ऑर्काइटिस (Orchitis - अंडकोष में सूजन)
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ऑर्काइटिस (Orchitis): अंडकोष की सूजन के कारण, लक्षण, जाँच और इलाज

परिचय

पुरुषों के प्रजनन तंत्र का एक अहम हिस्सा अंडकोष (Testis) है। ये दो अंडाकार ग्रंथियाँ हैं, जो अंडकोश की थैली (Scrotum) में रहती हैं। इनका काम शुक्राणु (Sperm) बनाना और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का उत्पादन करना है। जब किसी संक्रमण या सूजन के कारण एक या दोनों अंडकोष सूज जाते हैं, तो इस स्थिति को ऑर्काइटिस (Orchitis) कहते हैं।

यह किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन कुछ खास उम्र और परिस्थितियों में ज़्यादा देखा जाता है। समय पर इलाज न मिले तो यह तेज़ दर्द, फोड़ा (abscess) और प्रजनन क्षमता में कमी जैसी समस्याएँ पैदा कर सकता है। इसलिए इसके बारे में सही जानकारी होना ज़रूरी है।

ऑर्काइटिस क्या है?

“ऑर्काइटिस” शब्द ग्रीक भाषा के orchis (अंडकोष) और -itis (सूजन) से बना है। इसमें अंडकोष के ऊतकों में सूजन, दर्द और गर्मी महसूस होती है। यह एक तरफ (Unilateral) भी हो सकता है और दोनों तरफ (Bilateral) भी। ज़्यादातर मामलों में एक ही अंडकोष प्रभावित होता है।

अक्सर यह समस्या अकेले नहीं होती। कई बार अंडकोष के पीछे स्थित नली एपिडिडाइमिस (Epididymis) में भी सूजन होती है। तब इसे एपिडिडाइमो-ऑर्काइटिस (Epididymo-orchitis) कहते हैं। यह बैक्टीरियल ऑर्काइटिस का सबसे आम रूप है।

ऑर्काइटिस के प्रकार

1. वायरल ऑर्काइटिस: यह वायरस के संक्रमण से होता है। सबसे आम वायरस मम्प्स (कण्ठमाला/गलसुआ) का वायरस है। जिन किशोरों और वयस्क पुरुषों को यौवन (puberty) के बाद मम्प्स होता है, उनमें से लगभग हर तीन में से एक को ऑर्काइटिस हो सकता है। यह आमतौर पर मम्प्स के लक्षण शुरू होने के 4 से 10 दिन बाद दिखता है।

2. बैक्टीरियल ऑर्काइटिस: यह जीवाणु संक्रमण से होता है और आमतौर पर एपिडिडाइमिस के संक्रमण से फैलता है। इसके कारण उम्र के हिसाब से अलग-अलग होते हैं।

3. गैर-संक्रामक (Non-infectious) ऑर्काइटिस: कभी-कभी चोट, कुछ दवाओं या ऑटोइम्यून स्थितियों के कारण भी अंडकोष में सूजन आ सकती है। यह अपेक्षाकृत दुर्लभ है।

ऑर्काइटिस के मुख्य कारण

मम्प्स वायरस: टीकाकरण न होने की स्थिति में यह सबसे प्रमुख कारण है।

यौन संचारित संक्रमण (STI): 35 वर्ष से कम उम्र के यौन रूप से सक्रिय पुरुषों में क्लैमाइडिया (Chlamydia trachomatis) और गोनोरिया (Neisseria gonorrhoeae) सबसे आम कारण हैं। असुरक्षित यौन संबंध इसका बड़ा जोखिम है।

मूत्र मार्ग का संक्रमण (UTI): 35 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में आँतों के बैक्टीरिया, जैसे ई. कोलाई (E. coli), मूत्र मार्ग से ऊपर चढ़कर अंडकोष तक पहुँच जाते हैं।

प्रोस्टेट की समस्याएँ: प्रोस्टेट का बढ़ना या उसका संक्रमण मूत्र प्रवाह में रुकावट पैदा करता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है।

मूत्र संबंधी प्रक्रियाएँ: कैथेटर लगाना, सिस्टोस्कोपी या मूत्र मार्ग की सर्जरी के बाद संक्रमण फैल सकता है।

जन्मजात मूत्र मार्ग की विकृतियाँ: बच्चों और युवाओं में मूत्र प्रणाली की संरचनात्मक असामान्यताएँ जोखिम बढ़ाती हैं।

अन्य संक्रमण: दुर्लभ मामलों में टीबी (तपेदिक), ब्रूसेलोसिस और अन्य वायरस भी कारण बन सकते हैं।

जोखिम कारक

  • असुरक्षित यौन संबंध और एक से अधिक साथी
  • मम्प्स का टीका (MMR) न लगवाना
  • बार-बार होने वाला मूत्र मार्ग संक्रमण
  • बढ़ा हुआ प्रोस्टेट या मूत्र में रुकावट
  • मूत्र मार्ग में कैथेटर या अन्य उपकरण का प्रयोग
  • कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता
  • मूत्र मार्ग की जन्मजात विकृति

ऑर्काइटिस के लक्षण

लक्षण अचानक शुरू हो सकते हैं। आम लक्षण ये हैं:

  • एक या दोनों अंडकोष में सूजन और भारीपन
  • अंडकोष में दर्द, जो चलने, बैठने या छूने पर बढ़ता है
  • अंडकोश की त्वचा का लाल, गर्म और संवेदनशील होना
  • बुखार और कँपकँपी
  • थकान, बदन दर्द और मतली
  • पेशाब में जलन या बार-बार पेशाब आना
  • लिंग से पीप जैसा या असामान्य स्राव (खासकर STI में)
  • वीर्य में खून आना
  • पेट के निचले हिस्से या कमर में दर्द
  • जाँघ के जोड़ (groin) की गाँठों में सूजन

मम्प्स से जुड़े मामलों में कान के नीचे गालों की सूजन भी दिख सकती है।

ऑर्काइटिस और टेस्टिकुलर टॉर्शन में अंतर

यह जानना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि दोनों के लक्षण मिलते-जुलते हैं। टेस्टिकुलर टॉर्शन (Testicular Torsion) में अंडकोष अपनी नस (spermatic cord) पर मुड़ जाता है और उसका रक्त प्रवाह रुक जाता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें कुछ घंटों में इलाज न मिलने पर अंडकोष हमेशा के लिए खराब हो सकता है।

अगर अंडकोश में अचानक तेज़ दर्द उठे, खासकर किशोरों में, तो इंतज़ार न करें। तुरंत अस्पताल पहुँचें। घर पर खुद यह तय करने की कोशिश न करें कि यह ऑर्काइटिस है या टॉर्शन।

संभावित जटिलताएँ

अगर समय पर सही इलाज न हो, तो ये समस्याएँ हो सकती हैं:

  • अंडकोष में फोड़ा (Abscess): पीप जमा हो सकती है, जिसे निकालने के लिए सर्जरी करनी पड़ती है।
  • अंडकोष का सिकुड़ना (Testicular Atrophy): खासकर मम्प्स ऑर्काइटिस के बाद अंडकोष का आकार घट सकता है।
  • शुक्राणुओं की संख्या में कमी: दोनों अंडकोष प्रभावित हों तो बाँझपन (infertility) का खतरा बढ़ता है। हालाँकि एक तरफ के संक्रमण में पूर्ण बाँझपन कम होता है।
  • दीर्घकालिक दर्द: कुछ लोगों में महीनों तक हल्का दर्द बना रह सकता है।
  • हाइड्रोसील: अंडकोश में तरल पदार्थ जमा हो सकता है।
  • टेस्टोस्टेरोन में कमी: गंभीर मामलों में हार्मोन का स्तर प्रभावित हो सकता है।

निदान (Diagnosis) कैसे होता है?

डॉक्टर सबसे पहले लक्षणों, यौन इतिहास और मम्प्स के संपर्क या टीकाकरण के बारे में पूछते हैं। इसके बाद जाँच में ये चीज़ें शामिल हो सकती हैं:

  • शारीरिक परीक्षण: अंडकोष, अंडकोश और जाँघ की गाँठों की जाँच
  • पेशाब की जाँच और कल्चर: संक्रमण और बैक्टीरिया की पहचान के लिए
  • STI टेस्ट: लिंग से स्राव या पेशाब का नमूना लेकर क्लैमाइडिया और गोनोरिया की जाँच
  • रक्त जाँच: संक्रमण के संकेत (जैसे WBC की संख्या) देखने के लिए
  • अल्ट्रासाउंड (डॉप्लर): अंडकोष में रक्त प्रवाह देखने और टॉर्शन को अलग करने के लिए बहुत उपयोगी
  • मम्प्स की पुष्टि: ज़रूरत पड़ने पर एंटीबॉडी टेस्ट

इलाज

इलाज कारण पर निर्भर करता है, और दवा हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही लेनी चाहिए।

बैक्टीरियल ऑर्काइटिस: डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाएँ देते हैं। कौन-सी दवा दी जाए, यह उम्र और संभावित कारण पर निर्भर करता है। STI के मामले में यौन साथी का भी इलाज ज़रूरी है, वरना संक्रमण दोबारा हो सकता है। एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स खत्म करना चाहिए, भले ही लक्षण जल्दी ठीक हो जाएँ।

वायरल ऑर्काइटिस (मम्प्स): इसमें एंटीबायोटिक असर नहीं करते। इलाज लक्षणों को कम करने पर केंद्रित होता है: आराम, दर्द निवारक और सूजन कम करने वाली दवाएँ। यह आमतौर पर एक से दो हफ्ते में ठीक होता है, हालाँकि दर्द और सूजन कुछ और समय रह सकती है।

फोड़ा होने पर: पीप निकालने के लिए सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है।

घर पर देखभाल के उपाय

डॉक्टर के इलाज के साथ ये उपाय राहत देते हैं:

  • आराम करें और जब तक दर्द कम न हो, भारी काम या कसरत से बचें।
  • अंडकोश को सहारा दें। लेटते समय उसके नीचे तौलिया लपेटकर रखें और दिन में सपोर्टिव अंडरवियर पहनें।
  • ठंडी सिकाई करें। कपड़े में लपेटी बर्फ की पोटली 10 से 15 मिनट तक रखें। बर्फ सीधे त्वचा पर न लगाएँ।
  • पर्याप्त पानी पिएँ, ताकि मूत्र मार्ग साफ रहे।
  • डॉक्टर की सलाह से दर्द निवारक दवा लें।
  • यौन संबंध से परहेज़ करें जब तक इलाज पूरा न हो जाए।

बचाव के तरीके

  1. MMR टीका लगवाएँ। मम्प्स से बचाव का सबसे भरोसेमंद तरीका बचपन में यह टीका लगवाना है।
  2. सुरक्षित यौन संबंध बनाएँ। कंडोम का सही इस्तेमाल करें और साथियों की संख्या सीमित रखें।
  3. STI की नियमित जाँच कराएँ, खासकर अगर जोखिम ज़्यादा हो।
  4. मूत्र मार्ग संक्रमण का समय पर इलाज कराएँ। उसे अनदेखा न करें।
  5. प्रोस्टेट की समस्या हो तो नियमित जाँच कराएँ।
  6. निजी स्वच्छता का ध्यान रखें।
  7. खेल-कूद में सुरक्षा उपकरण (जैसे एथलेटिक सपोर्टर) पहनें, ताकि चोट से बचाव हो।

डॉक्टर के पास कब जाएँ?

इन स्थितियों में तुरंत चिकित्सक से मिलें:

  • अंडकोश में अचानक और तेज़ दर्द (इमरजेंसी)
  • अंडकोष में सूजन, लालिमा और तेज़ बुखार
  • पेशाब में जलन के साथ अंडकोष में दर्द
  • लिंग से पीप या स्राव
  • वीर्य या पेशाब में खून
  • दवा शुरू करने के 2 से 3 दिन बाद भी सुधार न होना

आम भ्रांतियाँ

भ्रांति: अंडकोष की सूजन अपने आप ठीक हो जाती है, इलाज की ज़रूरत नहीं।
सच्चाई: देरी करने पर जटिलताएँ बढ़ सकती हैं, इसलिए जाँच ज़रूरी है।

भ्रांति: ऑर्काइटिस सिर्फ यौन रोग है।
सच्चाई: यौन संक्रमण एक कारण है, पर मम्प्स और मूत्र संक्रमण से भी यह होता है।

भ्रांति: ऑर्काइटिस होने पर हमेशा बाँझपन हो जाता है।
सच्चाई: ज़्यादातर मामलों में, खासकर एक तरफ के संक्रमण में, प्रजनन क्षमता बनी रहती है। जोखिम मुख्यतः दोनों तरफ के गंभीर संक्रमण में है।

निष्कर्ष

ऑर्काइटिस अंडकोष की सूजन है, जो वायरस या बैक्टीरिया के संक्रमण से होती है। इसमें दर्द, सूजन, बुखार और पेशाब संबंधी परेशानियाँ आम हैं। सही समय पर जाँच और इलाज से यह ठीक हो सकता है। लेकिन देरी करने पर फोड़ा, अंडकोष का सिकुड़ना और प्रजनन संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं।

सबसे ज़रूरी बात यह है कि अंडकोश में अचानक तेज़ दर्द को कभी हल्के में न लें, क्योंकि यह टेस्टिकुलर टॉर्शन जैसी आपात स्थिति हो सकती है। टीकाकरण, सुरक्षित यौन आदतें और संक्रमण का समय पर इलाज इस बीमारी से बचाव के सबसे कारगर उपाय हैं। शर्म या झिझक के कारण इलाज टालना नुकसानदेह हो सकता है, इसलिए लक्षण दिखते ही योग्य डॉक्टर (यूरोलॉजिस्ट) से सलाह लें।

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