ओवेरियन टॉर्शन (Ovarian Torsion - अंडाशय का मुड़ना)
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ओवेरियन टॉर्शन (Ovarian Torsion): अंडाशय का मुड़ना

परिचय

ओवेरियन टॉर्शन एक गंभीर स्त्री रोग संबंधी आपातकालीन स्थिति है, जिसमें अंडाशय (ओवरी) अपने सहायक स्नायुबंधन (लिगामेंट्स) के चारों ओर मुड़ जाता है। यह मरोड़ अंडाशय को रक्त की आपूर्ति करने वाली नसों और धमनियों को दबा देती है या पूरी तरह अवरुद्ध कर देती है। कई बार फैलोपियन ट्यूब भी इस मरोड़ में शामिल हो जाती है, जिसे “एडनेक्सल टॉर्शन” कहा जाता है। यदि समय पर इसका निदान और उपचार न किया जाए, तो रक्त प्रवाह रुकने के कारण अंडाशय के ऊतक मृत (नेक्रोसिस) हो सकते हैं, जिससे स्थायी रूप से अंडाशय को खोना पड़ सकता है। यह स्थिति चिकित्सीय दृष्टि से एक आपातकाल मानी जाती है और इसमें जितनी जल्दी इलाज मिले, अंडाशय को बचाने की संभावना उतनी ही अधिक होती है।

ओवेरियन टॉर्शन क्यों होता है?

सामान्य स्थिति में अंडाशय अपनी जगह पर लिगामेंट्स की मदद से स्थिर रहता है। लेकिन जब अंडाशय का आकार बढ़ जाता है या उस पर असामान्य भार आ जाता है, तो वह अपनी धुरी पर घूमने लगता है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

1. अंडाशय में सिस्ट या ट्यूमर – सबसे आम कारण है अंडाशय में सिस्ट (गांठ) या ट्यूमर का बनना, विशेष रूप से जब उसका आकार 5 सेंटीमीटर से बड़ा हो जाता है। बड़ा आकार अंडाशय को असंतुलित कर देता है, जिससे मुड़ने की संभावना बढ़ जाती है।

2. गर्भावस्था – गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलावों के कारण अंडाशय और उसके स्नायुबंधन ढीले पड़ जाते हैं, जिससे टॉर्शन का खतरा बढ़ जाता है। यह विशेष रूप से पहली तिमाही में अधिक देखा जाता है, जब कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट बनता है।

3. फर्टिलिटी उपचार – ओवुलेशन इंडक्शन दवाओं के प्रयोग से अंडाशय बड़े हो सकते हैं (ओवेरियन हाइपरस्टिम्युलेशन सिंड्रोम), जिससे टॉर्शन का जोखिम बढ़ता है।

4. लंबे स्नायुबंधन – कुछ महिलाओं में जन्मजात रूप से अंडाशय को जोड़ने वाले लिगामेंट्स सामान्य से अधिक लंबे होते हैं, जिससे अंडाशय अधिक स्वतंत्र रूप से घूम सकता है।

5. कम उम्र में अधिक जोखिम – बच्चियों और किशोरियों में भी टॉर्शन हो सकता है, विशेषकर जब जन्मजात रूप से लिगामेंट्स ढीले होते हैं, भले ही सिस्ट न हो।

जोखिम कारक (Risk Factors)

  • प्रजनन आयु (15 से 30 वर्ष) की महिलाओं में सबसे अधिक जोखिम
  • अंडाशय में मौजूद सिस्ट, फाइब्रोमा या डर्मॉइड ट्यूमर
  • फर्टिलिटी उपचार करवा रही महिलाएं
  • गर्भावस्था, विशेष रूप से पहली तिमाही
  • पूर्व में हुई पेल्विक सर्जरी
  • दाएं अंडाशय में टॉर्शन बाएं की तुलना में अधिक आम है, क्योंकि बाईं ओर सिग्मॉइड कोलन अतिरिक्त सहारा देता है

प्रमुख लक्षण

ओवेरियन टॉर्शन के लक्षण अचानक शुरू होते हैं और तीव्रता से बढ़ते हैं। सबसे सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • पेट के निचले हिस्से में अचानक और तेज दर्द – यह दर्द आमतौर पर एक तरफ (दाएं या बाएं) होता है और कभी-कभी जांघ या पीठ तक फैल सकता है
  • मतली और उल्टी – अधिकांश मामलों में दर्द के साथ-साथ उल्टी भी होती है
  • दर्द का बार-बार आना और जाना (कभी-कभी अंडाशय आंशिक रूप से मुड़कर वापस खुल जाता है, जिससे दर्द रुक-रुक कर होता है)
  • हल्का बुखार (यदि ऊतक क्षति गंभीर हो)
  • पेट के निचले हिस्से में सूजन या भारीपन महसूस होना
  • चक्कर आना या बेचैनी

चूंकि ये लक्षण अपेंडिसाइटिस, किडनी स्टोन, एक्टोपिक प्रेगनेंसी, या पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिजीज जैसी अन्य स्थितियों से मिलते-जुलते हैं, इसलिए सही निदान के लिए तुरंत चिकित्सीय जांच आवश्यक है।

निदान (Diagnosis)

ओवेरियन टॉर्शन का निदान करना कई बार चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि इसके लक्षण अन्य पेट संबंधी समस्याओं जैसे होते हैं। डॉक्टर निम्नलिखित तरीकों से निदान करते हैं:

1. शारीरिक परीक्षण – पेट और पेल्विक परीक्षण के दौरान दर्द वाले स्थान की पहचान की जाती है।

2. अल्ट्रासाउंड (Doppler Ultrasound) – यह सबसे महत्वपूर्ण जांच है। ट्रांसवेजाइनल या पेट का अल्ट्रासाउंड अंडाशय के आकार, सिस्ट की उपस्थिति और रक्त प्रवाह की जांच करता है। डॉप्लर अल्ट्रासाउंड यह दिखाता है कि अंडाशय में रक्त प्रवाह सामान्य है या बाधित हुआ है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि सामान्य रक्त प्रवाह दिखने पर भी टॉर्शन की संभावना पूरी तरह खारिज नहीं की जा सकती, क्योंकि प्रारंभिक अवस्था में या आंशिक मरोड़ में रक्त प्रवाह बना रह सकता है।

3. सीटी स्कैन या एमआरआई – यदि निदान स्पष्ट न हो, तो अतिरिक्त इमेजिंग जांच की जा सकती है।

4. रक्त परीक्षण – सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ी हुई मिल सकती है, जो सूजन या ऊतक क्षति का संकेत देती है।

5. लैप्रोस्कोपी – कई बार निश्चित निदान केवल लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के दौरान ही हो पाता है, जब डॉक्टर सीधे अंडाशय को देखकर मरोड़ की पुष्टि करते हैं।

उपचार (Treatment)

ओवेरियन टॉर्शन का एकमात्र प्रभावी उपचार सर्जरी है। जितनी जल्दी सर्जरी की जाती है, अंडाशय को बचाने की संभावना उतनी ही अधिक होती है। उपचार के मुख्य विकल्प इस प्रकार हैं:

1. लैप्रोस्कोपिक डिटॉर्शन (Detorsion) – यह सबसे पसंदीदा तरीका है, विशेष रूप से युवा महिलाओं और उन महिलाओं के लिए जो भविष्य में गर्भधारण करना चाहती हैं। इस प्रक्रिया में सर्जन छोटे चीरों के माध्यम से अंडाशय को वापस उसकी सामान्य स्थिति में घुमा देते हैं, जिससे रक्त प्रवाह पुनः बहाल हो जाता है। यदि अंडाशय का ऊतक अभी भी जीवित है, तो उसे बचाया जा सकता है।

2. ओफोरेक्टॉमी (Oophorectomy) – यदि अंडाशय का ऊतक पूरी तरह मृत हो चुका है (नेक्रोसिस), तो अंडाशय को सर्जरी द्वारा निकालना पड़ता है। यह निर्णय सर्जरी के दौरान अंडाशय की स्थिति देखकर लिया जाता है।

3. सिस्ट रिमूवल (Cystectomy) – यदि टॉर्शन का कारण कोई सिस्ट है, तो अंडाशय को बचाते हुए केवल सिस्ट को हटाया जा सकता है, ताकि भविष्य में दोबारा टॉर्शन होने का खतरा कम हो।

4. ओवेरियोपेक्सी (Oophoropexy) – कुछ मामलों में, विशेष रूप से जब टॉर्शन बार-बार होता है या दूसरी तरफ के अंडाशय में पहले से टॉर्शन हो चुका हो, तो अंडाशय को पेल्विक दीवार से टांके लगाकर स्थिर किया जाता है ताकि वह दोबारा न मुड़े।

महत्वपूर्ण बात यह है कि पिछले समय में डॉक्टर मान लेते थे कि यदि अंडाशय काला या नीला दिखे तो वह मृत हो चुका है, लेकिन आधुनिक शोध बताते हैं कि अंडाशय का रंग बदलना हमेशा स्थायी क्षति का संकेत नहीं होता। इसलिए अब अधिकतर स्त्री रोग विशेषज्ञ अंडाशय को हटाने के बजाय पहले डिटॉर्शन करने और अंडाशय को बचाने की कोशिश करने की सलाह देते हैं।

जटिलताएं (Complications)

यदि ओवेरियन टॉर्शन का समय पर उपचार न किया जाए, तो निम्नलिखित जटिलताएं हो सकती हैं:

  • अंडाशय के ऊतक का स्थायी रूप से नष्ट होना (नेक्रोसिस)
  • अंडाशय को पूरी तरह निकालने की आवश्यकता
  • संक्रमण और पेरिटोनाइटिस (पेट की परत में सूजन)
  • प्रजनन क्षमता में कमी, विशेष रूप से यदि दोनों अंडाशय प्रभावित हों
  • दुर्लभ मामलों में सेप्सिस जैसी जानलेवा स्थिति

बचाव और सावधानियां

ओवेरियन टॉर्शन को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन कुछ सावधानियों से जोखिम को कम किया जा सकता है:

  • नियमित स्त्री रोग जांच करवाना, ताकि सिस्ट या ट्यूमर का समय पर पता चल सके
  • यदि अंडाशय में बड़ा सिस्ट पाया गया हो, तो डॉक्टर की सलाह अनुसार उसका इलाज करवाना
  • फर्टिलिटी उपचार के दौरान डॉक्टर की निगरानी में रहना
  • पेट के निचले हिस्से में अचानक तेज दर्द होने पर तुरंत चिकित्सीय सहायता लेना, बिना देरी किए

निष्कर्ष

ओवेरियन टॉर्शन एक ऐसी आपातकालीन स्थिति है, जिसमें समय की बहुत अहमियत होती है। पेट के निचले हिस्से में अचानक तेज दर्द के साथ मतली या उल्टी होने पर इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि देरी से अंडाशय को स्थायी नुकसान हो सकता है। शीघ्र निदान और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से अधिकांश मामलों में अंडाशय को बचाया जा सकता है और महिला की प्रजनन क्षमता को सुरक्षित रखा जा सकता है। इसलिए किसी भी असामान्य पेट दर्द को गंभीरता से लेते हुए बिना देरी किए डॉक्टर से परामर्श लेना अत्यंत आवश्यक है।

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