प्लेसेंटा प्रीविया (गर्भनाल का नीचे खिसकना): कारण, लक्षण, जोखिम और इलाज
परिचय
गर्भावस्था का हर चरण माँ और शिशु दोनों के लिए खास होता है। इस दौरान कुछ स्थितियाँ ऐसी भी बन सकती हैं जिनमें अतिरिक्त सावधानी और नियमित चिकित्सकीय निगरानी ज़रूरी हो जाती है। प्लेसेंटा प्रीविया ऐसी ही एक स्थिति है। आम भाषा में इसे “गर्भनाल का नीचे खिसकना” या “प्लेसेंटा का नीचे होना” कहते हैं। सही समय पर पहचान और उचित देखभाल से ज़्यादातर महिलाएँ स्वस्थ शिशु को जन्म देती हैं। फिर भी इसे हल्के में लेना ठीक नहीं, क्योंकि इसमें अचानक भारी रक्तस्राव का खतरा रहता है।
प्लेसेंटा प्रीविया क्या है?
प्लेसेंटा (अपरा या गर्भनाल) गर्भाशय के भीतर बनने वाला एक विशेष अंग है। यह माँ के रक्त से शिशु तक ऑक्सीजन और पोषण पहुँचाता है और शिशु का अपशिष्ट बाहर निकालता है। सामान्यतः यह गर्भाशय के ऊपरी भाग या पिछली या अगली दीवार से जुड़ा होता है।
प्लेसेंटा प्रीविया में प्लेसेंटा गर्भाशय के निचले हिस्से में जुड़ जाता है और गर्भाशय-ग्रीवा (सर्विक्स) के मुँह को आंशिक या पूरी तरह ढक लेता है। सर्विक्स वह रास्ता है जिससे सामान्य प्रसव में शिशु बाहर आता है। यह रास्ता बंद होने पर सामान्य प्रसव जोखिम भरा हो जाता है। लगभग 200 में से 1 गर्भावस्था में यह स्थिति देखी जाती है।
प्लेसेंटा प्रीविया के प्रकार
सर्विक्स के मुँह को ढकने की मात्रा के आधार पर इसे कई प्रकारों में बाँटा जाता है:
- संपूर्ण (कम्प्लीट) प्रीविया: प्लेसेंटा सर्विक्स के मुँह को पूरी तरह ढक लेता है। यह सबसे गंभीर प्रकार है।
- आंशिक (पार्शियल) प्रीविया: प्लेसेंटा मुँह के केवल एक हिस्से को ढकता है।
- सीमांत (मार्जिनल) प्रीविया: प्लेसेंटा का किनारा सर्विक्स के मुँह के बिल्कुल किनारे तक पहुँचता है, पर उसे ढकता नहीं।
- निम्न-स्थित (लो-लाइंग) प्लेसेंटा: प्लेसेंटा नीचे होता है और सर्विक्स के मुँह के बहुत पास (लगभग 2 सेंटीमीटर के भीतर) रहता है, पर उसे नहीं ढकता।
कारण और जोखिम कारक
इसका सटीक कारण हमेशा ज्ञात नहीं होता, लेकिन कुछ कारक इसकी संभावना बढ़ा देते हैं:
- पहले सिज़ेरियन (सी-सेक्शन) या गर्भाशय की सर्जरी: गर्भाशय पर बने निशान प्लेसेंटा के सही जगह जुड़ने में बाधा बन सकते हैं। सिज़ेरियन की संख्या बढ़ने पर जोखिम भी बढ़ता है।
- पहले प्लेसेंटा प्रीविया होना: पिछली गर्भावस्था में यह स्थिति रही हो तो दोबारा होने की संभावना अधिक रहती है।
- एक से अधिक शिशु (जुड़वाँ या तीन शिशु): प्लेसेंटा बड़ा होता है और गर्भाशय में अधिक जगह घेरता है।
- उम्र 35 वर्ष से अधिक होना।
- धूम्रपान या तंबाकू का सेवन: इससे प्लेसेंटा की रक्त-आपूर्ति प्रभावित होती है।
- कई बार गर्भधारण: जिन महिलाओं के कई प्रसव हो चुके हों, उनमें जोखिम कुछ अधिक होता है।
- गर्भाशय की पिछली सर्जरी या प्रक्रियाएँ, जैसे फाइब्रॉइड हटाना या बार-बार क्यूरेटेज (D&C)।
- आईवीएफ (IVF) जैसी सहायक प्रजनन तकनीकें।
लक्षण: किन संकेतों पर ध्यान दें?
इसका सबसे प्रमुख लक्षण है बिना दर्द के योनि से चमकीला लाल रक्तस्राव, जो आमतौर पर गर्भावस्था के दूसरे या तीसरे तिमाही में, अक्सर 28 सप्ताह के बाद, अचानक शुरू होता है। रक्तस्राव कभी हल्का और कभी काफ़ी अधिक हो सकता है। यह अपने आप रुक भी सकता है, पर कुछ दिनों या हफ्तों बाद दोबारा आ सकता है।
अन्य संकेत:
- कुछ महिलाओं को हल्के संकुचन या पेट में ऐंठन हो सकती है।
- शिशु की स्थिति असामान्य हो सकती है, जैसे उल्टा (ब्रीच) या आड़ा (ट्रांसवर्स) लेटा होना।
ध्यान रहे, कई महिलाओं में कोई लक्षण नहीं होता और यह स्थिति नियमित अल्ट्रासाउंड में ही पकड़ में आती है। गर्भावस्था में किसी भी प्रकार का योनि रक्तस्राव सामान्य नहीं माना जाना चाहिए।
संभावित जटिलताएँ
माँ के लिए:
- भारी रक्तस्राव: यह सबसे बड़ा खतरा है। इससे रक्त चढ़ाने (ब्लड ट्रांसफ्यूज़न) की ज़रूरत पड़ सकती है और गंभीर मामलों में जान को ख़तरा हो सकता है।
- प्लेसेंटा एक्रीटा स्पेक्ट्रम: इसमें प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार में सामान्य से अधिक गहराई तक जुड़ जाता है, जिससे प्रसव के बाद उसका अलग होना कठिन हो जाता है। इसमें कभी-कभी गर्भाशय निकालने (हिस्टेरेक्टॉमी) की नौबत आ सकती है।
- प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव (पोस्टपार्टम हैमरेज)।
- एनीमिया (खून की कमी)।
शिशु के लिए:
- समय से पहले जन्म: अचानक रक्तस्राव के कारण कभी-कभी समय से पहले प्रसव कराना पड़ता है, जिससे शिशु को साँस और अन्य समस्याओं का ख़तरा रहता है।
- गर्भ में कम वृद्धि और जन्म के समय कम वज़न।
- वासा प्रीविया: शिशु की कुछ रक्त-वाहिकाएँ सर्विक्स के मुँह पर से गुज़र सकती हैं, जो एक दुर्लभ पर गंभीर स्थिति है।
निदान कैसे होता है?
प्लेसेंटा की स्थिति का पता मुख्यतः अल्ट्रासाउंड से चलता है। गर्भावस्था के 18 से 22 सप्ताह के बीच होने वाले विस्तृत स्कैन (एनॉमली स्कैन) में आमतौर पर प्लेसेंटा की जगह देखी जाती है। यदि वह नीचे दिखे, तो ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड कराया जाता है, जो अधिक स्पष्ट तस्वीर देता है और सुरक्षित माना जाता है। ज़रूरत पड़ने पर प्लेसेंटा एक्रीटा की आशंका होने पर एमआरआई की सलाह भी दी जा सकती है।
एक राहत की बात यह है कि गर्भावस्था के शुरुआती या मध्य चरण में प्लेसेंटा नीचे दिखे, तो अक्सर चिंता की ज़रूरत नहीं होती। जैसे-जैसे गर्भाशय बढ़ता और ऊपर खिंचता है, प्लेसेंटा भी ऊपर की ओर खिसक जाता है। इसीलिए डॉक्टर बाद के हफ्तों में दोबारा स्कैन करके स्थिति जाँचते हैं। विशेषकर जब प्लेसेंटा सर्विक्स के मुँह को ढक न रहा हो, तब ज़्यादातर मामलों में वह अपने आप सही स्थिति में आ जाता है।
उपचार और प्रबंधन
इस स्थिति का कोई ऐसा इलाज नहीं है जो प्लेसेंटा को सीधे ऊपर खिसका दे। प्रबंधन का उद्देश्य रक्तस्राव से बचाव और सुरक्षित प्रसव है। यह रक्तस्राव की स्थिति, गर्भावस्था की अवधि और माँ व शिशु के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।
यदि रक्तस्राव नहीं हो रहा:
- डॉक्टर नियमित जाँच और समय-समय पर अल्ट्रासाउंड कराते हैं।
- पेल्विक रेस्ट की सलाह दी जाती है, यानी शारीरिक संबंध से परहेज़, योनि में कुछ भी न डालना, भारी वज़न उठाने और कठिन शारीरिक श्रम से बचना।
- एनीमिया हो तो आयरन और अन्य पोषक तत्व दिए जाते हैं।
यदि रक्तस्राव हो:
- तुरंत अस्पताल पहुँचना चाहिए। रक्तस्राव कम होने पर भी अस्पताल में भर्ती रखकर निगरानी की जा सकती है।
- ज़रूरत हो तो रक्त चढ़ाया जाता है।
- यदि प्रसव समय से पहले (आमतौर पर 34 सप्ताह से पहले) होने की आशंका हो, तो शिशु के फेफड़ों के विकास के लिए डॉक्टर स्टेरॉइड इंजेक्शन दे सकते हैं।
- यदि माँ का रक्त समूह Rh-नेगेटिव हो, तो आवश्यकतानुसार एंटी-डी इम्यूनोग्लोबुलिन दिया जाता है।
- रक्तस्राव अत्यधिक या अनियंत्रित हो, तो गर्भावस्था की अवधि चाहे जो हो, माँ की जान बचाने के लिए तत्काल सिज़ेरियन करना पड़ सकता है।
प्रसव कैसे होगा?
जब प्लेसेंटा सर्विक्स के मुँह को ढके हुए हो, तब सामान्य प्रसव सुरक्षित नहीं होता, क्योंकि शिशु के बाहर आने से पहले ही प्लेसेंटा बाहर निकलने की कोशिश करेगा और भयंकर रक्तस्राव हो सकता है। ऐसे मामलों में योजनाबद्ध सिज़ेरियन डिलीवरी ही उचित मानी जाती है। जिन मामलों में रक्तस्राव का इतिहास न हो, उनमें प्रायः 36 से 37 सप्ताह के बीच ऑपरेशन की योजना बनाई जाती है। एक्रीटा की आशंका हो तो समय और पहले तय किया जा सकता है, और ऑपरेशन ऐसे अस्पताल में कराना बेहतर होता है जहाँ रक्त बैंक, अनुभवी सर्जन और नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) उपलब्ध हो।
यदि प्लेसेंटा केवल निम्न-स्थित हो और सर्विक्स के मुँह से पर्याप्त दूरी पर हो, तो कुछ मामलों में डॉक्टर के निर्णय पर सामान्य प्रसव का प्रयास संभव हो सकता है।
बचाव और सावधानियाँ
हालाँकि इसे पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, पर जोखिम कम करने के कुछ तरीके हैं:
- धूम्रपान और तंबाकू पूरी तरह छोड़ दें। यह जोखिम घटाने का सबसे सीधा उपाय है।
- अनावश्यक सिज़ेरियन से बचें। जब तक चिकित्सकीय कारण न हो, सर्जरी का निर्णय सोच-समझकर लें।
- नियमित प्रसवपूर्व जाँच कराएँ और सभी अल्ट्रासाउंड समय पर करवाएँ।
- गर्भावस्था में आयरन और संतुलित आहार लें ताकि रक्तस्राव की स्थिति में शरीर कमज़ोर न पड़े।
- डॉक्टर ने जो गतिविधि-संबंधी पाबंदियाँ बताई हों, उनका पालन करें।
कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ?
निम्न स्थितियों में देरी न करें और नज़दीकी अस्पताल पहुँचें:
- गर्भावस्था में योनि से किसी भी मात्रा में रक्तस्राव, चाहे दर्द हो या न हो
- पेट में तेज़ दर्द या बार-बार संकुचन
- चक्कर आना, धड़कन तेज़ होना या बेहोशी जैसा लगना
- शिशु की हलचल में अचानक कमी
यदि आपको पहले से प्लेसेंटा प्रीविया बताया गया है, तो अपना अस्पताल पहले से तय रखें, ज़रूरी कागज़ात और बैग तैयार रखें, और रात में भी अस्पताल तक पहुँचने का साधन सुनिश्चित रखें। अकेले यात्रा न करें।
निष्कर्ष
प्लेसेंटा प्रीविया निश्चित रूप से एक गंभीर स्थिति है, पर यह डरने की नहीं, सतर्क रहने की बात है। आज की आधुनिक चिकित्सा में नियमित अल्ट्रासाउंड, समय पर निदान, रक्त की उपलब्धता और योजनाबद्ध सिज़ेरियन के कारण अधिकांश महिलाएँ सुरक्षित रूप से स्वस्थ शिशु को जन्म देती हैं। सबसे ज़रूरी है डॉक्टर की सलाह का पालन करना, चेतावनी के संकेतों को पहचानना और आपात स्थिति में बिना देरी अस्पताल पहुँचना। सही जानकारी और समय पर उठाया गया क़दम माँ और शिशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
