स्पर्मेटोसील (Spermatocele): अंडकोष के ऊपर तरल पदार्थ की गांठ के कारण, लक्षण और इलाज
परिचय
कई पुरुष नहाते समय या खुद की जाँच करते हुए अंडकोष (टेस्टिस) के ऊपर या पीछे एक छोटी, मुलायम गांठ महसूस करते हैं। यह अचानक दिखने वाली गांठ स्वाभाविक रूप से डर पैदा करती है, और पहला ख्याल अक्सर कैंसर का आता है। लेकिन हर गांठ कैंसर नहीं होती। ऐसी ही एक आम और आमतौर पर हानिरहित स्थिति है स्पर्मेटोसील, जिसे “एपिडिडाइमल सिस्ट” भी कहते हैं।
इस लेख में हम जानेंगे कि स्पर्मेटोसील क्या है, क्यों होता है, इसके लक्षण क्या हैं, इसकी जाँच और इलाज कैसे होता है, और किन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है।
स्पर्मेटोसील क्या है?
हर अंडकोष के ऊपरी और पिछले हिस्से पर एक लंबी, कुंडलित नली होती है, जिसे एपिडिडाइमिस (अधिवृषण) कहते हैं। वृषण में बने शुक्राणु यहाँ जमा होते हैं और परिपक्व होते हैं, फिर आगे शुक्रवाहिका (वास डेफेरेंस) से होकर बाहर निकलते हैं।
जब एपिडिडाइमिस के किसी हिस्से में एक थैलीनुमा गांठ (सिस्ट) बन जाती है और उसमें तरल पदार्थ भर जाता है, तो उसे स्पर्मेटोसील कहते हैं। इस तरल में अक्सर मृत शुक्राणु, वसा कण और अन्य कोशिकाएँ होती हैं, इसलिए यह दूधिया या धुँधला दिख सकता है। ज़्यादातर मामलों में यह सिस्ट एपिडिडाइमिस के ऊपरी सिरे (हेड) पर बनती है।
ज़रूरी बात: स्पर्मेटोसील कैंसर नहीं है और यह टेस्टिकुलर कैंसर का खतरा भी नहीं बढ़ाता। यह एक सौम्य (बिनाइन) स्थिति है।
यह कितना आम है?
अल्ट्रासाउंड जाँच में यह स्थिति काफ़ी पुरुषों में संयोग से मिल जाती है, और कई लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं होती क्योंकि यह कोई तकलीफ़ नहीं देती। यह किसी भी उम्र में हो सकती है, पर 20 से 50 वर्ष की उम्र के पुरुषों में ज़्यादा देखी जाती है। बच्चों में यह अपेक्षाकृत कम होती है।
स्पर्मेटोसील के कारण
इसका सटीक कारण आज भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। माना जाता है कि एपिडिडाइमिस की उन बारीक नलियों में रुकावट आ जाती है जिनसे शुक्राणु गुज़रते हैं। रुकावट के कारण तरल पदार्थ और शुक्राणु जमा होकर थैली का रूप ले लेते हैं। कुछ संभावित कारक ये हैं:
- नलियों में अवरोध: जन्मजात या बाद में किसी वजह से बनी रुकावट
- चोट या सूजन: अंडकोष में लगी चोट या एपिडिडाइमाइटिस (एपिडिडाइमिस की सूजन) के बाद
- संक्रमण: पहले हुआ कोई मूत्र या यौन संक्रमण
- जन्म से पहले DES दवा का संपर्क: पुराने समय में गर्भवती महिलाओं को दी जाने वाली डाइएथिलस्टिलबेस्ट्रॉल (DES) दवा के संपर्क में आए पुरुषों में इसका जोखिम अधिक पाया गया है
कई बार कोई स्पष्ट कारण मिलता ही नहीं, और यह अपने आप बन जाती है। यह किसी असुरक्षित यौन संबंध या हस्तमैथुन जैसी गतिविधियों का सीधा नतीजा नहीं है, इस बारे में फैली भ्रांतियों पर ध्यान न दें।
स्पर्मेटोसील के लक्षण
अधिकतर मामलों में कोई लक्षण नहीं होते। जब लक्षण होते हैं, तो वे ये हो सकते हैं:
- अंडकोष के ऊपर या पीछे एक छोटी, चिकनी, गोल और मुलायम गांठ, जो टेस्टिस से अलग महसूस होती है
- अंडकोश में भारीपन या खिंचाव का एहसास
- हल्का दर्द या बेचैनी, खासकर जब गांठ बड़ी हो जाए
- अंडकोश के एक तरफ़ हल्की सूजन
- लंबे समय तक खड़े रहने या शारीरिक मेहनत के बाद असुविधा
गांठ आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ती है। ज़्यादातर सिस्ट 1 से 2 सेंटीमीटर की होती हैं, पर कुछ काफ़ी बड़ी होकर असुविधा पैदा कर सकती हैं।
अन्य समान स्थितियों से अंतर
अंडकोश की हर गांठ स्पर्मेटोसील नहीं होती, इसलिए जाँच ज़रूरी है। कुछ मिलती-जुलती स्थितियाँ:
- हाइड्रोसील: इसमें अंडकोष के चारों ओर तरल जमा होता है और पूरा अंडकोश फूला हुआ लगता है। स्पर्मेटोसील में गांठ टेस्टिस के ऊपर अलग से महसूस होती है।
- वैरिकोसील: अंडकोश की नसों का फूलना, जो छूने पर “कीड़ों की थैली” जैसा लगता है। यह खड़े होने पर ज़्यादा उभरता है।
- टेस्टिकुलर ट्यूमर या कैंसर: आमतौर पर टेस्टिस के अंदर एक कठोर, अक्सर बिना दर्द की गांठ। इसे किसी भी हाल में नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
- एपिडिडाइमाइटिस: दर्द, लालिमा, गर्मी और कभी-कभी बुखार के साथ सूजन।
- हर्निया: कमर के पास से नीचे उतरती सूजन, जो खाँसने पर बढ़ सकती है।
निदान (जाँच कैसे होती है)
1. शारीरिक परीक्षण: डॉक्टर खड़े और लेटे हुए, दोनों स्थितियों में अंडकोश की जाँच करते हैं। स्पर्मेटोसील आमतौर पर टेस्टिस के ऊपर या पीछे अलग गांठ के रूप में महसूस होती है।
2. ट्रांसिल्यूमिनेशन टेस्ट: अँधेरे कमरे में गांठ के पीछे टॉर्च की रोशनी डाली जाती है। तरल से भरी सिस्ट से रोशनी आर-पार हो जाती है, जबकि ठोस गांठ से नहीं।
3. स्क्रोटल अल्ट्रासाउंड: यह सबसे भरोसेमंद जाँच है। इससे पक्का होता है कि गांठ तरल से भरी सिस्ट है, वह एपिडिडाइमिस से जुड़ी है, और टेस्टिस के अंदर कोई ट्यूमर नहीं है।
कभी-कभी, ज़रूरत पड़ने पर, संक्रमण के लिए मूत्र की जाँच या अन्य टेस्ट भी कराए जाते हैं।
इलाज
1. निगरानी (वेट एंड वॉच): अगर सिस्ट छोटी है, दर्द नहीं दे रही और अल्ट्रासाउंड में सब सामान्य है, तो किसी इलाज की ज़रूरत नहीं होती। डॉक्टर समय-समय पर जाँच की सलाह देते हैं। स्पर्मेटोसील अपने आप भी छोटी नहीं होती, पर हानि भी नहीं पहुँचाती।
2. दवाएँ: दवाएँ सिस्ट को खत्म नहीं करतीं। दर्द होने पर डॉक्टर की सलाह से दर्द निवारक दवा, और संक्रमण की आशंका हो तो एंटीबायोटिक दी जा सकती है।
3. सर्जरी (स्पर्मेटोसीलेक्टॉमी): अगर सिस्ट बड़ी हो, लगातार दर्द या भारीपन दे रही हो, या रोज़मर्रा के काम में बाधा बन रही हो, तो उसे सर्जरी से निकाला जाता है। यह आमतौर पर डे-केयर प्रक्रिया है और स्थानीय, स्पाइनल या सामान्य एनेस्थीसिया में की जाती है। इसमें अंडकोश में छोटा चीरा लगाकर सिस्ट को एपिडिडाइमिस से अलग कर निकाल दिया जाता है। ज़्यादातर मरीज़ उसी दिन घर लौट जाते हैं।
सर्जरी के संभावित जोखिम:
- संक्रमण या रक्तस्राव, अंडकोश में खून जमना (हेमेटोमा)
- सूजन और दर्द
- सिस्ट का दोबारा बनना
- एपिडिडाइमिस को नुकसान, जिससे शुक्राणुओं के मार्ग में रुकावट और प्रजनन क्षमता पर असर की आशंका
इसलिए जिन पुरुषों को भविष्य में संतान चाहिए, उन्हें सर्जरी का निर्णय यूरोलॉजिस्ट से विस्तार से चर्चा करके ही लेना चाहिए।
4. एस्पिरेशन और स्क्लेरोथेरेपी: इसमें सुई से तरल निकालकर एक रसायन डाला जाता है ताकि सिस्ट दोबारा न भरे। लेकिन इसमें सिस्ट के दोबारा बनने, संक्रमण और एपिडिडाइमिस को नुकसान की आशंका ज़्यादा होती है। इसलिए जो पुरुष भविष्य में पिता बनना चाहते हैं, उनमें आमतौर पर यह तरीका नहीं अपनाया जाता।
सर्जरी के बाद देखभाल
- डॉक्टर की बताई अवधि तक आराम करें और लगभग 1 से 2 सप्ताह तक भारी वज़न उठाने और कठिन व्यायाम से बचें
- सपोर्टर या टाइट अंडरवियर पहनें ताकि अंडकोश को सहारा मिले
- सूजन कम करने के लिए कपड़े में लपेटकर बर्फ़ की सिकाई करें
- घाव को साफ़ और सूखा रखें
- तेज़ बुखार, बढ़ता दर्द, घाव से मवाद या बहुत ज़्यादा सूजन हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें
क्या स्पर्मेटोसील प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है?
अधिकतर मामलों में स्पर्मेटोसील शुक्राणुओं की संख्या या गुणवत्ता पर कोई असर नहीं डालती। खतरा तब बढ़ता है जब बहुत बड़ी सिस्ट नलियों को दबा दे, या इलाज (खासकर सर्जरी या स्क्लेरोथेरेपी) के दौरान एपिडिडाइमिस को क्षति पहुँचे। अगर आप संतान की योजना बना रहे हैं और आपको यह समस्या है, तो डॉक्टर से वीर्य जाँच (सीमन एनालिसिस) और इलाज के विकल्पों पर बात करें।
डॉक्टर से कब मिलें?
अंडकोश में कोई भी नई गांठ या बदलाव दिखे, तो खुद निदान करने के बजाय डॉक्टर (यूरोलॉजिस्ट) से जाँच कराएँ। खासकर इन स्थितियों में देरी न करें:
- अंडकोश में अचानक तेज़ दर्द, मतली या उल्टी के साथ। यह टेस्टिकुलर टॉर्शन (वृषण का मुड़ना) का संकेत हो सकता है और यह आपातकाल है, जिसमें कुछ घंटों में इलाज ज़रूरी होता है
- गांठ का तेज़ी से बढ़ना
- टेस्टिस के अंदर कठोर गांठ महसूस होना
- लालिमा, गर्माहट और बुखार
- लगातार दर्द या भारीपन
स्वयं जाँच और रोकथाम
स्पर्मेटोसील को रोकने का कोई सिद्ध तरीका नहीं है, पर हर महीने टेस्टिकुलर सेल्फ़-एग्ज़ामिनेशन की आदत अच्छी है। नहाने के बाद, जब अंडकोश की त्वचा ढीली हो, दोनों अंडकोषों को अँगूठे और उँगलियों के बीच धीरे से घुमाकर देखें कि कोई नई गांठ, कठोरता या आकार में बदलाव तो नहीं है। इससे किसी भी समस्या का जल्दी पता चल जाता है, चाहे वह स्पर्मेटोसील हो या कुछ और।
खेलकूद के दौरान सुरक्षात्मक गियर पहनना, यौन संक्रमणों से बचाव और समय पर इलाज भी अंडकोश के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या स्पर्मेटोसील कैंसर बन सकता है?
नहीं, यह सौम्य है और कैंसर में नहीं बदलता।
क्या यह अपने आप ठीक हो जाता है?
आमतौर पर नहीं। यह वैसी ही रहती है या धीरे-धीरे थोड़ी बढ़ सकती है।
क्या यौन जीवन पर असर पड़ता है?
सामान्यतः नहीं। बहुत बड़ी सिस्ट में असुविधा हो सकती है।
क्या हर मरीज़ को सर्जरी करानी पड़ती है?
नहीं। ज़्यादातर मरीज़ों को सिर्फ़ निगरानी की ज़रूरत होती है।
निष्कर्ष
स्पर्मेटोसील अंडकोष के ऊपर बनने वाली तरल से भरी एक आम और सौम्य गांठ है, जो अक्सर बिना लक्षण के रहती है और किसी इलाज की माँग नहीं करती। फिर भी, अंडकोश में कोई भी नई गांठ मिलने पर सही निदान के लिए जाँच ज़रूरी है, क्योंकि इसी तरह की दिखने वाली कुछ स्थितियाँ गंभीर हो सकती हैं। अगर गांठ बड़ी होकर दर्द या असुविधा दे, तो सर्जरी सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है, बशर्ते प्रजनन क्षमता से जुड़े पहलुओं पर डॉक्टर से पहले चर्चा कर ली जाए। समय पर जाँच, सही जानकारी और शर्म या डर छोड़कर डॉक्टर से बात करना ही सबसे अच्छा उपाय है।
