डिलीवरी के बाद (Postpartum) पेल्विक फ्लोर को मजबूत करने वाले व्यायाम

डिलीवरी के बाद (Postpartum) पेल्विक फ्लोर को मजबूत करने वाले व्यायाम

डिलीवरी के बाद महिलाओं के शरीर में कई शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं। गर्भावस्था और प्रसव के दौरान पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों पर काफी दबाव पड़ता है, जिससे वे कमजोर हो सकती हैं। परिणामस्वरूप कई महिलाओं को पेशाब का रिसाव, पेल्विक दर्द, कमर दर्द या पेल्विक अंगों के नीचे खिसकने (Pelvic Organ Prolapse) जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अच्छी बात यह है कि सही समय पर किए गए पेल्विक फ्लोर व्यायाम इन मांसपेशियों को फिर से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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पेल्विक फ्लोर क्या होता है?

पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों, लिगामेंट्स और संयोजी ऊतकों का एक समूह होता है, जो मूत्राशय, गर्भाशय और आंतों को सहारा देता है। यह शरीर के निचले हिस्से में एक झूले की तरह कार्य करता है।

गर्भावस्था के दौरान बढ़ते शिशु का वजन और सामान्य प्रसव (Normal Delivery) के समय खिंचाव के कारण ये मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं।

डिलीवरी के बाद पेल्विक फ्लोर कमजोर होने के कारण

पेल्विक फ्लोर की कमजोरी के कई कारण हो सकते हैं, जैसे:

  • सामान्य प्रसव के दौरान अधिक खिंचाव
  • लंबे समय तक प्रसव पीड़ा (Prolonged Labour)
  • बड़े बच्चे का जन्म
  • फोर्सेप्स या वैक्यूम डिलीवरी
  • कई बार गर्भधारण
  • सी-सेक्शन के बाद भी गर्भावस्था के दौरान पड़ा दबाव
  • हार्मोनल परिवर्तन
  • मोटापा
  • लंबे समय तक कब्ज रहना

पेल्विक फ्लोर कमजोर होने के लक्षण

यदि डिलीवरी के बाद निम्न लक्षण दिखाई दें, तो यह पेल्विक फ्लोर कमजोरी का संकेत हो सकता है:

  • खांसने, छींकने या हंसने पर पेशाब का रिसाव
  • बार-बार पेशाब आने की समस्या
  • पेल्विक क्षेत्र में भारीपन महसूस होना
  • कमर के निचले हिस्से में दर्द
  • संभोग के दौरान असुविधा
  • योनि में ढीलापन महसूस होना
  • गैस या मल को नियंत्रित करने में कठिनाई

पेल्विक फ्लोर व्यायाम कब शुरू करें?

यदि प्रसव सामान्य रहा हो और कोई जटिलता न हो, तो हल्के पेल्विक फ्लोर व्यायाम डिलीवरी के कुछ दिनों बाद शुरू किए जा सकते हैं। हालांकि, यदि:

  • सी-सेक्शन हुआ हो
  • अधिक टांके लगे हों
  • गंभीर दर्द हो
  • अत्यधिक रक्तस्राव हो

तो व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह अवश्य लें।

पेल्विक फ्लोर व्यायाम शुरू करने से पहले सावधानियां

  • व्यायाम खाली मूत्राशय के साथ करें।
  • सांस को कभी न रोकें।
  • पेट, जांघ या नितंबों को अत्यधिक न कसें।
  • दर्द होने पर व्यायाम रोक दें।
  • धीरे-धीरे तीव्रता बढ़ाएं।
  • नियमितता बनाए रखें।

डिलीवरी के बाद पेल्विक फ्लोर को मजबूत करने वाले प्रमुख व्यायाम

1. केगल एक्सरसाइज (Kegel Exercise)

यह सबसे लोकप्रिय और प्रभावी पेल्विक फ्लोर व्यायाम है।

करने की विधि

  1. आरामदायक स्थिति में लेट जाएं या बैठ जाएं।
  2. उन मांसपेशियों को पहचानें जिनसे आप पेशाब को बीच में रोकती हैं।
  3. इन मांसपेशियों को धीरे-धीरे सिकोड़ें।
  4. 5 सेकंड तक होल्ड करें।
  5. फिर 5 सेकंड के लिए आराम दें।

दोहराव

  • 10 बार दोहराएं।
  • दिन में 3 बार करें।

लाभ

  • पेशाब रिसाव कम करता है।
  • पेल्विक अंगों को सहारा देता है।
  • मांसपेशियों की ताकत बढ़ाता है।

2. क्विक कॉन्ट्रैक्शन एक्सरसाइज

यह पेल्विक फ्लोर की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को बढ़ाती है।

कैसे करें?

  1. पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों को तेजी से सिकोड़ें।
  2. तुरंत छोड़ दें।
  3. प्रत्येक सिकुड़न 1 सेकंड की रखें।

दोहराव

  • 10–15 बार।
  • दिन में 2–3 सेट।

लाभ

  • छींकने या खांसने के समय पेशाब रिसाव को कम करने में मदद मिलती है।

3. पेल्विक टिल्ट (Pelvic Tilt Exercise)

यह पेट और पेल्विक फ्लोर दोनों को मजबूत करता है।

करने की विधि

  1. पीठ के बल लेट जाएं।
  2. घुटनों को मोड़ लें।
  3. पेट को हल्का अंदर खींचें।
  4. कमर को फर्श की ओर दबाएं।
  5. 5 सेकंड तक रोकें।
  6. धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौटें।

दोहराव

  • 10–15 बार।
  • दिन में 2 सेट।

लाभ

  • कमर दर्द कम करता है।
  • कोर मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।

4. ब्रिजिंग एक्सरसाइज (Bridging Exercise)

यह नितंब, पेट और पेल्विक फ्लोर को मजबूत बनाती है।

करने की विधि

  1. पीठ के बल लेटें।
  2. घुटने मोड़ लें।
  3. पेल्विक फ्लोर को कसें।
  4. धीरे-धीरे कूल्हों को ऊपर उठाएं।
  5. 5–10 सेकंड तक रुकें।
  6. धीरे-धीरे नीचे आएं।

दोहराव

  • 10 बार।
  • 2–3 सेट।

लाभ

  • पेल्विक स्थिरता बढ़ती है।
  • कोर शक्ति बेहतर होती है।

5. डायाफ्रामेटिक ब्रीदिंग (Diaphragmatic Breathing)

सांस लेने की यह तकनीक पेल्विक फ्लोर के समन्वय को बेहतर बनाती है।

करने की विधि

  1. आराम से लेट जाएं।
  2. एक हाथ पेट पर रखें।
  3. नाक से गहरी सांस लें।
  4. पेट को ऊपर उठने दें।
  5. सांस छोड़ते समय पेल्विक फ्लोर को हल्का सिकोड़ें।

दोहराव

  • 5–10 मिनट प्रतिदिन।

लाभ

  • तनाव कम होता है।
  • पेल्विक फ्लोर का नियंत्रण सुधरता है।

6. हील स्लाइड एक्सरसाइज (Heel Slide)

यह शुरुआती अवस्था में सुरक्षित मानी जाती है।

करने की विधि

  1. पीठ के बल लेटें।
  2. पेल्विक फ्लोर को हल्का कसें।
  3. एक पैर की एड़ी को धीरे-धीरे आगे सरकाएं।
  4. वापस प्रारंभिक स्थिति में आएं।
  5. दूसरे पैर से दोहराएं।

दोहराव

  • प्रत्येक पैर से 10 बार।

7. क्लैमशेल एक्सरसाइज (Clamshell Exercise)

यह कूल्हों और पेल्विक स्थिरता में सुधार करती है।

कैसे करें?

  1. करवट लेकर लेटें।
  2. घुटनों को मोड़ लें।
  3. पैरों को साथ रखें।
  4. ऊपर वाले घुटने को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं।
  5. फिर वापस नीचे लाएं।

दोहराव

  • प्रत्येक तरफ 10–15 बार।

व्यायाम करते समय किन गलतियों से बचें?

  • सांस रोककर व्यायाम करना।
  • बहुत अधिक जोर लगाना।
  • नियमित अभ्यास न करना।
  • दर्द होने पर भी व्यायाम जारी रखना।
  • भारी वजन जल्दी उठाना।
  • गलत मांसपेशियों को कसना।

किन परिस्थितियों में फिजियोथेरेपिस्ट से संपर्क करें?

यदि डिलीवरी के 6–8 सप्ताह बाद भी निम्न समस्याएं बनी रहें, तो महिला स्वास्थ्य विशेषज्ञ फिजियोथेरेपिस्ट से मिलें:

  • लगातार पेशाब का रिसाव
  • पेल्विक क्षेत्र में भारीपन
  • गंभीर कमर दर्द
  • संभोग के दौरान दर्द
  • मल नियंत्रण में समस्या
  • योनि से उभार महसूस होना

फिजियोथेरेपी की भूमिका

महिला स्वास्थ्य फिजियोथेरेपिस्ट पेल्विक फ्लोर की जांच करके व्यक्तिगत व्यायाम कार्यक्रम तैयार करते हैं। आवश्यकता पड़ने पर वे बायोफीडबैक, इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन और विशेष पुनर्वास तकनीकों का उपयोग भी कर सकते हैं।

निष्कर्ष

डिलीवरी के बाद पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों को मजबूत करना हर महिला के लिए महत्वपूर्ण है। नियमित और सही तरीके से किए गए केगल, ब्रिजिंग, पेल्विक टिल्ट तथा श्वास संबंधी व्यायाम न केवल पेल्विक फ्लोर की ताकत बढ़ाते हैं, बल्कि पेशाब रिसाव, कमर दर्द और अन्य समस्याओं को भी कम करने में मदद करते हैं। हालांकि, किसी भी व्यायाम कार्यक्रम को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है, विशेषकर यदि प्रसव जटिल रहा हो।

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