फैरिंजाइटिस (Pharyngitis): गले की खराश और सूजन के कारण, लक्षण और इलाज
परिचय
क्या आपको कभी कुछ निगलते समय गले में चुभन या जलन महसूस हुई है? क्या सुबह उठते ही गला सूखा और दर्द भरा लगा है? ऐसा होने पर आप शायद फैरिंजाइटिस से जूझ रहे हों। आम भाषा में इसे गले की खराश या गले का संक्रमण कहा जाता है।
फैरिंजाइटिस गले के पिछले हिस्से, यानी “ग्रसनी” (Pharynx) की सूजन है। ग्रसनी एक नली जैसी संरचना है जो मुँह और नाक के पीछे से शुरू होकर भोजन नली और श्वास नली तक जाती है। जब इस हिस्से की श्लेष्मा झिल्ली में सूजन आ जाती है, तो उसे फैरिंजाइटिस कहते हैं। यह दुनिया भर में डॉक्टर के पास जाने के सबसे आम कारणों में से एक है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, किसी को भी हो सकता है। मौसम बदलने पर, खासकर सर्दी और बरसात में, इसके मामले बढ़ जाते हैं।
फैरिंजाइटिस के प्रकार
1. तीव्र फैरिंजाइटिस (Acute Pharyngitis): यह अचानक शुरू होता है और आमतौर पर 3 से 7 दिनों में ठीक हो जाता है। यह सबसे आम प्रकार है।
2. दीर्घकालिक या क्रॉनिक फैरिंजाइटिस (Chronic Pharyngitis): इसमें गले की परेशानी हफ्तों या महीनों तक बनी रहती है। धूम्रपान, प्रदूषण या बार-बार होने वाले साइनस संक्रमण इसके पीछे हो सकते हैं।
कारण के आधार पर इसे वायरल, बैक्टीरियल और एलर्जिक फैरिंजाइटिस में भी बाँटा जाता है।
फैरिंजाइटिस के प्रमुख कारण
1. वायरल संक्रमण
लगभग 70 से 80 प्रतिशत मामलों में कारण वायरस होते हैं। सामान्य सर्दी-जुकाम के वायरस (राइनोवायरस, कोरोनावायरस), इन्फ्लूएंजा (फ्लू) के वायरस, एडिनोवायरस और एपस्टीन-बार वायरस (जो मोनोन्यूक्लिओसिस का कारण बनता है) इनमें शामिल हैं। खसरा और छोटी माता जैसी बीमारियों में भी गले में सूजन हो सकती है।
2. बैक्टीरियल संक्रमण
सबसे प्रमुख जीवाणु “ग्रुप A स्ट्रेप्टोकोकस” है, जो “स्ट्रेप थ्रोट” का कारण बनता है। यह 5 से 15 वर्ष के बच्चों में ज्यादा देखा जाता है। इसमें दर्द तेज होता है और बुखार भी तेज चढ़ सकता है। इसका सही इलाज जरूरी है, क्योंकि अनदेखी करने पर गठिया बुखार (रूमेटिक फीवर) जैसी जटिलताएँ हो सकती हैं।
3. एलर्जी
धूल, पराग कण, पालतू जानवरों के बाल या फफूंद से एलर्जी होने पर नाक से पानी गले के पिछले हिस्से में टपकता है (पोस्ट-नेज़ल ड्रिप)। इससे गला लगातार खराब रहता है।
4. पर्यावरणीय और जीवनशैली संबंधी कारण
- धूम्रपान और तंबाकू का सेवन
- वायु प्रदूषण, धुआँ और रासायनिक गंध
- बहुत ठंडा पानी, आइसक्रीम या ठंडे पेय
- एयर कंडीशनर की सूखी हवा
- ज़ोर-ज़ोर से बोलना, चिल्लाना या लंबे समय तक लगातार बोलना
- शराब का अधिक सेवन
5. अन्य कारण
एसिड रिफ्लक्स (GERD) में पेट का अम्ल गले तक आकर जलन पैदा करता है। मुँह से साँस लेने की आदत से भी गला सूखकर खराब हो सकता है। कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को भी जोखिम ज्यादा रहता है।
फैरिंजाइटिस के लक्षण
लक्षण कारण के अनुसार थोड़े अलग हो सकते हैं, लेकिन आमतौर पर ये दिखाई देते हैं:
- गले में दर्द, खराश, जलन या खुजली
- कुछ निगलने या बोलने पर दर्द बढ़ जाना
- गला सूखा और खुरदुरा लगना
- गले में लालिमा और सूजन
- टॉन्सिल पर सफेद या पीले धब्बे (खासकर बैक्टीरियल संक्रमण में)
- गर्दन की गाँठों (लिम्फ नोड्स) में सूजन और दर्द
- हल्का या तेज बुखार, ठंड लगना
- सिरदर्द और शरीर में दर्द
- आवाज़ बैठ जाना या भारी हो जाना
- खाँसी, नाक बहना और छींकें (वायरल संक्रमण में)
- भूख कम लगना और थकान
ध्यान दें: अगर खाँसी, नाक बहना और छींकें साथ हों, तो संक्रमण वायरल होने की संभावना ज्यादा होती है। अगर तेज बुखार, टॉन्सिल पर सफेद धब्बे और खाँसी का अभाव हो, तो बैक्टीरियल संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है।
फैरिंजाइटिस कैसे फैलता है?
वायरल और बैक्टीरियल फैरिंजाइटिस संक्रामक होते हैं। ये मुख्य रूप से इन तरीकों से फैलते हैं:
- संक्रमित व्यक्ति के खाँसने या छींकने से निकली बूँदों के ज़रिए
- संक्रमित व्यक्ति के साथ बर्तन, गिलास या तौलिया साझा करने से
- दूषित सतहों को छूने के बाद हाथ मुँह, नाक या आँखों पर लगाने से
भीड़भाड़ वाली जगहें, जैसे स्कूल, ऑफिस और सार्वजनिक परिवहन, संक्रमण फैलने के प्रमुख ठिकाने हैं।
निदान (Diagnosis)
डॉक्टर आमतौर पर इन तरीकों से जाँच करते हैं:
1. शारीरिक परीक्षण: टॉर्च की रोशनी में गले, टॉन्सिल, कान और नाक की जाँच की जाती है। गर्दन की गाँठें भी छूकर देखी जाती हैं।
2. रैपिड स्ट्रेप टेस्ट: गले से स्वैब लेकर कुछ ही मिनटों में स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया की जाँच की जाती है।
3. गले का कल्चर: अगर रैपिड टेस्ट नेगेटिव आए लेकिन शक बना रहे, तो स्वैब को लैब में भेजा जाता है। इसकी रिपोर्ट आने में 1 से 2 दिन लगते हैं।
4. रक्त जाँच: मोनोन्यूक्लिओसिस जैसी स्थितियों को पहचानने के लिए CBC और अन्य टेस्ट किए जा सकते हैं।
इलाज (Treatment)
वायरल फैरिंजाइटिस
इसमें एंटीबायोटिक काम नहीं करती। शरीर खुद ही संक्रमण से लड़कर कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। इलाज का उद्देश्य लक्षणों से राहत देना है। इसके लिए आराम, खूब तरल पदार्थ, दर्द और बुखार के लिए पैरासिटामोल (डॉक्टर की सलाह से) और गले की गोलियाँ या गरारे सहायक होते हैं।
बैक्टीरियल फैरिंजाइटिस
इसमें डॉक्टर एंटीबायोटिक देते हैं, जैसे पेनिसिलिन या अमोक्सिसिलिन। सबसे जरूरी बात यह है कि आराम मिलते ही दवा बंद न करें। पूरा कोर्स लेना ज़रूरी है, वरना संक्रमण दोबारा लौट सकता है या जटिलताएँ हो सकती हैं।
एलर्जिक फैरिंजाइटिस
एंटी-एलर्जिक दवाएँ और एलर्जी के कारण (धूल, पराग आदि) से दूरी बनाना मददगार होता है।
चेतावनी: बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक कभी न लें। गलत या अधूरी एंटीबायोटिक से दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया पैदा होने का खतरा रहता है।
घरेलू उपाय
हल्के और शुरुआती लक्षणों में ये उपाय आराम दे सकते हैं:
1. नमक के पानी के गरारे: एक गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक मिलाकर दिन में 3 से 4 बार गरारे करें। इससे सूजन और दर्द कम होता है।
2. शहद और अदरक: गुनगुने पानी या हर्बल चाय में शहद और अदरक मिलाकर पिएँ। शहद गले को आराम देता है। ध्यान रहे, एक वर्ष से छोटे बच्चों को शहद नहीं देना चाहिए।
3. हल्दी वाला दूध: रात को सोने से पहले गुनगुने दूध में चुटकी भर हल्दी मिलाकर पिएँ।
4. तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा: तुलसी की पत्तियाँ, काली मिर्च, अदरक और थोड़ी मुलेठी को पानी में उबालकर काढ़ा बनाएँ और गुनगुना पिएँ।
5. भाप लेना: गर्म पानी की भाप लेने से गले और नाक की सूखापन व जकड़न कम होती है।
6. खूब पानी पिएँ: गुनगुना पानी, सूप और हर्बल चाय गले को नम रखते हैं।
7. आवाज़ को आराम दें: ज़्यादा बोलने या फुसफुसाने से बचें, क्योंकि फुसफुसाने से भी गले पर ज़ोर पड़ता है।
8. कमरे में नमी रखें: ह्यूमिडिफायर का उपयोग सूखी हवा से बचाव करता है।
क्या खाएँ और क्या न खाएँ
खाएँ: दलिया, खिचड़ी, सूप, दाल का पानी, केला, उबली सब्जियाँ और गुनगुने पेय जैसी मुलायम चीज़ें।
न खाएँ: बहुत ठंडी चीज़ें (आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक), तला-भुना और मसालेदार भोजन, खट्टे अचार, धूम्रपान और शराब।
बचाव के उपाय
- साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोएँ, खासकर खाने से पहले और बाहर से आने के बाद।
- खाँसते या छींकते समय मुँह और नाक को रूमाल या कोहनी से ढकें।
- बीमार व्यक्ति से दूरी बनाएँ और उनके बर्तन, तौलिया साझा न करें।
- धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूर रहें।
- प्रदूषित जगहों पर मास्क पहनें।
- पर्याप्त नींद लें और संतुलित आहार खाएँ, जिसमें विटामिन C और जिंक से भरपूर चीज़ें हों।
- हर साल फ्लू का टीका लगवाएँ।
- टूथब्रश को संक्रमण के बाद बदल दें।
संभावित जटिलताएँ
ज्यादातर मामलों में फैरिंजाइटिस गंभीर नहीं होता, पर अनदेखी करने पर ये समस्याएँ हो सकती हैं:
- टॉन्सिल के पास फोड़ा (पेरिटॉन्सिलर एब्सेस)
- साइनस या कान का संक्रमण
- गठिया बुखार, जो दिल के वाल्व को नुकसान पहुँचा सकता है
- गुर्दे में सूजन (पोस्ट-स्ट्रेप्टोकोकल ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस)
डॉक्टर से कब मिलें?
इन स्थितियों में तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें:
- गले का दर्द 5 से 7 दिनों से अधिक बना रहे
- तेज बुखार (101°F या उससे अधिक)
- निगलने या साँस लेने में कठिनाई
- मुँह खोलने में दर्द या कठिनाई
- गर्दन में तेज सूजन या गाँठें
- थूक या लार में खून आना
- शरीर पर लाल चकत्ते
- बच्चे का लार टपकाना, खाना-पीना बंद कर देना या बहुत सुस्त हो जाना
- बार-बार गले का संक्रमण होना
निष्कर्ष
फैरिंजाइटिस एक आम समस्या है और अधिकतर मामलों में कुछ दिनों के आराम और घरेलू देखभाल से ठीक हो जाती है। फिर भी इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए, खासकर जब बैक्टीरियल संक्रमण का शक हो। स्वच्छता की आदतें, धूम्रपान से परहेज़ और संतुलित जीवनशैली अपनाकर आप इससे काफी हद तक बच सकते हैं। यदि लक्षण गंभीर हों या लंबे समय तक बने रहें, तो बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लें।
