पेरिटॉन्सिलर एब्सेस (क्विन्सी): गले का खतरनाक फोड़ा, कारण, लक्षण और इलाज
परिचय
गले में दर्द और खराश लगभग हर व्यक्ति को कभी न कभी होती है। ज़्यादातर मामलों में यह वायरल संक्रमण या साधारण टॉन्सिलाइटिस होता है और कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। लेकिन कभी-कभी टॉन्सिल का संक्रमण बढ़कर उसके आसपास मवाद (पस) का बड़ा जमाव बना देता है। इसी स्थिति को पेरिटॉन्सिलर एब्सेस कहते हैं। आम भाषा में इसे क्विन्सी भी कहा जाता है।
यह गले और सिर-गर्दन के गहरे हिस्सों में होने वाला सबसे आम संक्रमण है। समय पर इलाज न मिले तो यह सांस की नली को दबा सकता है या संक्रमण को गर्दन और छाती तक फैला सकता है। इसलिए इसके लक्षणों को पहचानना और तुरंत डॉक्टर से मिलना बहुत ज़रूरी है।
पेरिटॉन्सिलर एब्सेस क्या है?
“पेरी” का अर्थ है आसपास और “टॉन्सिलर” का अर्थ है टॉन्सिल से संबंधित। हमारे गले के दोनों ओर टॉन्सिल होते हैं, जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक व्यवस्था का हिस्सा हैं। टॉन्सिल के ऊपरी भाग के पास उसकी बाहरी परत (कैप्सूल) और गले की मांसपेशी के बीच एक हिस्सा होता है। जब संक्रमण टॉन्सिल से निकलकर इस हिस्से में पहुँचता है, तो वहाँ मवाद भर जाता है और फोड़ा बन जाता है।
यह आमतौर पर एक ही तरफ होता है और किशोरों तथा 15 से 35 वर्ष के युवाओं में ज़्यादा दिखता है। बच्चों और बुज़ुर्गों में यह अपेक्षाकृत कम होता है।
कारण
इस फोड़े का मुख्य कारण जीवाणु (बैक्टीरिया) का संक्रमण है। इसके सामान्य कारण ये हैं:
- अधूरा इलाज हुआ टॉन्सिलाइटिस: गले के संक्रमण में एंटीबायोटिक का कोर्स बीच में छोड़ देने से बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म नहीं होते और गहराई में फैल जाते हैं।
- बैक्टीरिया: सबसे आम कारण ग्रुप A स्ट्रेप्टोकोकस है। इसके अलावा स्टैफिलोकोकस ऑरियस और मुँह में रहने वाले एनारोबिक बैक्टीरिया भी अक्सर शामिल होते हैं। कई बार एक से अधिक प्रकार के बैक्टीरिया मिलकर संक्रमण करते हैं।
- बार-बार होने वाला टॉन्सिलाइटिस: जिन लोगों को बार-बार टॉन्सिल का संक्रमण होता है, उनमें जोखिम अधिक रहता है।
- मुँह और दाँतों की खराब सफाई: दाँतों और मसूड़ों के संक्रमण के बैक्टीरिया गले तक पहुँच सकते हैं।
- धूम्रपान: तंबाकू और सिगरेट का सेवन गले की सुरक्षात्मक परत को कमज़ोर करता है।
- कमज़ोर प्रतिरक्षा: डायबिटीज़ या अन्य कारणों से रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
लक्षण
शुरुआत सामान्य टॉन्सिलाइटिस जैसी लगती है, लेकिन 2 से 5 दिनों में लक्षण बदलने लगते हैं। इन संकेतों पर ध्यान दें:
- गले में एक तरफ तेज़ दर्द: दर्द इतना बढ़ सकता है कि थूक निगलना भी मुश्किल हो जाए।
- निगलने में तकलीफ: खाना-पीना कठिन हो जाता है, जिससे कमज़ोरी और पानी की कमी हो सकती है।
- मुँह पूरा न खुल पाना (ट्रिज़्मस): जबड़े की मांसपेशियों में ऐंठन के कारण मुँह खोलना कठिन हो जाता है। यह इस बीमारी का खास लक्षण है।
- आवाज़ में बदलाव: आवाज़ दबी हुई और भारी हो जाती है, मानो मुँह में गरम आलू रखकर बोल रहे हों। इसे “हॉट पोटैटो वॉइस” कहते हैं।
- तेज़ बुखार और कंपकंपी: अक्सर 101°F या उससे अधिक बुखार रहता है।
- कान में दर्द: गले की नसें कान से जुड़ी होती हैं, इसलिए प्रभावित तरफ कान में दर्द हो सकता है।
- गर्दन में सूजन और दर्द: गर्दन की गाँठें (लिम्फ नोड्स) सूज जाती हैं और छूने पर दुखती हैं। गर्दन घुमाना भी कठिन हो सकता है।
- मुँह से बदबू और लार टपकना: निगलने में दर्द के कारण लार मुँह में जमा होकर बाहर टपकने लगती है।
जाँच कैसे होती है?
निदान अधिकतर डॉक्टर की जाँच से ही हो जाता है। ईएनटी (कान-नाक-गला) विशेषज्ञ गले की जाँच में ये चीज़ें देखते हैं:
- प्रभावित तरफ का टॉन्सिल और तालु (पैलेट) लाल और सूजा हुआ दिखता है।
- टॉन्सिल अंदर की ओर और नीचे की तरफ धकेला हुआ लगता है।
- छोटी जीभ (यूवुला) सूजन के कारण दूसरी तरफ खिसकी हुई दिखती है।
ज़रूरत पड़ने पर ये जाँचें कराई जा सकती हैं:
- खून की जाँच: संक्रमण की गंभीरता समझने के लिए।
- गले का कल्चर: बैक्टीरिया की पहचान और सही एंटीबायोटिक चुनने के लिए।
- अल्ट्रासाउंड: मुँह के भीतर से किया जाने वाला अल्ट्रासाउंड मवाद की पुष्टि में मदद करता है।
- सीटी स्कैन: जब निदान अस्पष्ट हो या संक्रमण गर्दन के गहरे हिस्सों में फैलने की आशंका हो।
इलाज
इलाज का मुख्य सिद्धांत है मवाद निकालना और संक्रमण को खत्म करना। केवल दवाओं से ठीक होना कठिन होता है, क्योंकि फोड़े के भीतर तक दवा पूरी तरह नहीं पहुँच पाती।
1. मवाद निकालना (ड्रेनेज)
- नीडल एस्पिरेशन: स्थानीय संवेदनाहारी (लोकल एनेस्थीसिया) देकर सिरिंज से मवाद खींच लिया जाता है। यह सरल और अक्सर पर्याप्त तरीका है।
- चीरा लगाकर निकासी (इंसिज़न एंड ड्रेनेज): फोड़े में छोटा चीरा लगाकर मवाद बाहर निकाला जाता है।
- क्विन्सी टॉन्सिलेक्टॉमी: गंभीर या बार-बार होने वाले मामलों में फोड़े के साथ टॉन्सिल भी निकाल दिया जाता है। यह आमतौर पर सामान्य एनेस्थीसिया में होता है।
2. एंटीबायोटिक दवाएँ
डॉक्टर पेनिसिलिन, एमोक्सिसिलिन-क्लेवुलैनिक एसिड, क्लिंडामाइसिन या मेट्रोनिडाज़ोल जैसी दवाएँ देते हैं। ज़्यादा तकलीफ में शुरुआत नस के ज़रिए (IV) की जाती है और सुधार होने पर खाने वाली दवाएँ दी जाती हैं। पूरा कोर्स लेना बहुत ज़रूरी है, चाहे आराम मिल जाए।
3. सहायक इलाज
- दर्द और बुखार के लिए पैरासिटामोल या डॉक्टर द्वारा बताई गई दर्द-निवारक दवाएँ।
- सूजन कम करने के लिए कभी-कभी स्टेरॉइड।
- निगलने में कठिनाई होने पर IV तरल पदार्थ देकर पानी की कमी दूर की जाती है।
4. बाद में टॉन्सिल निकलवाना
जिन मरीजों को बार-बार टॉन्सिलाइटिस या क्विन्सी हुआ हो, उन्हें आमतौर पर संक्रमण ठीक होने के 4 से 6 सप्ताह बाद टॉन्सिल निकलवाने की सलाह दी जाती है। इससे दोबारा फोड़ा बनने का जोखिम बहुत घट जाता है।
घर पर देखभाल
डॉक्टर के इलाज के साथ ये उपाय राहत दे सकते हैं:
- गुनगुने नमक वाले पानी से दिन में कई बार गरारे करें।
- खूब पानी और तरल पदार्थ पिएँ। सूप, दाल का पानी और नारियल पानी अच्छे विकल्प हैं।
- नरम और ठंडा भोजन जैसे दही, खिचड़ी या दलिया लें, जिसे निगलना आसान हो।
- पर्याप्त आराम करें और बोलना कम रखें।
- धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूर रहें।
ध्यान रहे: घरेलू उपाय केवल सहायक हैं, इलाज का विकल्प नहीं। मवाद बन जाने पर उसे निकाले बिना ठीक होना मुश्किल है।
संभावित जटिलताएँ
समय पर इलाज न होने पर ये गंभीर समस्याएँ हो सकती हैं:
- सांस लेने में रुकावट: सूजन से वायुमार्ग सिकुड़ सकता है। यह सबसे खतरनाक स्थिति है।
- संक्रमण का फैलना: गर्दन के गहरे हिस्सों (पैराफैरिंजियल और रेट्रोफैरिंजियल स्पेस) में या छाती (मीडियास्टिनम) तक।
- लुडविग एंजाइना और लेमियर सिंड्रोम: ये गर्दन और रक्त-वाहिकाओं के दुर्लभ लेकिन जानलेवा संक्रमण हैं।
- फोड़ा फटना: इससे मवाद सांस की नली में जाकर निमोनिया कर सकता है।
- सेप्सिस: संक्रमण खून में फैलकर पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है।
- पानी की कमी: निगल न पाने से गंभीर कमज़ोरी हो सकती है।
डॉक्टर के पास कब जाएँ?
तुरंत अस्पताल जाएँ, यदि:
- गले में एक तरफ बहुत तेज़ दर्द हो और मुँह खोलना कठिन हो।
- लार भी निगल न पा रहे हों या लार टपक रही हो।
- आवाज़ अचानक दबी और भारी हो गई हो।
- सांस लेने में तकलीफ, घरघराहट या साँस फूल रही हो।
- तेज़ बुखार के साथ गर्दन में सूजन हो।
सांस की तकलीफ आपातकालीन स्थिति है और इसमें एक पल की देरी भी नहीं करनी चाहिए।
बचाव के उपाय
- गले के संक्रमण या टॉन्सिलाइटिस का पूरा और समय पर इलाज कराएँ। एंटीबायोटिक का कोर्स बीच में न छोड़ें।
- दिन में दो बार ब्रश करें और नियमित रूप से दाँतों की जाँच कराएँ।
- धूम्रपान और तंबाकू छोड़ें।
- डायबिटीज़ जैसी बीमारियों को नियंत्रण में रखें।
- संक्रमित व्यक्ति के साथ बर्तन, गिलास और तौलिया साझा न करें।
- बार-बार टॉन्सिलाइटिस होता हो तो ईएनटी विशेषज्ञ से टॉन्सिल निकलवाने के बारे में सलाह लें।
निष्कर्ष
पेरिटॉन्सिलर एब्सेस साधारण गले की खराश से कहीं अधिक गंभीर स्थिति है, जिसे नज़रअंदाज़ करना ठीक नहीं। गले में एक तरफ तेज़ दर्द, मुँह न खुल पाना, दबी आवाज़ और तेज़ बुखार इसके प्रमुख संकेत हैं। अच्छी बात यह है कि समय पर पहचान और सही इलाज मिलने पर यह पूरी तरह ठीक हो सकता है, और अधिकांश मरीज़ कुछ ही दिनों में स्वस्थ हो जाते हैं।
गले के संक्रमण को हल्के में न लें, पूरा इलाज कराएँ और लक्षण बिगड़ने पर तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से मिलें। सावधानी और समय पर इलाज ही इस बीमारी से बचाव की कुंजी है।
