टार्सल टनल सिंड्रोम (Tarsal Tunnel Syndrome - टखने की नस का दबना)
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टार्सल टनल सिंड्रोम (Tarsal Tunnel Syndrome) — टखने की नस का दबना

परिचय

टार्सल टनल सिंड्रोम एक ऐसी चिकित्सीय स्थिति है जिसमें टखने के अंदरूनी हिस्से में स्थित “पोस्टीरियर टिबियल नर्व” (Posterior Tibial Nerve) दब जाती है या उस पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। यह नस पैर के तलवे तक संवेदना और गति पहुँचाने का काम करती है। जब यह नस किसी संकरी सुरंगनुमा जगह से गुजरते समय दब जाती है, तो पैर में दर्द, झनझनाहट और सुन्नपन जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। इसे कार्पल टनल सिंड्रोम (जो कलाई में होता है) का “पैर वाला संस्करण” भी कहा जा सकता है, क्योंकि दोनों की मूल प्रक्रिया एक जैसी है — एक संकरी जगह में नस का दबना।

यह सिंड्रोम अपेक्षाकृत कम पाया जाने वाला विकार है, लेकिन जिन लोगों को यह होता है, उनके लिए यह चलने-फिरने और रोज़मर्रा के कामों में काफी परेशानी पैदा कर सकता है। समय पर पहचान और सही उपचार से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

टार्सल टनल क्या है?

“टार्सल टनल” टखने के अंदरूनी हिस्से (भीतरी टखने की हड्डी यानी मेडियल मैलियोलस के पीछे) में स्थित एक संकरी सुरंग जैसी संरचना है। यह एक सख्त लिगामेंट (जिसे फ्लेक्सर रेटिनैकुलम कहते हैं) से ढकी होती है। इस सुरंग के अंदर से पोस्टीरियर टिबियल नर्व के साथ-साथ कुछ नसें (टेंडन) और रक्त वाहिकाएँ भी गुजरती हैं। जब इस सीमित जगह में सूजन, चोट या किसी अन्य कारण से दबाव बढ़ जाता है, तो नस पर दबाव पड़ने लगता है और उसकी सामान्य कार्यक्षमता प्रभावित होती है।

टार्सल टनल सिंड्रोम के कारण

यह समस्या कई कारणों से हो सकती है, जिनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं:

  1. पैर में चोट लगना — टखने में मोच आना, फ्रैक्चर होना या किसी दुर्घटना में चोट लगने से सूजन आ सकती है, जो नस पर दबाव डालती है।
  2. फ्लैट फीट (सपाट पैर) — जिन लोगों के पैरों का आर्च (मेहराब) सामान्य से कम होता है, उनमें टखने के जोड़ पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे नस के दबने की संभावना बढ़ जाती है।
  3. सूजन संबंधी बीमारियाँ — रुमेटीइड अर्थराइटिस (गठिया) जैसी बीमारियों में जोड़ों के आसपास सूजन बढ़ने से नस दब सकती है।
  4. गांठ या सिस्ट बनना — टार्सल टनल के भीतर या आसपास कोई गांठ, सिस्ट, वैरिकोज नस या ट्यूमर बनने से जगह कम हो जाती है और नस पर दबाव पड़ता है।
  5. मधुमेह (डायबिटीज़) — मधुमेह के रोगियों में नसों में सूजन और द्रव जमा होने की प्रवृत्ति अधिक होती है, जिससे यह सिंड्रोम होने का खतरा बढ़ जाता है।
  6. मोटापा — अधिक वजन होने से पैरों और टखनों पर दबाव बढ़ता है।
  7. गर्भावस्था — गर्भावस्था के दौरान शरीर में पानी जमा होने (एडिमा) से भी यह समस्या हो सकती है।
  8. अत्यधिक शारीरिक गतिविधि — लंबे समय तक खड़े रहने, दौड़ने या बार-बार टखने पर ज़ोर पड़ने वाली गतिविधियों से भी नस पर दबाव बढ़ सकता है।

कई बार यह स्पष्ट रूप से पता नहीं चल पाता कि किसी व्यक्ति को यह समस्या क्यों हुई; इसे “इडियोपैथिक” (बिना स्पष्ट कारण के) मामला कहा जाता है।

लक्षण

टार्सल टनल सिंड्रोम के लक्षण व्यक्ति-दर-व्यक्ति अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन सामान्यतः निम्नलिखित लक्षण देखे जाते हैं:

  • टखने के अंदरूनी हिस्से में और तलवे में जलन जैसा दर्द
  • पैर के तलवे में झनझनाहट या “सुई चुभने” जैसा एहसास
  • पैर में सुन्नपन या संवेदना कम होना
  • पैर में कमजोरी महसूस होना, विशेष रूप से पंजों में
  • लंबे समय तक खड़े रहने, चलने या दौड़ने पर लक्षणों का बढ़ जाना
  • रात के समय या आराम करते समय भी दर्द बढ़ सकता है
  • कभी-कभी दर्द टखने से ऊपर पिंडली तक या नीचे पंजों तक फैल सकता है

ध्यान देने योग्य बात यह है कि ये लक्षण अक्सर धीरे-धीरे बढ़ते हैं और शुरुआत में इन्हें सामान्य थकान समझ लिया जाता है, जिससे निदान में देरी हो सकती है।

निदान (डायग्नोसिस)

टार्सल टनल सिंड्रोम की पहचान के लिए डॉक्टर आमतौर पर निम्नलिखित तरीके अपनाते हैं:

  1. शारीरिक परीक्षण — डॉक्टर टखने के अंदरूनी हिस्से पर हल्के से टैप करते हैं (जिसे “टिनल साइन” कहा जाता है)। यदि इससे झनझनाहट या दर्द महसूस होता है, तो यह इस सिंड्रोम का संकेत हो सकता है।
  2. नर्व कंडक्शन स्टडी (NCS) और इलेक्ट्रोमायोग्राफी (EMG) — ये टेस्ट यह मापते हैं कि नस कितनी तेज़ी और प्रभावी ढंग से संकेत भेज रही है। इनसे नस के दबने की पुष्टि होती है।
  3. एमआरआई (MRI) — यदि किसी गांठ, सिस्ट या ट्यूमर के कारण दबाव पड़ने का संदेह हो, तो एमआरआई से संरचनात्मक कारणों का पता लगाया जाता है।
  4. अल्ट्रासाउंड — कुछ मामलों में टार्सल टनल के अंदर की संरचनाओं को देखने के लिए अल्ट्रासाउंड का भी उपयोग किया जाता है।
  5. एक्स-रे — हड्डी संबंधी असामान्यताओं या फ्रैक्चर की जांच के लिए एक्स-रे कराया जा सकता है।

सही निदान बेहद ज़रूरी है क्योंकि इसके लक्षण प्लांटर फैसीआइटिस (एड़ी में दर्द), पेरीफेरल न्यूरोपैथी और अन्य पैर की समस्याओं से मिलते-जुलते हो सकते हैं।

उपचार के विकल्प

टार्सल टनल सिंड्रोम का उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या कितनी गंभीर है और इसका मूल कारण क्या है। सामान्यतः उपचार को दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है — बिना ऑपरेशन (नॉन-सर्जिकल) और ऑपरेशन (सर्जिकल)।

बिना ऑपरेशन के उपचार

  • आराम — प्रभावित पैर पर अतिरिक्त दबाव डालने वाली गतिविधियों को कम करना।
  • बर्फ की सिकाई — सूजन कम करने के लिए प्रभावित हिस्से पर बर्फ लगाना।
  • दवाइयाँ — सूजनरोधी दवाइयाँ (NSAIDs) दर्द और सूजन को कम करने में मदद कर सकती हैं।
  • ऑर्थोटिक्स (पैर के सहारे) — विशेष रूप से बने इनसोल या आर्च सपोर्ट पहनने से पैर पर पड़ने वाला दबाव संतुलित होता है, खासकर फ्लैट फीट वाले लोगों के लिए।
  • ब्रेस या स्प्लिंट — टखने को स्थिर रखने के लिए ब्रेस पहनना, ताकि नस पर अनावश्यक खिंचाव न पड़े।
  • फिजियोथेरेपी — विशेष व्यायाम और स्ट्रेचिंग तकनीकों से नस के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत और लचीला बनाया जाता है।
  • स्टेरॉयड इंजेक्शन — गंभीर सूजन की स्थिति में डॉक्टर टार्सल टनल के आसपास कॉर्टिकोस्टेरॉयड इंजेक्शन देने की सलाह दे सकते हैं।
  • वजन प्रबंधन — अधिक वजन वाले व्यक्तियों के लिए वजन कम करना लक्षणों में राहत दे सकता है।

ऑपरेशन (सर्जिकल उपचार)

यदि बिना ऑपरेशन के उपचार से पर्याप्त राहत नहीं मिलती, या यदि किसी गांठ, सिस्ट या संरचनात्मक समस्या के कारण नस दब रही है, तो डॉक्टर सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। इस सर्जरी को “टार्सल टनल रिलीज़” कहा जाता है, जिसमें फ्लेक्सर रेटिनैकुलम (सुरंग को ढकने वाला लिगामेंट) को काटकर नस पर पड़ रहे दबाव को कम किया जाता है। अधिकांश मामलों में यह सर्जरी प्रभावी होती है, हालाँकि पूर्ण रूप से ठीक होने में कुछ सप्ताह से लेकर कुछ महीनों तक का समय लग सकता है।

बचाव के उपाय

हालाँकि हर मामले में इसे पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, फिर भी कुछ सावधानियाँ बरतकर जोखिम को कम किया जा सकता है:

  • सही आकार और अच्छी सपोर्ट वाले जूते पहनना
  • लंबे समय तक एक ही स्थिति में खड़े रहने से बचना
  • वजन को नियंत्रण में रखना
  • नियमित रूप से पैरों और टखनों की स्ट्रेचिंग करना
  • मधुमेह या गठिया जैसी बीमारियों को नियंत्रण में रखना
  • खेलकूद या दौड़ने से पहले उचित वार्म-अप करना

डॉक्टर से कब संपर्क करें

यदि आपको टखने या पैर के तलवे में लगातार जलन, झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो रही है, और यह कुछ दिनों में अपने आप ठीक नहीं हो रहा है, तो किसी ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ या न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श करना उचित है। समय पर उपचार न मिलने पर नस को स्थायी नुकसान पहुँच सकता है, जिससे पैर में स्थायी सुन्नपन या कमजोरी हो सकती है।

निष्कर्ष

टार्सल टनल सिंड्रोम एक ऐसी समस्या है जो शुरुआत में मामूली लग सकती है, लेकिन अनदेखा करने पर यह जीवन की गुणवत्ता को काफी प्रभावित कर सकती है। सही समय पर पहचान, उचित जीवनशैली में बदलाव और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार अपनाकर इस स्थिति को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। यदि लक्षण लगातार बने रहें, तो आत्म-निदान या घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच अवश्य करवानी चाहिए, ताकि सही कारण का पता लगाकर उचित उपचार शुरू किया जा सके।

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