डायस्टेसिस रेक्टी (Diastasis Recti): डिलीवरी के बाद पेट की मांसपेशियों का अलग होना
गर्भावस्था और प्रसव हर महिला के जीवन का एक महत्वपूर्ण और सुखद अनुभव होता है। हालांकि, डिलीवरी के बाद शरीर में कई शारीरिक परिवर्तन होते हैं, जिनमें से एक आम लेकिन अक्सर अनदेखी की जाने वाली समस्या है डायस्टेसिस रेक्टी (Diastasis Recti)। इस स्थिति में पेट की सामने वाली सीधी मांसपेशियां (Rectus Abdominis Muscles) बीच की संयोजी ऊतक (Linea Alba) के फैल जाने के कारण एक-दूसरे से अलग हो जाती हैं।
कई महिलाएं डिलीवरी के महीनों बाद भी पेट बाहर निकला हुआ महसूस करती हैं और इसे केवल बढ़ी हुई चर्बी समझ लेती हैं, जबकि वास्तविक कारण डायस्टेसिस रेक्टी हो सकता है। यदि समय रहते इसका सही मूल्यांकन और फिजियोथेरेपी उपचार किया जाए, तो अधिकांश महिलाओं में अच्छे परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
इस लेख में हम डायस्टेसिस रेक्टी के कारण, लक्षण, जोखिम कारक, जांच, उपचार, फिजियोथेरेपी और बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
डायस्टेसिस रेक्टी क्या है?
डायस्टेसिस रेक्टी वह स्थिति है जिसमें पेट की दोनों सीधी मांसपेशियां (Six Pack Muscles) बीच से अलग हो जाती हैं। सामान्य रूप से इन दोनों मांसपेशियों को Linea Alba नामक मजबूत संयोजी ऊतक जोड़कर रखता है।
गर्भावस्था के दौरान बढ़ते हुए गर्भाशय और हार्मोनल बदलावों के कारण यह ऊतक खिंचने लगता है। परिणामस्वरूप दोनों मांसपेशियों के बीच दूरी बढ़ जाती है।
डिलीवरी के बाद अधिकांश महिलाओं में यह दूरी धीरे-धीरे कम हो जाती है, लेकिन कुछ महिलाओं में यह लंबे समय तक बनी रहती है।
डायस्टेसिस रेक्टी क्यों होती है?
इसके कई कारण हो सकते हैं:
- गर्भावस्था के दौरान पेट का अत्यधिक फैलना
- जुड़वा या एक से अधिक शिशुओं की गर्भावस्था
- बड़े वजन वाले बच्चे का जन्म
- बार-बार गर्भधारण
- उम्र अधिक होना
- पेट की मांसपेशियों का पहले से कमजोर होना
- गलत तरीके से भारी वजन उठाना
- मोटापा
किन महिलाओं में इसका खतरा अधिक होता है?
निम्न परिस्थितियों में डायस्टेसिस रेक्टी होने की संभावना अधिक होती है—
- 35 वर्ष से अधिक आयु
- एक से अधिक बार गर्भधारण
- जुड़वा बच्चों की गर्भावस्था
- सी-सेक्शन (Cesarean Delivery)
- अधिक वजन
- पेट की मांसपेशियों की कमजोरी
- गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक वजन बढ़ना
इसके प्रमुख लक्षण
डायस्टेसिस रेक्टी के लक्षण व्यक्ति-व्यक्ति में अलग हो सकते हैं।
मुख्य लक्षण हैं—
- पेट का बीच से बाहर निकला हुआ दिखाई देना
- लेटकर उठते समय पेट के बीच उभार बनना
- पेट की कमजोरी
- कमर दर्द
- लंबे समय तक खड़े रहने में कठिनाई
- कोर मांसपेशियों की कमजोरी
- गलत पोश्चर
- कब्ज की समस्या
- वजन कम होने के बाद भी पेट बाहर रहना
घर पर इसकी जांच कैसे करें?
प्राथमिक जांच के लिए निम्न तरीका अपनाया जा सकता है—
- पीठ के बल लेट जाएं।
- घुटनों को मोड़ लें।
- एक हाथ की उंगलियां नाभि के ऊपर रखें।
- सिर को हल्का ऊपर उठाएं।
- यदि उंगलियां मांसपेशियों के बीच अधिक गहराई तक चली जाएं, तो डायस्टेसिस रेक्टी की संभावना हो सकती है।
हालांकि अंतिम पुष्टि फिजियोथेरेपिस्ट या चिकित्सक द्वारा की जानी चाहिए।
क्या डायस्टेसिस रेक्टी अपने आप ठीक हो जाती है?
कुछ महिलाओं में डिलीवरी के बाद पहले 6–8 सप्ताह में स्वतः सुधार होने लगता है।
लेकिन यदि—
- 3–6 महीने बाद भी पेट बाहर दिखाई दे,
- कमर दर्द बना रहे,
- मांसपेशियों में कमजोरी बनी रहे,
तो फिजियोथेरेपी उपचार लेना चाहिए।
फिजियोथेरेपी क्यों आवश्यक है?
फिजियोथेरेपी डायस्टेसिस रेक्टी के उपचार का सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका माना जाता है।
फिजियोथेरेपिस्ट निम्न कार्य करते हैं—
- मांसपेशियों की दूरी का मूल्यांकन
- कोर मसल्स की जांच
- पेल्विक फ्लोर का मूल्यांकन
- सही व्यायाम योजना
- पोश्चर सुधार
- दैनिक गतिविधियों का प्रशिक्षण
डायस्टेसिस रेक्टी में सुरक्षित एक्सरसाइज
1. डायफ्रामेटिक ब्रीदिंग (Diaphragmatic Breathing)
यह पेट की गहरी मांसपेशियों को सक्रिय करती है।
कैसे करें
- आराम से लेट जाएं।
- धीरे-धीरे गहरी सांस लें।
- सांस छोड़ते समय पेट को हल्का अंदर खींचें।
- 10–15 बार दोहराएं।
2. ट्रांसवर्सस एब्डोमिनिस एक्टिवेशन
यह सबसे महत्वपूर्ण व्यायाम माना जाता है।
- पेट को धीरे-धीरे अंदर खींचें।
- सामान्य सांस लेते रहें।
- 10 सेकंड तक रोकें।
- 10–15 बार करें।
3. पेल्विक टिल्ट
- पीठ के बल लेटें।
- कमर को जमीन की ओर दबाएं।
- पेट हल्का अंदर रखें।
- 10–15 बार करें।
4. हील स्लाइड
- एक पैर को धीरे-धीरे आगे सरकाएं।
- पेट को अंदर रखें।
- दोनों पैरों से 10–10 बार करें।
5. ब्रिज एक्सरसाइज
- घुटने मोड़ें।
- धीरे-धीरे कूल्हों को ऊपर उठाएं।
- कुछ सेकंड रोकें।
- धीरे-धीरे नीचे आएं।
6. केगल एक्सरसाइज
पेल्विक फ्लोर मजबूत होने से कोर की स्थिरता भी बेहतर होती है।
किन एक्सरसाइज से बचना चाहिए?
डायस्टेसिस रेक्टी होने पर निम्न व्यायाम बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करने चाहिए—
- सिट-अप्स
- क्रंचेस
- लेग रेज
- डबल लेग लिफ्ट
- प्लैंक (शुरुआती अवस्था में)
- भारी वजन उठाना
- अत्यधिक ट्विस्टिंग एक्सरसाइज
ये मांसपेशियों की दूरी और बढ़ा सकते हैं।
दैनिक जीवन में क्या सावधानियां रखें?
- बिस्तर से उठते समय पहले करवट लें।
- अचानक झटके से न उठें।
- भारी सामान न उठाएं।
- सही पोश्चर बनाए रखें।
- कब्ज से बचें।
- अत्यधिक वजन बढ़ने से बचें।
- धीरे-धीरे नियमित व्यायाम करें।
क्या पेट बांधने वाली बेल्ट (Abdominal Binder) लाभदायक है?
डिलीवरी के बाद कुछ समय तक एब्डोमिनल बाइंडर या सपोर्ट बेल्ट आराम दे सकती है और शुरुआती सहारा प्रदान कर सकती है, लेकिन यह स्वयं डायस्टेसिस रेक्टी को ठीक नहीं करती।
स्थायी सुधार के लिए सही फिजियोथेरेपी व्यायाम और कोर मांसपेशियों को मजबूत करना आवश्यक है। बेल्ट का उपयोग केवल विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करें।
क्या सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है?
अधिकांश मामलों में सर्जरी की जरूरत नहीं होती।
सर्जरी पर विचार तब किया जा सकता है जब—
- मांसपेशियों का अलगाव बहुत अधिक हो।
- हर्निया मौजूद हो।
- कई महीनों की फिजियोथेरेपी के बाद भी सुधार न हो।
- दैनिक जीवन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा हो।
क्या इसे रोका जा सकता है?
पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन जोखिम कम किया जा सकता है।
- गर्भावस्था में सुरक्षित व्यायाम करें।
- अत्यधिक वजन बढ़ने से बचें।
- सही पोश्चर रखें।
- नियमित वॉक करें।
- पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज करें।
- डिलीवरी के बाद जल्दबाजी में कठिन व्यायाम शुरू न करें।
- फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह के अनुसार पोस्टनेटल रिहैबिलिटेशन करें।
कब डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से मिलें?
यदि—
- डिलीवरी के 8–12 सप्ताह बाद भी पेट बाहर रहे,
- पेट के बीच स्पष्ट उभार दिखाई दे,
- कमर दर्द लगातार बना रहे,
- पेट में कमजोरी महसूस हो,
- हर्निया का संदेह हो,
- व्यायाम करने पर दर्द बढ़े,
तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें।
निष्कर्ष
डायस्टेसिस रेक्टी डिलीवरी के बाद होने वाली एक सामान्य लेकिन महत्वपूर्ण समस्या है। इसे केवल पेट की चर्बी समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। समय पर पहचान, सही फिजियोथेरेपी, सुरक्षित कोर एक्सरसाइज, पेल्विक फ्लोर प्रशिक्षण और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर अधिकांश महिलाएं इस समस्या से सफलतापूर्वक उबर सकती हैं।
यदि डिलीवरी के कई महीनों बाद भी पेट का उभार कम नहीं हो रहा है या कमर दर्द और कमजोरी बनी हुई है, तो स्वयं कठिन व्यायाम करने के बजाय योग्य फिजियोथेरेपिस्ट से मूल्यांकन करवाएं। सही मार्गदर्शन के साथ नियमित अभ्यास करने पर शरीर की ताकत, पोश्चर और आत्मविश्वास—तीनों में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
