प्लूरिसी (Pleurisy / फेफड़ों की झिल्ली में सूजन)
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प्लूरिसी (Pleurisy): फेफड़ों की झिल्ली में सूजन — कारण, लक्षण और उपचार

परिचय

हमारे फेफड़े एक पतली, दोहरी परत वाली झिल्ली से ढके होते हैं जिसे प्लूरा (Pleura) कहा जाता है। यह झिल्ली दो परतों से मिलकर बनी होती है — एक परत सीधे फेफड़ों की सतह पर चिपकी होती है (विसरल प्लूरा) और दूसरी परत छाती की भीतरी दीवार पर होती है (पैराइटल प्लूरा)। इन दोनों परतों के बीच एक पतला तरल पदार्थ भरा रहता है, जो सांस लेते और छोड़ते समय फेफड़ों को छाती की दीवार पर आसानी से फिसलने में मदद करता है। जब इस झिल्ली में सूजन (इन्फ्लेमेशन) आ जाती है, तो इस स्थिति को चिकित्सकीय भाषा में प्लूरिसी या प्लूरिटिस (Pleuritis) कहा जाता है।

प्लूरिसी कोई स्वतंत्र बीमारी नहीं है, बल्कि यह किसी अन्य अंतर्निहित समस्या का लक्षण है। जब इन दोनों झिल्लियों में सूजन आती है, तो वे आपस में रगड़ खाने लगती हैं, जिससे तेज दर्द होता है, खासकर सांस लेते या खांसते समय।

प्लूरिसी के कारण

प्लूरिसी कई कारणों से हो सकता है, जिनमें प्रमुख हैं:

1. संक्रमण (Infections) सबसे आम कारण वायरल संक्रमण है, जैसे फ्लू या सामान्य सर्दी-जुकाम के वायरस। इसके अलावा बैक्टीरियल निमोनिया, तपेदिक (ट्यूबरकुलोसिस/टीबी), और कभी-कभी फंगल संक्रमण भी प्लूरिसी का कारण बन सकते हैं।

2. ऑटोइम्यून बीमारियां रुमेटॉइड अर्थराइटिस और ल्यूपस (Systemic Lupus Erythematosus) जैसी बीमारियों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपने ही ऊतकों पर हमला कर देती है, जिससे प्लूरा में सूजन आ सकती है।

3. फेफड़ों का कैंसर या मेटास्टेसिस फेफड़ों का कैंसर या शरीर के किसी अन्य हिस्से से फैला कैंसर भी प्लूरा को प्रभावित कर सकता है।

4. पल्मोनरी एम्बोलिज्म जब फेफड़ों की किसी रक्त वाहिका में खून का थक्का जम जाता है, तो इससे भी तेज छाती दर्द और प्लूरिसी जैसे लक्षण हो सकते हैं। यह एक आपातकालीन स्थिति है।

5. छाती में चोट पसलियों में फ्रैक्चर या छाती पर किसी प्रकार की चोट लगने से भी प्लूरा में सूजन आ सकती है।

6. अन्य कारण कुछ दवाओं की प्रतिक्रिया, सर्जरी के बाद जटिलताएं, अग्नाशय की सूजन (पैंक्रियाटाइटिस), और गुर्दे की गंभीर बीमारी भी कभी-कभी प्लूरिसी का कारण बन सकती हैं।

प्लूरिसी के प्रमुख लक्षण

प्लूरिसी का सबसे पहचाना जाने वाला लक्षण है तेज, चुभने वाला छाती का दर्द, जो निम्नलिखित विशेषताओं के साथ हो सकता है:

  • गहरी सांस लेने, खांसने या छींकने पर दर्द का बढ़ जाना
  • दर्द का एक तरफ ज्यादा महसूस होना, हालांकि यह दोनों तरफ भी हो सकता है
  • शरीर की स्थिति बदलने पर दर्द में बदलाव आना
  • दर्द कभी-कभी कंधे या पीठ तक फैल सकता है
  • उथली (छोटी) सांस लेना, क्योंकि गहरी सांस लेने पर दर्द होता है

इसके साथ अन्य लक्षण भी हो सकते हैं, जो अंतर्निहित कारण पर निर्भर करते हैं:

  • सूखी खांसी
  • बुखार और ठंड लगना (यदि संक्रमण हो)
  • सांस लेने में तकलीफ
  • थकान और कमजोरी
  • वजन कम होना (यदि कारण दीर्घकालिक जैसे टीबी या कैंसर हो)

प्लूरिसी के प्रकार

ड्राई प्लूरिसी (Dry Pleurisy): इसमें प्लूरा की दोनों परतें बिना तरल पदार्थ के आपस में रगड़ खाती हैं, जिससे तेज दर्द होता है।

प्लूरल इफ्यूजन (Pleural Effusion): कई बार सूजन के साथ प्लूरा की दोनों परतों के बीच अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो जाता है। दिलचस्प बात यह है कि जब तरल पदार्थ जमा हो जाता है, तो दर्द अक्सर कम हो जाता है क्योंकि तरल परतों को रगड़ने से रोकता है, लेकिन इससे सांस लेने में तकलीफ बढ़ सकती है।

निदान (डायग्नोसिस)

डॉक्टर प्लूरिसी का निदान करने के लिए कई तरीके अपनाते हैं:

शारीरिक जांच: स्टेथोस्कोप से फेफड़ों की आवाज सुनना। सूजन वाली झिल्लियों के रगड़ने से एक विशिष्ट “घर्षण” जैसी आवाज (प्लूरल रब) सुनाई देती है।

छाती का एक्स-रे: फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा होने या निमोनिया जैसी स्थितियों का पता लगाने के लिए।

सीटी स्कैन: अधिक विस्तृत जानकारी के लिए, विशेषकर पल्मोनरी एम्बोलिज्म या ट्यूमर की आशंका होने पर।

रक्त परीक्षण: संक्रमण, ऑटोइम्यून बीमारी या अन्य सूजन के संकेतों की जांच के लिए।

थोरासेंटेसिस (Thoracentesis): यदि प्लूरल इफ्यूजन है, तो सुई की मदद से तरल पदार्थ का नमूना निकालकर जांच की जाती है ताकि सटीक कारण का पता चल सके — जैसे संक्रमण, कैंसर या अन्य समस्या।

ईसीजी: सीने के दर्द के अन्य संभावित कारणों, जैसे हृदय संबंधी समस्याओं को खारिज करने के लिए।

उपचार

प्लूरिसी का उपचार मुख्य रूप से इसके अंतर्निहित कारण पर निर्भर करता है:

दर्द और सूजन कम करने के लिए: नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इन्फ्लेमेटरी दवाएं (NSAIDs) जैसे इबुप्रोफेन का उपयोग आमतौर पर किया जाता है, ताकि दर्द और सूजन दोनों कम हो सकें। गंभीर मामलों में डॉक्टर कॉर्टिकोस्टेरॉइड भी दे सकते हैं।

यदि कारण बैक्टीरियल संक्रमण है: एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं।

यदि कारण वायरल है: आमतौर पर सहायक उपचार (आराम, तरल पदार्थ, दर्द निवारक) पर्याप्त होता है, क्योंकि वायरल संक्रमण खुद ठीक हो जाते हैं।

यदि टीबी की पुष्टि हो: लंबे समय तक चलने वाली विशेष एंटी-ट्यूबरकुलोसिस दवाओं का कोर्स दिया जाता है।

प्लूरल इफ्यूजन के लिए: यदि तरल पदार्थ अधिक मात्रा में जमा हो गया है और सांस लेने में गंभीर तकलीफ हो रही है, तो थोरासेंटेसिस के जरिए तरल पदार्थ निकाला जाता है। कुछ मामलों में छाती में एक ट्यूब (चेस्ट ट्यूब) डालकर तरल को लगातार निकाला जाता है।

ऑटोइम्यून बीमारी से जुड़ी प्लूरिसी में: मूल बीमारी को नियंत्रित करने के लिए इम्यूनोसप्रेसिव दवाओं का उपयोग किया जाता है।

घरेलू देखभाल: पर्याप्त आराम करना, दर्द वाली तरफ करवट लेकर लेटना (इससे कुछ लोगों को राहत मिलती है), और छाती को सहारा देकर खांसना दर्द कम करने में मदद कर सकता है।

संभावित जटिलताएं

यदि प्लूरिसी का समय पर उपचार न किया जाए, तो कुछ जटिलताएं हो सकती हैं:

  • प्लूरल इफ्यूजन का बढ़ना: जिससे फेफड़े ठीक से फैल नहीं पाते और सांस लेने में गंभीर तकलीफ हो सकती है।
  • एम्पाइमा (Empyema): जब प्लूरल स्पेस में मवाद जमा हो जाता है, यह एक गंभीर संक्रमण की स्थिति है।
  • फेफड़ों का सिकुड़ना (Lung collapse): अत्यधिक तरल पदार्थ या हवा जमा होने से।
  • क्रॉनिक प्लूरल थिकनिंग: लंबे समय तक सूजन रहने से प्लूरा मोटी और कठोर हो सकती है, जिससे फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है।

डॉक्टर से कब मिलें

निम्नलिखित स्थितियों में तुरंत चिकित्सीय सहायता लेनी चाहिए:

  • अचानक और तेज छाती दर्द, खासकर यदि सांस लेने में तकलीफ के साथ हो
  • होंठ या उंगलियों का नीला पड़ना
  • तेज बुखार के साथ छाती में दर्द
  • खांसी में खून आना
  • दर्द जो कंधे, बांह या जबड़े तक फैले (यह हृदय संबंधी समस्या का संकेत भी हो सकता है)

चूंकि छाती का दर्द कई गंभीर स्थितियों जैसे हार्ट अटैक और पल्मोनरी एम्बोलिज्म का भी लक्षण हो सकता है, इसलिए इसे कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।

निष्कर्ष

प्लूरिसी फेफड़ों की सुरक्षात्मक झिल्ली में होने वाली एक सूजन की स्थिति है, जो संक्रमण से लेकर ऑटोइम्यून बीमारियों तक कई कारणों से हो सकती है। इसका मुख्य लक्षण तेज, सांस लेने के साथ बढ़ने वाला छाती दर्द है। सही समय पर निदान और उपचार से अधिकांश मामलों में यह पूरी तरह ठीक हो जाता है, लेकिन अंतर्निहित कारण की पहचान करना बेहद जरूरी है ताकि उचित उपचार दिया जा सके। यदि आपको या आपके किसी परिचित को छाती में असामान्य दर्द महसूस हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से परामर्श लें।

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