डिलेरियम ट्रेमेंस: शराब छोड़ने पर होने वाली जानलेवा स्थिति
प्रस्तावना
बहुत से लोग मानते हैं कि शराब छोड़ना सिर्फ इच्छाशक्ति का मामला है। लेकिन जो व्यक्ति लंबे समय से और अधिक मात्रा में शराब पी रहा है, उसके लिए अचानक शराब बंद कर देना शरीर के लिए बहुत बड़ा झटका हो सकता है। इसी झटके का सबसे गंभीर रूप डिलेरियम ट्रेमेंस (Delirium Tremens, संक्षेप में DT) है। इसमें व्यक्ति को तेज़ भ्रम, कंपन, भयानक मतिभ्रम और बेकाबू घबराहट होती है। समय पर इलाज न मिले तो यह जानलेवा हो सकता है। इसे आम बोलचाल में “शराब छोड़ने का पागलपन” भी कहा जाता है, पर यह पागलपन नहीं, एक गंभीर चिकित्सीय आपात स्थिति है।
डिलेरियम ट्रेमेंस क्या है?
यह शराब विथड्रॉअल (शराब छोड़ने के बाद होने वाले लक्षणों) का सबसे गंभीर चरण है। “डिलेरियम” का अर्थ है मानसिक भ्रम की अवस्था और “ट्रेमेंस” का अर्थ है कंपन। इसमें मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम अत्यधिक उत्तेजित हो जाते हैं, जिससे मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर गंभीर लक्षण दिखते हैं।
शराब छोड़ने वाले सभी लोगों को DT नहीं होता। अनुमान है कि शराब पर निर्भर लोगों में से लगभग 3 से 5 प्रतिशत में यह स्थिति विकसित होती है, लेकिन जिनमें होती है उनके लिए खतरा बहुत बड़ा होता है।
यह क्यों होता है?
हमारे मस्तिष्क में दो प्रमुख रसायन संतुलन बनाए रखते हैं। GABA दिमाग को शांत करता है और ग्लूटामेट उसे उत्तेजित करता है। शराब GABA के असर को बढ़ाती है और ग्लूटामेट के असर को घटाती है, इसीलिए पीने पर सुस्ती और सुकून का एहसास होता है।
लंबे समय तक शराब पीने पर मस्तिष्क इस असर से जूझने के लिए खुद को ढाल लेता है। GABA की संवेदनशीलता घट जाती है और ग्लूटामेट की सक्रियता बढ़ जाती है। जब शराब अचानक बंद होती है, तो शांत करने वाला असर गायब हो जाता है, जबकि उत्तेजना वाला तंत्र पूरी तेज़ी से चलता रहता है। नतीजा यह होता है कि नर्वस सिस्टम बेकाबू हो जाता है। इसी को DT कहा जाता है।
किन लोगों को अधिक खतरा है?
- जो व्यक्ति कई वर्षों से रोज़ भारी मात्रा में शराब पी रहा हो
- जिसे पहले कभी विथड्रॉअल के दौरान दौरे (seizures) या DT हुआ हो
- जिसकी उम्र अधिक हो
- जिसे लिवर की बीमारी, संक्रमण, दिल की बीमारी या अन्य गंभीर रोग हों
- जिसके शरीर में पोटैशियम, मैग्नीशियम या सोडियम की कमी हो
- जो कुपोषित हो, खासकर जिसमें विटामिन B1 (थायमिन) की कमी हो
- जो शराब के साथ नींद की गोलियाँ या अन्य नशीली दवाएँ भी लेता हो
- जो बिना चिकित्सकीय निगरानी के अचानक शराब बंद कर दे
लक्षण
शराब विथड्रॉअल के लक्षण चरणों में सामने आते हैं।
हल्के लक्षण (आखिरी शराब के 6 से 24 घंटे बाद):
हाथों में कंपन, बेचैनी, चिंता, सिरदर्द, पसीना आना, मतली या उल्टी, भूख न लगना, नींद न आना, दिल की धड़कन तेज़ होना।
दौरे (12 से 48 घंटे के बीच):
कुछ लोगों को मिर्गी जैसे दौरे पड़ सकते हैं। यह आगे चलकर DT का चेतावनी संकेत हो सकता है।
मतिभ्रम (12 से 48 घंटे के बीच):
व्यक्ति ऐसी चीज़ें देखता या सुनता है जो असल में होती ही नहीं, जैसे कीड़े-मकोड़े रेंगते दिखना या डरावनी आवाज़ें सुनाई देना।
डिलेरियम ट्रेमेंस (आमतौर पर 48 से 96 घंटे बाद):
- गहरा मानसिक भ्रम, जगह, समय और लोगों की पहचान खो देना
- तेज़ और भयावह मतिभ्रम
- पूरे शरीर में तेज़ कंपन
- अत्यधिक पसीना और तेज़ बुखार
- तेज़ धड़कन और बढ़ा हुआ रक्तचाप
- अत्यधिक उत्तेजना, आक्रामकता या डर
- नींद का पूरी तरह गायब हो जाना
- चेतना का उतार-चढ़ाव, कभी सुस्ती और कभी अति सक्रियता
ये लक्षण कई दिनों तक, कभी-कभी एक हफ्ते या उससे अधिक समय तक चल सकते हैं।
जटिलताएँ
DT में शरीर पर भारी दबाव पड़ता है। इससे ये खतरे पैदा हो सकते हैं:
- हृदय की अनियमित धड़कन और हृदयाघात
- गंभीर निर्जलीकरण और शरीर में लवणों का असंतुलन
- बार-बार दौरे पड़ना
- साँस लेने में परेशानी और निमोनिया
- अत्यधिक बुखार
- मतिभ्रम या भ्रम में खुद को या दूसरों को चोट पहुँचाना
- वर्निके-कोर्साकोफ सिंड्रोम, जो थायमिन की कमी से होने वाली गंभीर मस्तिष्क की समस्या है और स्थायी याददाश्त की हानि कर सकती है
बिना इलाज के DT में मृत्यु का खतरा काफी अधिक होता है। समय पर अस्पताल में इलाज मिलने पर यह जोखिम बहुत घट जाता है।
निदान कैसे होता है?
डॉक्टर मुख्य रूप से मरीज़ के शराब पीने के इतिहास, आखिरी बार पीने के समय और वर्तमान लक्षणों के आधार पर निदान करते हैं। विथड्रॉअल की गंभीरता मापने के लिए CIWA-Ar जैसे स्कोरिंग पैमाने का उपयोग किया जाता है। साथ ही खून की जाँच (इलेक्ट्रोलाइट्स, ब्लड शुगर, लिवर और किडनी की जाँच), ECG और ज़रूरत पड़ने पर अन्य जाँचें कराई जाती हैं, ताकि संक्रमण, सिर की चोट या अन्य कारणों को अलग किया जा सके, क्योंकि इनके लक्षण मिलते-जुलते हो सकते हैं।
इलाज
DT का इलाज घर पर करना खतरनाक है। इसे हमेशा अस्पताल में, अक्सर ICU या गहन निगरानी में, किया जाना चाहिए।
दवाएँ: इलाज की मुख्य दवाएँ बेंज़ोडायज़ेपाइन (जैसे डायज़ेपाम, लोराज़ेपाम, क्लोरडायज़ेपॉक्साइड) हैं। ये मस्तिष्क की अति-उत्तेजना को शांत करती हैं और दौरों से बचाव करती हैं। मात्रा मरीज़ के लक्षणों के अनुसार डॉक्टर तय करते हैं। गंभीर मामलों में अन्य दवाएँ भी जोड़ी जा सकती हैं।
थायमिन (विटामिन B1): मस्तिष्क को स्थायी क्षति से बचाने के लिए इसे लगभग हमेशा दिया जाता है, अक्सर इंजेक्शन के रूप में।
तरल पदार्थ और लवण: निर्जलीकरण ठीक करने और पोटैशियम, मैग्नीशियम जैसे लवणों का संतुलन बनाने के लिए नसों के ज़रिए सलाइन दिया जाता है।
सहायक देखभाल: बुखार पर नियंत्रण, हृदय और रक्तचाप की निगरानी, शांत और कम रोशनी वाला वातावरण, तथा मरीज़ को चोट से बचाने के उपाय।
दीर्घकालिक उपचार: DT से उबरना कहानी का अंत नहीं है। शराब की लत का इलाज, जिसमें परामर्श, नशामुक्ति दवाएँ और पुनर्वास शामिल हैं, दोबारा शराब की ओर लौटने से बचाता है।
रोकथाम
सबसे सुरक्षित तरीका है शराब को चिकित्सकीय देखरेख में धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से छोड़ना। यदि आप या आपका कोई अपना रोज़ शराब पीता है और छोड़ना चाहता है, तो ये बातें ध्यान रखें:
- अचानक और अकेले शराब बंद न करें, पहले डॉक्टर से मिलें
- यदि पहले कभी विथड्रॉअल में दौरे या भ्रम हुए हों, तो अस्पताल में भर्ती होकर डिटॉक्स कराना ज़रूरी है
- पौष्टिक भोजन लें और पानी पर्याप्त पिएँ
- नशामुक्ति केंद्र या मनोचिकित्सक की मदद लें
परिवार के लिए ज़रूरी बातें
परिवार की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। इन संकेतों पर तुरंत अस्पताल ले जाएँ या आपातकालीन सहायता बुलाएँ:
- व्यक्ति भ्रमित हो, पहचान न पा रहा हो या अजीब बातें कर रहा हो
- दौरा पड़ा हो
- तेज़ बुखार, बहुत तेज़ धड़कन या अत्यधिक पसीना हो
- कल्पित चीज़ें दिखने या सुनने की शिकायत हो
- बहुत अधिक बेचैनी या आक्रामकता हो
मरीज़ पर गुस्सा करने या उसे अकेला छोड़ने के बजाय शांत रहें, उसे सुरक्षित जगह पर रखें और तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। यह याद रखें कि शराब की लत एक बीमारी है, चरित्र की कमज़ोरी नहीं।
मदद कहाँ मिलेगी?
भारत में सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों में नशामुक्ति और मनोरोग विभाग उपलब्ध हैं। टेली-मानस (Tele-MANAS) की निःशुल्क हेल्पलाइन 14416 पर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सहायता और उचित संस्थानों की जानकारी मिल सकती है। अपने नज़दीकी ज़िला अस्पताल के मनोरोग या नशामुक्ति विभाग से भी संपर्क किया जा सकता है।
निष्कर्ष
डिलेरियम ट्रेमेंस इस बात की चेतावनी है कि लंबे समय तक चली शराब की आदत शरीर और मस्तिष्क में कितनी गहराई तक असर डालती है। यह स्थिति डरावनी ज़रूर है, लेकिन सही समय पर सही इलाज मिले तो इससे उबरा जा सकता है। असली सबक यह है कि शराब छोड़ना एक साहसी और सराहनीय फैसला है, पर इसे सुरक्षित तरीके से, डॉक्टर की निगरानी में ही करना चाहिए। मदद माँगना कमज़ोरी नहीं, समझदारी है।
