पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID)
| |

पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID): कारण, लक्षण, इलाज और बचाव

परिचय

महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं के बारे में खुलकर बात नहीं होती, और इसी वजह से वे गंभीर रूप ले लेती हैं। पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID) ऐसी ही एक स्थिति है। इसे हिंदी में “श्रोणि सूजन रोग” या आम भाषा में “पेडू का संक्रमण” कहा जा सकता है। यदि समय पर इलाज न हो, तो यह बांझपन, गर्भ का ट्यूब में ठहरना (एक्टोपिक प्रेगनेंसी) और लंबे समय तक रहने वाले पेट दर्द जैसी जटिलताएँ पैदा कर सकता है। अच्छी बात यह है कि शुरुआती पहचान और सही इलाज से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है और इसके दीर्घकालिक नुकसान से बचा जा सकता है।

PID क्या है?

PID महिलाओं के प्रजनन तंत्र के ऊपरी हिस्से का संक्रमण है। इसमें गर्भाशय (यूटरस), फैलोपियन ट्यूब (डिंबवाहिनी नलियाँ), अंडाशय (ओवरी) और कभी-कभी आसपास के ऊतक प्रभावित होते हैं। आमतौर पर संक्रमण योनि या गर्भाशय-ग्रीवा (सर्विक्स) में शुरू होता है और बैक्टीरिया ऊपर की ओर बढ़कर इन अंगों तक पहुँच जाते हैं।

PID अक्सर यौन संपर्क से फैलने वाले संक्रमणों से जुड़ा होता है, लेकिन हर मामला सीधे यौन संक्रमण का नहीं होता। कई बार योनि के सामान्य बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ने से भी यह हो सकता है।

PID के प्रमुख कारण

PID के पीछे सबसे आम कारण ये हैं:

  • क्लैमाइडिया (Chlamydia trachomatis) और गोनोरिया (Neisseria gonorrhoeae): ये दोनों यौन संचारित संक्रमण PID के सबसे प्रमुख कारणों में गिने जाते हैं। इनके लक्षण कई बार बहुत हल्के होते हैं या बिल्कुल नहीं दिखते, इसलिए संक्रमण चुपचाप ऊपर तक फैल जाता है।
  • बैक्टीरियल वेजिनोसिस: योनि में मौजूद लाभदायक और हानिकारक बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ने से भी संक्रमण ऊपर चढ़ सकता है।
  • अन्य सूक्ष्मजीव: माइकोप्लाज़्मा जेनिटेलियम जैसे जीवाणु भी कारण बन सकते हैं।
  • प्रसव, गर्भपात या स्त्री-रोग संबंधी प्रक्रियाओं के बाद संक्रमण: यदि इन प्रक्रियाओं के दौरान या बाद में स्वच्छता और देखभाल में कमी रहे, तो जोखिम बढ़ जाता है।

किन महिलाओं को ज़्यादा खतरा है?

कुछ स्थितियों में PID का जोखिम अधिक होता है:

  • 25 वर्ष से कम उम्र की यौन रूप से सक्रिय महिलाएँ
  • एक से अधिक साथी होना, या ऐसे साथी का होना जिसके कई साथी हों
  • बिना कंडोम के यौन संबंध
  • पहले कभी PID या कोई यौन संचारित संक्रमण हो चुका होना
  • योनि की अंदरूनी सफाई (डूशिंग) की आदत, जो योनि के प्राकृतिक बैक्टीरिया संतुलन को बिगाड़ती है
  • कॉपर-टी (IUD) लगवाने के बाद के शुरुआती हफ्ते। यह जोखिम कम और अस्थायी होता है, खासकर तब जब लगवाते समय पहले से कोई संक्रमण मौजूद हो

PID के लक्षण

PID के लक्षण हर महिला में अलग हो सकते हैं। कुछ में ये तेज़ होते हैं, तो कुछ में इतने हल्के कि पहचान में ही नहीं आते। आम लक्षण ये हैं:

  • पेट के निचले हिस्से (पेडू) में दर्द या भारीपन, जो हल्के से तेज़ तक हो सकता है
  • योनि से असामान्य स्राव, जो गाढ़ा, पीला-हरा या बदबूदार हो सकता है
  • संभोग के दौरान या बाद में दर्द
  • माहवारी के बीच या संभोग के बाद रक्तस्राव
  • माहवारी का अधिक दर्दनाक या अनियमित होना
  • पेशाब करते समय जलन या बार-बार पेशाब आना
  • बुखार, ठंड लगना, थकान
  • गंभीर स्थिति में उल्टी-मतली और तेज़ पेट दर्द

सावधानी की बात: कई महिलाओं में PID के लक्षण इतने सामान्य लगते हैं कि वे इन्हें माहवारी की सामान्य परेशानी या पेट की गड़बड़ी समझकर टाल देती हैं। यही देरी आगे चलकर नुकसान का कारण बनती है।

PID से होने वाली जटिलताएँ

संक्रमण जितनी देर तक बना रहता है, फैलोपियन ट्यूब और आसपास के ऊतकों को उतना ही अधिक नुकसान पहुँचता है। संभावित जटिलताएँ:

  1. बांझपन: ट्यूब में सूजन और निशान (स्कार) बनने से अंडाणु और शुक्राणु का मिलना कठिन हो जाता है। बार-बार PID होने पर बांझपन का खतरा काफी बढ़ जाता है।
  2. एक्टोपिक प्रेगनेंसी: ट्यूब आंशिक रूप से बंद या क्षतिग्रस्त हो तो भ्रूण गर्भाशय के बाहर, अक्सर ट्यूब में ही, ठहर सकता है। यह जानलेवा आपात स्थिति बन सकती है।
  3. दीर्घकालिक पेडू दर्द: कई महीनों या वर्षों तक रहने वाला दर्द, जो जीवन की गुणवत्ता प्रभावित करता है।
  4. ट्यूबो-ओवेरियन एब्सेस: ट्यूब और अंडाशय में मवाद की गाँठ बन सकती है, जिसके लिए अस्पताल में भर्ती और कभी-कभी सर्जरी की ज़रूरत पड़ती है।
  5. गंभीर मामलों में संक्रमण का रक्त में फैलना (सेप्सिस)।

निदान कैसे होता है?

PID की जाँच के लिए कोई एक निश्चित टेस्ट नहीं है। डॉक्टर लक्षणों, शारीरिक जाँच और कुछ परीक्षणों को मिलाकर निदान करते हैं:

  • चिकित्सकीय इतिहास और पेल्विक जाँच: डॉक्टर पेडू में कोमलता, गर्भाशय-ग्रीवा को छूने पर दर्द और असामान्य स्राव की जाँच करते हैं।
  • लैब टेस्ट: सर्विक्स या योनि से नमूना लेकर क्लैमाइडिया, गोनोरिया और अन्य संक्रमणों की जाँच। पेशाब और खून की जाँच भी की जा सकती है। प्रेगनेंसी टेस्ट भी ज़रूरी है, ताकि एक्टोपिक प्रेगनेंसी की संभावना को परखा जा सके।
  • अल्ट्रासाउंड: ट्यूबों में सूजन या मवाद की गाँठ देखने के लिए।
  • लेप्रोस्कोपी: कठिन या अनिश्चित मामलों में एक छोटे चीरे से कैमरा डालकर अंदर का सीधा निरीक्षण।

चूँकि लक्षणों के आधार पर ही इलाज शुरू करने की सलाह दी जाती है, इसलिए डॉक्टर अक्सर सभी रिपोर्ट आने का इंतज़ार किए बिना उपचार आरंभ कर देते हैं। इसका उद्देश्य भविष्य के नुकसान को रोकना है।

इलाज

PID का मुख्य इलाज एंटीबायोटिक दवाइयाँ हैं। चूँकि संक्रमण में कई तरह के बैक्टीरिया शामिल हो सकते हैं, डॉक्टर आमतौर पर एक से अधिक एंटीबायोटिक का मिश्रण देते हैं, और कोर्स कई दिनों (अक्सर लगभग दो सप्ताह) का होता है। दवा और खुराक का चुनाव डॉक्टर मरीज़ की स्थिति, गर्भावस्था और स्थानीय दिशानिर्देशों के आधार पर करते हैं, इसलिए स्वयं दवा लेना या पुराने पर्चे की दवाइयाँ दोहराना सही नहीं है।

इलाज में ध्यान रखने योग्य बातें:

  • कोर्स पूरा करें। लक्षण कम होते ही दवा बंद कर देने से संक्रमण पूरी तरह खत्म नहीं होता और दोबारा उभर सकता है।
  • साथी का इलाज ज़रूरी है। यदि संक्रमण यौन संपर्क से हुआ है, तो साथी की जाँच और इलाज के बिना PID बार-बार लौट सकता है। इलाज पूरा होने और लक्षण समाप्त होने तक यौन संबंध से परहेज़ करें।
  • फॉलो-अप जाँच। आमतौर पर 2-3 दिन में सुधार न दिखे तो तुरंत डॉक्टर से दोबारा मिलें।
  • अस्पताल में भर्ती: तेज़ बुखार, लगातार उल्टी, गर्भावस्था, मुँह से दवा न ले पाना, एब्सेस का संदेह, या दवा से सुधार न होने पर नसों के ज़रिए एंटीबायोटिक देने के लिए भर्ती करना पड़ सकता है।
  • सर्जरी: केवल गंभीर स्थितियों में, जैसे मवाद की गाँठ फटने का खतरा होने पर।
  • कॉपर-टी वाली महिलाओं में अक्सर IUD को हटाए बिना इलाज किया जा सकता है, पर यदि सुधार न हो तो डॉक्टर इसे हटाने का निर्णय ले सकते हैं।

ध्यान रहे, एंटीबायोटिक संक्रमण को ठीक करते हैं, पर जो निशान या नुकसान ट्यूबों को पहले ही हो चुका है, उसे वे पलट नहीं सकते। इसीलिए जल्दी इलाज इतना महत्वपूर्ण है।

रोकथाम: कैसे बचें?

PID से बचाव काफी हद तक संभव है:

  • सुरक्षित यौन संबंध: कंडोम का लगातार और सही उपयोग क्लैमाइडिया, गोनोरिया जैसे संक्रमणों का खतरा काफी घटाता है।
  • नियमित जाँच: यौन रूप से सक्रिय 25 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं, और नए या कई साथी होने पर अन्य महिलाओं को भी, क्लैमाइडिया-गोनोरिया की स्क्रीनिंग करानी चाहिए। इन संक्रमणों में अक्सर लक्षण नहीं होते, इसलिए जाँच ही एकमात्र रास्ता है।
  • संक्रमण का तुरंत इलाज: योनि स्राव, जलन या खुजली को नज़रअंदाज़ न करें।
  • डूशिंग से बचें: योनि स्वयं-सफाई करने वाला अंग है। अंदर साबुन या रसायन से धोना हानिकारक है। बाहरी हिस्से की सफाई साधारण पानी या हल्के उत्पाद से पर्याप्त है।
  • प्रमाणित चिकित्सक से प्रक्रिया: IUD लगवाना, गर्भपात या अन्य स्त्री-रोग प्रक्रियाएँ योग्य डॉक्टर और स्वच्छ वातावरण में ही करवाएँ।
  • साथी से खुलकर बात: संक्रमण होने पर साथी को बताना और उसका इलाज कराना बार-बार होने वाले संक्रमण से बचाता है।

कब तुरंत डॉक्टर से मिलें?

यदि निम्न में से कोई स्थिति हो तो देर न करें:

  • पेडू में तेज़ या लगातार बढ़ता दर्द
  • बुखार के साथ पेट दर्द
  • बदबूदार या असामान्य योनि स्राव
  • संभोग के दौरान नया या बढ़ता दर्द
  • माहवारी के बीच अनपेक्षित रक्तस्राव
  • गर्भवती होने की संभावना के साथ अचानक तेज़ पेट दर्द या चक्कर (यह एक्टोपिक प्रेगनेंसी का संकेत हो सकता है, तुरंत अस्पताल जाएँ)

कुछ आम भ्रांतियाँ

भ्रांति: PID केवल “गलत आचरण” वाली महिलाओं को होता है।
सच्चाई: यह एक चिकित्सीय संक्रमण है। एक ही साथी वाली महिला भी, यदि साथी से संक्रमण मिल जाए या बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़े, तो इसकी चपेट में आ सकती है। शर्म या झिझक के कारण इलाज में देरी सबसे बड़ा नुकसान करती है।

भ्रांति: लक्षण नहीं हैं तो संक्रमण नहीं है।
सच्चाई: क्लैमाइडिया जैसे संक्रमण अक्सर बिना लक्षण के रहते हैं और चुपचाप ट्यूबों को नुकसान पहुँचा सकते हैं।

भ्रांति: एक बार PID हुआ तो माँ बनना असंभव है।
सच्चाई: अधिकांश महिलाएँ, खासकर जिनका इलाज जल्दी हुआ, बाद में सामान्य रूप से गर्भधारण कर पाती हैं। हालाँकि जोखिम बढ़ता है, इसलिए गर्भधारण की योजना बनाते समय डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।

निष्कर्ष

पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज एक गंभीर लेकिन रोकी और ठीक की जा सकने वाली बीमारी है। इसका सबसे बड़ा खतरा देरी और चुप्पी है। पेडू का दर्द, असामान्य स्राव या संभोग में तकलीफ को “सामान्य बात” मानकर टालना भविष्य में माँ बनने की क्षमता तक को प्रभावित कर सकता है। सुरक्षित यौन व्यवहार, नियमित जाँच, समय पर इलाज और साथी की भागीदारी, यही PID से बचाव की कुंजी हैं।

यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो संकोच छोड़कर किसी स्त्री-रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें। समय पर लिया गया एक सही कदम आपके स्वास्थ्य और भविष्य दोनों की रक्षा कर सकता है।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *