यूरेथ्रल कारुनकल (Urethral Caruncle): महिलाओं के मूत्रमार्ग पर होने वाली गांठ
परिचय
यूरेथ्रल कारुनकल महिलाओं के मूत्रमार्ग (यूरेथ्रा) के बाहरी सिरे पर उभरने वाली एक छोटी, मुलायम और लाल रंग की गांठ है। मूत्रमार्ग वह नली है जिससे मूत्राशय का पेशाब शरीर के बाहर निकलता है। यह समस्या मुख्य रूप से रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के बाद की महिलाओं में देखी जाती है। कई बार यह बिना किसी लक्षण के होती है और नियमित जाँच में संयोग से पता चलती है, जबकि कुछ महिलाओं में यह दर्द, जलन और रक्तस्राव का कारण बन जाती है।
अच्छी बात यह है कि यह गांठ कैंसर नहीं है और आमतौर पर हानिरहित होती है। फिर भी, मूत्रमार्ग पर किसी भी नई गांठ या रक्तस्राव को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि कुछ गंभीर स्थितियाँ भी इसी तरह दिख सकती हैं। इसलिए सही निदान के लिए डॉक्टर से जाँच कराना ज़रूरी है।
यूरेथ्रल कारुनकल क्या होता है?
कारुनकल एक सौम्य (बिनाइन) उभार है जो मूत्रमार्ग के छिद्र (यूरेथ्रल ओपनिंग) के पिछले हिस्से या किनारे पर निकलता है। इसका आकार आमतौर पर कुछ मिलीमीटर से लेकर 1 सेंटीमीटर तक होता है, हालाँकि कभी-कभी यह इससे बड़ा भी हो सकता है। यह चमकदार, लाल या गुलाबी रंग की होती है और छूने पर बहुत संवेदनशील होती है। इसमें रक्त वाहिकाएँ बहुत अधिक होती हैं, इसलिए हल्के स्पर्श या रगड़ से भी खून निकल सकता है।
यह मूत्रमार्ग की श्लेष्मा झिल्ली (म्यूकोसा) के बाहर की ओर निकल आने या उसके अत्यधिक बढ़ने से बनती है। इसमें सूजन वाली कोशिकाएँ और छोटी रक्त नलिकाएँ पाई जाती हैं।
यह किन्हें प्रभावित करती है?
यूरेथ्रल कारुनकल लगभग पूरी तरह महिलाओं की समस्या है। यह सबसे ज़्यादा 50 वर्ष से अधिक उम्र की, रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाओं में होती है। कभी-कभी यह छोटी बच्चियों और युवा महिलाओं में भी देखी गई है, पर ऐसा बहुत कम होता है।
कारण
कारुनकल के सटीक कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन इसके पीछे कई कारक माने जाते हैं:
1. एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी: यह सबसे प्रमुख कारण माना जाता है। रजोनिवृत्ति के बाद शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर गिर जाता है। इससे मूत्रमार्ग और योनि के आसपास की त्वचा पतली, शुष्क और कमज़ोर हो जाती है। कमज़ोर ऊतक के कारण मूत्रमार्ग की अंदरूनी परत बाहर की ओर खिसक सकती है।
2. मूत्रमार्ग की श्लेष्मा का बाहर निकलना (प्रोलैप्स): मूत्रमार्ग की अंदरूनी परत के बाहर की ओर आ जाने से भी यह गांठ बन सकती है।
3. पुरानी सूजन या संक्रमण: मूत्रमार्ग के आसपास बार-बार होने वाली सूजन या संक्रमण से ऊतक में बदलाव आ सकते हैं।
4. पेल्विक की मांसपेशियों की कमज़ोरी: प्रसव, बढ़ती उम्र या अन्य कारणों से पेल्विक फ्लोर कमज़ोर होने पर मूत्रमार्ग को सहारा कम मिलता है।
5. लंबे समय से कब्ज़ या ज़ोर लगाना: पेट पर बार-बार दबाव पड़ने से भी ऊतक बाहर की ओर धकेले जा सकते हैं, हालाँकि यह प्रत्यक्ष कारण के बजाय सहायक कारक माना जाता है।
लक्षण
बहुत-सी महिलाओं में कारुनकल के कोई लक्षण नहीं होते और यह सिर्फ़ स्त्री रोग जाँच के दौरान पता चलती है। जब लक्षण होते हैं, तो वे इस प्रकार हो सकते हैं:
- मूत्रमार्ग के छिद्र पर लाल या गुलाबी, मुलायम गांठ या उभार
- पेशाब करते समय जलन या दर्द
- पेशाब के रास्ते से हल्का रक्तस्राव या अंडरवियर पर खून के धब्बे
- गांठ को छूने या कपड़ों की रगड़ से दर्द
- बार-बार पेशाब आने का एहसास
- संभोग के समय दर्द या असुविधा (डिस्पेरुनिया)
- पेशाब की धार में रुकावट या दिशा बदल जाना (बड़ी गांठ होने पर)
खून आने की मात्रा आमतौर पर कम होती है, लेकिन रजोनिवृत्ति के बाद किसी भी तरह का रक्तस्राव चिंता का विषय है और उसकी जाँच ज़रूरी है।
कारुनकल से मिलती-जुलती अन्य स्थितियाँ
मूत्रमार्ग पर होने वाली हर गांठ कारुनकल नहीं होती। कुछ अन्य स्थितियाँ भी ऐसी ही दिख सकती हैं, इसीलिए डॉक्टर से जाँच कराना आवश्यक है:
- यूरेथ्रल प्रोलैप्स: मूत्रमार्ग की पूरी परत का गोलाकार रूप में बाहर निकल आना।
- यूरेथ्रल कैंसर या अन्य ट्यूमर: यह दुर्लभ है, लेकिन इसे नकारना ज़रूरी है।
- स्केन ग्रंथि की सिस्ट या फोड़ा: मूत्रमार्ग के पास की ग्रंथियों में सूजन या मवाद।
- पॉलिप या मस्से: जैसे जननांगों के मस्से।
- हेमोरॉयड जैसी वाहिकीय गांठें या अन्य सूजन।
अगर गांठ का रंग गहरा हो, सतह असमान या कठोर हो, आकार तेज़ी से बढ़ रहा हो या लगातार रक्तस्राव हो, तो डॉक्टर बायोप्सी की सलाह दे सकते हैं।
निदान (जाँच)
1. शारीरिक और पेल्विक परीक्षण: डॉक्टर मूत्रमार्ग के छिद्र और आसपास के क्षेत्र को ध्यान से देखते हैं। कारुनकल की विशिष्ट बनावट और स्थान से अक्सर निदान का अंदाज़ा हो जाता है।
2. मूत्र की जाँच: पेशाब में संक्रमण, खून या मवाद की जाँच के लिए यूरिन रूटीन और कल्चर कराया जाता है।
3. सिस्टोस्कोपी: अगर मूत्राशय या मूत्रमार्ग के भीतर कोई अन्य समस्या का संदेह हो, तो एक पतले कैमरे वाले यंत्र से अंदर देखा जा सकता है।
4. बायोप्सी: अगर गांठ संदिग्ध लगे, तो उसका छोटा टुकड़ा निकालकर माइक्रोस्कोप से जाँचा जाता है ताकि कैंसर की संभावना को खारिज किया जा सके।
उपचार
उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि गांठ के लक्षण कितने हैं और वह कितनी बड़ी है।
1. निगरानी (कोई उपचार नहीं)
अगर गांठ छोटी है और कोई तकलीफ़ नहीं दे रही, तो अक्सर किसी उपचार की आवश्यकता नहीं होती। डॉक्टर सिर्फ़ नियमित निगरानी की सलाह देते हैं।
2. एस्ट्रोजन क्रीम
रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाओं में योनि और मूत्रमार्ग पर लगाई जाने वाली एस्ट्रोजन क्रीम सबसे आम पहला उपचार है। यह ऊतकों को मज़बूत और स्वस्थ बनाती है, जिससे गांठ का आकार और लक्षण कम हो सकते हैं। इसे डॉक्टर द्वारा बताई गई मात्रा और अवधि तक ही इस्तेमाल करना चाहिए। जिन महिलाओं को स्तन कैंसर या हार्मोन-संवेदनशील अन्य स्थितियों का इतिहास हो, उन्हें इसका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर को अवश्य बताना चाहिए।
3. सूजन-रोधी दवाएँ और क्रीम
सूजन और दर्द कम करने के लिए डॉक्टर सामयिक (टॉपिकल) एंटी-इन्फ्लेमेटरी क्रीम या दवाएँ दे सकते हैं। अगर साथ में मूत्र संक्रमण हो, तो एंटीबायोटिक भी दी जाती हैं।
4. सिट्ज़ बाथ
गुनगुने पानी में कुछ देर बैठने (सिट्ज़ बाथ) से जलन और दर्द में आराम मिल सकता है। यह एक सहायक घरेलू उपाय है, पर डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं।
5. शल्य चिकित्सा (सर्जरी)
अगर गांठ बड़ी हो, बार-बार खून बहा रही हो, बहुत दर्द दे रही हो, या दवाओं से ठीक न हो, तो उसे निकालने की सर्जरी की जाती है। इसके तरीके हैं:
- सर्जिकल एक्सिज़न: गांठ को काटकर निकाल देना और किनारों को टाँकों से जोड़ना।
- इलेक्ट्रोकॉटरी या लेज़र: गर्मी या लेज़र से गांठ को जलाकर हटाना।
- क्रायोथेरेपी: अत्यधिक ठंड से गांठ को नष्ट करना।
यह प्रक्रिया आमतौर पर छोटी होती है और अक्सर डे-केयर के रूप में हो जाती है। निकाले गए ऊतक की जाँच ज़रूर कराई जाती है। सर्जरी के बाद कुछ दिनों तक हल्का दर्द या जलन हो सकती है, और कभी-कभी गांठ दोबारा उभर सकती है।
घर पर देखभाल और सावधानियाँ
- जननांग क्षेत्र को साफ़ और सूखा रखें, लेकिन कठोर साबुन या रसायनों से बचें।
- सूती और ढीले अंडरगारमेंट पहनें।
- पर्याप्त पानी पिएँ ताकि पेशाब पतला रहे और जलन कम हो।
- कब्ज़ से बचने के लिए फाइबर युक्त आहार लें।
- गांठ को खुद दबाने, छेड़ने या घरेलू नुस्खों से हटाने की कोशिश न करें।
- पेशाब रोककर न रखें।
- ज़रूरत पड़ने पर दर्द के लिए डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा ही लें।
- संभोग में दर्द हो तो चिकनाई वाले (लुब्रिकेंट) उत्पादों का इस्तेमाल किया जा सकता है, और डॉक्टर से सलाह लें।
जटिलताएँ
कारुनकल आमतौर पर गंभीर नहीं होती, फिर भी कुछ परेशानियाँ हो सकती हैं:
- लगातार या बार-बार रक्तस्राव
- गांठ में संक्रमण
- रक्त की आपूर्ति कम होने पर गांठ का सड़ना या काला पड़ना (थ्रॉम्बोसिस), जिसमें तेज़ दर्द होता है
- पेशाब में रुकावट या तकलीफ़
- उपचार के बाद दोबारा उभरना
डॉक्टर से कब मिलें?
निम्नलिखित स्थितियों में बिना देर किए स्त्री रोग विशेषज्ञ या यूरोलॉजिस्ट से मिलें:
- मूत्रमार्ग के पास नई गांठ या उभार दिखे
- पेशाब के रास्ते से खून आए, खासकर रजोनिवृत्ति के बाद
- पेशाब में तेज़ जलन या दर्द हो
- गांठ का रंग बदले, वह तेज़ी से बढ़े या बहुत दर्दनाक हो जाए
- पेशाब करने में कठिनाई हो
- बुखार, मवाद या बदबू के साथ संक्रमण के लक्षण दिखें
क्या इसे रोका जा सकता है?
चूँकि इसका मुख्य कारण हार्मोनल बदलाव और बढ़ती उम्र है, इसलिए इसे पूरी तरह रोकना संभव नहीं है। फिर भी, रजोनिवृत्ति के बाद नियमित स्त्री रोग जाँच, जननांग स्वच्छता, स्वस्थ जीवनशैली और ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से हार्मोनल उपचार लेने से जोखिम कम किया जा सकता है। पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मज़बूत रखने के लिए केगल व्यायाम भी उपयोगी हो सकते हैं।
निष्कर्ष
यूरेथ्रल कारुनकल महिलाओं, विशेषकर रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाओं में होने वाली एक आम और सौम्य समस्या है। यह गांठ आमतौर पर कैंसर नहीं होती और कई मामलों में बिना उपचार के भी चल जाती है। जब लक्षण परेशान करें, तो एस्ट्रोजन क्रीम, सूजन-रोधी दवाएँ या ज़रूरत पड़ने पर छोटी सर्जरी से अच्छा नतीजा मिलता है।
सबसे ज़रूरी बात यह है कि मूत्रमार्ग पर गांठ या रक्तस्राव को शर्म या डर के कारण छिपाएँ नहीं। समय पर जाँच से न सिर्फ़ सही निदान और राहत मिलती है, बल्कि अन्य गंभीर बीमारियों की संभावना भी खारिज हो जाती है।
