गैस्ट्रिक वॉल्वुलस (Gastric Volvulus - पेट का मुड़ जाना)
| | |

वॉल्वुलस (Volvulus): आंतों का मुड़ना, जो बन सकता है जानलेवा आपातकाल

परिचय

हमारी आंतें लगभग 7 से 8 मीटर लंबी एक नली हैं, जो पेट की गुहा में एक पतली झिल्ली (मेसेंट्री) के सहारे टिकी रहती हैं। इसी झिल्ली में वे रक्त वाहिकाएं होती हैं जो आंतों को ऑक्सीजन और पोषण पहुंचाती हैं। कभी-कभी आंत का कोई हिस्सा अपनी ही धुरी पर घूमकर मुड़ जाता है। इस स्थिति को वॉल्वुलस (Volvulus) कहते हैं।

यह केवल आंत में गांठ पड़ने जैसी समस्या नहीं है। मुड़ाव के कारण आंत की नली बंद हो जाती है और साथ ही उसकी रक्त आपूर्ति भी कट जाती है। समय रहते इलाज न मिले तो आंत का वह हिस्सा गल सकता है, आंत फट सकती है और मरीज की जान जा सकती है। इसलिए वॉल्वुलस को चिकित्सा जगत में एक सर्जिकल इमरजेंसी माना जाता है।

वॉल्वुलस क्या है?

वॉल्वुलस शब्द लैटिन भाषा के “volvere” से आया है, जिसका अर्थ है “मुड़ना” या “घूमना”। जब आंत का कोई लूप (घुमाव वाला हिस्सा) अपनी मेसेंट्री के चारों ओर घूम जाता है, तो दो गंभीर समस्याएं एक साथ पैदा होती हैं:

  1. आंतों में रुकावट (Intestinal Obstruction): भोजन, गैस और मल आगे नहीं बढ़ पाते।
  2. रक्त प्रवाह में रुकावट (Ischemia): मेसेंट्री की रक्त वाहिकाएं मुड़ने से दब जाती हैं, जिससे आंत को खून नहीं मिलता और उसके ऊतक (टिश्यू) मरने लगते हैं।

जब ऊतक मर जाते हैं तो इसे गैंग्रीन (Gangrene) या नेक्रोसिस कहते हैं। इसके बाद आंत में छेद हो सकता है, मल पेट में फैल सकता है और गंभीर संक्रमण (पेरिटोनाइटिस और सेप्सिस) हो सकता है।

वॉल्वुलस के प्रकार

आंत के जिस हिस्से में मुड़ाव होता है, उसके आधार पर इसके मुख्य प्रकार हैं:

1. सिग्मॉयड वॉल्वुलस (Sigmoid Volvulus)

यह वयस्कों और बुजुर्गों में सबसे आम प्रकार है। बड़ी आंत का अंतिम घुमावदार हिस्सा (सिग्मॉयड कोलन) मुड़ जाता है। यह अक्सर लंबे समय से कब्ज के शिकार बुजुर्गों में देखा जाता है। भारत सहित एशिया और अफ्रीका के कई हिस्सों में, जहां आहार में रेशे (फाइबर) की मात्रा अधिक होती है और आंत लंबी व फैली हुई होती है, यह अपेक्षाकृत अधिक पाया जाता है।

2. सीकल वॉल्वुलस (Cecal Volvulus)

इसमें बड़ी आंत की शुरुआत का हिस्सा (सीकम) और कभी-कभी आरोही कोलन का भाग मुड़ जाता है। यह अपेक्षाकृत कम आम है और अपेक्षाकृत कम उम्र के वयस्कों में भी हो सकता है।

3. मिडगट वॉल्वुलस (Midgut Volvulus)

यह मुख्य रूप से नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों में होता है। इसका संबंध जन्मजात आंतों की असामान्य बनावट, यानी मैलरोटेशन (Malrotation) से है। इसमें छोटी आंत का बड़ा हिस्सा एक साथ मुड़ सकता है, इसलिए यह बेहद खतरनाक होता है।

4. गैस्ट्रिक वॉल्वुलस (Gastric Volvulus)

इसमें पेट (आमाशय) अपनी धुरी पर घूम जाता है। यह दुर्लभ है और अक्सर डायाफ्राम की हर्निया से जुड़ा होता है।

5. ट्रांसवर्स कोलन वॉल्वुलस

यह बहुत दुर्लभ प्रकार है, जिसमें बड़ी आंत का मध्य भाग मुड़ता है।

वॉल्वुलस के कारण

वॉल्वुलस किसी एक कारण से नहीं होता। कई कारक मिलकर इसकी जमीन तैयार करते हैं।

जन्मजात कारण

  • आंतों का सही ढंग से न घूमना या न जुड़ना (इंटेस्टाइनल मैलरोटेशन)
  • मेसेंट्री का बहुत संकरा या लंबा होना
  • आंत का असामान्य रूप से लंबा होना

अर्जित (बाद में उत्पन्न होने वाले) कारण

  • लंबे समय की पुरानी कब्ज, जिससे आंत फैल जाती है और लंबी हो जाती है
  • पहले हुई पेट की सर्जरी के कारण बने चिपकाव (एडहेशन्स या आसंजन)
  • बुढ़ापा, क्योंकि आंतों की मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं
  • गर्भावस्था, जिसमें बढ़ता गर्भाशय आंतों की स्थिति बदल देता है
  • कुछ मानसिक या स्नायु संबंधी रोगों में आंतों की गतिशीलता कम होना और कुछ दवाओं का लंबे समय तक सेवन, जो कब्ज बढ़ाती हैं
  • हाल ही में हुई कोलोनोस्कोपी या पेट की प्रक्रिया
  • अत्यधिक रेशेदार आहार के साथ पानी की कमी, जिससे आंतें भारी और फैली रहती हैं

लक्षण: कैसे पहचानें?

वॉल्वुलस के लक्षण उसके प्रकार और मुड़ाव की गंभीरता पर निर्भर करते हैं। कुछ लक्षण अचानक और तीव्र होते हैं, जबकि कुछ मामलों में धीरे-धीरे बढ़ते हैं।

वयस्कों में आम लक्षण:

  • पेट में तेज, ऐंठन भरा दर्द, जो आता-जाता रहता है और बाद में लगातार हो सकता है
  • पेट का अत्यधिक फूलना (डिस्टेंशन)
  • मल और गैस दोनों का न निकलना
  • उल्टी या मितली, खासकर रुकावट बढ़ने पर
  • कब्ज का अचानक बिगड़ना
  • भूख न लगना और कमजोरी

गंभीर स्थिति के संकेत (तुरंत अस्पताल जाएं):

  • पेट में असहनीय और लगातार दर्द
  • बुखार और तेज धड़कन
  • पेट को छूने पर बहुत दर्द या पेट का कड़ा हो जाना
  • मल में खून आना
  • बेहोशी, चक्कर या ब्लड प्रेशर गिरना
  • पेशाब कम होना

नवजात और बच्चों में लक्षण:

  • पित्त जैसी हरे या पीले रंग की उल्टी (यह सबसे खतरनाक संकेत माना जाता है)
  • शिशु का लगातार, असामान्य रूप से रोना और बेचैन रहना
  • पेट का फूला हुआ और सख्त होना
  • मल में खून या म्यूकस (श्लेष्मा)
  • दूध न पी पाना और सुस्ती

यदि किसी नवजात की उल्टी हरे रंग की हो, तो इसे हल्के में न लें। यह मिडगट वॉल्वुलस का संकेत हो सकता है और इसमें कुछ ही घंटों की देरी भारी पड़ सकती है।

जोखिम किन्हें अधिक है?

  • 60 से 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग
  • लंबे समय से कब्ज से पीड़ित लोग
  • नर्सिंग होम या लंबे समय तक बिस्तर पर रहने वाले मरीज
  • जिन शिशुओं में जन्मजात मैलरोटेशन हो
  • पहले पेट की सर्जरी करा चुके लोग
  • कुछ स्नायु संबंधी या मनोरोग संबंधी स्थितियों वाले मरीज, जिनकी आंतों की गति धीमी रहती है

निदान (डायग्नोसिस)

वॉल्वुलस का शीघ्र निदान जीवन रक्षक हो सकता है। डॉक्टर आमतौर पर निम्नलिखित जांचें करते हैं:

1. शारीरिक परीक्षण: पेट की जांच, फूलावट, दर्द की जगह और आंतों की आवाजों का परीक्षण।

2. पेट का एक्स-रे: सिग्मॉयड वॉल्वुलस में अक्सर एक विशेष आकार दिखता है, जिसे “कॉफी बीन साइन” या “बेंट इनर ट्यूब साइन” कहा जाता है। इसमें फैली हुई आंत उल्टे यू-आकार में दिखती है।

3. सीटी स्कैन (CT Scan): यह सबसे भरोसेमंद जांच है। इससे मुड़ाव की जगह, आंत की स्थिति और रक्त प्रवाह रुकने के संकेत साफ दिखते हैं। इसमें “व्हर्ल साइन” (भंवर जैसा चित्र) देखा जाता है।

4. बेरियम एनिमा: कुछ मामलों में “बर्ड बीक साइन” दिखता है, हालांकि संदिग्ध गैंग्रीन में यह जांच नहीं की जाती।

5. रक्त जांच: संक्रमण, निर्जलीकरण और ऊतकों की क्षति के संकेत जांचने के लिए।

6. नवजात में अल्ट्रासाउंड और अपर GI सीरीज: मिडगट वॉल्वुलस की पुष्टि के लिए ये जांचें उपयोगी हैं।

इलाज

वॉल्वुलस का इलाज मरीज की स्थिति, उम्र और आंत की सेहत पर निर्भर करता है।

प्रारंभिक स्थिरीकरण

मरीज को भर्ती कर नसों के जरिए तरल पदार्थ (IV fluids) दिए जाते हैं, मुंह से खाना-पीना बंद कर दिया जाता है, पेट का दबाव कम करने के लिए नाक के रास्ते नली (नैसोगैस्ट्रिक ट्यूब) डाली जाती है और जरूरत पड़ने पर एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं।

गैर-सर्जिकल उपचार (चुनिंदा मामलों में)

यदि सिग्मॉयड वॉल्वुलस है और आंत में गैंग्रीन या छेद के संकेत नहीं हैं, तो एंडोस्कोपिक डीकम्प्रेशन किया जा सकता है। इसमें सिग्मॉयडोस्कोप या कोलोनोस्कोप की मदद से मुड़ी हुई आंत को सीधा किया जाता है और एक ट्यूब लगाई जाती है। यह प्रक्रिया अक्सर तुरंत राहत देती है।

हालांकि, इस तरीके में वॉल्वुलस के दोबारा होने की संभावना काफी अधिक होती है, इसलिए आमतौर पर बाद में योजनाबद्ध सर्जरी की सलाह दी जाती है।

सर्जरी

निम्न स्थितियों में सर्जरी जरूरी होती है:

  • आंत में गैंग्रीन या छेद का संदेह
  • एंडोस्कोपिक प्रयास का असफल होना
  • मिडगट वॉल्वुलस (विशेषकर शिशुओं में)
  • बार-बार वॉल्वुलस होना

सर्जरी के मुख्य तरीके:

  • डिटॉर्शन (Detorsion): मुड़ी आंत को सीधा करना।
  • रिसेक्शन (Resection): क्षतिग्रस्त आंत का हिस्सा काटकर निकालना और स्वस्थ सिरों को जोड़ना (एनास्टोमोसिस) या जरूरत हो तो अस्थायी स्टोमा बनाना।
  • लैड की प्रक्रिया (Ladd’s Procedure): नवजात और बच्चों में मिडगट वॉल्वुलस का मानक ऑपरेशन।
  • कोलोपेक्सी: आंत को पेट की दीवार से टांककर स्थिर करना, ताकि दोबारा न मुड़े।

सर्जरी जितनी जल्दी हो, आंत बचाने की संभावना उतनी बेहतर होती है।

जटिलताएं

समय पर इलाज न होने पर निम्न गंभीर समस्याएं हो सकती हैं:

  • आंत का गलना (गैंग्रीन) और फटना
  • पेरिटोनाइटिस (पेट की भीतरी परत में संक्रमण)
  • सेप्सिस और बहु-अंग विफलता
  • शिशुओं में शॉर्ट बाउल सिंड्रोम, जब छोटी आंत का बड़ा हिस्सा निकालना पड़े और शरीर पोषण सोख न पाए
  • मृत्यु

रोकथाम और बचाव

सभी प्रकार के वॉल्वुलस को रोका नहीं जा सकता, खासकर जन्मजात कारणों को। फिर भी कुछ उपाय जोखिम घटा सकते हैं:

  1. कब्ज का सही इलाज करें: रेशेदार आहार (फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें) लें और पर्याप्त पानी पिएं।
  2. नियमित दिनचर्या और व्यायाम: रोजाना चलना-फिरना आंतों की गति को सक्रिय रखता है।
  3. बुजुर्गों का विशेष ध्यान: लंबे समय से कब्ज रहने पर डॉक्टर से सलाह लें, इसे सामान्य समझकर न टालें।
  4. दवाओं की समीक्षा: जो दवाएं कब्ज बढ़ाती हैं, उनके बारे में डॉक्टर से बात करें।
  5. शिशुओं की सतर्क निगरानी: बार-बार उल्टी, खासकर हरी उल्टी, को नजरअंदाज न करें।
  6. सर्जरी के बाद की सावधानी: पेट के ऑपरेशन के बाद यदि पेट दर्द या उल्टी हो तो तुरंत संपर्क करें।
  7. एक बार वॉल्वुलस होने पर: डॉक्टर की बताई योजनाबद्ध सर्जरी जरूर कराएं।

कब डॉक्टर से मिलें?

यदि आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को ये लक्षण दिखें, तो देर न करें और नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में जाएं:

  • अचानक शुरू हुआ तेज पेट दर्द के साथ पेट फूलना
  • मल और गैस का बिल्कुल बंद हो जाना
  • लगातार उल्टी
  • शिशु में हरी उल्टी या असामान्य रोना

घरेलू नुस्खे, पेट साफ करने की दवाएं या दर्द निवारक लेकर इंतजार करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे कीमती समय निकल जाता है।

निष्कर्ष

वॉल्वुलस ऐसी स्थिति है जिसमें आंत का मुड़ना उसकी नली और रक्त आपूर्ति, दोनों को बंद कर देता है। यह बुजुर्गों में सिग्मॉयड वॉल्वुलस के रूप में और नवजात शिशुओं में मिडगट वॉल्वुलस के रूप में विशेष रूप से देखा जाता है। इसके लक्षण तेज पेट दर्द, पेट फूलना, उल्टी और मल-गैस का रुकना हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि समय ही जीवन है। जल्दी पहचान, सही जांच और समय पर इलाज से आंत को बचाया जा सकता है और जान भी। लंबे समय की कब्ज को गंभीरता से लें, शिशुओं में हरी उल्टी को आपातकाल मानें और पेट के तेज दर्द को कभी अनदेखा न करें। जागरूकता ही इस जानलेवा स्थिति से बचाव की पहली सीढ़ी है।

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी योग्य चिकित्सक की सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *