मैस्टाइटिस (Mastitis - स्तन में सूजन और संक्रमण)
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मैस्टाइटिस (Mastitis): स्तन में सूजन और संक्रमण, कारण, लक्षण, इलाज और बचाव

परिचय

मैस्टाइटिस स्तन के ऊतकों (ब्रेस्ट टिशू) में होने वाली सूजन है, जो अक्सर संक्रमण के साथ जुड़ी होती है। इसमें स्तन में दर्द, लालिमा, गर्माहट और सूजन हो जाती है, और कई बार बुखार तथा फ्लू जैसी थकान भी महसूस होती है। यह समस्या सबसे ज़्यादा स्तनपान कराने वाली माताओं में देखी जाती है, इसीलिए इसे “लैक्टेशनल मैस्टाइटिस” भी कहते हैं। हालाँकि यह उन महिलाओं में भी हो सकती है जो स्तनपान नहीं करातीं, और बहुत कम मामलों में पुरुषों में भी।

मैस्टाइटिस तकलीफ़देह ज़रूर है, पर समय पर पहचान और सही इलाज से यह आमतौर पर पूरी तरह ठीक हो जाती है। सबसे अच्छी बात यह है कि ज़्यादातर मामलों में माँ बच्चे को स्तनपान कराना जारी रख सकती है।

मैस्टाइटिस कितनी आम है?

अनुमान है कि स्तनपान कराने वाली लगभग 10 से 20 प्रतिशत महिलाओं को कभी न कभी मैस्टाइटिस हो सकती है। यह प्रसव के बाद शुरुआती छह से बारह हफ़्तों में सबसे ज़्यादा होती है, लेकिन स्तनपान के किसी भी समय, यहाँ तक कि बच्चे का दूध छुड़ाने के दौरान भी हो सकती है।

मैस्टाइटिस के मुख्य कारण

1. दूध का ठीक से बाहर न निकलना (मिल्क स्टेसिस)
जब स्तन से दूध पूरी तरह खाली नहीं होता, तो दूध नलिकाओं में रुक जाता है। इससे सूजन शुरू हो सकती है। यह सबसे आम कारण है।

2. बैक्टीरिया का संक्रमण
निप्पल में दरार या छोटे घाव होने पर त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया (जैसे स्टैफिलोकोकस ऑरियस) या बच्चे के मुँह के बैक्टीरिया स्तन के अंदर पहुँच सकते हैं और संक्रमण कर सकते हैं।

3. बच्चे का सही तरीके से न चूसना
अगर बच्चा स्तन को ठीक से नहीं पकड़ पाता (खराब लैच), तो दूध पूरी तरह नहीं निकलता और निप्पल को चोट भी लग सकती है।

4. दूध पिलाने का अंतराल बढ़ जाना
बच्चे का अचानक लंबे समय तक सोना, फीड छूट जाना, या बच्चे को अचानक बोतल/फॉर्मूला पर डालना भी दूध जमने का कारण बन सकता है।

5. दबाव
बहुत कसी हुई ब्रा, भारी बैग का पट्टा या सोते समय स्तन पर लगातार दबाव दूध की नलिकाओं को बंद कर सकता है।

जोखिम बढ़ाने वाले कारक

  • पहले कभी मैस्टाइटिस होना
  • निप्पल में दरारें या घाव
  • बहुत ज़्यादा दूध बनना और ब्रेस्ट पंप का अनुचित इस्तेमाल
  • थकान, तनाव और नींद की कमी
  • कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता
  • पौष्टिक आहार और पर्याप्त तरल की कमी
  • बच्चे की जीभ में कसाव (टंग-टाई) जैसी समस्या

मैस्टाइटिस के लक्षण

लक्षण अक्सर अचानक शुरू होते हैं और आमतौर पर एक ही स्तन में दिखते हैं:

  • स्तन के किसी हिस्से में दर्द, कोमलता या भारीपन
  • त्वचा का लाल होना, कभी-कभी तिकोने या पट्टी जैसे हिस्से में
  • स्तन में गर्माहट और सूजन
  • स्तन में गाँठ जैसा सख़्त हिस्सा
  • दूध पिलाते समय जलन या तेज़ दर्द
  • 38.5°C (101°F) या उससे ज़्यादा बुखार
  • ठंड लगना, कँपकँपी, बदन दर्द और थकान
  • कभी-कभी निप्पल से मवाद या खून मिला स्राव

मैस्टाइटिस के प्रकार

लैक्टेशनल मैस्टाइटिस: स्तनपान के दौरान होने वाला, सबसे आम प्रकार।

नॉन-लैक्टेशनल मैस्टाइटिस: स्तनपान न कराने वाली महिलाओं में होता है। यह निप्पल पियर्सिंग, त्वचा के संक्रमण, मधुमेह या कुछ अन्य कारणों से हो सकता है। इसमें विशेष रूप से डॉक्टर की जाँच ज़रूरी है।

संभावित जटिलताएँ

अगर इलाज में देरी हो जाए, तो:

  • ब्रेस्ट एब्सेस (फोड़ा): स्तन में मवाद से भरी दर्दनाक गाँठ बन सकती है, जिसे कई बार सुई से निकालने या छोटे चीरे से ड्रेन करने की ज़रूरत पड़ती है।
  • बार-बार होने वाली मैस्टाइटिस: अगर मूल कारण (जैसे लैच की समस्या) ठीक न हो।
  • दूध की मात्रा में कमी: दर्द के कारण स्तनपान रोकने से दूध कम बन सकता है।
  • गंभीर संक्रमण: बहुत कम मामलों में संक्रमण फैल सकता है।

निदान कैसे होता है?

ज़्यादातर मामलों में डॉक्टर लक्षणों और शारीरिक जाँच से ही मैस्टाइटिस की पहचान कर लेते हैं। ज़रूरत पड़ने पर:

  • दूध का कल्चर टेस्ट: अगर इलाज का असर न हो, संक्रमण बार-बार हो या अस्पताल से मिला संक्रमण हो।
  • अल्ट्रासाउंड: अगर फोड़े का शक हो।
  • मैमोग्राफी या बायोप्सी: अगर स्तनपान न कराने वाली महिला में लक्षण बने रहें या इलाज के बाद भी ठीक न हों, तब दूसरी गंभीर बीमारियों को ठीक से जाँचने के लिए।

इलाज

1. स्तनपान जारी रखें

यह सबसे महत्वपूर्ण सलाह है। प्रभावित स्तन से दूध पिलाना सुरक्षित है और दूध को बाहर निकालने में मदद करता है। बच्चे को इस दूध से कोई नुकसान नहीं होता। अगर दर्द ज़्यादा हो, तो पहले कम दर्द वाले स्तन से शुरू करें, फिर प्रभावित स्तन पर आएँ। ध्यान रखें कि फीडिंग के बाद भी स्तन भारी लगे तो हाथ या पंप से थोड़ा दूध निकालें, पर ज़रूरत से ज़्यादा पंप न करें, वरना दूध और बढ़ सकता है।

2. आराम और तरल पदार्थ

पर्याप्त आराम करें, खूब पानी और तरल पदार्थ पिएँ और संतुलित आहार लें। शरीर को संक्रमण से लड़ने के लिए ऊर्जा चाहिए।

3. दर्द और सूजन की दवा

डॉक्टर की सलाह से पैरासिटामोल या इबुप्रोफेन जैसी दवाएँ बुखार और दर्द में राहत देती हैं। इबुप्रोफेन सूजन कम करने में भी मदद करता है।

4. सेंक

फीडिंग से पहले हल्की गर्म सेंक दूध के प्रवाह में मदद कर सकती है। फीडिंग के बाद ठंडी सेंक (कपड़े में लपेटी ठंडी पट्टी) सूजन और दर्द कम करती है।

5. हल्का हाथ

पहले सलाह दी जाती थी कि गाँठ को ज़ोर से मसलें, लेकिन अब माना जाता है कि ज़ोरदार मसाज से सूजन और बढ़ सकती है। केवल बहुत हल्के हाथ से, निप्पल की ओर सहलाना बेहतर है।

6. एंटीबायोटिक दवाएँ

अगर लक्षण 12 से 24 घंटे में बेहतर न हों, बुखार तेज़ हो, निप्पल में दरार या मवाद हो, या संक्रमण साफ़ दिखे, तो डॉक्टर एंटीबायोटिक देते हैं। ये आमतौर पर 10 से 14 दिन की होती हैं, और स्तनपान के दौरान सुरक्षित मानी जाने वाली दवाएँ ही चुनी जाती हैं। पूरा कोर्स ज़रूर पूरा करें, चाहे आराम जल्दी मिल जाए, वरना संक्रमण लौट सकता है। अपने आप कोई दवा न लें।

7. फोड़े का इलाज

अगर एब्सेस बन जाए, तो डॉक्टर अल्ट्रासाउंड की निगरानी में मवाद निकालते हैं या छोटी सर्जरी करते हैं। इसके साथ एंटीबायोटिक भी दी जाती हैं।

घरेलू देखभाल के सुझाव

  • ढीली, सूती और आरामदायक ब्रा पहनें।
  • निप्पल को साफ़ और सूखा रखें, और फटने पर डॉक्टर या लैक्टेशन सलाहकार की सलाह से उपयुक्त क्रीम लगाएँ।
  • स्तन पर कसकर पट्टी न बाँधें।
  • पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें और परिवार से मदद माँगें। थकान संक्रमण का जोखिम बढ़ाती है।
  • हर बार अलग-अलग पोज़िशन में दूध पिलाएँ, ताकि सभी नलिकाएँ खाली हों।

मैस्टाइटिस से बचाव कैसे करें?

  1. सही लैच सुनिश्चित करें। बच्चे का मुँह निप्पल के साथ एरिओला के बड़े हिस्से को पकड़े।
  2. नियमित अंतराल पर दूध पिलाएँ। आमतौर पर दिन में 8 से 12 बार। लंबे अंतराल से बचें।
  3. एक स्तन पूरी तरह खाली करें और फिर दूसरा दें।
  4. ज़रूरत से ज़्यादा पंपिंग न करें।
  5. कसी हुई ब्रा या कपड़ों से बचें।
  6. हाथ धोने की आदत रखें, खासकर फीडिंग से पहले।
  7. निप्पल में दरार को नज़रअंदाज़ न करें। शुरू में ही उपचार करवाएँ।
  8. दूध छुड़ाना धीरे-धीरे करें, अचानक नहीं।
  9. तनाव कम करें, पौष्टिक आहार लें और पानी पर्याप्त पिएँ।

कुछ आम भ्रांतियाँ

भ्रांति: संक्रमित स्तन का दूध बच्चे के लिए हानिकारक है।
सच: आमतौर पर यह बच्चे के लिए सुरक्षित है। स्तनपान जारी रखने की सलाह दी जाती है।

भ्रांति: स्तनपान रोक देने से जल्दी ठीक हो जाएगा।
सच: अचानक रोकने से दूध जमकर समस्या और बढ़ सकती है।

भ्रांति: गाँठ को ज़ोर से दबाकर निकालना चाहिए।
सच: ज़ोरदार मसाज से सूजन और ऊतकों को नुकसान बढ़ सकता है।

डॉक्टर से कब मिलें?

तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें, अगर:

  • लक्षण 24 से 48 घंटे में बेहतर न हों
  • तेज़ बुखार (101°F या ज़्यादा) या कँपकँपी हो
  • स्तन में कठोर, बहुत दर्दनाक गाँठ या मवाद दिखे
  • निप्पल से खून या मवाद आए
  • लालिमा तेज़ी से फैल रही हो
  • बहुत कमज़ोरी, चक्कर या तेज़ धड़कन हो
  • लक्षण बार-बार लौट रहे हों

महत्वपूर्ण: अगर स्तनपान न कराने वाली महिला में स्तन में लालिमा, सूजन या गाँठ हो, या इलाज के बाद भी ठीक न हो, तो जाँच ज़रूर कराएँ। बहुत दुर्लभ मामलों में कुछ गंभीर स्तन रोग शुरू में संक्रमण जैसे दिख सकते हैं, इसलिए सही निदान ज़रूरी है।

निष्कर्ष

मैस्टाइटिस एक आम और इलाज योग्य समस्या है, जिससे घबराने की ज़रूरत नहीं। सही लैच, नियमित स्तनपान, पर्याप्त आराम और समय पर चिकित्सकीय सलाह से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। याद रखें, स्तन में दर्द या लालिमा को अनदेखा न करें, और माँ की देखभाल भी उतनी ही ज़रूरी है जितनी शिशु की। अगर आप या आपके आसपास कोई महिला इन लक्षणों से जूझ रही है, तो समय रहते स्त्री रोग विशेषज्ञ या लैक्टेशन सलाहकार से परामर्श लें।

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