मास्टिटिस (Mastitis): स्तन में सूजन और इन्फेक्शन – संपूर्ण जानकारी
मास्टिटिस क्या है?
मास्टिटिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें स्तन के ऊतकों (tissues) में सूजन आ जाती है, और कई बार यह सूजन बैक्टीरियल इन्फेक्शन के साथ भी जुड़ी होती है। यह समस्या ज़्यादातर उन महिलाओं में देखने को मिलती है जो स्तनपान (breastfeeding) करा रही होती हैं, इसीलिए इसे “लैक्टेशनल मास्टिटिस” (Lactational Mastitis) भी कहा जाता है। हालांकि यह स्थिति उन महिलाओं में भी हो सकती है जो स्तनपान नहीं करा रही हैं, और दुर्लभ मामलों में पुरुषों में भी मास्टिटिस देखा गया है।
मास्टिटिस में आमतौर पर स्तन का एक हिस्सा लाल, सूजा हुआ, गर्म और दर्दनाक हो जाता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह स्थिति फोड़े (abscess) में भी बदल सकती है, जिसके लिए सर्जिकल हस्तक्षेप की ज़रूरत पड़ सकती है।
मास्टिटिस के प्रकार
1. लैक्टेशनल मास्टिटिस
यह सबसे सामान्य प्रकार है, जो स्तनपान कराने वाली महिलाओं में होता है। यह आमतौर पर प्रसव के बाद पहले तीन महीनों के भीतर सबसे ज़्यादा होता है, हालांकि यह स्तनपान की किसी भी अवस्था में हो सकता है।
2. नॉन-लैक्टेशनल मास्टिटिस
यह उन महिलाओं में होता है जो स्तनपान नहीं करा रही हैं। इसके पीछे हार्मोनल बदलाव, धूम्रपान, या निप्पल पियर्सिंग जैसे कारण हो सकते हैं।
3. पेरिडक्टल मास्टिटिस
यह स्थिति स्तन की नलिकाओं (ducts) के आसपास सूजन के कारण होती है और अक्सर धूम्रपान करने वाली महिलाओं में ज़्यादा देखी जाती है।
मास्टिटिस के कारण
मास्टिटिस होने के पीछे मुख्यतः निम्नलिखित कारण ज़िम्मेदार होते हैं:
दूध का रुक जाना (Milk Stasis): जब स्तन से दूध पूरी तरह से नहीं निकल पाता और नलिकाओं में जमा हो जाता है, तो यह सूजन और इन्फेक्शन का कारण बन सकता है। यह तब होता है जब बच्चा ठीक से स्तनपान नहीं कर पाता, फीडिंग सेशन छूट जाते हैं, या बच्चा अचानक स्तनपान कम कर देता है।
बैक्टीरियल इन्फेक्शन: निप्पल में दरार (cracked nipple) या घाव के ज़रिए त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया (जैसे Staphylococcus aureus) स्तन के अंदर प्रवेश कर सकते हैं और इन्फेक्शन पैदा कर सकते हैं।
ब्लॉक्ड मिल्क डक्ट: जब दूध की कोई नलिका पूरी तरह से खाली नहीं हो पाती, तो उसमें रुकावट आ जाती है, जिससे उस हिस्से में सूजन और दर्द होता है।
गलत फीडिंग पोजीशन: बच्चे को सही तरीके से स्तन से न लगाना (poor latch) भी दूध के ठीक से न निकलने का एक बड़ा कारण है।
टाइट कपड़े या ब्रा: बहुत ज़्यादा टाइट ब्रा पहनने से स्तन पर दबाव पड़ता है, जिससे दूध का प्रवाह बाधित हो सकता है।
तनाव और थकान: नई माताओं में अत्यधिक तनाव और नींद की कमी भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमज़ोर कर सकती है, जिससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
मास्टिटिस के लक्षण
मास्टिटिस के लक्षण आमतौर पर अचानक और तेज़ी से उभरते हैं। इनमें शामिल हैं:
- स्तन के किसी हिस्से में सूजन, लालिमा और गर्माहट
- स्तन में दर्द या जलन, विशेष रूप से स्तनपान के दौरान
- छूने पर स्तन में गांठ जैसा महसूस होना
- स्तन की त्वचा पर धारीदार लाल निशान
- बुखार (आमतौर पर 101°F या 38.3°C से अधिक)
- ठंड लगना और शरीर में कंपकंपी
- थकान और कमज़ोरी महसूस होना
- सिरदर्द और शरीर में दर्द (जैसे फ्लू के लक्षण)
- कुछ मामलों में निप्पल से पस (मवाद) निकलना
अगर बुखार के साथ फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दें, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि सूजन के साथ-साथ बैक्टीरियल इन्फेक्शन भी मौजूद है।
जोखिम बढ़ाने वाले कारक
कुछ स्थितियां मास्टिटिस होने की संभावना को बढ़ा सकती हैं:
- पहले भी मास्टिटिस हो चुका होना
- निप्पल में दरारें या घाव
- स्तनपान की तकनीक सही न होना
- फीडिंग शेड्यूल में अनियमितता
- अत्यधिक थकान और तनाव
- खराब पोषण और कमज़ोर इम्यून सिस्टम
- धूम्रपान करना
- बहुत टाइट कपड़े पहनना
निदान (Diagnosis)
आमतौर पर डॉक्टर स्तन की शारीरिक जांच और लक्षणों के आधार पर मास्टिटिस का निदान कर लेते हैं। हालांकि, अगर इलाज के बाद भी लक्षण ठीक नहीं होते, या अगर डॉक्टर को फोड़े (abscess) या किसी अन्य जटिलता का संदेह हो, तो निम्नलिखित जांचें भी की जा सकती हैं:
- स्तन का अल्ट्रासाउंड
- दूध की जांच (कल्चर टेस्ट), ताकि यह पता चल सके कि कौन सा बैक्टीरिया इन्फेक्शन के लिए ज़िम्मेदार है
- दुर्लभ मामलों में, अगर लक्षण असामान्य हों या बार-बार मास्टिटिस हो रहा हो, तो मैमोग्राम या बायोप्सी की सलाह दी जा सकती है (कैंसर जैसी अन्य स्थितियों को खारिज करने के लिए)
इलाज (Treatment)
मास्टिटिस का इलाज इसकी गंभीरता पर निर्भर करता है:
घरेलू उपाय और स्व-देखभाल
- लगातार स्तनपान जारी रखें: भले ही दर्द हो, स्तनपान बंद नहीं करना चाहिए क्योंकि दूध निकालते रहना रिकवरी में मदद करता है और दूध रुकने से बचाता है।
- प्रभावित हिस्से से पहले फीड कराएं: बच्चे को प्रभावित स्तन से पहले दूध पिलाना शुरू करें, क्योंकि बच्चा सबसे ज़्यादा भूख में सबसे ज़ोर से चूसता है, जिससे रुकावट खुलने में मदद मिलती है।
- गर्म सिकाई: फीडिंग से पहले स्तन पर गर्म कपड़े या गर्म पानी की सिकाई करने से दूध का प्रवाह आसान होता है।
- ठंडी सिकाई: फीडिंग के बाद दर्द और सूजन कम करने के लिए ठंडी सिकाई फायदेमंद हो सकती है।
- स्तन की हल्की मालिश: गांठ वाले हिस्से पर हल्के हाथों से गोलाई में मालिश करने से रुकावट खुलने में मदद मिलती है।
- पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ: शरीर को ठीक होने के लिए भरपूर पानी पिएं और आराम करें।
- सही फीडिंग पोजीशन अपनाएं: ताकि बच्चा स्तन से पूरी तरह दूध खींच सके।
चिकित्सकीय इलाज
अगर घरेलू उपायों से 24 घंटे में सुधार न हो, या बुखार व लक्षण बढ़ते जाएं, तो डॉक्टर से संपर्क करना ज़रूरी है। डॉक्टर निम्नलिखित सलाह दे सकते हैं:
- एंटीबायोटिक्स: अगर बैक्टीरियल इन्फेक्शन की पुष्टि हो जाए, तो डॉक्टर 10-14 दिनों का एंटीबायोटिक कोर्स देते हैं। यह ज़रूरी है कि पूरा कोर्स पूरा किया जाए, भले ही लक्षण जल्दी ठीक हो जाएं।
- दर्द निवारक दवाएं: बुखार और दर्द कम करने के लिए पैरासिटामोल या इबुप्रोफेन जैसी दवाएं दी जा सकती हैं (डॉक्टर की सलाह अनुसार, विशेष रूप से स्तनपान के दौरान)।
- फोड़े का इलाज: अगर स्थिति गंभीर हो जाए और फोड़ा बन जाए, तो उसे सुई से निकालना (aspiration) या छोटी सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है।
स्तनपान जारी रखना क्यों ज़रूरी है?
बहुत सी माताएं यह सोचकर स्तनपान बंद कर देती हैं कि इससे बच्चे को नुकसान होगा, लेकिन यह गलत धारणा है। मास्टिटिस के दौरान भी दूध बच्चे के लिए पूरी तरह सुरक्षित रहता है, और बीच में स्तनपान रोकना बल्कि स्थिति को और बिगाड़ सकता है क्योंकि इससे दूध और ज़्यादा जमा हो जाता है। अगर दर्द के कारण सीधे स्तनपान कराना मुश्किल हो, तो ब्रेस्ट पंप या हाथ से दूध निकालकर स्तन को खाली रखा जा सकता है।
मास्टिटिस से बचाव के उपाय
मास्टिटिस से बचने के लिए निम्नलिखित सावधानियां मददगार साबित हो सकती हैं:
- बच्चे को नियमित अंतराल पर स्तनपान कराएं और फीडिंग सेशन न छोड़ें।
- सुनिश्चित करें कि हर बार स्तन पूरी तरह से खाली हो।
- बच्चे की लैचिंग पोजीशन सही रखें; ज़रूरत पड़ने पर लैक्टेशन कंसल्टेंट की मदद लें।
- दोनों स्तनों से बारी-बारी से फीड कराएं।
- ढीले और आरामदायक कपड़े व ब्रा पहनें।
- निप्पल में दरार या घाव होने पर तुरंत उसकी देखभाल करें।
- पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और तनाव प्रबंधन पर ध्यान दें।
- धूम्रपान से परहेज़ करें।
- अगर स्तन में गांठ या भारीपन महसूस हो, तो तुरंत हल्की मालिश और गर्म सिकाई से उसे दूर करने की कोशिश करें।
डॉक्टर से कब संपर्क करें?
निम्नलिखित स्थितियों में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए:
- बुखार 101°F (38.3°C) से अधिक हो
- लक्षण 24-48 घंटों में सुधर न हों
- स्तन में तेज़ दर्द और सूजन बढ़ती जाए
- निप्पल से पस या असामान्य स्राव निकले
- स्तन पर लाल धारियां तेज़ी से फैल रही हों
- बार-बार मास्टिटिस की समस्या हो रही हो
निष्कर्ष
मास्टिटिस एक आम लेकिन तकलीफदेह स्थिति है, जो ज़्यादातर स्तनपान कराने वाली माताओं को प्रभावित करती है। सही जानकारी, समय पर देखभाल और उचित इलाज से इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके लक्षण दिखते ही स्तनपान बंद न करें, बल्कि नियमित रूप से दूध निकालते रहें और ज़रूरत पड़ने पर बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें। सही सावधानी और देखभाल के साथ अधिकांश महिलाएं कुछ ही दिनों में पूरी तरह स्वस्थ हो जाती हैं।
