गैलेक्टोसिमिया (Galactosemia): नवजात शिशुओं में दूध से जुड़ी एक गंभीर आनुवंशिक बीमारी
परिचय
माँ का दूध नवजात शिशु के लिए सबसे अच्छा आहार माना जाता है, लेकिन कुछ दुर्लभ बच्चों के लिए यही दूध खतरनाक हो सकता है। इसका कारण है गैलेक्टोसिमिया, एक जन्मजात आनुवंशिक बीमारी। इसमें शरीर दूध में मौजूद शर्करा के एक हिस्से, गैलेक्टोज़, को ठीक से पचा नहीं पाता। समय पर पहचान और सही आहार से बच्चा स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ सकता है, लेकिन देरी होने पर गंभीर और कभी-कभी जानलेवा जटिलताएँ हो सकती हैं।
गैलेक्टोसिमिया क्या है?
दूध और दुग्ध उत्पादों में लैक्टोज़ नामक प्राकृतिक शर्करा होती है। पाचन के दौरान लैक्टोज़ दो सरल शर्कराओं, ग्लूकोज़ और गैलेक्टोज़, में टूट जाता है। ग्लूकोज़ शरीर को सीधे ऊर्जा देता है, जबकि गैलेक्टोज़ को पहले कुछ एंजाइमों की मदद से ग्लूकोज़ में बदलना पड़ता है।
गैलेक्टोसिमिया में इन्हीं एंजाइमों में से कोई एक अनुपस्थित या बहुत कम सक्रिय होता है। नतीजतन गैलेक्टोज़ और उसके हानिकारक उप-उत्पाद (जैसे गैलेक्टोज़-1-फॉस्फेट और गैलेक्टिटॉल) रक्त और अंगों में जमा होने लगते हैं। ये पदार्थ यकृत (लिवर), मस्तिष्क, आँखों और अन्य अंगों को नुकसान पहुँचाते हैं।
अनुमान है कि क्लासिक गैलेक्टोसिमिया लगभग 30,000 से 60,000 जन्मों में से एक बच्चे को होता है। यह दर अलग-अलग आबादियों में अलग हो सकती है।
गैलेक्टोसिमिया के प्रकार
यह बीमारी मुख्यतः तीन प्रकार की होती है, जो अलग-अलग एंजाइम की कमी से जुड़े हैं:
1. टाइप I (क्लासिक गैलेक्टोसिमिया): इसमें GALT (गैलेक्टोज़-1-फॉस्फेट यूरिडिलट्रांसफरेज़) एंजाइम की गंभीर कमी होती है। यह सबसे आम और सबसे गंभीर प्रकार है।
2. टाइप II: इसमें GALK (गैलेक्टोकाइनेज़) एंजाइम की कमी होती है। इसका मुख्य लक्षण बचपन में मोतियाबिंद है, और अन्य जटिलताएँ अपेक्षाकृत कम होती हैं।
3. टाइप III: इसमें GALE (यूडीपी-गैलेक्टोज़-4-एपिमरेज़) एंजाइम की कमी होती है। इसका स्वरूप बहुत हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकता है।
इनके अलावा ड्यूआर्टे वैरिएंट नामक एक हल्का रूप भी है, जिसमें एंजाइम की गतिविधि आंशिक रूप से कम होती है। अधिकांश मामलों में इसमें कठोर आहार-प्रतिबंध की आवश्यकता नहीं पड़ती, फिर भी यह निर्णय डॉक्टर ही करते हैं।
कारण: यह बीमारी कैसे होती है?
गैलेक्टोसिमिया एक ऑटोसोमल रिसेसिव आनुवंशिक विकार है। इसका मतलब है कि बच्चे को यह बीमारी तभी होती है जब उसे माता और पिता, दोनों से खराब जीन की एक-एक प्रति मिले।
- माता-पिता आमतौर पर वाहक (carrier) होते हैं। उनके पास एक सामान्य और एक परिवर्तित जीन होता है, इसलिए उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते।
- यदि दोनों माता-पिता वाहक हैं, तो हर गर्भावस्था में बच्चे के प्रभावित होने की संभावना 25%, वाहक होने की 50% और पूरी तरह स्वस्थ होने की 25% रहती है।
- जिन परिवारों में पहले किसी बच्चे को यह बीमारी हो चुकी हो या करीबी रिश्तेदारों में विवाह हुआ हो, वहाँ जोखिम अधिक हो सकता है।
लक्षण
क्लासिक गैलेक्टोसिमिया के लक्षण आमतौर पर जन्म के कुछ दिनों के भीतर, दूध पीना शुरू करने के बाद दिखते हैं:
- दूध पीने में अरुचि और बार-बार उल्टी
- दस्त
- सुस्ती, चिड़चिड़ापन और कमज़ोर चूसना
- वज़न न बढ़ना और विकास में रुकावट
- पीलिया (Jaundice), जो सामान्य से अधिक लंबे समय तक बना रहता है
- लिवर का बढ़ना और लिवर की कार्यक्षमता में गड़बड़ी
- आँखों में मोतियाबिंद, जो कभी-कभी शुरुआती दिनों में ही बन जाता है
- रक्तस्राव की प्रवृत्ति
सबसे बड़ा खतरा गंभीर संक्रमण (सेप्सिस) का है, खासकर E. coli जैसे जीवाणुओं से। क्लासिक गैलेक्टोसिमिया वाले नवजातों में इसका जोखिम अधिक होता है, और समय पर इलाज न मिले तो जान भी जा सकती है। यदि नवजात दूध पीने के बाद अचानक बीमार पड़ जाए और पीलिया, उल्टी या सुस्ती हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
संभावित दीर्घकालिक जटिलताएँ
जल्दी निदान और सख्त आहार के बावजूद कुछ बच्चों में आगे चलकर समस्याएँ आ सकती हैं। इनमें शामिल हैं:
- सीखने में कठिनाई और बौद्धिक विकास में देरी
- बोलने और भाषा संबंधी समस्याएँ (जैसे स्पीच डिस्प्रैक्सिया)
- हाथों में कंपन या समन्वय की दिक्कतें
- लड़कियों में अंडाशय की समय से पहले कमज़ोरी (Premature Ovarian Insufficiency), जिससे मासिक धर्म देर से शुरू होना या प्रजनन क्षमता में कमी हो सकती है
- हड्डियों का कमज़ोर होना (कम अस्थि घनत्व)
ये जटिलताएँ शरीर में गैलेक्टोज़ के अंदरूनी उत्पादन और अन्य कारकों से भी जुड़ी हो सकती हैं, इसलिए हर बच्चे में इनका स्वरूप अलग-अलग होता है।
निदान कैसे होता है?
- नवजात शिशु की स्क्रीनिंग: कई देशों में जन्म के कुछ दिनों के भीतर एड़ी से खून की कुछ बूँदें लेकर जाँच की जाती है। यह सबसे प्रभावी तरीका है, क्योंकि लक्षण उभरने से पहले ही बीमारी पकड़ में आ सकती है। भारत में यह जाँच अभी सभी जगह नियमित रूप से उपलब्ध नहीं है, इसलिए अभिभावक अपने बाल रोग विशेषज्ञ से इसके बारे में पूछ सकते हैं।
- एंजाइम टेस्ट: लाल रक्त कोशिकाओं में GALT, GALK या GALE की गतिविधि मापी जाती है।
- गैलेक्टोज़-1-फॉस्फेट की जाँच: रक्त में इसका स्तर बढ़ा होना बीमारी का संकेत देता है।
- जेनेटिक टेस्ट: जीन में बदलाव की पुष्टि के लिए, जो परिवार की आगे की योजना के लिए भी उपयोगी होता है।
- मूत्र परीक्षण: पेशाब में रिड्यूसिंग शुगर की उपस्थिति भी संकेत दे सकती है, पर अकेले यह पर्याप्त नहीं है।
उपचार: गैलेक्टोज़-मुक्त आहार
फिलहाल गैलेक्टोसिमिया का मुख्य उपचार आहार से गैलेक्टोज़ को हटाना है। जैसे ही निदान पर संदेह हो, शिशु को माँ का दूध और सामान्य फॉर्मूला दूध देना तुरंत बंद कर देना चाहिए। इसके बजाय डॉक्टर की सलाह पर लैक्टोज़-मुक्त विशेष फॉर्मूला (जैसे सोया-आधारित या एलिमेंटल फॉर्मूला) दिया जाता है।
परहेज़ वाली प्रमुख चीज़ें:
- गाय, भैंस और बकरी का दूध तथा माँ का दूध (शिशुओं के लिए)
- दही, पनीर, छाछ, मक्खन, मलाई, आइसक्रीम और खोया/मावा
- दूध वाली मिठाइयाँ, चॉकलेट और दूध मिश्रित बेकरी उत्पाद
- कई प्रोसेस्ड और पैकेज्ड खाद्य पदार्थ, जिनमें दूध या लैक्टोज़ छिपा हो सकता है
सावधानियाँ:
- हर पैकेट का लेबल ध्यान से पढ़ना ज़रूरी है। “मिल्क सॉलिड्स”, “व्हे”, “केसीन” और “लैक्टोज़” जैसे शब्द चेतावनी के संकेत हैं।
- कई दवाओं और सप्लीमेंट्स में लैक्टोज़ का उपयोग भराव (filler) के रूप में होता है। कोई भी दवा देने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से पूछना चाहिए।
- कुछ फल, सब्ज़ियाँ और दालों में गैलेक्टोज़ की थोड़ी मात्रा प्राकृतिक रूप से होती है। इन्हें कितना लेना है, यह पंजीकृत आहार-विशेषज्ञ (डायटीशियन) की सलाह से तय करें।
- दूध हटाने से कैल्शियम और विटामिन D की कमी हो सकती है, इसलिए डॉक्टर की निगरानी में इनकी पूर्ति करनी चाहिए।
गैलेक्टोसिमिया के मरीज को यह आहार जीवनभर अपनाना पड़ता है, लेकिन इसकी सख्ती कितनी रखनी है, यह बीमारी के प्रकार और मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। यह निर्णय विशेषज्ञ चिकित्सक ही लें।
नियमित निगरानी और देखभाल
आहार शुरू करने के बाद भी लगातार अनुवर्ती जाँच (follow-up) आवश्यक है:
- समय-समय पर रक्त में गैलेक्टोज़-1-फॉस्फेट का स्तर जाँचना
- आँखों की जाँच, मोतियाबिंद के लिए
- बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास का आकलन
- ज़रूरत पड़ने पर स्पीच थेरेपी और विशेष शिक्षा सहायता
- किशोरावस्था में लड़कियों के लिए प्रजनन-स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन
- हड्डियों के स्वास्थ्य की जाँच
एक बहु-विषयक टीम, जिसमें बाल रोग विशेषज्ञ, मेटाबॉलिक/जेनेटिक विशेषज्ञ, आहार-विशेषज्ञ और नेत्र रोग विशेषज्ञ शामिल हों, बच्चे की देखभाल के लिए सबसे उपयुक्त होती है।
रोकथाम और आनुवंशिक परामर्श
गैलेक्टोसिमिया को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, क्योंकि यह जीन से जुड़ी बीमारी है। लेकिन:
- जिन दंपतियों के परिवार में यह बीमारी रही हो, वे आनुवंशिक परामर्श (Genetic Counselling) ले सकते हैं।
- वाहक-जाँच से जोखिम का पता लगाया जा सकता है।
- कुछ मामलों में गर्भावस्था के दौरान प्रसव-पूर्व निदान संभव है।
- जिस परिवार में एक बच्चे को यह बीमारी हो, वहाँ अगले शिशु के जन्म पर तुरंत जाँच कराना बेहद ज़रूरी है।
समाज और परिवार की भूमिका
इस बीमारी में परिवार का सहयोग सबसे अहम है। घर के सभी सदस्यों, दादा-दादी, रिश्तेदारों और स्कूल के शिक्षकों को यह समझाना चाहिए कि बच्चा दूध या दूध से बनी चीज़ें क्यों नहीं खा सकता। त्योहारों, जन्मदिन और पार्टियों में मिठाइयों और पकवानों को लेकर विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। बच्चा बड़ा होने पर उसे धीरे-धीरे अपने आहार के बारे में जागरूक बनाना चाहिए, ताकि वह खुद समझदारी से चुनाव कर सके।
निष्कर्ष
गैलेक्टोसिमिया एक दुर्लभ लेकिन गंभीर चयापचय रोग है, जिसमें शरीर दूध की शर्करा गैलेक्टोज़ को पचा नहीं पाता। इसके लक्षण जन्म के शुरुआती दिनों में ही उभर सकते हैं, और उपचार में देरी जानलेवा साबित हो सकती है। अच्छी बात यह है कि नवजात स्क्रीनिंग, शीघ्र निदान और गैलेक्टोज़-मुक्त आहार से अधिकांश बच्चे लंबा और अपेक्षाकृत सामान्य जीवन जी सकते हैं। यदि आपके नवजात को दूध पीने के बाद उल्टी, पीलिया या असामान्य सुस्ती हो, तो बिना देर किए चिकित्सक से मिलें।
