डैक्रियोसिस्टाइटिस (आंसू की थैली का संक्रमण): कारण, लक्षण और उपचार
परिचय
हमारी आंखें लगातार आंसू बनाती रहती हैं। ये आंसू आंख की सतह को नम रखते हैं, उसे साफ करते हैं और धूल-कण या कीटाणुओं को बाहर निकालते हैं। आंसू आंख की सतह पर फैलने के बाद नाक की ओर बहकर निकल जाते हैं। इसके लिए आंख के भीतरी कोने में एक छोटी-सी नाली-प्रणाली होती है, जिसे “आंसू की निकासी प्रणाली” कहते हैं। जब यह मार्ग अवरुद्ध हो जाता है, तो आंसू रुककर जमा होने लगते हैं और उनमें संक्रमण पनप सकता है। इसी संक्रमण को डैक्रियोसिस्टाइटिस कहा जाता है।
सरल शब्दों में, डैक्रियोसिस्टाइटिस आंसू की थैली (lacrimal sac) में होने वाला संक्रमण और सूजन है। यह थैली आंख के भीतरी कोने और नाक के बीच, नाक की जड़ के पास स्थित होती है। यह समस्या शिशुओं और 40 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्कों, विशेषकर महिलाओं में अधिक देखी जाती है। भारत में यह नेत्र रोग विशेषज्ञों के पास आने वाली आम समस्याओं में से एक है।
आंसू की निकासी प्रणाली कैसे काम करती है?
इस रोग को समझने के लिए पहले आंसुओं के बहने का रास्ता जानना उपयोगी है:
- आंसू ग्रंथि (Lacrimal gland): यह आंख के ऊपरी बाहरी हिस्से में होती है और आंसू बनाती है।
- पंक्टा (Puncta): ऊपरी और निचली पलक के भीतरी कोने पर दो छोटे छिद्र, जिनसे आंसू भीतर जाते हैं।
- कैनालिकुली (Canaliculi): ये बारीक नलिकाएं आंसुओं को पंक्टा से थैली तक ले जाती हैं।
- आंसू की थैली (Lacrimal sac): यहां आंसू इकट्ठे होते हैं।
- नैसोलैक्रिमल डक्ट (Nasolacrimal duct): यह नली थैली से आंसुओं को नाक के भीतर पहुंचाती है।
जब इस नली में कहीं भी रुकावट आती है, तो आंसू थैली में ठहर जाते हैं। ठहरा हुआ तरल जीवाणुओं के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण बन जाता है और संक्रमण शुरू हो जाता है।
डैक्रियोसिस्टाइटिस के प्रकार
यह रोग मुख्यतः दो रूपों में होता है:
1. तीव्र (Acute) डैक्रियोसिस्टाइटिस: इसमें अचानक दर्द, लालिमा और सूजन होती है। यह तेजी से बढ़ता है और तुरंत इलाज की जरूरत होती है।
2. दीर्घकालिक (Chronic) डैक्रियोसिस्टाइटिस: इसमें लंबे समय तक आंख से पानी बहता रहता है और बार-बार चिपचिपा स्राव आता है। दर्द अपेक्षाकृत कम होता है, पर संक्रमण बार-बार लौट सकता है।
इसके अलावा, उम्र के आधार पर इसे जन्मजात (शिशुओं में) और अर्जित (वयस्कों में) वर्गों में बांटा जाता है।
कारण
शिशुओं में
- नैसोलैक्रिमल डक्ट का न खुलना: गर्भ में विकास के दौरान आंसू की नली के निचले सिरे पर एक पतली झिल्ली होती है, जो आमतौर पर जन्म के आसपास खुल जाती है। कुछ शिशुओं में यह नहीं खुलती और रुकावट बनी रहती है। लगभग 5 से 6 प्रतिशत नवजात शिशुओं में यह स्थिति पाई जाती है, और अधिकांश में यह पहले वर्ष के भीतर अपने आप ठीक हो जाती है।
वयस्कों में
- उम्र के साथ नली का संकरा होना: बढ़ती उम्र में नली की भीतरी परत मोटी हो जाती है और रास्ता तंग हो जाता है। यह मध्यम आयु की महिलाओं में अधिक होता है, क्योंकि उनकी निकासी नली अपेक्षाकृत संकरी होती है।
- नाक की समस्याएं: लंबे समय का साइनस संक्रमण, नाक की हड्डी का टेढ़ापन (deviated septum), नाक के पॉलीप्स या नाक की सर्जरी।
- चोट: चेहरे या नाक की हड्डी पर लगी चोट से नली क्षतिग्रस्त हो सकती है।
- पथरी (Dacryolith): कभी-कभी थैली में छोटी पथरी बन जाती है जो रास्ता रोक देती है।
- पुराने संक्रमण: आंख या नाक के बार-बार होने वाले संक्रमण से नली में निशान बन सकते हैं।
- अन्य रोग: सारकॉइडोसिस, ग्रैन्युलोमैटोसिस विद पॉलीएंजाइटिस जैसी सूजन संबंधी बीमारियां और कुछ मामलों में ट्यूमर भी रुकावट का कारण बन सकते हैं।
संक्रमण फैलाने वाले जीवाणु
सामान्यतः स्टैफिलोकोकस ऑरियस, स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया और स्यूडोमोनास जैसे जीवाणु इस संक्रमण में पाए जाते हैं।
लक्षण
तीव्र डैक्रियोसिस्टाइटिस के लक्षण
- आंख के भीतरी कोने और नाक के पास तेज दर्द
- उस हिस्से में लालिमा, गर्माहट और सूजन, जो गाल तक फैल सकती है
- छूने पर कोमलता और कभी-कभी गांठ जैसा उभार
- आंख से लगातार पानी बहना (Epiphora)
- आंख से पीला या हरा चिपचिपा स्राव (मवाद)
- बुखार, थकान और बेचैनी (कुछ मामलों में)
- पलकों का सूज जाना
दीर्घकालिक डैक्रियोसिस्टाइटिस के लक्षण
- हर समय आंख से पानी आना, खासकर ठंडी हवा या धूप में
- आंख का बार-बार चिपचिपा होना, सुबह पलकें चिपक जाना
- आंख के भीतरी कोने को दबाने पर मवाद या श्लेष्मा निकलना
- आंख का लाल रहना
- धुंधलापन, क्योंकि आंसुओं की परत बिगड़ जाती है
शिशुओं में पहचान
- जन्म के कुछ सप्ताह के भीतर एक या दोनों आंखों से पानी बहना
- आंख में बार-बार कीचड़ या पीला स्राव
- आंख के भीतरी कोने को दबाने पर स्राव बाहर निकलना
- सामान्यतः आंख की सफेदी साफ रहती है, जो इसे कंजंक्टिवाइटिस से अलग करती है
जटिलताएं
समय पर इलाज न होने पर निम्न समस्याएं हो सकती हैं:
- आंसू की थैली में फोड़ा (Abscess): मवाद इकट्ठा होकर फूट सकता है और त्वचा पर छेद (fistula) बना सकता है।
- ऑर्बिटल सेल्युलाइटिस: संक्रमण आंख के गड्ढे के भीतर फैल सकता है, जो गंभीर स्थिति है और दृष्टि के लिए खतरा बन सकती है।
- कॉर्निया का अल्सर: लगातार संक्रमित आंसू आंख की पुतली की सतह को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
- बार-बार संक्रमण: नली पूरी तरह बंद रहने पर संक्रमण बार-बार लौटता है।
- दुर्लभ मामलों में संक्रमण मस्तिष्क तक पहुंचकर गंभीर जटिलता पैदा कर सकता है।
निदान (जांच)
नेत्र रोग विशेषज्ञ आमतौर पर इन तरीकों से रोग की पुष्टि करते हैं:
- शारीरिक परीक्षण: आंख और नाक के पास की जांच, सूजन और स्राव का आकलन।
- रेगर्जिटेशन टेस्ट: थैली को दबाने पर मवाद या तरल का पंक्टा से बाहर आना रुकावट का संकेत है।
- डाई डिसअपीयरेंस टेस्ट: आंख में रंगीन बूंद डालकर देखा जाता है कि वह कितनी जल्दी नाक तक पहुंचती है।
- सिरिंजिंग (Lacrimal syringing): नली में पानी डालकर देखा जाता है कि रास्ता खुला है या बंद। तीव्र संक्रमण के दौरान यह जांच नहीं की जाती।
- स्राव का कल्चर: कौन-सा जीवाणु है, यह जानने के लिए।
- इमेजिंग (CT स्कैन या डैक्रियोसिस्टोग्राफी): जटिल मामलों में, या जब ट्यूमर या पथरी का संदेह हो।
उपचार
उपचार रोग की अवस्था और रोगी की उम्र पर निर्भर करता है।
तीव्र अवस्था में
- एंटीबायोटिक दवाएं: डॉक्टर की सलाह पर खाने वाली एंटीबायोटिक दी जाती हैं। गंभीर मामलों में इंजेक्शन भी लगाए जा सकते हैं।
- दर्द और सूजन की दवाएं: आराम के लिए दर्दनिवारक दवाएं।
- गुनगुना सेंक: साफ कपड़े से हल्का गर्म सेंक दर्द और सूजन में राहत देता है।
- फोड़े का इलाज: यदि मवाद इकट्ठा हो गया हो, तो डॉक्टर उसे चीरा लगाकर निकाल सकते हैं।
ध्यान रखें कि तीव्र संक्रमण में एंटीबायोटिक से लक्षण ठीक हो जाते हैं, पर रुकावट बनी रहे तो संक्रमण दोबारा हो सकता है। इसलिए स्थायी इलाज के लिए आमतौर पर सर्जरी की जरूरत पड़ती है।
शिशुओं में
- आंसू की थैली की मालिश (Crigler massage): माता-पिता को डॉक्टर सही तरीका सिखाते हैं। इसमें आंख के भीतरी कोने के पास थैली वाले हिस्से को हल्के से नीचे की ओर दबाया जाता है, दिन में कई बार। यह रुकावट खोलने में मदद करती है।
- एंटीबायोटिक आई ड्रॉप्स: संक्रमण होने पर।
- प्रतीक्षा: अधिकांश शिशुओं में एक वर्ष की उम्र तक नली अपने आप खुल जाती है।
- प्रोबिंग (Probing): यदि लगभग 6 से 12 महीने की उम्र तक समस्या बनी रहे, तो एक छोटी प्रक्रिया में पतली जांच-तार से नली खोली जाती है।
- सिलिकॉन ट्यूब डालना या बैलून डाइलेशन: प्रोबिंग असफल होने पर।
वयस्कों में: डैक्रियोसिस्टोराइनोस्टॉमी (DCR) सर्जरी
वयस्कों में दीर्घकालिक रुकावट का सबसे प्रभावी और स्थायी इलाज DCR सर्जरी है। इसमें आंसू की थैली और नाक के बीच एक नया रास्ता बनाया जाता है, ताकि आंसू सीधे नाक में बह सकें।
DCR के दो मुख्य तरीके हैं:
- बाहरी DCR (External DCR): नाक के पास त्वचा में चीरा लगाकर की जाती है। इसकी सफलता दर बहुत अच्छी है।
- एंडोस्कोपिक DCR: नाक के भीतर से दूरबीन की मदद से की जाती है। इसमें चेहरे पर निशान नहीं रहता और रिकवरी तेज होती है।
सर्जरी से पहले सक्रिय संक्रमण को दवाओं से नियंत्रित किया जाता है। सर्जरी के बाद कुछ दिन तक नाक की देखभाल और दवाइयां जरूरी होती हैं। कई बार सुरक्षा के लिए अस्थायी सिलिकॉन ट्यूब लगाई जाती है, जिसे बाद में निकाल दिया जाता है।
घरेलू देखभाल और सावधानियां
- आंख को बार-बार न छुएं और न रगड़ें।
- हाथ साफ रखें और संक्रमित आंख छूने के बाद हाथ धोएं।
- साफ रुई या कपड़े से स्राव को भीतर से बाहर की ओर पोंछें, और हर बार नई रुई इस्तेमाल करें।
- तौलिया, रूमाल और तकिए का कवर दूसरों के साथ साझा न करें।
- गुनगुने पानी का सेंक दिन में कुछ बार करें।
- संक्रमण के दौरान कॉन्टैक्ट लेंस और आंखों का मेकअप न इस्तेमाल करें।
- डॉक्टर द्वारा दी गई दवा का पूरा कोर्स पूरा करें, भले ही आराम मिल जाए।
- थैली को जोर से दबाकर मवाद निकालने की कोशिश घर पर न करें, इससे संक्रमण फैल सकता है।
- नाक के रोगों (साइनस, एलर्जी) का समय पर इलाज कराएं।
डॉक्टर के पास कब जाएं?
इन स्थितियों में बिना देरी के नेत्र रोग विशेषज्ञ से मिलें:
- आंख के कोने में तेज दर्द, लालिमा और सूजन हो
- तेज बुखार के साथ पलक या गाल में सूजन फैल रही हो
- आंख हिलाने में दर्द हो या आंख बाहर की ओर उभरी लगे
- नजर धुंधली हो जाए
- शिशु की आंख से कई सप्ताह तक पानी या कीचड़ आता रहे
- आंख से पानी बहने की समस्या महीनों तक चले
बचाव
डैक्रियोसिस्टाइटिस को हमेशा रोकना संभव नहीं है, पर कुछ बातें जोखिम कम करती हैं:
- नाक और साइनस के संक्रमण का सही इलाज कराएं।
- चेहरे और नाक पर चोट से बचें।
- आंखों की स्वच्छता का ध्यान रखें।
- आंख से लगातार पानी बहने को हल्के में न लें और समय रहते जांच कराएं।
निष्कर्ष
डैक्रियोसिस्टाइटिस आंसू की थैली का संक्रमण है, जो आंसू की निकासी नली में रुकावट के कारण होता है। शुरुआत में यह केवल आंख से पानी आने जैसा सामान्य लक्षण लग सकता है, पर अनदेखी करने पर दर्दनाक सूजन, फोड़ा और गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है। शिशुओं में अधिकतर मामले मालिश और प्रतीक्षा से ठीक हो जाते हैं, जबकि वयस्कों में स्थायी समाधान प्रायः DCR सर्जरी से मिलता है। सही समय पर निदान, उचित दवाइयां और स्वच्छता का ध्यान रखकर इस रोग से पूरी तरह छुटकारा पाया जा सकता है।
महत्वपूर्ण सूचना: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। यदि आपको या आपके बच्चे को ऐसे लक्षण दिखें, तो किसी योग्य नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
