्ट्रैक्चर (हथेली की उंगलियों का मुड़ जाना) का इतिहास हो, उनमें इसका खतरा अधिक होता है।

3. ऑटोइम्यून और सूजन संबंधी कारण: शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का असामान्य प्रतिक्रिया करना भी एक संभावित कारण माना जाता है।

जोखिम कारक

निम्नलिखित स्थितियों में इस रोग का खतरा बढ़ सकता है:

  • बढ़ती उम्र
  • मधुमेह (डायबिटीज)
  • उच्च रक्तचाप
  • धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन
  • उच्च कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोग
  • पेल्विक क्षेत्र की सर्जरी, खासकर प्रोस्टेट कैंसर की सर्जरी
  • परिवार में इस रोग का इतिहास
  • लिंग में पूर्व चोट

लक्षण

पेरोनी रोग के लक्षण अचानक या धीरे-धीरे दोनों तरह से सामने आ सकते हैं।

  • लिंग में गांठ या कठोर पट्टी: त्वचा के नीचे छूने पर महसूस होने वाली सख्त जगह, आमतौर पर लिंग के ऊपरी हिस्से पर।
  • टेढ़ापन: इरेक्शन के दौरान लिंग का ऊपर, नीचे या किसी एक तरफ मुड़ना। हल्का टेढ़ापन सामान्य है और कई स्वस्थ पुरुषों में होता है, इसलिए चिंता तभी करें जब टेढ़ापन नया हो, बढ़ रहा हो या तकलीफ दे रहा हो।
  • दर्द: इरेक्शन के समय या कभी-कभी बिना इरेक्शन के भी दर्द होना, खासकर बीमारी की शुरुआती अवस्था में।
  • लिंग का छोटा होना: पहले की तुलना में लंबाई कम महसूस होना।
  • इरेक्शन में समस्या: इरेक्शन कमजोर होना या उसे बनाए रखने में कठिनाई।
  • मोड़ या “घंटे के आकार” जैसी बनावट: प्लाक की जगह पर लिंग में गड्ढा या पतलापन दिखना।
  • संभोग में कठिनाई या दर्द: टेढ़ापन ज्यादा होने पर यौन संबंध बनाना मुश्किल या दर्दनाक हो सकता है।

रोग के दो चरण

सक्रिय (एक्यूट) चरण: यह लगभग 6 से 18 महीने तक चलता है। इस दौरान सूजन रहती है, प्लाक बन रहा होता है, दर्द हो सकता है और टेढ़ापन बढ़ सकता है।

स्थिर (क्रॉनिक) चरण: इसमें प्लाक बन चुका होता है और स्थिर हो जाता है। दर्द अक्सर कम हो जाता है या खत्म हो जाता है और टेढ़ापन आगे नहीं बढ़ता। लेकिन बना हुआ टेढ़ापन अपने आप पूरी तरह ठीक नहीं होता। कुछ मामलों में हल्का सुधार देखा जाता है, पर अधिकांश में स्थिति वैसी ही रहती है या बिगड़ जाती है।

इलाज का तरीका इन चरणों के अनुसार बदलता है।

निदान कैसे होता है?

पेरोनी रोग की पहचान आमतौर पर यूरोलॉजिस्ट (मूत्र रोग विशेषज्ञ) करते हैं।

  • इतिहास और शारीरिक जांच: डॉक्टर लक्षणों की शुरुआत, दर्द, चोट और यौन क्रिया पर असर के बारे में पूछते हैं। इसके बाद लिंग को छूकर प्लाक की जगह और आकार देखा जाता है।
  • तस्वीरें: मरीज से इरेक्शन की स्थिति की तस्वीरें लाने को कहा जा सकता है, ताकि टेढ़ापन का कोण समझा जा सके। इसे डॉक्टर के साथ निजी और सुरक्षित रूप से साझा करें।
  • अल्ट्रासाउंड (डुप्लेक्स): इससे प्लाक, उसमें कैल्शियम जमाव और रक्त प्रवाह की जांच होती है।
  • इंजेक्शन से इरेक्शन टेस्ट: कभी-कभी डॉक्टर के क्लिनिक में दवा देकर इरेक्शन कराया जाता है, ताकि टेढ़ापन का सही कोण मापा जा सके।

उपचार के विकल्प

इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि रोग किस चरण में है, टेढ़ापन कितना है और यौन क्रिया पर कितना असर पड़ रहा है। यदि टेढ़ापन हल्का है और कोई तकलीफ नहीं है, तो अक्सर किसी इलाज की जरूरत नहीं पड़ती और डॉक्टर केवल निगरानी की सलाह देते हैं।

दवाइयां और गैर-सर्जिकल उपचार

  • कोलेजिनेज इंजेक्शन: यह प्लाक के कोलेजन को तोड़ने वाला इंजेक्शन है, जिसे सीधे प्लाक में लगाया जाता है। यह उन मामलों में उपयोगी माना गया है जहां टेढ़ापन स्थिर हो और एक सीमा से अधिक हो। इसके साथ डॉक्टर की देखरेख में लिंग को सीधा करने की कुछ क्रियाएं सिखाई जाती हैं। भारत में इसकी उपलब्धता की जानकारी अपने डॉक्टर से लें।
  • वेरापामिल इंजेक्शन: यह कुछ मामलों में प्लाक में लगाया जाता है, हालांकि इसके प्रमाण सीमित हैं।
  • मुंह से ली जाने वाली दवाएं: विटामिन ई, पोटेशियम पैरा-अमिनोबेंजोएट, पेंटॉक्सिफाइलिन जैसी दवाएं दी जाती रही हैं, पर इनकी प्रभावशीलता के प्रमाण कमजोर हैं। सूजन और दर्द के लिए डॉक्टर दर्द निवारक दवाएं दे सकते हैं।
  • पेनाइल ट्रैक्शन थेरेपी: एक विशेष उपकरण से लिंग को धीरे-धीरे खींचा जाता है। कुछ अध्ययनों में इससे लंबाई और टेढ़ापन में मामूली सुधार दिखा है। इसे डॉक्टर की सलाह से ही करें।
  • वैक्यूम डिवाइस: कुछ मरीजों में उपयोगी हो सकता है, पर बिना सलाह के इस्तेमाल न करें।

सर्जरी

सर्जरी आमतौर पर तभी सुझाई जाती है जब रोग कम से कम 6 से 12 महीने तक स्थिर हो चुका हो, टेढ़ापन इतना हो कि संभोग असंभव या बहुत कठिन हो, और दवाओं से लाभ न मिला हो।

  • प्लिकेशन: प्लाक की विपरीत दिशा में ट्यूनिका को छोटा करके लिंग सीधा किया जाता है। यह अपेक्षाकृत सरल तरीका है, पर इससे लिंग की लंबाई थोड़ी कम हो सकती है।
  • प्लाक कटाई और ग्राफ्टिंग: प्लाक को काटकर या चीरकर उसकी जगह ग्राफ्ट लगाया जाता है। यह जटिल टेढ़ापन या बड़े प्लाक में किया जाता है, लेकिन इसमें इरेक्शन प्रभावित होने का जोखिम अधिक होता है।
  • पेनाइल इम्प्लांट: यदि टेढ़ापन के साथ इरेक्टाइल डिसफंक्शन भी गंभीर हो और दवाओं से लाभ न मिले, तो इम्प्लांट लगाया जा सकता है।

मानसिक और भावनात्मक प्रभाव

पेरोनी रोग का असर केवल शारीरिक नहीं होता। कई पुरुषों में चिंता, आत्मविश्वास की कमी, अवसाद और साथी से दूरी जैसी समस्याएं देखी जाती हैं। साथी के साथ खुलकर बातचीत बहुत मदद करती है। साथी को यह समझाना जरूरी है कि यह एक चिकित्सीय स्थिति है, इसमें किसी की गलती नहीं है और इलाज संभव है। जरूरत पड़ने पर काउंसलर या सेक्स थेरेपिस्ट की मदद लेने में संकोच न करें।

कुछ आम मिथक

  • मिथक: यह यौन रोग या संक्रमण है। सच्चाई यह है कि यह संक्रमण नहीं है और छूने या संबंध बनाने से एक से दूसरे में नहीं फैलता।
  • मिथक: यह हस्तमैथुन की वजह से होता है। ऐसा कोई सिद्ध प्रमाण नहीं है। बस यह याद रखें कि इरेक्शन में लिंग पर जोरदार दबाव या चोट से बचना बेहतर है।
  • मिथक: घरेलू नुस्खे और झोलाछाप इलाज से यह ठीक हो जाता है। बिना प्रमाण के तेल, मालिश या कथित “चमत्कारी” दवाओं पर भरोसा करने से समय बर्बाद होता है और नुकसान भी हो सकता है।
  • मिथक: यह कैंसर है। पेरोनी रोग कैंसर नहीं है और इसका कैंसर से कोई संबंध नहीं है।

बचाव और जीवनशैली

इस रोग को पूरी तरह रोकने का कोई पक्का तरीका नहीं है, पर कुछ बातें जोखिम घटाने में मदद कर सकती हैं:

  • धूम्रपान छोड़ें और शराब सीमित रखें।
  • डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखें।
  • संतुलित आहार लें और नियमित व्यायाम करें।
  • यौन क्रिया के दौरान लिंग पर अचानक झटके या मोड़ से बचें।
  • लिंग में चोट लगने पर या दर्द व गांठ महसूस होने पर देर न करें और डॉक्टर को दिखाएं।

डॉक्टर से कब मिलें?

निम्न स्थितियों में तुरंत यूरोलॉजिस्ट से सलाह लें:

  • लिंग में गांठ या कठोर पट्टी महसूस हो
  • इरेक्शन में अचानक टेढ़ापन आने लगे
  • इरेक्शन के समय दर्द हो
  • संभोग में कठिनाई या दर्द हो
  • इरेक्शन कमजोर पड़ने लगे

शुरुआती चरण में इलाज शुरू करने से बेहतर परिणाम मिलने की संभावना अधिक रहती है।

निष्कर्ष

पेरोनी रोग एक वास्तविक और इलाज योग्य चिकित्सीय स्थिति है। यह खतरनाक नहीं है, लेकिन इसे नजरअंदाज करने से यौन जीवन और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ सकता है। शर्म या झिझक की वजह से इलाज टालना सबसे बड़ी गलती है। यदि आपको या आपके किसी परिचित को ऐसे लक्षण दिखें, तो योग्य यूरोलॉजिस्ट से मिलकर सही जांच कराएं। समय पर पहचान, सही उपचार और साथी का सहयोग मिलकर इस समस्या के साथ बेहतर जीवन संभव बना सकते हैं।

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