रेट्रोफैरिंजियल एब्सेस (Retropharyngeal Abscess - गले के पीछे मवाद)
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रेट्रोफैरिंजियल एब्सेस (गले के पीछे मवाद): कारण, लक्षण, जाँच और इलाज

परिचय

गले में दर्द और निगलने में तकलीफ़ अक्सर सामान्य सर्दी-ज़ुकाम या टॉन्सिल के संक्रमण से होती है। लेकिन कभी-कभी यही तकलीफ़ एक गंभीर बीमारी का संकेत होती है, जिसे रेट्रोफैरिंजियल एब्सेस कहते हैं। इसमें गले की पिछली दीवार के पीछे मौजूद गहरे ऊतकों में मवाद (पस) भर जाता है। यह स्थिति छोटे बच्चों में अधिक देखी जाती है और समय पर इलाज न मिले तो जानलेवा हो सकती है, क्योंकि यह साँस की नली को दबा सकती है और संक्रमण छाती तक फैल सकता है।

इस लेख में हम इस बीमारी को आसान भाषा में समझेंगे: यह क्या है, क्यों होती है, कैसे पहचानें और इलाज क्या है।

रेट्रोफैरिंजियल स्पेस क्या है?

हमारे गले (ग्रसनी या फैरिंक्स) के पीछे और रीढ़ की हड्डी के आगे एक संकरी जगह होती है, जिसे रेट्रोफैरिंजियल स्पेस कहते हैं। इसमें ढीले ऊतक और लसीका ग्रंथियाँ (लिम्फ नोड्स) होती हैं। यह जगह खोपड़ी के आधार से नीचे छाती के मध्य भाग (मीडियास्टिनम) तक जाती है।

छोटे बच्चों में इस जगह की लिम्फ नोड्स अधिक विकसित होती हैं। नाक, गले और कान के संक्रमण का जीवाणु इन ग्रंथियों में पहुँचकर उन्हें संक्रमित कर देता है। ग्रंथियों में सूजन आती है, फिर वे पककर मवाद का रूप ले लेती हैं। यही रेट्रोफैरिंजियल एब्सेस है। लगभग 5-6 साल की उम्र के बाद ये ग्रंथियाँ धीरे-धीरे सिकुड़ने लगती हैं, इसलिए बड़े बच्चों और वयस्कों में यह कम होता है।

किन्हें अधिक खतरा होता है?

  • 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, खासकर 2 से 4 साल के
  • जिन्हें हाल में गले, नाक, साइनस या कान का संक्रमण हुआ हो
  • कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग, जैसे मधुमेह, एचआईवी या कैंसर के मरीज़
  • जिन्हें गले में चोट लगी हो, जैसे मछली की हड्डी, चिकन की हड्डी या नुकीली चीज़ चुभना
  • जिनके गले या भोजन-नली की जाँच (एंडोस्कोपी) या दंत प्रक्रिया हुई हो
  • नशीली दवाओं का इंजेक्शन लेने वाले वयस्क

मुख्य कारण

इस बीमारी में आमतौर पर एक से अधिक प्रकार के जीवाणु शामिल होते हैं:

  1. स्ट्रेप्टोकोकस (ग्रुप A बीटा-हीमोलिटिक)
  2. स्टेफिलोकोकस ऑरियस, जिसमें MRSA भी शामिल है, जो आजकल अधिक चिंता का विषय है
  3. एनारोबिक जीवाणु, जो बिना ऑक्सीजन के पनपते हैं

संक्रमण कैसे पहुँचता है?

  • ऊपरी श्वसन तंत्र का संक्रमण, जैसे टॉन्सिलाइटिस, ग्रसनीशोथ, साइनसाइटिस या ओटाइटिस मीडिया, जिससे जीवाणु लिम्फ नोड्स में पहुँच जाता है
  • गले के पिछले हिस्से में सीधी चोट या बाहरी वस्तु का चुभना
  • दाँतों का संक्रमण या दंत प्रक्रिया के बाद फैला संक्रमण
  • वयस्कों में कभी-कभी रीढ़ की हड्डी या आस-पास की संरचनाओं से संक्रमण का फैलाव

लक्षण

बीमारी अक्सर गले की सामान्य खराश या बुखार से शुरू होती है, इसलिए शुरुआत में इसे पहचानना कठिन हो सकता है। जैसे-जैसे मवाद बढ़ता है, लक्षण गंभीर होते जाते हैं।

बच्चों में:

  • तेज़ बुखार, जो कई दिनों तक बना रहे
  • निगलने में बहुत दर्द (ओडिनोफेजिया); बच्चा दूध या खाना लेने से मना कर दे
  • मुँह से लार टपकना, क्योंकि निगलने में तकलीफ़ होती है
  • गर्दन अकड़ जाना और गर्दन को एक तरफ़ टेढ़ा रखना (टॉर्टिकॉलिस)
  • गर्दन घुमाने या ऊपर देखने में दर्द
  • आवाज़ में बदलाव, जैसे मुँह में आलू रखकर बोलने जैसी आवाज़
  • साँस लेने में कठिनाई, साँस के साथ खर्राटे जैसी आवाज़ (स्ट्रिडोर)
  • चिड़चिड़ापन और सुस्ती
  • गर्दन में गाँठें या सूजन

वयस्कों में:

  • गले में तेज़ दर्द और निगलने में परेशानी
  • गर्दन में दर्द और अकड़न
  • बुखार और थकान
  • आवाज़ बैठना या बदल जाना
  • गंभीर स्थिति में साँस लेने में दिक्कत

तुरंत आपातकालीन सहायता कब लें?
यदि बच्चे को साँस लेने में कठिनाई हो, होंठ नीले पड़ रहे हों, लगातार लार टपक रही हो, गर्दन बिल्कुल न घूम रही हो या बच्चा बहुत सुस्त हो, तो देर न करें और तुरंत अस्पताल पहुँचें।

संभावित जटिलताएँ

इलाज में देरी होने पर मवाद फैल सकता है और कई गंभीर समस्याएँ पैदा हो सकती हैं:

  • साँस की नली में रुकावट, जो सबसे ख़तरनाक जटिलता है
  • मीडियास्टिनाइटिस, यानी छाती के बीच के हिस्से में संक्रमण
  • एब्सेस का फटना, जिससे मवाद फेफड़ों में जाकर एस्पिरेशन निमोनिया कर सकता है
  • सेप्सिस, यानी संक्रमण का खून में फैल जाना
  • गर्दन की बड़ी रक्त-वाहिकाओं में संक्रमण या रुकावट (जैसे जुगुलर वेन थ्रोम्बोसिस)
  • कैरोटिड धमनी को नुकसान (दुर्लभ)
  • ऑस्टियोमाइलाइटिस, यानी रीढ़ की हड्डी में संक्रमण

निदान (जाँच)

डॉक्टर सबसे पहले बच्चे या मरीज़ के लक्षणों का इतिहास लेते हैं और शारीरिक जाँच करते हैं। गले की जाँच में पिछली दीवार का उभरा हुआ या सूजा हुआ हिस्सा दिख सकता है। बहुत छोटे बच्चों में गले के भीतर सीधे जाँच करना कठिन और जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि इससे बच्चा घबरा सकता है और साँस पर असर पड़ सकता है।

सामान्य जाँचें:

  • गर्दन का लेटरल एक्स-रे: इसमें गले के पीछे के नरम ऊतक की मोटाई बढ़ी हुई दिखती है। यह शुरुआती और तेज़ जाँच है।
  • सीटी स्कैन (गर्दन, कंट्रास्ट सहित): यह सबसे भरोसेमंद जाँच है। इससे पता चलता है कि मवाद इकट्ठा हो चुका है (एब्सेस) या सिर्फ़ सूजन (सेल्युलाइटिस) है, और संक्रमण कितना फैला है।
  • खून की जाँच: इसमें सफ़ेद रक्त कोशिकाओं (WBC) की संख्या और CRP, ESR जैसे सूजन के मार्कर देखे जाते हैं।
  • कल्चर टेस्ट: मवाद निकलने पर उसे जाँच के लिए भेजा जाता है ताकि जीवाणु की पहचान हो और सही एंटीबायोटिक चुनी जा सके।

इलाज

इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि संक्रमण कितना गंभीर है और क्या साँस की नली प्रभावित है।

1. साँस की सुरक्षा (एयरवे मैनेजमेंट)
सबसे पहली प्राथमिकता साँस को सुरक्षित रखना है। कठिन स्थिति में मरीज़ को ऑक्सीजन दी जाती है या साँस की नली में ट्यूब डालनी पड़ सकती है। इसे अनुभवी विशेषज्ञ, जैसे ईएनटी सर्जन और एनेस्थेटिस्ट, करते हैं।

2. इंट्रावीनस (नस से) एंटीबायोटिक्स
मरीज़ को अस्पताल में भर्ती करके नस के ज़रिये एंटीबायोटिक दी जाती है। आमतौर पर ऐसी दवाएँ चुनी जाती हैं जो स्ट्रेप्टोकोकस, स्टैफिलोकोकस और एनारोबिक जीवाणुओं पर असर करें, जैसे क्लिंडामाइसिन या एम्पिसिलिन-सल्बैक्टम। MRSA की आशंका हो तो उसके अनुसार दवा बदली जाती है। कल्चर रिपोर्ट आने पर दवा में ज़रूरी बदलाव किया जाता है।

3. सर्जिकल ड्रेनेज (मवाद निकालना)

  • यदि एब्सेस बड़ा है, साँस पर असर डाल रहा है या केवल एंटीबायोटिक से 24 से 48 घंटे में सुधार नहीं होता, तो मवाद निकालना ज़रूरी होता है।
  • यह आमतौर पर मुँह के भीतर से चीरा लगाकर या सूई से खींचकर किया जाता है, अधिकतर सामान्य एनेस्थीसिया में।
  • कुछ मामलों में, जब संक्रमण गहरा या गर्दन के बाहर तक फैला हो, तो बाहर से (गर्दन में चीरा लगाकर) भी ड्रेनेज करना पड़ सकता है।

4. सहायक इलाज

  • नस से तरल पदार्थ (आईवी फ़्लूइड), क्योंकि निगलने में दिक्कत के कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है
  • बुखार और दर्द के लिए पैरासिटामोल या डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवाएँ
  • कभी-कभी सूजन कम करने के लिए स्टेरॉइड, डॉक्टर की सलाह पर

छोटे और शुरुआती सेल्युलाइटिस के मामलों में, जहाँ मवाद इकट्ठा न हुआ हो, अकेले एंटीबायोटिक से भी ठीक होना संभव है, पर निगरानी अस्पताल में ही होनी चाहिए।

ठीक होने में कितना समय लगता है?

सही और समय पर इलाज मिलने पर अधिकांश मरीज़ कुछ दिनों में बेहतर होने लगते हैं। बुखार उतरने और खाना-पीना शुरू होने के बाद आमतौर पर नस की एंटीबायोटिक से मुँह की एंटीबायोटिक पर लाया जाता है। कुल इलाज की अवधि आमतौर पर 10 से 14 दिन होती है, जिसे डॉक्टर मरीज़ की स्थिति देखकर तय करते हैं। दवा का कोर्स बीच में न छोड़ें, वरना संक्रमण दोबारा लौट सकता है।

रोकथाम के उपाय

इस बीमारी से पूरी तरह बचाव संभव नहीं है, लेकिन जोखिम कम किया जा सकता है:

  • गले, नाक और कान के संक्रमण का समय पर और पूरा इलाज कराएँ
  • बच्चों में गले की खराश और बुखार को हल्के में न लें, खासकर यदि 2-3 दिन में सुधार न हो
  • हाथ धोने की आदत डालें और संक्रमित लोगों से दूरी रखें
  • बच्चों को खाते समय या खेलते समय मुँह में नुकीली चीज़ (लकड़ी की सींक, ब्रश, खिलौना) लेकर दौड़ने से रोकें
  • मछली या मांस खाते समय हड्डी के प्रति सावधानी रखें
  • दाँतों और मुँह की सफ़ाई का ध्यान रखें और दंत संक्रमण का इलाज कराएँ
  • बच्चों का टीकाकरण समय पर पूरा कराएँ, जिससे कुछ गंभीर संक्रमणों का जोखिम घटता है
  • मधुमेह जैसी बीमारियों को नियंत्रित रखें

घर पर ध्यान देने योग्य बातें

रेट्रोफैरिंजियल एब्सेस का इलाज घर पर करना सुरक्षित नहीं है। ऐसे में गरारे, घरेलू नुस्खे या बिना डॉक्टर की सलाह की एंटीबायोटिक से समय बर्बाद होता है और स्थिति बिगड़ सकती है। यदि बच्चे में कई दिनों तक बुखार के साथ गर्दन में अकड़न, लार टपकना या निगलने में बहुत दर्द हो, तो तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ या बाल रोग विशेषज्ञ से मिलें।

निष्कर्ष

रेट्रोफैरिंजियल एब्सेस एक गंभीर लेकिन इलाज योग्य स्थिति है। सबसे ज़रूरी है इसे समय पर पहचानना। लगातार बुखार, निगलने में तकलीफ़, गर्दन की अकड़न और साँस में दिक्कत जैसे लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें। सही समय पर जाँच, नस से एंटीबायोटिक और ज़रूरत पड़ने पर मवाद निकालने की प्रक्रिया से अधिकांश मरीज़ पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं। सतर्कता और त्वरित चिकित्सा सहायता ही इस बीमारी से बचाव की कुंजी है।

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