वैरिकोसील (Varicocele): अंडकोष की नसों का फूलना – कारण, लक्षण और इलाज
परिचय
पुरुषों के स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं पर लोग खुलकर बात नहीं करते, और वैरिकोसील उनमें से एक है। यह ऐसी स्थिति है जिसमें अंडकोष (स्क्रोटम) की नसें फूल जाती हैं। इसे सरल शब्दों में वैसे समझा जा सकता है जैसे कुछ लोगों के पैरों में नसें उभरकर टेढ़ी-मेढ़ी दिखने लगती हैं (वैरिकोज़ वेन्स)। बहुत से पुरुषों को इसके बारे में तब पता चलता है जब वे संतान न होने की जाँच करवाते हैं।
अनुमान है कि लगभग 15 प्रतिशत पुरुषों में यह समस्या पाई जाती है। पुरुष बांझपन की जाँच करवाने वालों में यह अनुपात काफ़ी ज़्यादा, लगभग 35 से 40 प्रतिशत, तक देखा गया है। इसलिए इसे समझना और समय पर पहचानना ज़रूरी है।
वैरिकोसील क्या है?
अंडकोष में शुक्राणु बनते हैं। इन्हें रक्त पहुँचाने के लिए धमनियाँ होती हैं, और इस्तेमाल हो चुका रक्त वापस ले जाने का काम नसें करती हैं। अंडकोष की नसों के जाल को “पैम्पिनिफॉर्म प्लेक्सस” कहते हैं।
इन नसों के अंदर छोटे वाल्व होते हैं, जो रक्त को केवल एक दिशा में, यानी हृदय की ओर, बहने देते हैं। जब ये वाल्व कमज़ोर या ख़राब हो जाते हैं, तो रक्त वापस नीचे लौटने लगता है और नसों में जमा होने लगता है। इससे नसें फूलकर मोटी और टेढ़ी हो जाती हैं। इसी स्थिति को वैरिकोसील कहते हैं।
किस तरफ़ ज़्यादा होता है?
लगभग 85 से 90 प्रतिशत मामलों में वैरिकोसील बाईं तरफ़ होता है। इसका कारण शारीरिक बनावट है। बाईं तरफ़ की अंडकोष नस एक बड़ी नस (रीनल वेन) में लगभग समकोण पर खुलती है, जिससे रक्त के बहाव पर दबाव ज़्यादा पड़ता है। दाईं तरफ़ की नस सीधे मुख्य नस (इन्फीरियर वेना कावा) में जाती है। कभी-कभी दोनों तरफ़ भी हो सकता है। अगर केवल दाईं तरफ़ अचानक वैरिकोसील दिखे, तो डॉक्टर पेट के अंदर किसी गाँठ या रुकावट की जाँच भी करवाते हैं।
वैरिकोसील के कारण
वैरिकोसील का सटीक कारण हर मामले में स्पष्ट नहीं होता, पर ये बातें प्रमुख मानी जाती हैं:
- नसों के वाल्व की कमज़ोरी: यह जन्मजात हो सकती है और आमतौर पर किशोरावस्था में यौवन (प्यूबर्टी) के दौरान सामने आती है, जब अंडकोष में रक्त का प्रवाह बढ़ता है।
- शारीरिक बनावट: बाईं नस की बनावट के कारण वहाँ दबाव ज़्यादा रहता है।
- नसों पर दबाव: पेट में कोई गाँठ या बढ़ा हुआ गुर्दा नस को दबा सकता है। यह कम मामलों में होता है, पर 40 साल के बाद अचानक हुए वैरिकोसील में इसकी जाँच ज़रूरी है।
- भारी वज़न उठाना और ज़ोर लगाना: लंबे समय तक ऐसा करने से पेट के अंदर का दबाव बढ़ता है, जो लक्षणों को बिगाड़ सकता है।
- आनुवंशिकता: परिवार में किसी को यह समस्या रही हो तो जोखिम कुछ बढ़ सकता है।
ध्यान रहे, वैरिकोसील किसी ग़लत आदत, यौन गतिविधि या हस्तमैथुन से नहीं होता। यह एक आम भ्रांति है।
लक्षण
बहुत से पुरुषों में वैरिकोसील का कोई लक्षण नहीं होता और यह संयोग से पता चलता है। जब लक्षण होते हैं, तो वे इस तरह के हो सकते हैं:
- अंडकोष में भारीपन या खिंचाव: ऐसा लगता है जैसे नीचे कुछ लटक रहा हो।
- हल्का, धीमा दर्द: यह अक्सर दिन के अंत में, लंबे समय तक खड़े रहने या व्यायाम के बाद बढ़ता है, और लेटने पर आराम मिलता है।
- नसों का उभार: खड़े होने पर अंडकोष के ऊपर नसें “कीड़ों की थैली” जैसी महसूस होती हैं।
- अंडकोष के आकार में अंतर: प्रभावित तरफ़ का अंडकोष छोटा या ढीला लग सकता है।
- सूजन: कभी-कभी हल्की सूजन दिखती है।
- संतान न होना: कई बार यही एकमात्र संकेत होता है।
अगर दर्द अचानक और बहुत तेज़ हो, तो यह वैरिकोसील नहीं बल्कि टॉर्शन (अंडकोष का मुड़ना) जैसी आपात स्थिति हो सकती है, जिसमें तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।
वैरिकोसील के ग्रेड
जाँच में डॉक्टर इसे तीन श्रेणियों में बाँटते हैं:
- ग्रेड 1: केवल गहरी साँस रोककर ज़ोर लगाने (वालसाल्वा) पर महसूस होता है।
- ग्रेड 2: ज़ोर लगाए बिना खड़े होकर हाथ से जाँचने पर महसूस होता है।
- ग्रेड 3: बिना छुए, देखने भर से नसें साफ़ दिख जाती हैं।
इसके अलावा कुछ मामले “सबक्लिनिकल” होते हैं, जो केवल अल्ट्रासाउंड में दिखते हैं।
प्रजनन क्षमता पर असर
वैरिकोसील से प्रजनन क्षमता प्रभावित होने के पीछे माना जाता है कि नसों में जमा गर्म रक्त अंडकोष का तापमान बढ़ा देता है। शुक्राणु बनने के लिए शरीर के सामान्य तापमान से थोड़ा कम तापमान चाहिए। तापमान बढ़ने और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से ये प्रभाव पड़ सकते हैं:
- शुक्राणुओं की संख्या घटना
- शुक्राणुओं की गति (मोटिलिटी) कम होना
- शुक्राणुओं का आकार असामान्य होना
- समय के साथ अंडकोष के आकार और कार्य में कमी
हालाँकि हर वैरिकोसील वाले पुरुष को बांझपन नहीं होता। बहुत से लोग सामान्य रूप से पिता बनते हैं। पर जिन्हें संतान प्राप्ति में कठिनाई है, उनके लिए इसका इलाज एक अहम विकल्प है।
जाँच कैसे होती है?
- शारीरिक परीक्षण: यूरोलॉजिस्ट खड़े होने की स्थिति में और वालसाल्वा करवाकर अंडकोष की जाँच करते हैं।
- स्क्रोटल कलर डॉप्लर अल्ट्रासाउंड: इससे नसों का आकार और उनमें रक्त के उलटे बहाव की पुष्टि होती है। यह सबसे भरोसेमंद जाँच मानी जाती है।
- वीर्य विश्लेषण (सीमेन एनालिसिस): प्रजनन क्षमता जाँचने के लिए, ख़ासकर जब संतान की योजना हो। सही तस्वीर के लिए अक्सर यह जाँच दोबारा करवाई जाती है।
- हार्मोन जाँच: ज़रूरत पड़ने पर टेस्टोस्टेरोन, FSH और LH की जाँच की जाती है।
इलाज के विकल्प
1. निगरानी और सहायक उपाय
अगर कोई लक्षण नहीं है, अंडकोष का आकार सामान्य है और प्रजनन संबंधी कोई चिंता नहीं है, तो अक्सर इलाज की ज़रूरत नहीं होती। नियमित जाँच करवाते रहना काफ़ी होता है। हल्के दर्द में ये उपाय मदद करते हैं:
- सहारा देने वाला अंडरवियर (सपोर्टर या फिटेड ब्रीफ़) पहनना
- डॉक्टर की सलाह से दर्द निवारक दवा लेना
- लंबे समय तक खड़े रहने या भारी वज़न उठाने से बचना
2. सर्जरी (वैरिकोसेलेक्टॉमी)
सर्जरी की सलाह आमतौर पर इन स्थितियों में दी जाती है:
- लगातार बना रहने वाला दर्द जो दवा से ठीक न हो
- शुक्राणुओं की गुणवत्ता में कमी और संतान प्राप्ति में परेशानी
- किशोरों में अंडकोष का विकास रुकना या दोनों अंडकोषों के आकार में स्पष्ट अंतर
सर्जरी में प्रभावित नसों को बाँध दिया जाता है ताकि रक्त स्वस्थ नसों से होकर बहे। प्रमुख तरीके:
- माइक्रोसर्जिकल सबइंगुइनल तकनीक: इसे सबसे बेहतर माना जाता है। सूक्ष्मदर्शी की मदद से केवल फूली नसें बाँधी जाती हैं, जिससे दोबारा होने और जटिलताओं की संभावना कम रहती है।
- लैप्रोस्कोपिक सर्जरी: पेट में छोटे चीरों से की जाती है।
- ओपन सर्जरी: पारंपरिक तरीका।
ज़्यादातर मामलों में यह डे-केयर सर्जरी है, यानी मरीज़ उसी दिन या अगले दिन घर जा सकता है। कुछ दिनों का आराम और लगभग 1 से 2 सप्ताह तक भारी काम से परहेज़ सामान्यतः बताया जाता है। सही समय आपका सर्जन बताएगा।
3. एम्बोलाइज़ेशन
इसमें रेडियोलॉजिस्ट जाँघ या गर्दन की नस से बारीक नली डालकर प्रभावित नस को बंद कर देते हैं। इसमें चीरा नहीं लगता, पर यह हर जगह उपलब्ध नहीं होता और सभी मरीज़ों के लिए उपयुक्त भी नहीं होता।
संभावित जोखिम
किसी भी इलाज की तरह इनमें भी कुछ जोखिम हैं: हाइड्रोसील (अंडकोष के आसपास पानी जमना), संक्रमण, और कभी-कभी वैरिकोसील का दोबारा होना। अनुभवी सर्जन से माइक्रोसर्जरी करवाने पर ये संभावनाएँ काफ़ी कम हो जाती हैं।
सर्जरी के बाद क्या उम्मीद करें?
सर्जरी के बाद दर्द में आमतौर पर राहत मिलती है। शुक्राणुओं की गुणवत्ता में सुधार धीरे-धीरे आता है, क्योंकि शुक्राणु बनने और परिपक्व होने की प्रक्रिया में लगभग 3 महीने लगते हैं। इसलिए सुधार जाँचने के लिए वीर्य विश्लेषण प्रायः 3 से 6 महीने बाद दोबारा करवाया जाता है। कई पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या और गति बेहतर होती है और प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना बढ़ती है, हालाँकि यह हर व्यक्ति में अलग होता है और इसकी गारंटी नहीं दी जा सकती।
जीवनशैली के सुझाव
वैरिकोसील को केवल जीवनशैली से ठीक नहीं किया जा सकता, पर ये आदतें समग्र प्रजनन स्वास्थ्य के लिए फ़ायदेमंद हैं:
- संतुलित आहार लें, जिसमें फल, सब्ज़ियाँ, मेवे और प्रोटीन शामिल हों।
- वज़न नियंत्रित रखें और नियमित हल्का व्यायाम करें।
- धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें, क्योंकि ये शुक्राणुओं की गुणवत्ता घटाते हैं।
- बहुत तंग कपड़े और लैपटॉप को सीधे गोद में रखने से बचें।
- अंडकोष को अधिक गर्मी (जैसे बहुत गर्म पानी में लंबे समय तक नहाना) से बचाएँ।
- तनाव कम करें और पर्याप्त नींद लें।
भ्रांतियाँ और सच्चाई
- भ्रांति: वैरिकोसील का मतलब है कि पुरुष कभी पिता नहीं बन सकता।
सच्चाई: बहुत से पुरुष सामान्य रूप से संतान उत्पन्न करते हैं, और इलाज से भी सुधार संभव है। - भ्रांति: यह यौन संबंध या हस्तमैथुन से होता है।
सच्चाई: इसका इन गतिविधियों से कोई संबंध नहीं है। - भ्रांति: यह कैंसर बन जाता है।
सच्चाई: वैरिकोसील कैंसर नहीं है और कैंसर में नहीं बदलता। पर अंडकोष में कोई भी गाँठ महसूस हो तो जाँच ज़रूर करवाएँ। - भ्रांति: केवल दवाओं से यह ठीक हो जाता है।
सच्चाई: दवाएँ केवल दर्द में राहत देती हैं, फूली नसों को ठीक नहीं करतीं।
डॉक्टर से कब मिलें?
- अंडकोष में लगातार दर्द, भारीपन या सूजन हो
- खड़े होने पर नसें उभरी हुई महसूस हों
- दोनों अंडकोषों के आकार में फ़र्क़ दिखे
- एक साल या उससे अधिक समय से नियमित प्रयास के बावजूद गर्भधारण न हो रहा हो
- किशोर बेटे को इस तरह की कोई शिकायत हो
- अचानक तेज़ दर्द हो (यह आपात स्थिति है, तुरंत अस्पताल जाएँ)
इसके लिए यूरोलॉजिस्ट या एंड्रोलॉजिस्ट से मिलना उचित रहता है।
निष्कर्ष
वैरिकोसील एक आम और अक्सर गंभीर न होने वाली समस्या है, पर इसे नज़रअंदाज़ करना ठीक नहीं, ख़ासकर तब जब दर्द हो या संतान की योजना हो। शर्म या झिझक के कारण इलाज टालने से अंडकोष के कार्य पर असर पड़ सकता है। समय पर जाँच, सही सलाह और ज़रूरत पड़ने पर आधुनिक सर्जरी से अधिकांश पुरुष स्वस्थ और सामान्य जीवन जी सकते हैं।
