स्टाई (गुहेरी): कारण, लक्षण, घरेलू उपचार और बचाव
परिचय
आँख की पलक पर अचानक एक दर्दनाक, लाल उभार निकल आए तो आमतौर पर लोग उसे “गुहेरी” या “अंजनहारी” कहते हैं। चिकित्सा की भाषा में इसे स्टाई (Stye) या हॉर्डियोलम (Hordeolum) कहा जाता है। यह पलक के किनारे पर होने वाला एक छोटा, पीड़ादायक संक्रमण है, जो देखने में मुँहासे या छोटे फोड़े जैसा लगता है।
स्टाई किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है, चाहे बच्चा हो, युवा हो या बुजुर्ग। यह बहुत आम समस्या है और ज़्यादातर मामलों में बिना किसी गंभीर नुकसान के एक-दो हफ़्ते में अपने आप ठीक हो जाती है। फिर भी इसके कारण पलक में सूजन, चुभन, आँख से पानी आना और असहजता होती है, जिससे रोज़मर्रा के काम प्रभावित हो सकते हैं। इस लेख में हम स्टाई के प्रकार, कारण, लक्षण, उपचार और बचाव के उपायों को विस्तार से समझेंगे।
स्टाई क्या है?
हमारी पलकों के किनारे पर बरौनियों (eyelashes) की जड़ों के पास कई छोटी तैलीय ग्रंथियाँ होती हैं। ये ग्रंथियाँ एक तैलीय पदार्थ छोड़ती हैं, जो आँख की सतह को नम और सुरक्षित रखता है। जब इन ग्रंथियों या बरौनी की जड़ (follicle) में रुकावट आ जाती है और वहाँ बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, तो संक्रमण होता है और एक दर्दनाक गाँठ बन जाती है। यही स्टाई है।
लगभग 90 से 95 प्रतिशत मामलों में इसका कारण स्टैफिलोकोकस ऑरियस (Staphylococcus aureus) नामक बैक्टीरिया होता है, जो आमतौर पर हमारी त्वचा और नाक में पाया जाता है।
स्टाई के प्रकार
स्टाई मुख्यतः दो प्रकार की होती है:
1. बाहरी स्टाई (External Hordeolum): यह पलक के बाहरी किनारे पर, बरौनी की जड़ के पास बनती है। यह सबसे आम प्रकार है और दूर से ही एक लाल, मुँहासे जैसे उभार के रूप में दिखाई देती है। अक्सर इसके बीच में पीले रंग का मवाद (pus) दिखता है।
2. आंतरिक स्टाई (Internal Hordeolum): यह पलक के अंदरूनी हिस्से में, मीबोमियन ग्रंथि (Meibomian gland) में संक्रमण के कारण होती है। यह अधिक गहरी होती है और इसमें दर्द भी अपेक्षाकृत ज़्यादा होता है। पलक को उलटकर देखने पर ही यह स्पष्ट दिखती है।
स्टाई और चैलेज़ियन (Chalazion) में अंतर
अक्सर लोग स्टाई और चैलेज़ियन को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन दोनों अलग हैं।
- स्टाई संक्रमण के कारण होती है, शुरू से ही दर्दनाक होती है और जल्दी (कुछ दिनों में) उभरती है।
- चैलेज़ियन तैलीय ग्रंथि के बंद हो जाने से बनने वाली गाँठ है। यह आमतौर पर दर्द रहित होती है, धीरे-धीरे बढ़ती है और पलक में थोड़ी गहराई में महसूस होती है।
कभी-कभी एक स्टाई ठीक होने के बाद चैलेज़ियन में बदल सकती है।
स्टाई होने के प्रमुख कारण
स्टाई का मूल कारण बैक्टीरियल संक्रमण है, लेकिन कुछ स्थितियाँ इसका जोखिम बढ़ा देती हैं:
- गंदे हाथों से आँखें छूना या रगड़ना: यह सबसे आम कारण है। हाथों के बैक्टीरिया सीधे पलक तक पहुँच जाते हैं।
- ब्लेफ़ेराइटिस (Blepharitis): पलकों के किनारों की पुरानी सूजन, जिसमें पलकों पर रूसी जैसी पपड़ी जमती है।
- पुराना या दूषित मेकअप: काजल, आईलाइनर और मस्कारा का लंबे समय तक इस्तेमाल करना या दूसरों के साथ साझा करना।
- रात को मेकअप न हटाना: इससे ग्रंथियों के मुँह बंद हो सकते हैं।
- कॉन्टैक्ट लेंस की अस्वच्छता: बिना हाथ धोए लेंस लगाना या लेंस की सफ़ाई में लापरवाही।
- तैलीय त्वचा और रूसी: इनसे ग्रंथियों में तेल जमने की संभावना बढ़ती है।
- रोज़ेशिया (Rosacea) जैसी त्वचा संबंधी समस्याएँ।
- मधुमेह (Diabetes): मधुमेह के रोगियों में संक्रमण की संभावना अधिक रहती है और स्टाई बार-बार हो सकती है।
- तनाव, नींद की कमी और कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता।
- धूल, धुआँ और प्रदूषण: खासकर ऐसे वातावरण में जहाँ आँखों में धूल-मिट्टी ज़्यादा जाती हो।
- पहले कभी स्टाई हो चुकी हो: जिन्हें एक बार हुई है, उन्हें दोबारा होने की संभावना अधिक रहती है।
स्टाई के लक्षण
स्टाई के लक्षण आमतौर पर एक आँख में दिखाई देते हैं, हालाँकि कभी-कभी दोनों आँखों में या एक साथ कई स्टाई भी हो सकती हैं। प्रमुख लक्षण ये हैं:
- पलक के किनारे पर लाल, सूजा हुआ और दर्दनाक उभार
- पलक को छूने या झपकाने पर दर्द
- पलक में भारीपन और चुभन या किरकिरी महसूस होना
- आँख से पानी आना
- रोशनी के प्रति संवेदनशीलता
- उभार के बीच में पीला मवाद दिखाई देना
- पलक के आसपास की त्वचा में सूजन और कभी-कभी पूरी पलक का फूल जाना
- पलक के किनारे पर पपड़ी जमना
शुरुआत में पलक में हल्की खुजली या कसाव महसूस होता है, फिर एक-दो दिन में दर्द और लालिमा बढ़ती है। लगभग तीन से पाँच दिन में उभार का सिरा पीला होकर फूट सकता है और मवाद निकलने के बाद राहत मिलती है।
निदान कैसे होता है?
स्टाई का निदान आमतौर पर साधारण जाँच से ही हो जाता है। नेत्र रोग विशेषज्ञ पलक और आँख की सतह को देखकर पहचान कर लेते हैं। इसके लिए किसी विशेष टेस्ट की ज़रूरत प्रायः नहीं पड़ती। यदि स्टाई बार-बार हो रही हो, तो डॉक्टर मधुमेह या अन्य अंतर्निहित कारणों की जाँच करवा सकते हैं।
घरेलू उपचार और देखभाल
अधिकांश स्टाई में घर पर देखभाल ही पर्याप्त होती है।
1. गुनगुनी सिकाई (Warm Compress): यह सबसे प्रभावी उपाय है। एक साफ़ कपड़े को गुनगुने पानी में भिगोकर निचोड़ें और बंद पलक पर 10 से 15 मिनट तक रखें। इसे दिन में 3 से 4 बार दोहराएँ। गर्मी से जमा हुआ तेल पिघलता है, रुकावट खुलती है और मवाद अपने आप निकलने में मदद मिलती है। ध्यान रखें कि पानी बहुत गर्म न हो, वरना पलक की नाज़ुक त्वचा जल सकती है।
2. पलकों की हल्की सफ़ाई: सिकाई के बाद पलक के किनारों को बेबी शैम्पू की एक-दो बूँद मिले गुनगुने पानी में भिगोए साफ़ रुई के फाहे से धीरे-धीरे साफ़ करें।
3. हल्की मालिश: सिकाई के बाद उभार के आसपास साफ़ उँगली से बहुत हल्के हाथ से मालिश करने से मवाद निकलने में सहायता मिल सकती है। ज़ोर बिल्कुल न लगाएँ।
4. स्वच्छता बनाए रखें: आँखों को छूने से पहले और बाद में हाथ अच्छी तरह धोएँ। हर बार सिकाई के लिए साफ़ कपड़ा इस्तेमाल करें।
5. मेकअप और कॉन्टैक्ट लेंस बंद करें: स्टाई ठीक होने तक आँखों का मेकअप न करें और कॉन्टैक्ट लेंस की जगह चश्मे का उपयोग करें। संक्रमित अवस्था में इस्तेमाल किया गया मेकअप फेंक देना बेहतर है।
6. दर्द में राहत: ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से पैरासिटामोल जैसी दर्द निवारक दवा ली जा सकती है।
क्या न करें
- स्टाई को फोड़ने या निचोड़ने की कोशिश बिल्कुल न करें। इससे संक्रमण आसपास फैल सकता है और स्थिति गंभीर हो सकती है।
- गंदे हाथों या कपड़े से आँख न छुएँ।
- बिना सलाह के कोई भी आई ड्रॉप या मलहम न डालें।
- हल्दी, लहसुन, चाय की पत्ती या अन्य अप्रमाणित नुस्खे सीधे आँख में न लगाएँ। आँख बहुत संवेदनशील अंग है और ऐसे नुस्खे जलन या नया संक्रमण पैदा कर सकते हैं।
- तौलिया, रूमाल और मेकअप दूसरों के साथ साझा न करें।
चिकित्सकीय उपचार
यदि घरेलू देखभाल से कुछ दिनों में सुधार न हो, तो डॉक्टर निम्न उपचार दे सकते हैं:
- एंटीबायोटिक मलहम या ड्रॉप्स: बैक्टीरियल संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए।
- खाने वाली एंटीबायोटिक दवाएँ: यदि संक्रमण पलक के आसपास की त्वचा में फैल गया हो या स्टाई बहुत बड़ी हो।
- स्टेरॉयड इंजेक्शन: बड़ी और लगातार बनी रहने वाली सूजन में, कुछ मामलों में।
- चीरा लगाकर निकासी (Incision and Drainage): यदि स्टाई बड़ी हो, बहुत दर्द दे रही हो या दृष्टि में बाधा डाल रही हो और अपने आप न फूटे, तो नेत्र विशेषज्ञ स्थानीय सुन्न करने की दवा देकर एक छोटे से चीरे से मवाद निकाल देते हैं। यह प्रक्रिया सुरक्षित और तेज़ होती है।
डॉक्टर से कब मिलें?
निम्न स्थितियों में बिना देर किए नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें:
- स्टाई एक सप्ताह से अधिक समय में भी ठीक न हो या बढ़ती जाए
- सूजन पूरी पलक, गाल या आँख के आसपास फैल जाए
- दृष्टि धुंधली हो जाए या देखने में कठिनाई हो
- आँख में तेज़ दर्द हो या आँख का सफ़ेद हिस्सा बहुत लाल हो जाए
- बुखार आ जाए
- पलक से खून आए
- स्टाई बार-बार निकलती हो
- मधुमेह के रोगी में या छोटे बच्चे में स्टाई हो
जटिलताएँ
अधिकतर स्टाई गंभीर समस्या नहीं बनतीं, लेकिन लापरवाही से कुछ जटिलताएँ हो सकती हैं:
- चैलेज़ियन का बनना: जो महीनों तक रह सकता है और कभी-कभी छोटी सर्जरी की ज़रूरत पड़ती है।
- पलक की सेल्युलाइटिस (Preseptal Cellulitis): संक्रमण का पलक की त्वचा और आसपास के ऊतकों में फैल जाना।
- बार-बार स्टाई होना।
- पलक की बनावट में हल्का बदलाव, यदि बार-बार संक्रमण हो।
स्टाई से बचाव के उपाय
बचाव ही सबसे अच्छा उपचार है। इन आदतों को अपनाकर स्टाई का जोखिम काफ़ी कम किया जा सकता है:
- हाथ साफ़ रखें और आँखों को बार-बार न छुएँ या रगड़ें।
- रात को सोने से पहले मेकअप ज़रूर हटाएँ।
- आँखों के मेकअप का सामान समय-समय पर बदलें। मस्कारा और आईलाइनर को हर तीन से छह महीने में बदलना उचित है, और इन्हें किसी से साझा न करें।
- कॉन्टैक्ट लेंस की सफ़ाई का पूरा ध्यान रखें और निर्देशानुसार ही बदलें।
- पलकों की नियमित सफ़ाई करें, खासकर यदि आपको ब्लेफ़ेराइटिस या रूसी की समस्या है।
- साफ़ तौलिये और रूमाल का उपयोग करें।
- मधुमेह को नियंत्रण में रखें।
- संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन से रोग-प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत रखें।
- धूल-धुएँ से बचाव के लिए बाहर निकलते समय चश्मा पहनें।
- यदि आपको बार-बार स्टाई होती है, तो नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लेकर कारण का पता लगवाएँ।
बच्चों में स्टाई
बच्चे अक्सर गंदे हाथों से आँखें रगड़ते हैं, इसलिए उनमें स्टाई आम है। बच्चों में भी उपचार लगभग वही है: गुनगुनी सिकाई और स्वच्छता। बच्चे को उभार छूने या फोड़ने से रोकें। यदि सूजन ज़्यादा हो, बुखार आए या कुछ दिनों में आराम न मिले, तो बाल रोग या नेत्र विशेषज्ञ को दिखाएँ।
क्या स्टाई संक्रामक है?
स्टाई स्वयं बहुत अधिक संक्रामक नहीं मानी जाती, लेकिन इसके बैक्टीरिया तौलिये, तकिये के कवर या हाथों के ज़रिए दूसरों तक या दूसरी आँख तक पहुँच सकते हैं। इसलिए संक्रमित व्यक्ति को अपना तौलिया और रूमाल अलग रखना चाहिए और हाथ बार-बार धोने चाहिए।
निष्कर्ष
स्टाई या गुहेरी एक आम, कष्टदायक लेकिन आमतौर पर हानिरहित समस्या है। सही समय पर गुनगुनी सिकाई, स्वच्छता और धैर्य के साथ यह कुछ ही दिनों में ठीक हो जाती है। सबसे ज़रूरी बात यह है कि उसे फोड़ने या निचोड़ने की गलती न करें और घरेलू नुस्खे सीधे आँख में न आज़माएँ। यदि सूजन बढ़ रही हो, दृष्टि प्रभावित हो रही हो या स्टाई बार-बार निकल रही हो, तो नेत्र रोग विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। आँखें अनमोल हैं, इसलिए उनकी स्वच्छता और देखभाल में कभी लापरवाही न करें।
