टेस्टिकुलर टॉर्शन (अंडकोष का मुड़ना): कारण, लक्षण, निदान और इलाज
परिचय
टेस्टिकुलर टॉर्शन एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें अंडकोष (टेस्टिस) अपनी धुरी पर घूम जाता है और उसकी रक्त आपूर्ति रुक जाती है। अंडकोष एक रस्सीनुमा संरचना से जुड़ा होता है, जिसे “स्पर्मेटिक कॉर्ड” कहते हैं। इसी कॉर्ड में खून की नलिकाएँ, नसें और शुक्राणु ले जाने वाली नली (वास डिफेरेंस) होती हैं। जब यह कॉर्ड मुड़ जाती है, तो अंडकोष तक खून पहुँचना बंद हो जाता है।
अगर समय रहते इलाज न मिले तो अंडकोष हमेशा के लिए खराब हो सकता है और उसे सर्जरी से निकालना पड़ सकता है। इसलिए इस स्थिति में हर मिनट कीमती है। आम तौर पर 4 से 6 घंटे के भीतर इलाज मिलने पर अंडकोष बचने की संभावना बहुत अधिक रहती है, जबकि 12 घंटे के बाद यह संभावना तेज़ी से घटती जाती है और 24 घंटे बाद अंडकोष बचना बहुत मुश्किल हो जाता है।
अंडकोष की बनावट और टॉर्शन कैसे होता है
सामान्य स्थिति में अंडकोष अंडकोश की थैली (स्क्रोटम) की दीवार से कुछ हद तक मज़बूती से जुड़ा रहता है। लेकिन कुछ लोगों में यह जुड़ाव कमज़ोर होता है। एक जन्मजात बनावट, जिसे “बेल क्लैपर डिफॉर्मिटी” (Bell-clapper deformity) कहा जाता है, में अंडकोष थैली के अंदर घंटी के लटकन की तरह ढीला लटका रहता है। ऐसे में वह आसानी से घूम सकता है।
जब अंडकोष घूमता है, तो स्पर्मेटिक कॉर्ड में ऐंठन आ जाती है। सबसे पहले नसों में खून का बहाव रुकता है, जिससे सूजन आती है। फिर धमनियों का रक्त प्रवाह भी बंद हो जाता है और ऊतक (टिशू) को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाती है। यही स्थिति “इस्केमिया” कहलाती है, जो आगे चलकर टिशू की मृत्यु (नेक्रोसिस) का कारण बनती है।
किन्हें होता है अधिक खतरा
टेस्टिकुलर टॉर्शन किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन कुछ समूहों में इसकी संभावना अधिक होती है:
- किशोर और युवा लड़के: यह 12 से 18 वर्ष की उम्र में सबसे ज़्यादा देखा जाता है। इसी उम्र में अंडकोष का तेज़ी से विकास होता है।
- नवजात शिशु: कभी-कभी जन्म से पहले या जन्म के तुरंत बाद भी टॉर्शन हो सकता है।
- परिवार में इतिहास: अगर परिवार में किसी को यह समस्या रही हो, तो जोखिम बढ़ जाता है।
- पहले कभी टॉर्शन हुआ हो: एक अंडकोष में टॉर्शन होने पर दूसरे में भी इसकी संभावना रहती है, क्योंकि बनावट अक्सर दोनों तरफ एक जैसी होती है।
- अनडिसेंडेड टेस्टिस: जिन बच्चों में अंडकोष पेट से थैली में नीचे नहीं उतरा होता।
कारण
कई बार टॉर्शन बिना किसी स्पष्ट कारण के हो जाता है, यहाँ तक कि नींद के दौरान भी। फिर भी कुछ कारक इससे जुड़े माने जाते हैं:
- जन्मजात बनावट: बेल क्लैपर डिफॉर्मिटी सबसे आम कारण है।
- ठंड का मौसम: ठंड से क्रेमेस्टर मांसपेशी सिकुड़ती है, जिससे अंडकोष तेज़ी से ऊपर खिंच सकता है और घूम सकता है। सर्दियों में इसके मामले कुछ अधिक देखे जाते हैं।
- चोट या झटका: खेलकूद या दुर्घटना में अंडकोश पर चोट लगना।
- तेज़ शारीरिक गतिविधि: अचानक भागना, कूदना या ज़ोर लगाना।
- तेज़ विकास: किशोरावस्था में अंडकोष का आकार तेज़ी से बढ़ना।
लक्षण
टेस्टिकुलर टॉर्शन के लक्षण अचानक शुरू होते हैं। प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं:
- अचानक तेज़ दर्द: अंडकोश में एक तरफ़ अचानक और बहुत तेज़ दर्द होना सबसे प्रमुख लक्षण है। यह दर्द कई बार रात में सोते समय नींद से जगा देता है।
- सूजन: प्रभावित तरफ की थैली सूज जाती है।
- लालिमा या रंग बदलना: त्वचा लाल या गहरी पड़ सकती है।
- अंडकोष का ऊपर खिंच जाना: प्रभावित अंडकोष सामान्य से ऊँचा या टेढ़ी स्थिति में दिख सकता है।
- पेट के निचले हिस्से में दर्द: कई बार दर्द पेट या कमर तक फैलता है। छोटे बच्चे अक्सर सिर्फ़ पेट दर्द की शिकायत करते हैं, इसलिए अंडकोश की जाँच ज़रूर करानी चाहिए।
- मतली और उल्टी: तेज़ दर्द के कारण जी मिचलाना या उल्टी होना आम है।
- बुखार: कुछ मामलों में हल्का बुखार हो सकता है।
- बार-बार पेशाब की इच्छा: कभी-कभी ऐसा भी हो सकता है।
महत्वपूर्ण: कई बार दर्द आकर चला जाता है। इसे “इंटरमिटेंट टॉर्शन” कहते हैं, जिसमें अंडकोष घूमकर अपने आप वापस सीधा हो जाता है। दर्द ठीक हो जाने पर भी डॉक्टर को दिखाना ज़रूरी है, क्योंकि यह दोबारा और अधिक गंभीर रूप में आ सकता है।
टॉर्शन और अन्य समस्याओं में अंतर
अंडकोश के दर्द के कई अन्य कारण भी होते हैं, जैसे एपिडिडाइमाइटिस (संक्रमण), ऑर्काइटिस, हर्निया या चोट। खुद से यह तय करना मुश्किल है कि दर्द किस वजह से है। संक्रमण में दर्द आम तौर पर धीरे-धीरे बढ़ता है और बुखार या पेशाब में जलन साथ हो सकती है, जबकि टॉर्शन में दर्द अचानक और बहुत तीव्र होता है। फिर भी इनके बीच फ़र्क़ केवल डॉक्टर की जाँच से ही हो सकता है। इसलिए अंडकोश में अचानक तेज़ दर्द को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
निदान (डायग्नोसिस)
डॉक्टर आम तौर पर निम्न तरीकों से निदान करते हैं:
- शारीरिक जाँच: डॉक्टर अंडकोश की स्थिति, सूजन और दर्द की जाँच करते हैं। टॉर्शन में अक्सर “क्रेमेस्टेरिक रिफ्लेक्स” (जाँघ के अंदरूनी हिस्से को सहलाने पर अंडकोष का ऊपर उठना) गायब होता है।
- अल्ट्रासाउंड (कलर डॉप्लर): यह जाँच अंडकोष में रक्त प्रवाह दिखाती है। रक्त प्रवाह कम या बंद होना टॉर्शन का संकेत है।
- यूरिन टेस्ट: संक्रमण की संभावना को परखने के लिए।
ध्यान रहे कि अगर डॉक्टर को टॉर्शन का प्रबल संदेह हो, तो वे जाँच रिपोर्ट का इंतज़ार किए बिना सीधे सर्जरी का निर्णय ले सकते हैं, क्योंकि देरी से अंडकोष बचाना कठिन हो जाता है।
इलाज
1. मैनुअल डिटॉर्शन
कुछ मामलों में डॉक्टर बाहर से हाथ द्वारा अंडकोष को घुमाकर वापस सीधा करने की कोशिश करते हैं। यह एक अस्थायी राहत है, इसके बाद भी सर्जरी ज़रूरी होती है। इसे घर पर कभी न आज़माएँ।
2. सर्जरी (ऑर्कियोपेक्सी)
यह मुख्य और निश्चित इलाज है। इसमें अंडकोश में छोटा चीरा लगाकर मुड़ी हुई कॉर्ड को सीधा किया जाता है। अगर अंडकोष में खून का प्रवाह लौट आए और वह जीवित दिखे, तो उसे अंडकोश की दीवार से टाँकों द्वारा जोड़ दिया जाता है ताकि वह दोबारा न घूमे। आम तौर पर दूसरे अंडकोष को भी बचाव के तौर पर इसी तरह स्थिर कर दिया जाता है।
3. ऑर्कीएक्टॉमी
अगर देरी हो जाए और अंडकोष पूरी तरह मृत हो चुका हो, तो उसे निकालना पड़ता है। ऐसा न करने पर सड़े हुए टिशू से संक्रमण फैल सकता है। एक अंडकोष निकलने के बाद भी दूसरा अंडकोष सामान्य रूप से काम कर सकता है, लेकिन प्रजनन क्षमता पर कुछ असर पड़ सकता है।
जटिलताएँ
समय पर इलाज न मिलने पर ये समस्याएँ हो सकती हैं:
- अंडकोष का स्थायी नुकसान या सिकुड़ जाना
- अंडकोष निकालने की ज़रूरत
- शुक्राणुओं की संख्या या गुणवत्ता में कमी और प्रजनन क्षमता पर असर
- संक्रमण या फोड़ा बनना
- कॉस्मेटिक चिंता, जिसके लिए बाद में कृत्रिम इम्प्लांट का विकल्प भी होता है
सर्जरी के बाद देखभाल
- डॉक्टर द्वारा बताई गई दर्द निवारक और अन्य दवाएँ समय पर लें।
- कुछ सप्ताह तक भारी व्यायाम, दौड़ना, साइकिल चलाना और खेलकूद से बचें।
- चीरे वाली जगह को साफ़ और सूखा रखें।
- सहारा देने वाले अंडरवियर (सपोर्टर) पहनना राहत देता है।
- बुखार, बढ़ती सूजन, मवाद या दर्द बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- फॉलो-अप के लिए निर्धारित तारीख पर ज़रूर जाएँ।
क्या इसे रोका जा सकता है?
चूँकि इसका प्रमुख कारण जन्मजात बनावट है, इसलिए इसे पूरी तरह रोकना संभव नहीं है। लेकिन जोखिम और नुकसान कम करने के लिए ये बातें महत्वपूर्ण हैं:
- अगर एक बार टॉर्शन हो चुका है, तो दूसरी तरफ के लिए निवारक सर्जरी पर डॉक्टर से चर्चा करें।
- माता-पिता अपने किशोर बच्चों से इस विषय पर खुलकर बात करें, क्योंकि कई लड़के शर्म के कारण दर्द छुपाते हैं और इलाज में देरी हो जाती है।
- बार-बार आने-जाने वाले अंडकोश दर्द की अनदेखी न करें।
किशोरों और अभिभावकों के लिए ज़रूरी संदेश
भारत में शर्म या झिझक के कारण कई किशोर अंडकोश के दर्द के बारे में किसी को नहीं बताते। यही देरी सबसे बड़ा नुकसान करती है। माता-पिता को चाहिए कि बच्चों को यह भरोसा दें कि इस तरह का दर्द बताना बिल्कुल सामान्य और ज़रूरी है। साथ ही, अगर बच्चा अचानक पेट दर्द के साथ उल्टी कर रहा हो और चलने-बैठने में परेशानी बता रहा हो, तो अंडकोश की जाँच ज़रूर कराएँ।
कब तुरंत अस्पताल जाएँ
निम्न स्थितियों में बिना देर किए नज़दीकी अस्पताल के इमरजेंसी विभाग या यूरोलॉजिस्ट/सर्जन के पास जाएँ:
- अंडकोश में अचानक तेज़ दर्द
- एक तरफ़ सूजन, लालिमा या अंडकोष का ऊपर खिंचा होना
- दर्द के साथ उल्टी या मतली
- दर्द कुछ देर में ठीक हो गया हो, फिर भी जाँच कराएँ
घर पर गर्म सेंक, मालिश या दर्द की दवा लेकर इंतज़ार करना ख़तरनाक हो सकता है। जितनी जल्दी इलाज शुरू होगा, अंडकोष बचने की संभावना उतनी अधिक होगी।
निष्कर्ष
टेस्टिकुलर टॉर्शन एक ऐसी आपात स्थिति है जिसमें समय ही सबसे महत्वपूर्ण कारक है। अंडकोश में अचानक होने वाला तेज़ दर्द कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, खासकर किशोरों और युवाओं में। शर्म, झिझक या “अपने आप ठीक हो जाएगा” वाली सोच अंडकोष खोने का कारण बन सकती है। जागरूकता, खुला संवाद और समय पर चिकित्सकीय सहायता से इस समस्या में लगभग पूरी तरह सफल इलाज संभव है।
अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी लक्षण की स्थिति में तुरंत योग्य डॉक्टर से परामर्श करें।
