पेरिटोनाइटिस (Peritonitis - पेट की झिल्ली की सूजन)
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पेरिटोनाइटिस (Peritonitis): पेट की झिल्ली की सूजन के कारण, लक्षण, इलाज और बचाव

परिचय

हमारे पेट के भीतर मौजूद अंग, जैसे आंतें, पेट, यकृत (लिवर) और प्लीहा, एक पतली और चिकनी झिल्ली से ढके रहते हैं। इस झिल्ली को पेरिटोनियम (Peritoneum) कहते हैं। जब इसमें संक्रमण या सूजन हो जाती है, तो उस स्थिति को पेरिटोनाइटिस कहा जाता है। आम भाषा में इसे पेट की झिल्ली की सूजन कहते हैं।

पेरिटोनाइटिस एक गंभीर और जानलेवा स्थिति हो सकती है। यदि समय पर इलाज न मिले तो संक्रमण पूरे शरीर में फैल सकता है और सेप्सिस, अंगों की विफलता और मृत्यु तक का खतरा बन जाता है। इसलिए इसके लक्षणों को पहचानना और तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना बहुत ज़रूरी है।

पेरिटोनियम क्या है और इसका काम क्या है?

पेरिटोनियम दो परतों वाली झिल्ली है। एक परत पेट की दीवार के भीतरी हिस्से को ढकती है और दूसरी परत पेट के अंगों को लपेटती है। इन दोनों परतों के बीच थोड़ा-सा चिकना तरल रहता है, जिससे अंग आपस में रगड़ खाए बिना आसानी से हिल-डुल सकते हैं। यह झिल्ली अंगों को सहारा देती है, रक्त और लसीका की नलिकाओं को रास्ता देती है और संक्रमण से बचाव में भी मदद करती है।

पेरिटोनाइटिस के प्रकार

1. प्राथमिक या स्वतःस्फूर्त बैक्टीरियल पेरिटोनाइटिस (SBP): इसमें पेट के किसी अंग के फटे बिना ही पेट के तरल में संक्रमण हो जाता है। यह अक्सर लिवर सिरोसिस के मरीज़ों में देखा जाता है, जिनके पेट में पानी (जलोदर या Ascites) भर जाता है।

2. द्वितीयक पेरिटोनाइटिस: यह सबसे आम प्रकार है। जब पेट या आंत का कोई अंग फट जाता है या उसमें छेद हो जाता है, तब बैक्टीरिया या अन्य पदार्थ पेट की गुहा में फैल जाते हैं और झिल्ली में सूजन पैदा करते हैं।

3. डायलिसिस से जुड़ा पेरिटोनाइटिस: जिन किडनी रोगियों का पेरिटोनियल डायलिसिस होता है, उनमें कैथेटर के रास्ते संक्रमण पहुँच सकता है।

4. तृतीयक पेरिटोनाइटिस: यह इलाज के बाद भी बना रहने वाला या दोबारा होने वाला संक्रमण है। यह आमतौर पर बहुत गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों में होता है।

पेरिटोनाइटिस के प्रमुख कारण

पेरिटोनाइटिस के पीछे कई कारण हो सकते हैं:

  • अपेंडिक्स का फटना: अपेंडिसाइटिस का समय पर इलाज न होने पर अपेंडिक्स फट सकता है, जो इसका एक आम कारण है।
  • आमाशय या आंत में छेद: पेप्टिक अल्सर (पेट के घाव) गहरे होकर आमाशय की दीवार में छेद कर सकते हैं।
  • पित्ताशय या अग्न्याशय की सूजन: कोलेसिस्टाइटिस या गंभीर पैंक्रियाटाइटिस के कारण भी झिल्ली में सूजन फैल सकती है।
  • डाइवर्टिकुलाइटिस: बड़ी आंत की दीवार में बनी छोटी थैलियों में संक्रमण होकर वे फट सकती हैं।
  • पेट की चोट या सर्जरी: दुर्घटना में पेट पर गहरी चोट लगना या ऑपरेशन के बाद संक्रमण होना।
  • लिवर सिरोसिस: जलोदर के तरल में बैक्टीरिया पनपने से SBP हो सकता है।
  • पेरिटोनियल डायलिसिस: कैथेटर के संक्रमण से।
  • आंतों में रुकावट या सूजन संबंधी आंत्र रोग: जैसे क्रोन्स रोग या अल्सरेटिव कोलाइटिस।
  • पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिज़ीज़: महिलाओं में प्रजनन अंगों के संक्रमण का फैलाव।
  • क्षय रोग (टीबी): कुछ मामलों में पेट की टीबी भी पेरिटोनियम को प्रभावित करती है, जो भारत जैसे देशों में विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है।

जोखिम कारक

कुछ स्थितियों में पेरिटोनाइटिस होने की संभावना अधिक रहती है:

  • लिवर की बीमारी या सिरोसिस
  • किडनी फेल होना और पेरिटोनियल डायलिसिस पर होना
  • हाल ही में पेट की सर्जरी या पेट में चोट
  • अपेंडिसाइटिस, अल्सर, डाइवर्टिकुलाइटिस या पित्ताशय की पथरी का पुराना इतिहास
  • कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता (जैसे एचआईवी, कैंसर का इलाज, स्टेरॉयड का लंबे समय तक सेवन)
  • दर्द निवारक दवाओं (NSAIDs) का अत्यधिक सेवन, जो पेट में अल्सर बना सकता है

पेरिटोनाइटिस के लक्षण

लक्षण अचानक शुरू हो सकते हैं और तेज़ी से बिगड़ते हैं। मुख्य लक्षण ये हैं:

  • पेट में तेज़ और लगातार दर्द, जो छूने, हिलने-डुलने या खाँसने पर और बढ़ जाता है
  • पेट का फूलना और कसाव महसूस होना
  • पेट छूने पर बहुत कठोर या तना हुआ लगना
  • बुखार और कंपकंपी
  • मतली और उल्टी
  • भूख न लगना
  • मल या गैस बाहर न निकल पाना, या दस्त
  • पेशाब कम आना और मुँह सूखना (डिहाइड्रेशन के संकेत)
  • तेज़ धड़कन, तेज़ साँस और थकान
  • गंभीर स्थिति में चक्कर आना, भ्रम की स्थिति और रक्तचाप गिरना

ध्यान दें: SBP के मामलों में दर्द हल्का भी हो सकता है और लक्षण अस्पष्ट रहते हैं। सिरोसिस के मरीज़ में अचानक बुखार, पेट का बढ़ना या भ्रम होना खतरे का संकेत है।

संभावित जटिलताएं

समय पर इलाज न होने पर निम्न गंभीर समस्याएं हो सकती हैं:

  • सेप्सिस और सेप्टिक शॉक: संक्रमण खून में फैलकर पूरे शरीर को प्रभावित करता है।
  • पेट में फोड़ा (Abscess) बनना
  • आंतों में चिपकाव (Adhesions): जो आगे चलकर आंतों में रुकावट पैदा कर सकता है।
  • कई अंगों का काम करना बंद कर देना (किडनी, फेफड़े, लिवर आदि)
  • जानलेवा स्थिति या मृत्यु

निदान कैसे होता है?

डॉक्टर सबसे पहले मरीज़ का इतिहास पूछते हैं और पेट की जाँच करते हैं। इसके बाद आवश्यकतानुसार ये जाँचें की जाती हैं:

  • रक्त जाँच: श्वेत रक्त कोशिकाओं (WBC) की संख्या और संक्रमण के अन्य संकेतकों के लिए
  • पेट के तरल की जाँच (Paracentesis): सुई से पेट का थोड़ा तरल निकालकर उसकी जाँच और कल्चर किया जाता है। SBP की पुष्टि में यह बहुत महत्वपूर्ण है।
  • इमेजिंग: एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन से पेट के भीतर छेद, फोड़े या हवा की मौजूदगी का पता चलता है।
  • मूत्र और अन्य जाँचें: अन्य संक्रमणों को परखने के लिए

उपचार

पेरिटोनाइटिस एक आपातकालीन स्थिति है, इसलिए इलाज अस्पताल में भर्ती करके ही किया जाता है।

1. एंटीबायोटिक दवाएं: संक्रमण से लड़ने के लिए आमतौर पर नस के ज़रिए (IV) एंटीबायोटिक दी जाती हैं। कल्चर की रिपोर्ट आने पर दवा बदली भी जा सकती है।

2. शल्य चिकित्सा (सर्जरी): द्वितीयक पेरिटोनाइटिस में अक्सर सर्जरी ज़रूरी होती है। इसमें फटे अंग की मरम्मत या उसे निकालना, पेट की गुहा की सफ़ाई और फोड़ा हो तो उसे निकालना शामिल है।

3. सहायक उपचार: शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करने के लिए IV तरल, दर्द और उल्टी की दवाएं, ज़रूरत पड़ने पर ऑक्सीजन और रक्तचाप को सँभालने की दवाएं दी जाती हैं। कुछ मामलों में आंतों को आराम देने के लिए कुछ समय तक मुँह से खाना बंद रखा जाता है।

4. SBP का विशेष उपचार: इसमें एंटीबायोटिक के साथ कभी-कभी एल्ब्यूमिन का इंजेक्शन भी दिया जाता है। बार-बार संक्रमण रोकने के लिए कुछ मरीज़ों को लंबे समय तक कम खुराक की एंटीबायोटिक दी जा सकती है।

5. डायलिसिस से जुड़े मामले: एंटीबायोटिक दी जाती हैं और संक्रमण न जाए तो कैथेटर बदलना या निकालना पड़ सकता है।

रोकथाम के उपाय

  • पेट में लंबे समय तक दर्द, बुखार या उल्टी को नज़रअंदाज़ न करें, खासकर अपेंडिसाइटिस या अल्सर के लक्षण हों तो
  • पेट के अल्सर का पूरा इलाज कराएं और बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाएं लंबे समय तक न लें
  • लिवर सिरोसिस के मरीज़ नियमित जाँच कराएं और नमक का सेवन नियंत्रित रखें
  • पेरिटोनियल डायलिसिस करने वाले मरीज़ हाथ धोने और कैथेटर की सफ़ाई के नियमों का सख़्ती से पालन करें
  • पेट की सर्जरी के बाद घाव की देखभाल और डॉक्टर की हिदायतों का पालन करें
  • संतुलित, रेशेयुक्त आहार लें और शराब से दूर रहें, जिससे लिवर और आंतें स्वस्थ रहें
  • साफ़-सुथरा और स्वच्छ भोजन-पानी लें ताकि पेट के संक्रमण से बचाव हो

डॉक्टर के पास कब जाएं?

यदि निम्न में से कोई भी स्थिति हो तो बिना देर किए नज़दीकी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में जाएं:

  • अचानक शुरू हुआ पेट का तेज़ दर्द जो कम न हो रहा हो
  • पेट का कठोर होना और छूने पर असहनीय दर्द
  • पेट दर्द के साथ तेज़ बुखार, लगातार उल्टी या साँस लेने में कठिनाई
  • पेट दर्द के साथ बेहोशी, भ्रम या अत्यधिक कमज़ोरी
  • सिरोसिस या डायलिसिस के मरीज़ में अचानक बुखार और पेट में बदलाव

निष्कर्ष

पेरिटोनाइटिस पेट की भीतरी झिल्ली का गंभीर संक्रमण है, जो अपेंडिक्स या आंत के फटने, लिवर की बीमारी या डायलिसिस जैसी स्थितियों से हो सकता है। इसके लक्षण, यानी तेज़ पेट दर्द, पेट का कड़ा होना, बुखार और उल्टी, को हल्के में नहीं लेना चाहिए। शुरुआती निदान, सही एंटीबायोटिक और ज़रूरत पड़ने पर सर्जरी से अधिकांश मरीज़ ठीक हो सकते हैं, पर देरी जानलेवा साबित हो सकती है। जागरूकता, समय पर जाँच और जोखिम वाली बीमारियों का नियमित प्रबंधन ही इससे बचाव का सबसे अच्छा तरीका है।

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