पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID)
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पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID): कारण, लक्षण, इलाज और बचाव

परिचय

महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएँ ऐसी हैं जिन पर लोग खुलकर बात नहीं करते। पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID) उनमें से एक है। हिंदी में इसे पेल्विक संक्रमण या श्रोणि में सूजन की बीमारी कहा जाता है। यह महिलाओं के प्रजनन अंगों में होने वाला संक्रमण है, जो समय पर इलाज न होने पर बाँझपन और लंबे समय तक रहने वाले पेट के निचले हिस्से के दर्द जैसी गंभीर समस्याएँ पैदा कर सकता है। अच्छी बात यह है कि समय पर पहचान और सही इलाज से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।

PID क्या है?

PID महिला के ऊपरी प्रजनन तंत्र का संक्रमण है। इसमें गर्भाशय (यूटरस), फैलोपियन ट्यूब (डिंबवाहिनी नलियाँ), अंडाशय (ओवरी) और कभी-कभी आसपास के ऊतक प्रभावित होते हैं। आमतौर पर संक्रमण योनि या गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) से शुरू होता है और बैक्टीरिया ऊपर की ओर बढ़कर इन अंगों तक पहुँच जाते हैं।

यह समस्या मुख्य रूप से प्रजनन आयु की महिलाओं में, यानी लगभग 15 से 45 वर्ष के बीच, देखी जाती है। कई बार शुरुआती अवस्था में लक्षण इतने हल्के होते हैं कि महिला को पता ही नहीं चलता, और संक्रमण चुपचाप नुकसान पहुँचाता रहता है।

PID के प्रमुख कारण

PID के ज़्यादातर मामलों में कारण बैक्टीरिया होते हैं। मुख्य कारण ये हैं:

1. यौन संचारित संक्रमण (STI): क्लैमाइडिया और गोनोरिया PID के सबसे आम कारण हैं। ये संक्रमण अक्सर बिना लक्षणों के रहते हैं और बिना इलाज के ऊपर की ओर फैल जाते हैं।

2. योनि के सामान्य बैक्टीरिया का असंतुलन: बैक्टीरियल वेजिनोसिस जैसी स्थिति में योनि के हानिकारक बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं और गर्भाशय तक पहुँच सकते हैं।

3. प्रसव, गर्भपात या चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के बाद संक्रमण: डिलीवरी, गर्भपात, डी एंड सी (D&C), या गर्भाशय में कोई उपकरण डालने की प्रक्रिया के दौरान या बाद में अगर स्वच्छता का ध्यान न रखा जाए तो संक्रमण हो सकता है।

4. कॉपर-टी या IUD लगवाना: IUD लगवाने के शुरुआती कुछ हफ्तों में संक्रमण का थोड़ा जोखिम रहता है, खासकर अगर पहले से कोई संक्रमण मौजूद हो। इसीलिए IUD लगवाने से पहले जाँच कराना ज़रूरी है।

जोखिम कारक

कुछ स्थितियों में PID होने की संभावना बढ़ जाती है:

  • कम उम्र में यौन संबंध शुरू करना
  • एक से अधिक यौन साथी होना, या साथी के एक से अधिक संबंध होना
  • असुरक्षित यौन संबंध और कंडोम का उपयोग न करना
  • पहले कभी PID या किसी यौन संक्रमण का होना
  • बार-बार योनि की भीतरी धुलाई (डूशिंग) करना
  • हाल ही में IUD लगवाना
  • मासिक धर्म के दौरान और सामान्य दिनों में व्यक्तिगत स्वच्छता की कमी

PID के लक्षण

PID के लक्षण हर महिला में अलग हो सकते हैं। कुछ में ये तेज़ होते हैं, तो कुछ में बहुत हल्के। सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:

  • पेट के निचले हिस्से या पेल्विक क्षेत्र में दर्द या भारीपन, जो सबसे आम लक्षण है
  • योनि से असामान्य स्राव, जो गाढ़ा, पीला या हरा हो सकता है और जिसमें बदबू आ सकती है
  • यौन संबंध के दौरान दर्द
  • पेशाब करते समय जलन या दर्द
  • मासिक धर्म के बीच में या संबंध के बाद रक्तस्राव
  • मासिक धर्म का सामान्य से ज़्यादा या दर्दनाक होना
  • बुखार और ठंड लगना
  • थकान और कमज़ोरी
  • जी मिचलाना या उल्टी

अगर बुखार तेज़ हो, पेट में बहुत तेज़ दर्द हो या उल्टियाँ रुक न रही हों, तो यह गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकता है और तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।

PID से होने वाली जटिलताएँ

अगर PID का इलाज देर से हो या बिल्कुल न हो, तो इसके दुष्परिणाम लंबे समय तक रह सकते हैं:

बाँझपन (इनफर्टिलिटी): संक्रमण से फैलोपियन ट्यूब में घाव या रुकावट आ सकती है, जिससे अंडाणु और शुक्राणु का मिलन मुश्किल हो जाता है। हर बार PID होने पर यह जोखिम बढ़ता जाता है।

एक्टोपिक प्रेगनेंसी (अस्थानिक गर्भावस्था): ट्यूब क्षतिग्रस्त होने पर भ्रूण गर्भाशय के बाहर, अक्सर ट्यूब में ही, ठहर सकता है। यह जानलेवा स्थिति हो सकती है।

दीर्घकालिक पेल्विक दर्द: कुछ महिलाओं को महीनों या वर्षों तक पेट के निचले हिस्से में दर्द रहता है।

ट्यूबो-ओवेरियन एब्सेस: फैलोपियन ट्यूब या अंडाशय में मवाद की गाँठ बन सकती है, जिसके लिए कभी-कभी सर्जरी या ड्रेनेज की ज़रूरत पड़ती है।

बार-बार संक्रमण: एक बार PID होने के बाद दोबारा होने की संभावना बढ़ जाती है।

निदान: जाँच कैसे होती है?

PID की कोई एक निश्चित जाँच नहीं है, इसलिए डॉक्टर लक्षणों, शारीरिक परीक्षण और जाँचों को मिलाकर निदान करते हैं। आमतौर पर ये कदम उठाए जाते हैं:

  • चिकित्सा इतिहास और पेल्विक परीक्षण: डॉक्टर लक्षणों और यौन इतिहास के बारे में पूछते हैं और जाँचते हैं कि गर्भाशय या ट्यूब छूने पर दर्द तो नहीं करते।
  • योनि और सर्विक्स के स्राव की जाँच: क्लैमाइडिया, गोनोरिया और अन्य बैक्टीरिया का पता लगाने के लिए।
  • रक्त और मूत्र की जाँच: संक्रमण के संकेत देखने और गर्भावस्था की संभावना को अलग करने के लिए।
  • अल्ट्रासाउंड: ट्यूब या अंडाशय में सूजन, पानी या मवाद की गाँठ देखने के लिए।
  • लैप्रोस्कोपी: कठिन या गंभीर मामलों में, जब निदान साफ़ न हो, तब कैमरे वाली पतली नली से भीतर के अंगों को देखा जाता है।

इलाज

PID का इलाज मुख्य रूप से एंटीबायोटिक दवाओं से होता है। चूँकि संक्रमण में एक से ज़्यादा प्रकार के बैक्टीरिया हो सकते हैं, इसलिए आमतौर पर दो या तीन एंटीबायोटिक एक साथ दी जाती हैं।

हल्के से मध्यम मामले: इनमें इंजेक्शन और मुँह से ली जाने वाली दवाओं का कोर्स घर पर किया जा सकता है, जो आमतौर पर 14 दिन का होता है। लक्षण जल्दी ठीक लगने लगें तब भी पूरा कोर्स करना बहुत ज़रूरी है। बीच में दवा छोड़ने से संक्रमण दोबारा उभर सकता है और बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो सकते हैं।

गंभीर मामले: तेज़ बुखार, लगातार उल्टी, गर्भावस्था, मवाद की गाँठ, या घर पर दवा से आराम न मिलने की स्थिति में अस्पताल में भर्ती करके नसों के ज़रिए एंटीबायोटिक दी जाती है।

साथी का इलाज: अगर संक्रमण यौन संबंध से हुआ है, तो साथी की जाँच और इलाज भी ज़रूरी है। ऐसा न करने पर संक्रमण बार-बार लौट सकता है। इलाज के दौरान और पूरा होने तक यौन संबंध से परहेज़ करना चाहिए।

सर्जरी: यह बहुत कम मामलों में ज़रूरी होती है, जैसे जब मवाद की गाँठ फट जाए या दवाओं से ठीक न हो।

IUD वाली महिलाओं में: डॉक्टर स्थिति के अनुसार तय करते हैं कि IUD निकालना है या नहीं। अपने आप कोई फ़ैसला न लें।

अपनी मर्ज़ी से दवा लेना या मेडिकल स्टोर से बिना पर्चे के एंटीबायोटिक लेना ठीक नहीं है। इससे संक्रमण दब सकता है, पर पूरी तरह ख़त्म नहीं होता।

रोकथाम के उपाय

PID से बचाव काफ़ी हद तक संभव है:

  1. सुरक्षित यौन संबंध: कंडोम का नियमित और सही उपयोग STI और PID का जोखिम काफ़ी घटाता है।
  2. एक ही साथी के प्रति निष्ठा और साथी का स्वस्थ होना।
  3. नियमित जाँच: यौन रूप से सक्रिय महिलाओं, खासकर कम उम्र की महिलाओं और नए साथी वाली महिलाओं, को समय-समय पर STI की जाँच करानी चाहिए।
  4. असामान्य लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें: योनि स्राव में बदलाव, जलन या दर्द दिखे तो जल्दी डॉक्टर से मिलें।
  5. डूशिंग से बचें: योनि के भीतर साबुन या रसायनों से धुलाई करने से प्राकृतिक अच्छे बैक्टीरिया नष्ट होते हैं। बाहरी हिस्से की सफ़ाई सादे पानी और हल्के उत्पादों से करना काफ़ी है।
  6. स्वच्छ प्रक्रियाएँ: प्रसव, गर्भपात या IUD लगवाने जैसी प्रक्रियाएँ केवल योग्य डॉक्टर से और स्वच्छ चिकित्सा केंद्र में करवाएँ।
  7. मासिक धर्म में स्वच्छता: पैड या कपड़ा समय पर बदलें और साफ़-सफ़ाई रखें।
  8. पूरा इलाज कराएँ: किसी भी प्रजनन या मूत्र संक्रमण का पूरा इलाज करें, ताकि वह ऊपर की ओर न फैले।

कुछ आम भ्रांतियाँ

भ्रांति: PID केवल अनैतिक आचरण वाली महिलाओं को होता है। यह गलत है। यह एक चिकित्सकीय समस्या है, जो विवाहित महिलाओं में भी हो सकती है, जैसे साथी से संक्रमण मिलने पर या प्रसव के बाद। शर्म या झिझक के कारण इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए।

भ्रांति: लक्षण न हों तो संक्रमण नहीं है। कई बार PID बिना स्पष्ट लक्षणों के भी नुकसान करता रहता है।

भ्रांति: एक बार ठीक हो गया तो दोबारा नहीं होगा। दोबारा संक्रमण संभव है, इसलिए रोकथाम के उपाय जारी रखना ज़रूरी है।

डॉक्टर से कब मिलें?

निम्न स्थितियों में बिना देर किए स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें:

  • पेट के निचले हिस्से में लगातार या बढ़ता दर्द
  • असामान्य या बदबूदार योनि स्राव
  • संबंध के दौरान या बाद में दर्द या रक्तस्राव
  • बुखार के साथ पेल्विक दर्द
  • बहुत तेज़ दर्द, बेहोशी जैसा महसूस होना या लगातार उल्टी, जो आपातकालीन स्थिति हो सकती है

निष्कर्ष

पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज एक गंभीर लेकिन इलाज योग्य स्थिति है। असली खतरा तब बनता है जब इसे नज़रअंदाज़ किया जाता है या शर्म के कारण इलाज टाला जाता है। समय पर जाँच, डॉक्टर की सलाह से पूरा एंटीबायोटिक कोर्स, साथी का इलाज और सुरक्षित यौन व्यवहार, ये चार बातें PID से बचाव और उसके दुष्परिणामों से सुरक्षा का आधार हैं। अपने शरीर में होने वाले बदलावों के प्रति सजग रहना और नियमित स्वास्थ्य जाँच कराना हर महिला के लिए ज़रूरी है।

नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी लक्षण की स्थिति में योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

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