ईोसिनोफिलिक एसोफेगाइटिस (Eosinophilic Esophagitis - भोजन नली में एलर्जी)
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ईोसिनोफिलिक एसोफेगाइटिस (Eosinophilic Esophagitis): भोजन नली में एलर्जी की पूरी जानकारी

परिचय

ईोसिनोफिलिक एसोफेगाइटिस, जिसे संक्षेप में EoE भी कहा जाता है, एक दीर्घकालिक (क्रॉनिक) सूजन संबंधी रोग है जो भोजन नली यानी अन्ननली (Esophagus) को प्रभावित करता है। यह रोग मुख्य रूप से एलर्जी की प्रतिक्रिया के कारण होता है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली अन्ननली की परत में एक विशेष प्रकार की श्वेत रक्त कोशिका, जिसे ईोसिनोफिल कहते हैं, को असामान्य मात्रा में जमा कर देती है। यह कोशिकाएं सामान्यतः शरीर को परजीवियों और एलर्जी कारकों से लड़ने में मदद करती हैं, लेकिन जब ये अन्ननली की दीवार में अत्यधिक जमा हो जाती हैं, तो वहां सूजन, जलन और क्षति पहुंचाती हैं।

पिछले कुछ दशकों में इस बीमारी के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है, और अब यह बच्चों तथा वयस्कों दोनों में भोजन निगलने की समस्याओं का एक प्रमुख कारण मानी जाती है। यह कोई संक्रामक रोग नहीं है, बल्कि एक एलर्जिक और इम्यून-मध्यस्थ (immune-mediated) स्थिति है।

ईोसिनोफिलिक एसोफेगाइटिस के कारण

EoE का सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह आनुवंशिक (genetic) प्रवृत्ति और पर्यावरणीय कारकों के मेल से उत्पन्न होता है। कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:

  • खाद्य एलर्जी: दूध, अंडा, गेहूं, सोया, मूंगफली, ट्री नट्स और समुद्री भोजन जैसे खाद्य पदार्थ सबसे आम एलर्जी ट्रिगर माने जाते हैं। इन खाद्य पदार्थों के प्रति शरीर की अतिसंवेदनशील प्रतिक्रिया अन्ननली में सूजन पैदा करती है।
  • वायुजनित एलर्जन: पराग (pollen), धूल के कण, पालतू जानवरों के बाल जैसे वायुजनित एलर्जी कारक भी इस रोग को बढ़ा सकते हैं, इसीलिए कुछ मरीजों में मौसम बदलने पर लक्षण बिगड़ जाते हैं।
  • आनुवंशिक प्रवृत्ति: यदि परिवार में किसी को एलर्जी संबंधी रोग, अस्थमा या एक्जिमा रहा हो, तो EoE होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • अन्य एलर्जिक रोगों का इतिहास: जिन लोगों को पहले से अस्थमा, एलर्जिक राइनाइटिस (एलर्जी से नाक बहना), या एटोपिक डर्मेटाइटिस (त्वचा की एलर्जी) है, उनमें EoE विकसित होने का खतरा अधिक होता है। इस समूह को “एटोपिक ट्रायड” कहा जाता है।

प्रमुख लक्षण

ईोसिनोफिलिक एसोफेगाइटिस के लक्षण उम्र के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

वयस्कों में लक्षण:

  • भोजन निगलने में कठिनाई (डिस्फेगिया), विशेष रूप से ठोस भोजन निगलते समय
  • भोजन का अन्ननली में फंस जाना (food impaction), जो कभी-कभी आपातकालीन स्थिति बन सकती है
  • सीने में जलन या दर्द, जो एसिड रिफ्लक्स (GERD) जैसा महसूस होता है लेकिन दवाओं से पूरी तरह ठीक नहीं होता
  • छाती के बीचोंबीच दर्द
  • उल्टी जैसा महसूस होना

बच्चों में लक्षण:

  • खाने से इनकार करना या धीरे-धीरे खाना
  • पेट दर्द
  • उल्टी या जी मिचलाना
  • वजन ठीक से न बढ़ना या बढ़ने में देरी होना
  • छोटे बच्चों में दूध पिलाने में दिक्कत
  • नींद में खलल

क्योंकि ये लक्षण अन्य पाचन संबंधी रोगों, जैसे GERD (गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज) से मिलते-जुलते हैं, इसलिए अक्सर सही निदान होने में समय लग जाता है।

निदान की प्रक्रिया

EoE का निदान करने के लिए डॉक्टर आमतौर पर निम्नलिखित तरीके अपनाते हैं:

  1. एंडोस्कोपी (Upper GI Endoscopy): इसमें एक पतली, कैमरे वाली नली मुंह के रास्ते अन्ननली में डाली जाती है ताकि अंदरूनी परत को देखा जा सके। EoE में अन्ननली की दीवार पर सफेद धब्बे, छल्लेनुमा बनावट (rings), संकुचन (strictures) या रेखीय दरारें (linear furrows) दिखाई दे सकती हैं।
  2. बायोप्सी: एंडोस्कोपी के दौरान अन्ननली से ऊतक के छोटे नमूने लिए जाते हैं। यदि माइक्रोस्कोप के नीचे प्रति हाई-पावर फील्ड में 15 या उससे अधिक ईोसिनोफिल कोशिकाएं पाई जाती हैं, तो यह EoE की पुष्टि करता है।
  3. एलर्जी परीक्षण: त्वचा प्रिक टेस्ट (skin prick test) या रक्त परीक्षण के माध्यम से यह पता लगाया जाता है कि कौन से खाद्य पदार्थ या पर्यावरणीय तत्व एलर्जी का कारण बन रहे हैं।
  4. बेरियम स्वैलो टेस्ट: कुछ मामलों में अन्ननली की संरचना और उसमें किसी संकुचन का पता लगाने के लिए यह एक्स-रे आधारित जांच की जाती है।

उपचार के विकल्प

EoE का उपचार आमतौर पर तीन मुख्य दिशाओं में किया जाता है — दवाएं, आहार में बदलाव, और आवश्यकता पड़ने पर प्रक्रिया संबंधी हस्तक्षेप।

1. दवाएं

  • प्रोटॉन पंप इनहिबिटर्स (PPI): पहले चरण में अक्सर एसिड कम करने वाली दवाएं दी जाती हैं, क्योंकि कुछ मरीजों में इनसे लक्षणों और सूजन दोनों में सुधार होता है।
  • टॉपिकल स्टेरॉयड्स: फ्लूटिकासोन या बुडेसोनाइड जैसी स्टेरॉयड दवाएं, जिन्हें निगला जाता है (इन्हेलर के माध्यम से मुंह में स्प्रे करके या घोल के रूप में), सीधे अन्ननली की सूजन को कम करने में प्रभावी होती हैं।
  • बायोलॉजिक दवाएं: गंभीर या दवा-प्रतिरोधी मामलों में डूपिलुमैब (Dupilumab) जैसी नई बायोलॉजिक थेरेपी का उपयोग किया जाता है, जो इम्यून प्रतिक्रिया को नियंत्रित करती है।

2. आहार में बदलाव (Dietary Therapy)

आहार प्रबंधन EoE के उपचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें कुछ मुख्य तरीके अपनाए जाते हैं:

  • सिक्स फूड एलिमिनेशन डाइट (Six-Food Elimination Diet – SFED): इसमें दूध, अंडा, गेहूं, सोया, मूंगफली/ट्री नट्स और मछली/समुद्री भोजन जैसे छह सबसे आम एलर्जी कारक खाद्य पदार्थों को आहार से पूरी तरह हटा दिया जाता है, और बाद में एक-एक करके दोबारा शामिल करके देखा जाता है कि किससे लक्षण बिगड़ते हैं।
  • लक्षित एलिमिनेशन डाइट: एलर्जी परीक्षण के परिणामों के आधार पर केवल विशेष खाद्य पदार्थों को हटाया जाता है।
  • एलिमेंटल डाइट: गंभीर मामलों में, विशेष रूप से बच्चों में, पूरी तरह अमीनो एसिड आधारित फॉर्मूला दिया जाता है, जिसमें एलर्जी पैदा करने वाला कोई भी तत्व नहीं होता।

3. प्रक्रिया संबंधी उपचार

यदि अन्ननली में संकुचन (stricture) बन गया हो और भोजन निगलने में गंभीर कठिनाई हो, तो डॉक्टर एसोफेजियल डायलेशन नामक प्रक्रिया अपना सकते हैं, जिसमें एक विशेष गुब्बारे या डायलेटर की मदद से अन्ननली को धीरे-धीरे चौड़ा किया जाता है।

जटिलताएं

अगर EoE का समय पर उपचार न किया जाए, तो निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं:

  • अन्ननली का स्थायी रूप से संकरा हो जाना (fibrostenosis)
  • बार-बार भोजन का गले में फंसना, जो एक आपातकालीन स्थिति बन सकती है
  • बच्चों में पोषण की कमी और वृद्धि में बाधा
  • जीवन की गुणवत्ता में गिरावट, क्योंकि मरीज धीरे-धीरे खाने से बचने लगते हैं

जीवनशैली और देखभाल संबंधी सुझाव

  • भोजन को अच्छी तरह चबाकर, धीरे-धीरे खाएं
  • खाने के साथ पर्याप्त पानी या तरल पदार्थ लें ताकि निगलने में आसानी हो
  • सूखे, कड़े या रेशेदार खाद्य पदार्थों से जो एलर्जी ट्रिगर हैं, बचें
  • डॉक्टर की सलाह पर नियमित एंडोस्कोपी और फॉलो-अप कराते रहें ताकि सूजन की स्थिति की निगरानी हो सके
  • यदि परिवार में एलर्जी संबंधी रोगों का इतिहास है, तो लक्षण दिखते ही जांच कराएं

डॉक्टर से कब मिलें

यदि आपको या आपके बच्चे को बार-बार भोजन निगलने में कठिनाई हो रही है, भोजन गले में फंस रहा है, सीने में लगातार जलन रहती है जो सामान्य एसिडिटी की दवाओं से ठीक नहीं होती, या वजन बढ़ने में समस्या आ रही है, तो बिना देर किए किसी गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट (पाचन तंत्र विशेषज्ञ) से परामर्श लेना चाहिए। समय पर निदान और सही उपचार से इस बीमारी को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है और जटिलताओं से बचा जा सकता है।

निष्कर्ष

ईोसिनोफिलिक एसोफेगाइटिस एक दीर्घकालिक एलर्जिक रोग है जो भोजन नली को प्रभावित करता है, लेकिन उचित निदान, आहार प्रबंधन और दवाओं की मदद से इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। जागरूकता बढ़ने और चिकित्सा विज्ञान में हो रही प्रगति के साथ, आज इस बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए बेहतर उपचार विकल्प उपलब्ध हैं। यदि लक्षण दिखाई दें, तो समय पर विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लेना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

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