हैंड, फुट एंड माउथ डिजीज (HFMD)
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हैंड, फुट एंड माउथ डिजीज (HFMD): कारण, लक्षण और बचाव

परिचय

हैंड, फुट एंड माउथ डिजीज (Hand, Foot and Mouth Disease – HFMD) एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से छोटे बच्चों, खासकर पांच साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करती है। हालांकि यह बीमारी वयस्कों में भी हो सकती है, लेकिन बच्चों में इसका असर ज़्यादा देखने को मिलता है क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अभी पूरी तरह विकसित नहीं होती। इस बीमारी का नाम इसके लक्षणों से ही पड़ा है — यह मुख्य रूप से हाथों, पैरों और मुंह को प्रभावित करती है, जहां छाले या दाने उभर आते हैं।

यह बीमारी आमतौर पर गंभीर नहीं होती और अधिकतर मामलों में एक हफ्ते से दस दिन के भीतर अपने आप ठीक हो जाती है। फिर भी, इसके बारे में सही जानकारी होना ज़रूरी है ताकि समय पर पहचान की जा सके और इसे फैलने से रोका जा सके।

HFMD का कारण

हैंड, फुट एंड माउथ डिजीज मुख्य रूप से एंटरोवायरस समूह के वायरस से होती है। इनमें सबसे आम कारण कॉक्सैकीवायरस A16 (Coxsackievirus A16) है। इसके अलावा एंटरोवायरस 71 (EV71) भी इस बीमारी के लिए जिम्मेदार हो सकता है, और यह वायरस कभी-कभी ज़्यादा गंभीर लक्षण पैदा कर सकता है।

यह वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद गले और आंतों में बढ़ता है, और फिर धीरे-धीरे त्वचा और मुंह के अंदरूनी हिस्सों को प्रभावित करता है। संक्रमण के बाद लक्षण दिखने में आमतौर पर 3 से 6 दिन का समय लगता है, जिसे इनक्यूबेशन पीरियड कहा जाता है।

बीमारी कैसे फैलती है

HFMD एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है और यह कई तरीकों से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकती है:

  • सीधे संपर्क से – संक्रमित व्यक्ति के छालों के तरल पदार्थ, लार या मल के संपर्क में आने से।
  • खांसने और छींकने से – वायरस हवा में छोटी बूंदों के जरिए फैल सकता है।
  • दूषित सतहों से – खिलौनों, दरवाज़ों के हैंडल, या अन्य वस्तुओं को छूने के बाद हाथ मुंह पर लगाने से।
  • मल-मौखिक मार्ग से – खासकर छोटे बच्चों में, जो डायपर बदलने के दौरान या स्वच्छता का ध्यान न रखने पर हो सकता है।

चूंकि बच्चे अक्सर एक-दूसरे के करीब खेलते हैं और खिलौने साझा करते हैं, इसलिए स्कूलों, डेकेयर सेंटरों और आंगनवाड़ी जैसी जगहों पर यह बीमारी तेज़ी से फैल सकती है।

HFMD के लक्षण

इस बीमारी के लक्षण आमतौर पर चरणबद्ध तरीके से सामने आते हैं:

शुरुआती लक्षण:

  • हल्का से मध्यम बुखार
  • गले में खराश
  • भूख में कमी
  • थकान और सुस्ती
  • चिड़चिड़ापन (खासकर छोटे बच्चों में)

एक-दो दिन बाद दिखने वाले लक्षण:

  • मुंह के अंदर, जीभ पर और मसूड़ों पर दर्दनाक छाले
  • हाथों की हथेलियों और पैरों के तलवों पर लाल दाने या छोटे-छोटे फफोले
  • कभी-कभी घुटनों, कोहनियों और नितंबों पर भी दाने दिखाई दे सकते हैं
  • मुंह में छालों के कारण खाने-पीने में तकलीफ

ये दाने आमतौर पर खुजली नहीं करते, लेकिन कुछ मामलों में हल्की जलन या असहजता हो सकती है। बच्चों में मुंह के छालों के कारण खाना-पीना मुश्किल हो जाता है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है।

किसे ज़्यादा खतरा होता है

  • पांच साल से कम उम्र के बच्चे, विशेषकर वे जो डेकेयर या प्ले-स्कूल जाते हैं
  • कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग
  • वे लोग जो संक्रमित व्यक्ति के करीबी संपर्क में रहते हैं, जैसे माता-पिता या देखभाल करने वाले

एक बार यह बीमारी हो जाने के बाद, शरीर में उस विशेष वायरस के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है, लेकिन चूंकि HFMD कई अलग-अलग वायरस से हो सकती है, इसलिए दोबारा संक्रमण होना असंभव नहीं है।

निदान (Diagnosis)

अधिकतर मामलों में डॉक्टर केवल लक्षणों को देखकर ही HFMD की पहचान कर लेते हैं — मुंह के छाले और हाथ-पैर पर दानों का एक साथ होना इस बीमारी की पहचान का प्रमुख आधार है। सामान्यतः किसी विशेष जांच की आवश्यकता नहीं पड़ती। हालांकि, गंभीर मामलों में या जब निदान स्पष्ट न हो, तो डॉक्टर गले या मल के नमूने की जांच करवा सकते हैं ताकि वायरस की पुष्टि की जा सके।

उपचार

हैंड, फुट एंड माउथ डिजीज का कोई विशिष्ट एंटीवायरल इलाज उपलब्ध नहीं है। चूंकि यह एक वायरल संक्रमण है, इसलिए एंटीबायोटिक दवाएं इस पर असर नहीं करतीं। उपचार मुख्य रूप से लक्षणों को कम करने और आराम देने पर केंद्रित होता है। इसमें शामिल हो सकते हैं:

  • बुखार और दर्द को कम करने के लिए डॉक्टर की सलाह अनुसार दवाएं
  • मुंह के छालों की जलन कम करने के लिए मुंह धोने के उपाय
  • पर्याप्त तरल पदार्थ का सेवन ताकि डिहाइड्रेशन न हो
  • नरम और ठंडे भोजन का सेवन, जो निगलने में आसान हो

किसी भी दवा के इस्तेमाल से पहले डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी है, खासकर छोटे बच्चों के मामले में।

घरेलू देखभाल के सुझाव

  • बच्चे को पर्याप्त आराम करने दें
  • ठंडा पानी, नारियल पानी या अन्य तरल पदार्थ बार-बार दें ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे
  • मसालेदार, खट्टे या कठोर भोजन से बचें, क्योंकि इससे मुंह के छालों में जलन हो सकती है
  • नरम, ठंडा भोजन जैसे दही, खिचड़ी या सूप दें
  • हाथों को बार-बार साबुन से धोने की आदत डालें
  • बच्चे के नाखून छोटे रखें ताकि खरोंचने से संक्रमण न फैले

बचाव के उपाय

चूंकि HFMD का कोई टीका व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है (कुछ देशों में EV71 के लिए सीमित टीके मौजूद हैं), इसलिए बचाव ही सबसे कारगर उपाय है:

  1. हाथों की स्वच्छता – खाने से पहले, टॉयलेट के बाद और डायपर बदलने के बाद साबुन-पानी से हाथ धोना सबसे प्रभावी तरीका है।
  2. संक्रमित बच्चों को अलग रखना – लक्षण दिखने पर बच्चे को स्कूल या डेकेयर न भेजें, जब तक छाले पूरी तरह ठीक न हो जाएं।
  3. वस्तुओं और सतहों की सफाई – खिलौनों, दरवाज़ों के हैंडल और अन्य साझा वस्तुओं को नियमित रूप से कीटाणुरहित करें।
  4. व्यक्तिगत सामान साझा न करें – बर्तन, तौलिये और अन्य निजी सामान संक्रमित व्यक्ति के साथ साझा करने से बचें।
  5. खांसते-छींकते समय मुंह ढकें – ताकि वायरस हवा के जरिए न फैले।

जटिलताएं

अधिकतर मामलों में HFMD बिना किसी गंभीर जटिलता के ठीक हो जाती है। हालांकि, कुछ दुर्लभ मामलों में निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं:

  • डिहाइड्रेशन – मुंह के छालों के कारण पर्याप्त तरल पदार्थ न ले पाने से
  • वायरल मेनिन्जाइटिस – दुर्लभ मामलों में, जब वायरस मस्तिष्क की परतों को प्रभावित करता है
  • एन्सेफलाइटिस – अत्यंत दुर्लभ मामलों में, विशेषकर EV71 वायरस से जुड़े संक्रमणों में
  • नाखूनों का अस्थायी रूप से झड़ना – कुछ बच्चों में ठीक होने के कुछ हफ्तों बाद देखा जाता है

डॉक्टर से कब संपर्क करें

निम्नलिखित स्थितियों में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए:

  • अगर बुखार बहुत तेज़ हो या कई दिनों तक बना रहे
  • बच्चा तरल पदार्थ लेने से पूरी तरह इनकार कर दे और डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखें (जैसे कम पेशाब आना, सुस्ती)
  • गर्दन में अकड़न, तेज़ सिरदर्द या असामान्य नींद आना
  • लक्षण एक हफ्ते से ज़्यादा समय तक बने रहें
  • सांस लेने में तकलीफ या बार-बार उल्टी होना

निष्कर्ष

हैंड, फुट एंड माउथ डिजीज एक आम लेकिन अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्यतः छोटे बच्चों को प्रभावित करती है। अधिकतर मामलों में यह हल्की होती है और बिना किसी विशेष इलाज के अपने आप ठीक हो जाती है। सही स्वच्छता आदतें अपनाकर, संक्रमित व्यक्ति को दूसरों से अलग रखकर और साफ-सफाई का ध्यान रखकर इस बीमारी के फैलाव को काफी हद तक रोका जा सकता है। अगर लक्षण गंभीर हों या बढ़ते जाएं, तो समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना सबसे बेहतर कदम है।

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