मंकीपॉक्स (Mpox / Monkeypox)
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मंकीपॉक्स (Mpox): लक्षण, कारण, बचाव और इलाज की पूरी जानकारी

परिचय

मंकीपॉक्स, जिसे अब आधिकारिक रूप से Mpox (एमपॉक्स) कहा जाता है, एक वायरल संक्रमण है जो मुख्य रूप से जानवरों से इंसानों में फैलता है और बाद में इंसान से इंसान में भी पहुँच सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने नवंबर 2022 में इस बीमारी का नाम बदलकर Mpox रखा, ताकि “मंकी” शब्द से जुड़ी भ्रांतियों और भेदभाव को कम किया जा सके।

यह बीमारी पहली बार 1958 में डेनमार्क में प्रयोगशाला के बंदरों में पाई गई थी, इसीलिए इसका नाम “मंकीपॉक्स” पड़ा। इंसानों में इसका पहला मामला 1970 में कांगो गणराज्य (तब ज़ायर) में एक नौ वर्षीय बच्चे में दर्ज किया गया। लंबे समय तक यह मध्य और पश्चिम अफ्रीका के कुछ देशों तक सीमित रही, लेकिन 2022 में इसका प्रकोप दुनिया के कई देशों में फैल गया। तब WHO ने इसे अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था। 2024 में भी अफ्रीका में बढ़ते मामलों और नए स्ट्रेन के कारण इसे फिर से आपातकाल घोषित किया गया। चूँकि इस बीमारी की स्थिति समय के साथ बदलती रहती है, इसलिए ताज़ा आँकड़ों और दिशा-निर्देशों के लिए WHO और भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट देखना सबसे उचित है।

Mpox का कारण: कौन-सा वायरस है ज़िम्मेदार?

Mpox एक वायरस के कारण होता है जिसे मंकीपॉक्स वायरस (MPXV) कहते हैं। यह Poxviridae परिवार के Orthopoxvirus वर्ग से संबंधित है। इसी वर्ग में चेचक (स्मॉलपॉक्स) का वायरस भी आता है, इसलिए दोनों बीमारियों के लक्षणों में कुछ समानता मिलती है, हालाँकि Mpox आमतौर पर चेचक से कम गंभीर होती है।

इस वायरस के दो मुख्य समूह (क्लेड) माने जाते हैं:

  • क्लेड I (पहले मध्य अफ्रीकी क्लेड): इसमें गंभीर बीमारी और मृत्यु का जोखिम तुलनात्मक रूप से अधिक माना जाता है। इसके भी उप-प्रकार (Ia और Ib) हैं।
  • क्लेड II (पहले पश्चिम अफ्रीकी क्लेड): यह अपेक्षाकृत हल्का माना जाता है। 2022 के वैश्विक प्रकोप में मुख्य रूप से क्लेड IIb शामिल था।

यह कैसे फैलता है?

जानवरों से इंसानों में

संक्रमित जानवरों, जैसे कुछ प्रजातियों के कृंतक (चूहे, गिलहरी आदि) और बंदरों के काटने, खरोंचने, उनके खून, शरीर के तरल पदार्थ या घावों के संपर्क में आने से वायरस इंसान तक पहुँच सकता है। संक्रमित जानवर का अधपका मांस खाना भी जोखिम बढ़ा सकता है।

इंसान से इंसान में

  • संक्रमित व्यक्ति के त्वचा के घावों, दानों या पपड़ियों से सीधा संपर्क
  • लंबे समय तक नज़दीकी, आमने-सामने का संपर्क, जिसमें साँस की बूँदों के ज़रिए संक्रमण हो सकता है
  • यौन संपर्क सहित शारीरिक अंतरंगता
  • संक्रमित व्यक्ति के कपड़े, बिस्तर, तौलिये या अन्य दूषित वस्तुओं का इस्तेमाल
  • गर्भवती महिला से गर्भ में पल रहे शिशु में या जन्म के दौरान

यह समझना ज़रूरी है कि Mpox कोविड-19 की तरह हवा में आसानी से नहीं फैलता। इसके प्रसार के लिए आमतौर पर निकट और लंबा संपर्क आवश्यक होता है। साथ ही, यह किसी एक समुदाय या समूह तक सीमित बीमारी नहीं है; कोई भी व्यक्ति संपर्क में आने पर संक्रमित हो सकता है।

ऊष्मायन अवधि (Incubation Period)

संक्रमण होने के बाद लक्षण दिखने में आमतौर पर 3 से 17 दिन लगते हैं, हालाँकि यह अवधि कुछ मामलों में 1 से 21 दिन तक भी हो सकती है। बीमारी आमतौर पर 2 से 4 सप्ताह तक चलती है।

Mpox के लक्षण

लक्षण आम तौर पर दो चरणों में दिखाई देते हैं।

शुरुआती लक्षण

  • बुखार
  • तेज़ सिरदर्द
  • मांसपेशियों और पीठ में दर्द
  • थकान और कमज़ोरी
  • ठंड लगना
  • गले में खराश
  • लिम्फ नोड्स (गाँठों) में सूजन, जो Mpox की एक खास पहचान मानी जाती है और इसे चेचक व चिकनपॉक्स से अलग करने में मदद करती है

त्वचा पर दाने

बुखार शुरू होने के 1 से 3 दिन बाद दाने उभर सकते हैं। ये चेहरे से शुरू होकर हाथ-पैरों, हथेलियों, तलवों और शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल सकते हैं। कुछ मामलों में ये जननांगों, गुदा के आसपास या मुँह के भीतर भी होते हैं।

दानों का विकास कई चरणों में होता है: पहले सपाट लाल धब्बे, फिर उभरे हुए दाने, फिर तरल से भरे फफोले, फिर मवाद वाले छाले, और अंत में पपड़ी बनकर गिर जाना। जब तक सभी पपड़ियाँ गिर न जाएँ और नई त्वचा न बन जाए, व्यक्ति संक्रामक माना जाता है।

कभी-कभी केवल कुछ ही दाने होते हैं, या बुखार जैसे लक्षणों के बिना सिर्फ़ दाने दिखते हैं, इसलिए हर मामले में लक्षण एक जैसे नहीं होते।

किन्हें अधिक जोखिम है?

  • संक्रमित व्यक्ति के घर में रहने वाले या उनकी देखभाल करने वाले लोग
  • स्वास्थ्यकर्मी, यदि वे उचित सुरक्षा उपकरण के बिना संपर्क में आएँ
  • बच्चे
  • गर्भवती महिलाएँ
  • कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग, जैसे अनियंत्रित एचआईवी संक्रमण वाले व्यक्ति
  • प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा करने वाले या वहाँ रहने वाले लोग
  • कई साझेदारों के साथ यौन संपर्क रखने वाले लोग

जटिलताएँ

अधिकांश लोग कुछ सप्ताह में बिना गंभीर परेशानी के ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में जटिलताएँ हो सकती हैं:

  • घावों में जीवाणु संक्रमण
  • निमोनिया
  • आँखों का संक्रमण, जिससे दृष्टि को नुकसान हो सकता है
  • मस्तिष्क में सूजन (एन्सेफेलाइटिस)
  • निर्जलीकरण
  • त्वचा पर स्थायी निशान

नवजात शिशुओं, छोटे बच्चों और कमज़ोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में गंभीर बीमारी का जोखिम अधिक रहता है। मृत्यु दर क्लेड, क्षेत्र और स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता के अनुसार भिन्न होती है।

निदान (Diagnosis)

Mpox के दाने चिकनपॉक्स, खसरा, दाद, कुछ यौन संचारित संक्रमणों और अन्य त्वचा रोगों से मिलते-जुलते हो सकते हैं, इसलिए केवल देखकर निदान पक्का नहीं किया जा सकता। इसकी पुष्टि के लिए डॉक्टर दानों या घावों से नमूना लेते हैं और PCR (पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन) टेस्ट कराते हैं, जो सबसे भरोसेमंद जाँच मानी जाती है। जाँच विशेष सरकारी प्रयोगशालाओं में की जाती है, इसलिए संदेह होने पर स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए।

इलाज

अधिकांश मामलों में Mpox अपने आप ठीक हो जाता है और इलाज का मुख्य उद्देश्य लक्षणों को सँभालना होता है:

  • पर्याप्त आराम और भरपूर तरल पदार्थ
  • बुखार और दर्द के लिए डॉक्टर की सलाह से दवाएँ
  • घावों को साफ़ और सूखा रखना, और उन्हें खुजलाने से बचना
  • द्वितीयक संक्रमण होने पर एंटीबायोटिक्स, डॉक्टर की देखरेख में

गंभीर मामलों में कुछ देशों में टेकोविरिमैट (Tecovirimat) जैसी एंटीवायरल दवा का उपयोग किया गया है, लेकिन इसके प्रभाव को लेकर शोध जारी है और इसका इस्तेमाल केवल चिकित्सकीय निगरानी में होना चाहिए। खुद से दवा लेना या घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहना ख़तरनाक हो सकता है।

टीकाकरण

चेचक के टीके Mpox के विरुद्ध कुछ हद तक सुरक्षा देते हैं, क्योंकि दोनों वायरस एक ही परिवार के हैं। इसके अलावा MVA-BN (जिसे जिन्नेओस/इम्वानेक्स भी कहा जाता है) जैसे टीके Mpox के लिए स्वीकृत हैं और WHO ने इनके उपयोग की सिफ़ारिश की है। टीकाकरण आमतौर पर उन लोगों के लिए सुझाया जाता है जिन पर जोखिम अधिक है, जैसे संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में आए लोग, कुछ स्वास्थ्यकर्मी और प्रयोगशाला कर्मचारी। टीके की उपलब्धता और पात्रता देश के अनुसार अलग-अलग है, इसलिए इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग से लेनी चाहिए।

बचाव के उपाय

Mpox से बचाव के लिए कुछ सरल सावधानियाँ बेहद कारगर हैं:

  1. संक्रमित व्यक्ति से सीधे त्वचा संपर्क से बचें, विशेषकर जब उसके शरीर पर दाने हों।
  2. हाथों को बार-बार साबुन-पानी से धोएँ या अल्कोहल-आधारित सैनिटाइज़र इस्तेमाल करें।
  3. बीमार व्यक्ति के कपड़े, तौलिये, बिस्तर और बर्तन साझा न करें, और इन्हें गर्म पानी व डिटर्जेंट से धोएँ।
  4. बीमार या मृत जंगली जानवरों के संपर्क से बचें, और मांस को अच्छी तरह पकाकर खाएँ।
  5. संक्रमित व्यक्ति की देखभाल करते समय मास्क, दस्ताने और सुरक्षात्मक कपड़े पहनें।
  6. संदिग्ध मरीज़ को अलग रखें (आइसोलेशन) जब तक वह पूरी तरह ठीक न हो जाए और सारी पपड़ियाँ न गिर जाएँ।
  7. प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा से पहले ताज़ा स्वास्थ्य सलाह देख लें।
  8. सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाएँ और लक्षण दिखने पर अंतरंग संपर्क से परहेज़ करें।

अगर लक्षण दिखें तो क्या करें?

यदि आपको अचानक बुखार के साथ असामान्य दाने या गाँठों में सूजन दिखे, खासकर तब जब आप किसी संदिग्ध मरीज़ के संपर्क में आए हों या प्रभावित क्षेत्र से लौटे हों, तो:

  • घबराएँ नहीं, लेकिन देर भी न करें।
  • तुरंत किसी डॉक्टर या नज़दीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
  • दूसरों से दूरी बनाकर रखें और दानों को ढककर रखें।
  • डॉक्टर के पास जाने से पहले फ़ोन पर सूचना दें, ताकि वे अन्य मरीज़ों को सुरक्षित रखते हुए आपकी जाँच कर सकें।

भ्रांतियाँ और सच्चाई

भ्रांति: Mpox केवल बंदरों से फैलता है।
सच्चाई: यह मुख्यतः कृंतकों से भी फैलता है, और इंसान से इंसान में भी संचारित हो सकता है।

भ्रांति: यह कोविड जितना तेज़ी से हवा में फैलता है।
सच्चाई: इसके लिए आमतौर पर निकट और लंबा संपर्क ज़रूरी होता है।

भ्रांति: यह केवल किसी खास समुदाय की बीमारी है।
सच्चाई: कोई भी व्यक्ति संक्रमित हो सकता है; ऐसी धारणाएँ कलंक पैदा करती हैं और लोगों को इलाज कराने से रोकती हैं।

भ्रांति: संक्रमित होने पर मृत्यु निश्चित है।
सच्चाई: अधिकांश मरीज़ उचित देखभाल से पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।

निष्कर्ष

Mpox एक ऐसी बीमारी है जिसे समय पर पहचान, जागरूकता और सावधानी से काफ़ी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। घबराहट की जगह सही जानकारी सबसे बड़ा हथियार है। साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखना, संदिग्ध मरीज़ से सुरक्षित दूरी बनाना, लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से मिलना और केवल विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी लेना, यही बचाव का मूल मंत्र है। साथ ही, मरीज़ों के प्रति संवेदनशील रहना और उन्हें कलंकित न करना भी उतना ही ज़रूरी है, क्योंकि डर और भेदभाव के कारण लोग इलाज छिपाने लगते हैं, जिससे संक्रमण और फैलता है।

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

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