सर्वाइकल डिस्प्लेसिया (Cervical Dysplasia - गर्भाशय ग्रीवा में असामान्य कोशिकाएं)
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सर्वाइकल डिस्प्लेसिया (Cervical Dysplasia): गर्भाशय ग्रीवा में असामान्य कोशिकाएं

परिचय

महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) की बीमारियाँ बहुत महत्वपूर्ण हैं। सर्विक्स गर्भाशय का निचला, संकरा हिस्सा है जो योनि से जुड़ता है। कई बार इस हिस्से की सतह की कोशिकाओं में असामान्य बदलाव आने लगते हैं। इन्हीं बदलावों को सर्वाइकल डिस्प्लेसिया कहा जाता है। चिकित्सा भाषा में इसे सर्वाइकल इंट्राएपिथीलियल नियोप्लासिया (CIN) या स्क्वैमस इंट्राएपिथीलियल लेज़न (SIL) भी कहते हैं।

सबसे ज़रूरी बात यह है कि सर्वाइकल डिस्प्लेसिया कैंसर नहीं है। यह एक पूर्व-कैंसर (प्री-कैंसरस) अवस्था है, यानी इन असामान्य कोशिकाओं में आगे चलकर कैंसर बनने की संभावना रहती है। यदि समय पर पहचान और इलाज हो जाए, तो सर्वाइकल कैंसर को लगभग पूरी तरह रोका जा सकता है। भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में से एक है, इसलिए इस विषय पर जागरूकता बेहद ज़रूरी है।

सर्वाइकल डिस्प्लेसिया क्या है?

हमारे शरीर की कोशिकाएँ एक निश्चित क्रम में बनती, बढ़ती और नष्ट होती हैं। जब गर्भाशय ग्रीवा की सतह की कोशिकाओं की संरचना और बढ़ने का तरीका सामान्य से अलग हो जाता है, तो उसे डिस्प्लेसिया कहते हैं। ये कोशिकाएँ माइक्रोस्कोप में देखने पर सामान्य कोशिकाओं से भिन्न दिखती हैं।

डिस्प्लेसिया के प्रकार (गंभीरता के आधार पर)

असामान्य कोशिकाओं की मोटाई और बदलाव के स्तर के अनुसार इसे तीन श्रेणियों में बाँटा जाता है:

  1. हल्का डिस्प्लेसिया (CIN 1 / LSIL): इसमें असामान्य कोशिकाएँ केवल सतह की निचली एक-तिहाई परत तक सीमित होती हैं। अधिकांश मामलों में यह अपने आप ठीक हो जाता है।
  2. मध्यम डिस्प्लेसिया (CIN 2): इसमें असामान्य कोशिकाएँ लगभग दो-तिहाई परत तक फैल जाती हैं।
  3. गंभीर डिस्प्लेसिया (CIN 3 / HSIL): इसमें असामान्य कोशिकाएँ लगभग पूरी परत में फैल जाती हैं। इसे कार्सिनोमा इन सिटू भी कहते हैं। इसमें इलाज ज़रूरी होता है, क्योंकि इसके कैंसर में बदलने का खतरा अधिक है।

मुख्य कारण: ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV)

सर्वाइकल डिस्प्लेसिया का सबसे प्रमुख कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) का संक्रमण है। HPV के सौ से अधिक प्रकार हैं, जिनमें से लगभग 14 प्रकार “उच्च जोखिम” वाले माने जाते हैं। इनमें HPV-16 और HPV-18 सबसे खतरनाक हैं और अधिकांश सर्वाइकल कैंसर के पीछे यही दो प्रकार होते हैं।

HPV मुख्यतः यौन संपर्क से फैलता है। यह बहुत आम संक्रमण है और अधिकांश यौन रूप से सक्रिय लोग अपने जीवन में कभी न कभी इससे संक्रमित होते हैं। ज़्यादातर मामलों में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इसे एक-दो साल में खुद ही खत्म कर देती है। लेकिन जब संक्रमण लंबे समय तक बना रहता है, तब कोशिकाओं में असामान्य बदलाव शुरू हो सकते हैं।

जोखिम कारक

HPV संक्रमण के अलावा कुछ अन्य कारक डिस्प्लेसिया का खतरा बढ़ा देते हैं:

  • कम उम्र में यौन संबंध की शुरुआत
  • एक से अधिक यौन साथी होना, या साथी के कई साथी होना
  • धूम्रपान या तंबाकू का सेवन: तंबाकू के रसायन सर्विक्स की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाते हैं और प्रतिरक्षा को कमजोर करते हैं
  • कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता: जैसे HIV संक्रमण, अंग प्रत्यारोपण के बाद ली जाने वाली दवाएँ या स्टेरॉइड का लंबे समय तक सेवन
  • कई बार गर्भधारण या कम उम्र में गर्भधारण
  • अन्य यौन संचारित संक्रमण: जैसे क्लैमाइडिया या हर्पीज़
  • लंबे समय तक हार्मोनल गर्भनिरोधक गोलियों का प्रयोग (कुछ अध्ययनों में संबंध पाया गया है)
  • पैप टेस्ट या स्क्रीनिंग न कराना
  • व्यक्तिगत स्वच्छता की कमी और पोषण की कमी

लक्षण

सर्वाइकल डिस्प्लेसिया की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसमें आमतौर पर कोई लक्षण नहीं दिखते। महिलाओं को पता ही नहीं चलता कि उनकी कोशिकाओं में बदलाव हो रहे हैं। इसका पता अक्सर नियमित जाँच (स्क्रीनिंग) के दौरान ही चलता है।

हालाँकि, यदि संक्रमण आगे बढ़ जाए या कैंसर की ओर बढ़े, तो ये लक्षण दिख सकते हैं:

  • मासिक धर्म के बीच में असामान्य रक्तस्राव
  • संभोग के बाद रक्तस्राव या दर्द
  • मेनोपॉज़ (रजोनिवृत्ति) के बाद रक्तस्राव
  • योनि से असामान्य, बदबूदार या खून मिला स्राव
  • पेड़ू (पेल्विक) में दर्द

ये लक्षण अन्य कारणों से भी हो सकते हैं, फिर भी इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए और तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलना चाहिए।

जाँच और निदान

चूँकि लक्षण नहीं होते, इसलिए नियमित स्क्रीनिंग ही बचाव का सबसे मज़बूत हथियार है।

1. पैप स्मियर टेस्ट (Pap Smear)

इसमें डॉक्टर सर्विक्स से कोशिकाओं का एक छोटा नमूना लेकर प्रयोगशाला में माइक्रोस्कोप से जाँच करते हैं। यह जाँच सरल, कम समय में होने वाली और लगभग दर्द रहित है। इससे असामान्य कोशिकाओं का पता चलता है।

2. HPV डीएनए टेस्ट

यह जाँच बताती है कि सर्विक्स में उच्च जोखिम वाला HPV वायरस मौजूद है या नहीं। कई बार पैप टेस्ट के साथ इसे भी किया जाता है। 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में यह विशेष रूप से उपयोगी है।

3. कोल्पोस्कोपी (Colposcopy)

यदि पैप या HPV टेस्ट में असामान्यता मिले, तो डॉक्टर कोल्पोस्कोप नामक एक विशेष यंत्र से सर्विक्स को बड़ा करके देखते हैं। इस दौरान सर्विक्स पर एक विशेष घोल (एसिटिक एसिड) लगाया जाता है, जिससे असामान्य हिस्से सफेद दिखाई देने लगते हैं।

4. बायोप्सी (Biopsy)

कोल्पोस्कोपी में संदिग्ध क्षेत्र दिखने पर वहाँ से ऊतक का बहुत छोटा टुकड़ा निकालकर जाँच के लिए भेजा जाता है। बायोप्सी की रिपोर्ट से ही डिस्प्लेसिया का सटीक स्तर (CIN 1, 2 या 3) तय होता है।

5. VIA/VILI जाँच

भारत जैसे देशों में, जहाँ संसाधन सीमित हो सकते हैं, सरकारी कार्यक्रमों में एसिटिक एसिड या लूगोल आयोडीन से दृश्य निरीक्षण (VIA/VILI) की सरल विधि भी अपनाई जाती है।

इलाज

इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि डिस्प्लेसिया कितना गंभीर है, महिला की उम्र क्या है और क्या वह भविष्य में गर्भधारण करना चाहती है।

निगरानी (Watchful Waiting)

हल्के डिस्प्लेसिया (CIN 1) में अक्सर तुरंत इलाज की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि यह खुद ठीक हो सकता है। डॉक्टर 6 से 12 महीने के अंतराल पर नियमित पैप या HPV टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।

असामान्य कोशिकाओं को हटाने की प्रक्रियाएँ

मध्यम और गंभीर डिस्प्लेसिया में असामान्य ऊतक को हटाया या नष्ट किया जाता है:

  • LEEP (लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल एक्सीजन प्रक्रिया): इसमें बिजली से गर्म किए गए पतले तार के लूप से असामान्य ऊतक को काटकर निकाला जाता है। यह अक्सर ओपीडी में स्थानीय बेहोशी देकर की जाती है।
  • कोन बायोप्सी (Cold Knife Conization): इसमें सर्विक्स का शंकु (कोन) के आकार का हिस्सा निकाला जाता है। यह निदान और इलाज दोनों के काम आती है।
  • क्रायोथेरेपी (Cryotherapy): इसमें अत्यधिक ठंड से असामान्य कोशिकाओं को जमाकर नष्ट किया जाता है।
  • लेज़र थेरेपी: इसमें लेज़र किरणों से असामान्य कोशिकाओं को जलाकर नष्ट किया जाता है।

हिस्टेरेक्टॉमी

बहुत कम मामलों में, जब बार-बार समस्या लौट आए और महिला बच्चे नहीं चाहती हो, तब डॉक्टर गर्भाशय निकालने पर विचार कर सकते हैं। यह आम तौर पर पहली पसंद नहीं होती।

इलाज के बाद देखभाल

प्रक्रिया के बाद कुछ दिन हल्का रक्तस्राव या स्राव हो सकता है। डॉक्टर आमतौर पर कुछ हफ्तों तक संभोग, टैम्पॉन और भारी वज़न उठाने से बचने की सलाह देते हैं। इलाज के बाद भी नियमित फॉलो-अप जाँच बहुत ज़रूरी है, क्योंकि समस्या दोबारा हो सकती है।

रोकथाम के उपाय

1. HPV टीकाकरण

HPV वैक्सीन सर्वाइकल डिस्प्लेसिया और कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। यह आमतौर पर 9 से 14 वर्ष की बच्चियों को दी जाती है, यानी यौन गतिविधि शुरू होने से पहले। बड़ी उम्र की महिलाएँ भी डॉक्टर की सलाह से टीका ले सकती हैं। भारत में भी अब स्वदेशी HPV वैक्सीन उपलब्ध है। टीकाकरण की नवीनतम नीति और उपलब्धता के बारे में अपने डॉक्टर या स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र से जानकारी लें।

2. नियमित स्क्रीनिंग

आमतौर पर 21 से 25 वर्ष की उम्र के बाद या यौन सक्रिय होने के बाद नियमित पैप टेस्ट शुरू करने की सलाह दी जाती है। स्क्रीनिंग कितने अंतराल पर करानी है, यह उम्र और जोखिम पर निर्भर करता है। अपनी स्त्री रोग विशेषज्ञ से इसकी सही योजना बनाएँ।

3. सुरक्षित यौन व्यवहार

कंडोम का प्रयोग HPV के जोखिम को कम करता है, हालाँकि पूरी तरह समाप्त नहीं करता। यौन साथियों की संख्या सीमित रखना भी लाभदायक है।

4. धूम्रपान और तंबाकू से दूरी

तंबाकू छोड़ने से सर्विक्स की कोशिकाएँ स्वस्थ रहती हैं और प्रतिरक्षा मज़बूत होती है।

5. स्वस्थ जीवनशैली

संतुलित आहार (फल, हरी सब्ज़ियाँ, विटामिन C, E और फोलेट से भरपूर भोजन), नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन से रोग प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत रहती है, जो HPV से लड़ने में मदद करती है।

कब डॉक्टर से मिलें?

  • यदि आपकी पैप या HPV रिपोर्ट असामान्य आई हो
  • असामान्य योनि रक्तस्राव या स्राव हो रहा हो
  • संभोग के दौरान या बाद में दर्द या रक्तस्राव हो
  • आपने कभी स्क्रीनिंग न करवाई हो और आपकी उम्र 25 वर्ष से अधिक हो
  • आपको HIV या अन्य कारणों से कमज़ोर प्रतिरक्षा की समस्या हो

भ्रांतियाँ और सच्चाई

भ्रांति: असामान्य पैप रिपोर्ट का मतलब कैंसर है।
सच्चाई: नहीं, इसका अर्थ केवल इतना है कि कोशिकाओं में बदलाव हैं, जिनकी आगे जाँच ज़रूरी है।

भ्रांति: लक्षण नहीं हैं तो जाँच की ज़रूरत नहीं।
सच्चाई: डिस्प्लेसिया में शुरुआती अवस्था में कोई लक्षण नहीं होते, इसलिए जाँच ही एकमात्र रास्ता है।

भ्रांति: इलाज के बाद गर्भधारण संभव नहीं।
सच्चाई: अधिकांश महिलाएँ इलाज के बाद सामान्य रूप से गर्भधारण कर सकती हैं, हालाँकि कुछ प्रक्रियाओं (जैसे कोन बायोप्सी) में समय से पहले प्रसव का जोखिम थोड़ा बढ़ सकता है। इसलिए अपने डॉक्टर से चर्चा करें।

भ्रांति: HPV केवल महिलाओं की समस्या है।
सच्चाई: HPV पुरुषों में भी हो सकता है और वे इसे फैला सकते हैं। इसलिए जागरूकता दोनों के लिए आवश्यक है।

निष्कर्ष

सर्वाइकल डिस्प्लेसिया गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में आने वाला एक ऐसा बदलाव है जो चुपचाप विकसित होता है, पर समय रहते पकड़ में आने पर पूरी तरह इलाज योग्य है। HPV टीकाकरण, नियमित स्क्रीनिंग और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर सर्वाइकल कैंसर के खतरे को बहुत हद तक रोका जा सकता है।

हर महिला को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना चाहिए और शर्म या डर के कारण जाँच को टालना नहीं चाहिए। याद रखें, “समय पर जाँच, कैंसर से बचाव” यही इस बीमारी से बचने का मूल मंत्र है। अपनी माँ, बहन, बेटी और सहेलियों को भी इस बारे में जागरूक करें।

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