गैलेक्टोरिया (Galactorrhea - स्तनपान न कराने पर भी दूध का स्राव)
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गैलेक्टोरिया (Galactorrhea): स्तनपान न कराने पर भी दूध का स्राव, कारण, लक्षण और उपचार

परिचय

कई महिलाएँ कभी न कभी यह देखकर चौंक जाती हैं कि गर्भावस्था या स्तनपान न होने पर भी स्तनों से दूध जैसा तरल निकल रहा है। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को गैलेक्टोरिया (Galactorrhea) कहते हैं। यह शब्द यूनानी भाषा से आया है: “गाला” यानी दूध और “रिया” यानी बहना।

गैलेक्टोरिया अपने आप में कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक लक्षण है। यह शरीर में हार्मोन के असंतुलन, किसी दवा के प्रभाव या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। ज़्यादातर मामलों में यह गंभीर नहीं होता और इलाज से ठीक हो जाता है, पर इसके कारण का पता लगाना ज़रूरी है।

गैलेक्टोरिया क्या है?

जब स्तन से दूध जैसा स्राव हो और उसका संबंध हाल की गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान से न हो, तो उसे गैलेक्टोरिया कहा जाता है। सामान्यतः प्रसव के बाद स्तनपान बंद करने पर कुछ महीनों तक हल्का स्राव हो सकता है। लेकिन स्तनपान बंद किए लगभग छह महीने या उससे अधिक बीत जाने के बाद भी स्राव जारी रहे, या जिस महिला ने कभी गर्भधारण ही न किया हो उसे हो, तो इसे गैलेक्टोरिया माना जाता है।

स्राव का रंग आमतौर पर दूधिया सफ़ेद होता है, पर कभी पारदर्शी, हल्का पीला या हरा-सा भी हो सकता है। यह एक या दोनों स्तनों से हो सकता है। यह लगातार भी हो सकता है और रुक-रुककर भी, कभी अपने आप तो कभी स्तन दबाने पर।

यह किसे हो सकता है?

आम धारणा है कि यह केवल महिलाओं की समस्या है, पर ऐसा नहीं है।

  • महिलाओं में: यह प्रजनन आयु की महिलाओं में अधिक देखा जाता है, पर किसी भी उम्र में हो सकता है, रजोनिवृत्ति के बाद भी।
  • पुरुषों में: यह दुर्लभ है, पर होता है, और अक्सर हार्मोन संबंधी गड़बड़ी से जुड़ा होता है।
  • नवजात शिशुओं में: माँ के हार्मोन के असर से जन्म के कुछ दिन बाद शिशु के स्तनों से थोड़ा दूध जैसा तरल निकल सकता है। इसे कभी “डायन का दूध” (witch’s milk) कहा जाता था। यह सामान्य है और कुछ हफ़्तों में अपने आप ठीक हो जाता है। इसे दबाना या निचोड़ना नहीं चाहिए।

मुख्य लक्षण

गैलेक्टोरिया का मुख्य लक्षण स्तन से दूध जैसा स्राव है। साथ में ये लक्षण भी दिख सकते हैं, जो कारण पर निर्भर करते हैं:

  • मासिक धर्म का अनियमित होना या बंद हो जाना
  • गर्भधारण में कठिनाई या बाँझपन
  • सिरदर्द और नज़र में बदलाव, विशेषकर पास की चीज़ें धुंधली दिखना या किनारे की नज़र कमज़ोर होना
  • यौन इच्छा में कमी
  • योनि में सूखापन
  • चेहरे या शरीर पर अनचाहे बाल, मुँहासे
  • पुरुषों में स्तनों का बढ़ना, यौन क्षमता में कमी और शुक्राणुओं की संख्या में कमी

गैलेक्टोरिया के प्रमुख कारण

1. प्रोलैक्टिन हार्मोन का बढ़ना (हाइपरप्रोलैक्टिनेमिया)

दूध बनाने का काम मुख्य रूप से प्रोलैक्टिन नामक हार्मोन करता है, जो मस्तिष्क के नीचे स्थित पिट्यूटरी ग्रंथि में बनता है। जब किसी कारण से इसका स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है, तो स्तन दूध बनाने लगते हैं। गैलेक्टोरिया के अधिकांश मामलों के पीछे यही कारण होता है।

2. पिट्यूटरी ग्रंथि का ट्यूमर (प्रोलैक्टिनोमा)

पिट्यूटरी ग्रंथि में एक छोटी, आमतौर पर कैंसर-रहित गाँठ बन सकती है, जो बहुत अधिक प्रोलैक्टिन बनाती है। इसे प्रोलैक्टिनोमा कहते हैं। छोटा हो तो दवाओं से नियंत्रित हो जाता है। बड़ा होने पर यह आसपास की नसों पर दबाव डालकर सिरदर्द और दृष्टि संबंधी समस्याएँ पैदा कर सकता है।

3. दवाएँ

कई आम दवाएँ प्रोलैक्टिन बढ़ा सकती हैं:

  • मानसिक रोगों की कुछ दवाएँ (एंटीसाइकोटिक), जैसे रिस्पेरिडोन
  • कुछ अवसादरोधी दवाएँ
  • उल्टी और गैस की दवाएँ, जैसे मेटोक्लोप्रामाइड और डोमपेरिडोन
  • उच्च रक्तचाप की कुछ दवाएँ, जैसे मेथिलडोपा और वेरापामिल
  • कुछ दर्द निवारक दवाएँ (ओपिओइड)
  • कुछ गर्भनिरोधक गोलियाँ और हार्मोन वाली दवाएँ
  • एसिडिटी की कुछ दवाएँ

महत्वपूर्ण: अगर आपको लगता है कि कोई दवा इसका कारण है, तो डॉक्टर से पूछे बिना उसे बंद न करें। इससे मूल बीमारी बिगड़ सकती है।

4. थायरॉइड की कमी (हाइपोथायरायडिज्म)

थायरॉइड हार्मोन कम बनने पर शरीर प्रोलैक्टिन का स्तर बढ़ा देता है। इसके साथ थकान, वज़न बढ़ना, ठंड ज़्यादा लगना, कब्ज़ और बालों का झड़ना जैसे लक्षण हो सकते हैं।

5. गर्भावस्था

गर्भावस्था में स्तन दूध बनाने की तैयारी करते हैं और पहले से कुछ स्राव हो सकता है। इसलिए जब प्रजनन आयु की महिला को अचानक स्राव हो, तो पहले गर्भावस्था की जाँच ज़रूरी है।

6. स्तनों की अत्यधिक उत्तेजना

स्तनों को बार-बार छूने या दबाने, कसी हुई या रगड़ खाने वाली ब्रा, अत्यधिक यौन उत्तेजना या बार-बार स्तनों की जाँच से भी कभी-कभी स्राव हो सकता है। यह हानिरहित होता है और उत्तेजना बंद करने पर रुक जाता है।

7. अन्य कारण

  • पुरानी किडनी की बीमारी, जिसमें शरीर प्रोलैक्टिन को ठीक से साफ़ नहीं कर पाता
  • लिवर की गंभीर बीमारी
  • छाती की दीवार पर चोट, सर्जरी, जलन या शिंगल्स (हर्पीज़ ज़ोस्टर)
  • पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) कुछ मामलों में
  • तनाव और शारीरिक या मानसिक दबाव
  • कुछ जड़ी-बूटियाँ, जैसे सौंफ़, मेथी, सतावर और सोआ जैसी चीज़ें, जब उन्हें अधिक मात्रा में सप्लीमेंट के रूप में लिया जाए
  • कुछ मामलों में कोई स्पष्ट कारण नहीं मिलता। इसे इडियोपैथिक गैलेक्टोरिया कहते हैं।

कब तुरंत डॉक्टर से मिलें?

सामान्य दूधिया स्राव आमतौर पर चिंताजनक नहीं होता, पर इन स्थितियों में देर न करें:

  • स्राव खूनी हो या भूरे रंग का हो
  • स्राव सिर्फ़ एक स्तन से हो और अपने आप बिना दबाए निकले
  • स्तन में कोई गाँठ, त्वचा में बदलाव या निप्पल का अंदर धँस जाना
  • तेज़ या लगातार सिरदर्द
  • नज़र धुंधली होना या दृष्टि का दायरा सिकुड़ना
  • मासिक धर्म का कई महीनों तक बंद रहना
  • स्राव कई सप्ताह से जारी रहना

एक स्तन से खूनी या पारदर्शी स्राव की जाँच खास तौर पर ज़रूरी है, क्योंकि यह दूध की नलिकाओं की अलग समस्याओं का संकेत हो सकता है। यह गैलेक्टोरिया से अलग स्थिति है।

निदान: जाँच कैसे होती है?

डॉक्टर सबसे पहले विस्तार से पूछते हैं: स्राव कब शुरू हुआ, कैसा है, मासिक धर्म कैसा है, कौन-सी दवाएँ ली जा रही हैं, और कोई सिरदर्द या दृष्टि संबंधी परेशानी है या नहीं। इसके बाद स्तनों की जाँच होती है। इसके अतिरिक्त आमतौर पर ये जाँचें कराई जाती हैं:

  • गर्भावस्था जाँच, प्रजनन आयु की महिलाओं में
  • ब्लड में प्रोलैक्टिन का स्तर
  • थायरॉइड फ़ंक्शन टेस्ट (TSH, T3, T4)
  • किडनी और लिवर की जाँच, ज़रूरत पड़ने पर
  • MRI (मस्तिष्क), अगर प्रोलैक्टिन बहुत अधिक हो या पिट्यूटरी ट्यूमर का संदेह हो
  • मैमोग्राफी या अल्ट्रासाउंड, अगर स्तन में गाँठ या संदिग्ध स्राव हो

प्रोलैक्टिन का सैंपल सुबह उठने के कुछ घंटे बाद, आराम की स्थिति में लेना बेहतर होता है, क्योंकि तनाव, भोजन और स्तनों की जाँच से भी यह थोड़ा बढ़ सकता है।

उपचार

इलाज पूरी तरह इस पर निर्भर करता है कि गैलेक्टोरिया का कारण क्या है।

  • दवा-जनित मामलों में: डॉक्टर दवा की खुराक बदल सकते हैं या विकल्प दे सकते हैं।
  • थायरॉइड की कमी में: थायरॉइड हार्मोन की गोली (जैसे लिवोथायरोक्सिन) देने से प्रोलैक्टिन सामान्य हो जाता है और स्राव रुक जाता है।
  • प्रोलैक्टिनोमा में: कैबरगोलिन या ब्रोमोक्रिप्टीन जैसी दवाएँ दी जाती हैं। ये प्रोलैक्टिन कम करती हैं और अक्सर ट्यूमर को भी छोटा कर देती हैं। अधिकांश मरीज़ों में सर्जरी की ज़रूरत नहीं पड़ती। जिन दुर्लभ मामलों में दवा असर नहीं करती या ट्यूमर बहुत बड़ा होता है, वहाँ सर्जरी या रेडियोथेरेपी पर विचार किया जाता है।
  • किडनी या अन्य बीमारी में: मूल रोग का इलाज किया जाता है।
  • बिना किसी गंभीर कारण के हल्के मामलों में: अगर प्रोलैक्टिन सामान्य है और स्राव से परेशानी नहीं है, तो अक्सर इलाज की ज़रूरत नहीं होती, सिर्फ़ निगरानी रखी जाती है।

उपचार शुरू होने के बाद स्राव कम होने में कुछ हफ़्ते से कुछ महीने लग सकते हैं, इसलिए धैर्य रखना और नियमित फ़ॉलो-अप कराना ज़रूरी है।

रोज़मर्रा की देखभाल के कुछ सुझाव

  • स्तनों को बार-बार दबाकर या निचोड़कर देखने से बचें, क्योंकि इससे स्राव और बढ़ सकता है।
  • ढीली, आरामदायक और सूती ब्रा पहनें।
  • खुद से दवाएँ या हर्बल सप्लीमेंट शुरू न करें।
  • तनाव कम करने की कोशिश करें और पर्याप्त नींद लें।
  • स्राव से कपड़े भीग रहे हों तो सूती ब्रेस्ट पैड का उपयोग किया जा सकता है।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा बंद न करें।

प्रचलित भ्रांतियाँ

भ्रांति: दूध निकलने का मतलब है कि महिला गर्भवती है।
सच: गर्भावस्था एक कारण हो सकती है, पर अन्य कई कारण भी होते हैं।

भ्रांति: यह स्तन कैंसर का लक्षण है।
सच: दूधिया स्राव शायद ही कभी कैंसर से जुड़ा होता है। हालाँकि खूनी या एक स्तन से होने वाले स्राव की जाँच ज़रूर करानी चाहिए।

भ्रांति: इसका कोई इलाज नहीं है।
सच: ज़्यादातर मामलों में सही कारण पता चलने पर इलाज संभव है और परिणाम अच्छे रहते हैं।

भ्रांति: इससे हमेशा बाँझपन हो जाता है।
सच: बढ़ा हुआ प्रोलैक्टिन ओव्यूलेशन को प्रभावित कर सकता है, पर इलाज के बाद अधिकांश महिलाएँ सामान्य रूप से गर्भधारण कर पाती हैं।

निष्कर्ष

गैलेक्टोरिया घबराने की नहीं, समझने और जाँच कराने की स्थिति है। यह अक्सर प्रोलैक्टिन हार्मोन, थायरॉइड की गड़बड़ी या किसी दवा के असर से जुड़ा होता है, और सही जाँच व उपचार से नियंत्रित हो जाता है। बेहद ज़रूरी बात यह है कि इसे शर्म या डर के कारण छुपाया न जाए। अगर आपको या आपके किसी परिजन को स्तन से अनचाहा स्राव हो रहा है, तो समय रहते किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ या एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से सलाह लें। जल्दी निदान से न केवल असुविधा दूर होती है, बल्कि किसी अंतर्निहित समस्या का समय पर इलाज भी संभव होता है।

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