हेपेटाइटिस (A, B, C, D, E): वायरल लिवर संक्रमण की पूरी जानकारी
परिचय
लिवर यानी यकृत हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। यह भोजन को पचाने में मदद करता है, खून से हानिकारक तत्वों को छानता है, ऊर्जा जमा करता है और शरीर को संक्रमण से लड़ने में सहारा देता है। जब किसी कारण से लिवर में सूजन आ जाती है, तो उस स्थिति को हेपेटाइटिस कहते हैं।
सूजन के कई कारण हो सकते हैं, जैसे अत्यधिक शराब, कुछ दवाइयाँ, ऑटोइम्यून रोग या विषैले पदार्थ। लेकिन दुनिया भर में सबसे आम कारण वायरस हैं। वायरल हेपेटाइटिस के पाँच मुख्य प्रकार हैं: A, B, C, D और E। इनके फैलने के तरीके, गंभीरता और इलाज अलग-अलग हैं। भारत में यह एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है, इसीलिए सरकार ने “राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम” शुरू किया है। हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है।
हेपेटाइटिस के सामान्य लक्षण
कई बार हेपेटाइटिस के लक्षण बिल्कुल दिखाई नहीं देते, खासकर B और C में, जो वर्षों तक चुपचाप लिवर को नुकसान पहुँचाते रहते हैं। जब लक्षण दिखते हैं तो इनमें शामिल हैं:
- त्वचा और आँखों का पीला पड़ना (पीलिया)
- गहरे रंग का पेशाब और हल्के रंग का मल
- थकान और कमजोरी
- भूख न लगना, जी मिचलाना और उल्टी
- पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में दर्द
- हल्का बुखार और जोड़ों में दर्द
- त्वचा में खुजली
हेपेटाइटिस A
कैसे फैलता है: यह वायरस दूषित पानी और दूषित भोजन से फैलता है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति के मल से दूषित चीज़ें खाता-पीता है, तो संक्रमण हो जाता है। गंदे हाथ, खुले में बिकने वाला कटा फल, बर्फ और अस्वच्छ पानी इसके आम स्रोत हैं। बरसात के मौसम और भीड़भाड़ वाले इलाकों में इसके मामले बढ़ जाते हैं।
प्रभाव: यह आमतौर पर तीव्र (acute) बीमारी है, यानी कुछ हफ्तों में अपने आप ठीक हो जाती है और लिवर को स्थायी नुकसान नहीं पहुँचाती। बच्चों में अक्सर हल्के लक्षण होते हैं, जबकि बड़ों में पीलिया और गंभीर थकान ज्यादा देखी जाती है। कभी-कभी यह गंभीर रूप ले सकता है, लेकिन ऐसा कम होता है।
इलाज और बचाव: इसका कोई विशेष इलाज नहीं है। आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ और हल्का भोजन ही मुख्य उपचार है। बचाव के लिए टीका उपलब्ध है, साथ ही साफ पानी पीना, हाथ धोना और स्वच्छ भोजन ज़रूरी है।
हेपेटाइटिस B
कैसे फैलता है: यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खून और शारीरिक तरल पदार्थों से फैलता है। मुख्य तरीके हैं:
- असुरक्षित यौन संबंध
- संक्रमित सुई या सिरिंज का साझा उपयोग
- बिना जाँचा हुआ खून चढ़ाना
- संक्रमित माँ से नवजात शिशु को (प्रसव के दौरान)
- ब्लेड, टैटू या एक्यूपंक्चर के असुरक्षित उपकरण
यह साधारण संपर्क जैसे हाथ मिलाने, गले लगाने, साथ खाना खाने या छींकने-खाँसने से नहीं फैलता।
प्रभाव: हेपेटाइटिस B तीव्र भी हो सकता है और दीर्घकालिक (chronic) भी। वयस्कों में अधिकांश संक्रमण अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन शिशुओं और छोटे बच्चों में संक्रमण के दीर्घकालिक होने की संभावना बहुत अधिक होती है। लंबे समय तक रहने वाला संक्रमण आगे चलकर लिवर सिरोसिस (लिवर का सिकुड़ना और कठोर होना) और लिवर कैंसर का कारण बन सकता है।
इलाज और बचाव: दीर्घकालिक हेपेटाइटिस B में एंटीवायरल दवाइयाँ (जैसे टेनोफोविर, एंटेकैविर) वायरस को नियंत्रित रखती हैं, हालाँकि अधिकतर मामलों में यह पूरी तरह खत्म नहीं होता और लंबे समय तक निगरानी चाहिए। सबसे प्रभावी बचाव टीकाकरण है। नवजात शिशु को जन्म के 24 घंटे के भीतर पहली खुराक दी जाती है, और फिर निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बाकी खुराकें। वयस्क जिन्होंने टीका नहीं लिया है, वे भी लगवा सकते हैं। गर्भावस्था में हेपेटाइटिस B की जाँच कराना बहुत ज़रूरी है ताकि बच्चे को संक्रमण से बचाया जा सके।
हेपेटाइटिस C
कैसे फैलता है: यह मुख्य रूप से खून के संपर्क से फैलता है, जैसे संक्रमित सुइयों के साझा उपयोग, असुरक्षित रक्त आधान या अस्वच्छ चिकित्सा प्रक्रियाओं से। यौन संचरण और माँ से बच्चे में फैलना B की तुलना में कम आम है।
प्रभाव: अधिकांश लोगों में यह दीर्घकालिक संक्रमण बन जाता है और वर्षों तक बिना लक्षण के रहता है। इसी कारण कई लोगों को तब पता चलता है जब लिवर को काफी नुकसान हो चुका होता है। इलाज न होने पर सिरोसिस और लिवर कैंसर का खतरा रहता है।
इलाज और बचाव: अच्छी खबर यह है कि आधुनिक डायरेक्ट-एक्टिंग एंटीवायरल दवाइयों (जैसे सोफोसबुविर-आधारित) से 8 से 12 हफ्तों में 95% से अधिक मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं। भारत में ये दवाइयाँ सरकारी कार्यक्रम के तहत भी उपलब्ध हैं। परंतु हेपेटाइटिस C का कोई टीका नहीं है, इसलिए बचाव सुरक्षित सुई, जाँचा हुआ खून और स्टराइल उपकरणों पर निर्भर है।
हेपेटाइटिस D
हेपेटाइटिस D (डेल्टा) एक अधूरा वायरस है जो अकेले संक्रमण नहीं कर सकता। यह केवल उन्हीं लोगों को संक्रमित करता है जिन्हें पहले से हेपेटाइटिस B है (या जो एक साथ दोनों से संक्रमित होते हैं)। यह B के संचरण के समान तरीकों से फैलता है।
D के साथ संक्रमण होने पर बीमारी ज्यादा गंभीर हो जाती है और लिवर को नुकसान तेज़ी से होता है। इसका अलग टीका नहीं है, लेकिन हेपेटाइटिस B का टीका D से भी बचाता है, क्योंकि B के बिना D संक्रमण संभव नहीं। इलाज जटिल है और विशेषज्ञ की देखरेख में ही होना चाहिए।
हेपेटाइटिस E
कैसे फैलता है: A की तरह E भी दूषित पानी और भोजन से फैलता है। बाढ़, खराब सीवेज व्यवस्था और अस्वच्छ जल आपूर्ति वाले इलाकों में इसके प्रकोप देखे जाते हैं। कभी-कभी अधपके सूअर या खेल-मांस से भी संक्रमण हो सकता है।
प्रभाव: अधिकांश मामलों में यह कुछ हफ्तों में अपने आप ठीक हो जाता है। लेकिन गर्भवती महिलाओं में यह बहुत खतरनाक हो सकता है, खासकर तीसरी तिमाही में, जिसमें लिवर फेल होने और जान जाने का जोखिम बढ़ जाता है। कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में यह दीर्घकालिक भी हो सकता है।
इलाज और बचाव: आमतौर पर सहायक देखभाल ही की जाती है। गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती जरूरी होती है। बचाव के लिए सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता सबसे महत्वपूर्ण हैं। कुछ देशों में टीका मौजूद है, पर भारत में यह अभी व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है।
जाँच कैसे होती है
हेपेटाइटिस की पुष्टि खून की जाँच से होती है। लिवर फंक्शन टेस्ट (SGOT/SGPT, बिलीरुबिन) से लिवर की स्थिति का पता चलता है, जबकि विशेष सीरोलॉजिकल जाँचों जैसे HBsAg (B के लिए), anti-HCV (C के लिए) और IgM anti-HAV या anti-HEV से वायरस के प्रकार की पहचान होती है। ज़रूरत पड़ने पर अल्ट्रासाउंड, फाइब्रोस्कैन या बायोप्सी से लिवर को हुए नुकसान का आकलन किया जाता है।
खान-पान और जीवनशैली
हेपेटाइटिस के दौरान और उसके बाद लिवर की देखभाल जरूरी है:
- शराब पूरी तरह बंद करें, क्योंकि यह लिवर को और नुकसान पहुँचाती है।
- डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा, खासकर दर्द निवारक या जड़ी-बूटी वाली दवाएँ न लें।
- हल्का, सुपाच्य और संतुलित भोजन लें। उबला या ताजा पका खाना बेहतर है।
- भरपूर पानी पिएँ, लेकिन केवल उबला या फ़िल्टर किया हुआ।
- पर्याप्त आराम करें।
- झाड़-फूँक या बिना प्रमाण वाले घरेलू इलाज के भरोसे न रहें, क्योंकि इससे इलाज में देरी होकर नुकसान बढ़ सकता है।
बचाव के आसान उपाय
- टीकाकरण: हेपेटाइटिस A और B के टीके लगवाएँ।
- स्वच्छता: खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोएँ।
- सुरक्षित पानी: उबला या शुद्ध किया हुआ पानी पिएँ।
- सुरक्षित सुई: हमेशा नई, डिस्पोज़ेबल सुई का उपयोग करें, और रेज़र, ब्लेड या टूथब्रश साझा न करें।
- सुरक्षित यौन संबंध: कंडोम का उपयोग करें।
- सुरक्षित रक्त: केवल जाँचा हुआ खून ही चढ़वाएँ।
- गर्भावस्था में जाँच: हर गर्भवती महिला को हेपेटाइटिस B की जाँच करानी चाहिए।
- सुरक्षित टैटू/पियर्सिंग: केवल स्वच्छ और प्रमाणित स्थान चुनें।
डॉक्टर से कब मिलें
यदि आँखों या त्वचा में पीलापन, लगातार थकान, भूख की कमी, पेट दर्द या गहरे रंग का पेशाब दिखे तो तुरंत चिकित्सक से मिलें। इसी तरह, यदि आप किसी जोखिम भरे संपर्क (असुरक्षित सुई, संक्रमित व्यक्ति से घनिष्ठ संपर्क) में आए हों, तो लक्षणों का इंतज़ार किए बिना जाँच कराएँ। पेट में सूजन, उल्टी में खून या अत्यधिक सुस्ती जैसे लक्षण आपातकालीन स्थिति हैं।
निष्कर्ष
हेपेटाइटिस एक गंभीर लेकिन काफी हद तक रोकी जा सकने वाली बीमारी है। A और E दूषित जल व भोजन से फैलते हैं और आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाते हैं; B, C और D खून व शारीरिक तरल पदार्थों से फैलते हैं और लिवर को स्थायी नुकसान पहुँचा सकते हैं। टीकाकरण, स्वच्छता, सुरक्षित व्यवहार और समय पर जाँच से इस बीमारी से बचा जा सकता है। हेपेटाइटिस C अब पूरी तरह ठीक होने योग्य है और B को दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है। जागरूकता और समय पर इलाज ही लिवर को स्वस्थ रखने की कुंजी है।
