होर्डिंग डिसऑर्डर: जब चीज़ें छोड़ना नामुमकिन हो जाए
परिचय
हमारे आसपास कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें पुराने अख़बार, टूटे खिलौने, ख़ाली डिब्बे या पुराने कपड़े फेंकना मुश्किल लगता है। भारतीय घरों में “काम आ जाएगा” कहकर चीज़ें रख लेना आम बात है। लेकिन जब यह आदत इतनी बढ़ जाए कि घर में चलने-फिरने की जगह न बचे, रसोई, बिस्तर और सीढ़ियाँ भी सामान से भर जाएँ और व्यक्ति चाहकर भी कुछ फेंक न पाए, तब यह सिर्फ़ आदत नहीं रहती। यह एक मानसिक स्वास्थ्य समस्या हो सकती है, जिसे होर्डिंग डिसऑर्डर कहा जाता है।
होर्डिंग डिसऑर्डर क्या है?
होर्डिंग डिसऑर्डर एक मानसिक विकार है, जिसमें व्यक्ति को वस्तुओं को त्यागने या उनसे अलग होने में लगातार और गहरी कठिनाई होती है, चाहे उनकी असली कीमत या उपयोगिता कुछ भी हो। वह उन्हें बचाकर रखना ज़रूरी समझता है और उन्हें फेंकने के विचार से ही बेचैन हो जाता है। नतीजा यह होता है कि सामान जमा होता जाता है और रहने की जगह अव्यवस्थित हो जाती है।
पहले इसे जुनूनी-बाध्यकारी विकार (OCD) का एक रूप माना जाता था। साल 2013 में अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन की मार्गदर्शिका DSM-5 में इसे एक अलग मानसिक विकार के रूप में मान्यता दी गई। अनुमान है कि दुनिया की लगभग 2 से 6 प्रतिशत आबादी इससे प्रभावित हो सकती है। इसकी शुरुआत अक्सर किशोरावस्था या युवावस्था में होती है, पर लक्षण उम्र के साथ गंभीर होते जाते हैं और अधिकतर मामले 40-50 की उम्र के बाद ही ध्यान में आते हैं।
सामान्य संग्रह और होर्डिंग में अंतर
हर संग्रह करने वाला व्यक्ति होर्डर नहीं होता। सिक्के, टिकट या किताबें जमा करने वाला कलेक्टर अपने संग्रह को सलीके से सजाता है, उसे दिखाकर गर्व महसूस करता है और उसकी रहने की जगह उपयोग लायक बनी रहती है। होर्डर के मामले में स्थिति उलटी होती है। सामान बेतरतीब ढेरों में जमा होता है, ज़्यादातर बेकार होता है और घर की बुनियादी सुविधाओं को ही बंद कर देता है। व्यक्ति को इससे शर्मिंदगी और परेशानी भी होती है, फिर भी वह इसे बदल नहीं पाता।
प्रमुख लक्षण
होर्डिंग डिसऑर्डर के लक्षणों को तीन हिस्सों में समझा जा सकता है:
1. वस्तुओं से अलग होने में कठिनाई। व्यक्ति को कुछ भी फेंकने, बेचने या दान करने में तीव्र तनाव होता है। उसे लगता है कि भविष्य में इसकी ज़रूरत पड़ेगी, या इसमें कोई भावनात्मक मूल्य है।
2. अत्यधिक वस्तुएँ इकट्ठा करना। कई लोग बार-बार ज़रूरत से ज़्यादा ख़रीदारी करते हैं या मुफ़्त चीज़ें उठा लाते हैं, जैसे सेल के सामान, विज्ञापन पर्चे, बैग और डिब्बे। इसे “एक्सेसिव एक्विज़िशन” कहा जाता है।
3. रहने की जगह का अनुपयोगी हो जाना। कमरों में रास्ते बंद हो जाते हैं, बिस्तर पर सोने की जगह नहीं बचती, गैस चूल्हा या वॉश-बेसिन इस्तेमाल नहीं हो पाते।
इसके साथ अन्य संकेत भी दिखते हैं:
- निर्णय लेने में बहुत कठिनाई
- चीज़ों को व्यवस्थित करने में असमर्थता
- सामान को दूसरों के छूने या हटाने पर गुस्सा या घबराहट
- शर्मिंदगी के कारण मेहमानों को घर बुलाने से बचना
- रिश्तेदारों और दोस्तों से दूरी
कुछ लोगों में पशु होर्डिंग भी देखी जाती है, जिसमें वे बड़ी संख्या में जानवर पाल लेते हैं लेकिन उनकी उचित देखभाल नहीं कर पाते।
होर्डिंग के संभावित कारण
इसका कोई एक निश्चित कारण नहीं है। शोध बताते हैं कि कई कारक मिलकर भूमिका निभाते हैं:
- आनुवंशिकता: जिन लोगों के परिवार में किसी को यह समस्या रही हो, उनमें इसका जोखिम अधिक पाया गया है।
- मस्तिष्क की कार्यप्रणाली: निर्णय लेने, ध्यान केंद्रित करने और भावनाओं को नियंत्रित करने वाले मस्तिष्क के हिस्सों में अंतर देखा गया है।
- तनावपूर्ण या दुखद अनुभव: किसी प्रियजन की मृत्यु, तलाक, आर्थिक संकट या बड़े जीवन-परिवर्तन के बाद लक्षण उभर सकते हैं या बढ़ सकते हैं।
- बचपन का माहौल: जिन घरों में अभाव या असुरक्षा रही हो, वहाँ चीज़ों को सुरक्षा के प्रतीक की तरह देखने की प्रवृत्ति बन सकती है।
- स्वभाव: अनिर्णय, पूर्णतावाद और चिंता की प्रवृत्ति वाले लोगों में जोखिम अधिक हो सकता है।
होर्डिंग अक्सर अन्य समस्याओं के साथ भी पाई जाती है, जैसे अवसाद, चिंता विकार, ध्यान-अभाव अतिसक्रियता विकार (ADHD) और OCD। इसलिए सही जाँच बहुत ज़रूरी है।
स्वास्थ्य और जीवन पर प्रभाव
होर्डिंग सिर्फ़ “घर गंदा रहने” की समस्या नहीं है। इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं:
- आग का ख़तरा: ज्वलनशील सामान के ढेर, बंद रास्ते और ब्लॉक हुए निकास आपात स्थिति में जानलेवा साबित हो सकते हैं।
- गिरने और चोट लगने का जोखिम: ढेर गिर सकते हैं और बुज़ुर्गों के लिए फिसलना या ठोकर खाना बेहद ख़तरनाक होता है।
- अस्वच्छता और बीमारियाँ: धूल, फफूँद, कीड़े-मकोड़े और चूहे साँस की बीमारियों और संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
- पारिवारिक तनाव: घर के अन्य सदस्य परेशान होते हैं, झगड़े बढ़ते हैं और रिश्ते बिगड़ने लगते हैं।
- सामाजिक अलगाव: शर्म और डर के कारण व्यक्ति अकेला पड़ता जाता है।
- आर्थिक और कानूनी परेशानियाँ: अनावश्यक ख़रीदारी से कर्ज़ बढ़ सकता है और असुरक्षित घर की स्थिति में मकान-मालिक या स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई हो सकती है।
- मानसिक स्वास्थ्य पर असर: अवसाद, अकेलापन और आत्मग्लानि आम हैं।
निदान कैसे होता है?
निदान किसी मनोचिकित्सक या क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट द्वारा किया जाता है। वे व्यक्ति से उसके व्यवहार, भावनाओं, जीवन-इतिहास और घर की स्थिति के बारे में विस्तार से बात करते हैं। कभी-कभी परिवार के सदस्यों से भी जानकारी ली जाती है। साथ ही यह देखा जाता है कि यह समस्या किसी अन्य मानसिक या शारीरिक बीमारी, जैसे मस्तिष्क की चोट या मनोभ्रंश (डिमेंशिया), के कारण तो नहीं है।
उपचार: उम्मीद मौजूद है
हालाँकि इसका इलाज चुनौतीपूर्ण है, फिर भी सही सहयोग से काफ़ी सुधार संभव है।
1. संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (CBT)। होर्डिंग के लिए यह सबसे प्रभावी उपचारों में गिनी जाती है। इसमें व्यक्ति सीखता है कि:
- वस्तुओं के बारे में उसकी सोच और भावनाएँ कैसे बनती हैं
- चीज़ों को फेंकने की चिंता को धीरे-धीरे कैसे सहना है
- निर्णय लेने और व्यवस्थित करने के कौशल कैसे विकसित करने हैं
- ख़रीदारी की इच्छा को कैसे नियंत्रित करना है
थेरेपी में अक्सर छोटे लक्ष्य तय किए जाते हैं, जैसे एक दिन में एक दराज़ साफ़ करना।
2. दवाएँ। कुछ मामलों में डॉक्टर SSRI वर्ग की अवसाद-रोधी दवाएँ सुझा सकते हैं, ख़ासकर जब साथ में अवसाद या चिंता भी हो। दवा हमेशा विशेषज्ञ की देखरेख में ही लें।
3. सहायता समूह और पारिवारिक सहयोग। समान समस्या से गुज़र रहे लोगों से बात करने से अकेलापन कम होता है और हौसला मिलता है।
4. प्रशिक्षित सहायक। कुछ जगहों पर प्रोफ़ेशनल ऑर्गनाइज़र मनोचिकित्सक के मार्गदर्शन में घर को व्यवस्थित करने में मदद करते हैं।
एक ज़रूरी बात: व्यक्ति की मर्ज़ी के बिना अचानक पूरा घर साफ़ कर देना ठीक नहीं है। इससे गहरा भावनात्मक आघात लगता है और अक्सर कुछ ही समय में सामान फिर जमा हो जाता है। धीरे-धीरे, सहमति के साथ किया गया बदलाव ही टिकाऊ होता है।
परिवार और दोस्त कैसे मदद करें?
- सहानुभूति रखें। ताने, डाँट या शर्मिंदा करने वाली बातें स्थिति बिगाड़ती हैं। “तुम पागल हो” या “कबाड़ी हो” जैसे शब्द बिल्कुल न कहें।
- समझें कि यह आलस्य या ज़िद नहीं है। यह एक वास्तविक मानसिक समस्या है।
- छोटे कदम प्रोत्साहित करें। एक कोना, एक अलमारी या एक डिब्बा, जो भी वे ख़ुद चुनें।
- पेशेवर मदद के लिए प्रेरित करें। साथ जाकर डॉक्टर से मिलने की पेशकश करें।
- सुरक्षा पर ध्यान दें। रास्ते, निकास और गैस-बिजली के आसपास की जगह साफ़ रखने में सहायता करें।
- धैर्य रखें। सुधार में समय लगता है और बीच में असफलताएँ भी आ सकती हैं।
कुछ आम भ्रांतियाँ
भ्रांति: होर्डर सिर्फ़ आलसी या गंदे लोग होते हैं।
सच्चाई: यह एक मानसिक विकार है, और कई पीड़ित बाहर से बहुत सलीकेदार दिखते हैं।
भ्रांति: सारा सामान एक बार में फेंक देने से समस्या ख़त्म हो जाएगी।
सच्चाई: जब तक अंतर्निहित सोच और भावनाओं पर काम नहीं होता, सामान दोबारा जमा हो जाता है।
भ्रांति: यह सिर्फ़ बुज़ुर्गों की समस्या है।
सच्चाई: इसकी शुरुआत आमतौर पर कम उम्र में होती है, बस गंभीरता बाद में दिखती है।
निष्कर्ष
होर्डिंग डिसऑर्डर एक गंभीर पर उपचार-योग्य मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है। यह न व्यक्ति की कमज़ोरी है, न उसके चरित्र का दोष। जब वस्तुओं से जुड़ाव जीवन की सुरक्षा, स्वास्थ्य और रिश्तों पर भारी पड़ने लगे, तो इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। समय पर पहचान, परिवार का सहयोगी रवैया और विशेषज्ञ की मदद से व्यक्ति धीरे-धीरे अपने घर और जीवन में जगह बना सकता है। यदि आप या आपके परिचित में ऐसे लक्षण दिखें, तो किसी मनोचिकित्सक या क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट से परामर्श अवश्य लें। मदद माँगना कमज़ोरी नहीं, बेहतर जीवन की ओर पहला क़दम है।
