मंकीपॉक्स (Mpox): एक विस्तृत जानकारी
परिचय
मंकीपॉक्स, जिसे अब आधिकारिक रूप से Mpox कहा जाता है, एक विषाणुजनित (वायरल) संक्रामक रोग है जो ऑर्थोपॉक्सवायरस (Orthopoxvirus) जीनस के मंकीपॉक्स वायरस (MPXV) के कारण होता है। यही जीनस उस वायरस का भी है जिसने कभी चेचक (स्मॉलपॉक्स) जैसी घातक बीमारी फैलाई थी। मंकीपॉक्स मुख्य रूप से पश्चिम और मध्य अफ्रीका के कुछ देशों में स्थानिक (endemic) रहा है, लेकिन वर्ष 2022 में इसने एक वैश्विक प्रकोप का रूप ले लिया, जिसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे कई बार अंतरराष्ट्रीय स्तर की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (Public Health Emergency of International Concern) घोषित किया।
नाम में बदलाव क्यों?
पहले इस बीमारी को “मंकीपॉक्स” कहा जाता था क्योंकि 1958 में डेनमार्क की एक प्रयोगशाला में बंदरों में इस वायरस की पहचान सबसे पहले हुई थी। लेकिन इस नाम से जुड़े कलंक (stigma) और भ्रामक जानकारी को कम करने के उद्देश्य से नवंबर 2022 में WHO ने आधिकारिक रूप से इसका नया नाम “Mpox” रखा। ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह बीमारी मुख्य रूप से बंदरों से नहीं, बल्कि कृंतकों (rodents) और गिलहरी जैसे छोटे स्तनधारी जानवरों से फैलती है, जो इसके प्राकृतिक भंडार (natural reservoir) माने जाते हैं।
वायरस के प्रकार (क्लेड)
मंकीपॉक्स वायरस के मुख्य रूप से दो क्लेड (उपसमूह) पाए जाते हैं:
- क्लेड I (Clade I) – यह मुख्यतः मध्य अफ्रीका, विशेषकर कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में पाया जाता है और अपेक्षाकृत अधिक गंभीर माना जाता है। इसका उप-प्रकार क्लेड Ib 2023-24 में तेजी से फैलने के कारण चर्चा में रहा।
- क्लेड II (Clade II) – यह पश्चिम अफ्रीका से जुड़ा है और 2022 के वैश्विक प्रकोप के लिए यही जिम्मेदार था। यह तुलनात्मक रूप से कम गंभीर होता है।
संक्रमण कैसे फैलता है
मंकीपॉक्स एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तथा कुछ पशुओं से मनुष्यों में फैल सकता है। संक्रमण के प्रमुख माध्यम इस प्रकार हैं:
- सीधे संपर्क से: संक्रमित व्यक्ति की त्वचा पर बने घावों, फफोलों या पपड़ी (scabs) के सीधे संपर्क में आने से।
- शारीरिक तरल पदार्थों से: संक्रमित व्यक्ति के लार, वीर्य, योनि स्राव या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से।
- यौन संपर्क सहित घनिष्ठ शारीरिक संपर्क से: वर्तमान वैश्विक प्रकोप में यौन नेटवर्क के माध्यम से संक्रमण फैलना संचरण का सबसे प्रमुख तरीका रहा है, जो पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित कर रहा है।
- सांस की बूंदों से: लंबे समय तक आमने-सामने के निकट संपर्क में रहने पर।
- दूषित वस्तुओं से: संक्रमित व्यक्ति के कपड़े, बिस्तर की चादर या तौलिये के संपर्क में आने से।
- संक्रमित पशुओं से: काटने, खरोंचने या संक्रमित पशु का मांस ठीक से पकाए बिना खाने से।
- मां से बच्चे में: गर्भावस्था के दौरान या प्रसव के समय संक्रमित मां से नवजात शिशु में संक्रमण फैल सकता है, जो शिशुओं के लिए विशेष रूप से खतरनाक हो सकता है।
लक्षण
मंकीपॉक्स के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 5 से 21 दिनों के भीतर दिखाई देते हैं। सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:
- तेज बुखार
- सिरदर्द
- मांसपेशियों में दर्द और कमर दर्द
- ठंड लगना और थकान
- लिम्फ नोड्स (गिल्टियों) में सूजन, जो मंकीपॉक्स को चेचक से अलग करने वाली एक महत्वपूर्ण पहचान है
- चेहरे, हाथ-पैर, हथेलियों, तलवों और जननांग क्षेत्र पर दाने या फुंसियां, जो धीरे-धीरे फफोलों और फिर पपड़ी में बदल जाती हैं
ये दाने आमतौर पर 2 से 4 सप्ताह में अपने आप ठीक हो जाते हैं। अधिकांश मामलों में यह रोग स्वतः सीमित (self-limiting) होता है, यानी उपचार के बिना भी ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर रूप ले सकता है, खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में।
किन्हें अधिक खतरा है
- छोटे बच्चे, विशेषकर नवजात शिशु
- गर्भवती महिलाएं
- एचआईवी या अन्य कारणों से कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग
- कई यौन साथी रखने वाले व्यक्ति, विशेषकर वे जो घनिष्ठ शारीरिक संपर्क में आते हैं
निदान
मंकीपॉक्स के निदान के लिए सबसे विश्वसनीय तरीका है दानों या घावों से लिए गए नमूने की पीसीआर (PCR) जांच, जो वायरस के डीएनए की पहचान करती है। केवल लक्षणों के आधार पर मंकीपॉक्स को चिकनपॉक्स, खसरा या अन्य त्वचा संक्रमणों से अलग करना मुश्किल हो सकता है, इसलिए प्रयोगशाला जांच आवश्यक होती है।
उपचार
मंकीपॉक्स के लिए कोई विशिष्ट, व्यापक रूप से स्वीकृत दवा उपलब्ध नहीं है, और अधिकांश रोगी सहायक देखभाल (supportive care) से ठीक हो जाते हैं, जिसमें शामिल है:
- पर्याप्त तरल पदार्थ लेना
- बुखार और दर्द के लिए सामान्य दवाएं
- दानों को साफ और सूखा रखना ताकि द्वितीयक जीवाणु संक्रमण न हो
- गंभीर मामलों में एंटीवायरल दवाओं (जैसे टेकोविरिमैट) का उपयोग किया जा सकता है, हालांकि इनकी प्रभावशीलता पर अभी और शोध चल रहा है
टीकाकरण और रोकथाम
चेचक के टीके, जो ऑर्थोपॉक्सवायरस परिवार के विरुद्ध सुरक्षा देते हैं, मंकीपॉक्स से बचाव में भी काफी हद तक प्रभावी पाए गए हैं। कई देशों में उच्च जोखिम वाले समूहों के लिए विशेष रूप से विकसित मंकीपॉक्स टीके (जैसे MVA-BN) उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
रोकथाम के सामान्य उपाय:
- संक्रमित या संदिग्ध व्यक्तियों के साथ सीधे शारीरिक संपर्क से बचें
- संक्रमित व्यक्ति के कपड़े, बिस्तर या बर्तन साझा न करें
- नियमित रूप से हाथ साबुन-पानी या सैनिटाइज़र से धोएं
- लक्षण दिखने पर स्वयं को दूसरों से अलग (आइसोलेट) रखें और तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें
- जंगली या अज्ञात पशुओं, विशेषकर कृंतकों के संपर्क से बचें, खासकर स्थानिक क्षेत्रों में
- सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाएं और संदिग्ध लक्षण होने पर घनिष्ठ संपर्क से परहेज करें
वर्तमान वैश्विक स्थिति (2026)
2022 के बड़े वैश्विक प्रकोप के बाद से मंकीपॉक्स पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि यह अब भी कई देशों में सक्रिय रूप से फैल रहा है। WHO की वर्ष 2026 की स्थिति रिपोर्टों के अनुसार, हर महीने दुनिया भर के दर्जनों देशों से हजारों की संख्या में नए पुष्ट मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें से अधिकांश अफ्रीकी क्षेत्र से रिपोर्ट किए जा रहे हैं। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य सहित अफ्रीका के कई देशों में जनवरी 2025 से अब तक हजारों मामले और सैकड़ों मौतें दर्ज हो चुकी हैं। संक्रमण का प्रमुख माध्यम अब भी यौन नेटवर्क के जरिए होने वाला संपर्क बना हुआ है, इसके बाद घरेलू संपर्क का स्थान आता है। कुछ देशों में, जैसे कोलंबिया में, क्लेड Ib वायरस के नए मामलों की पुष्टि भी हुई है, जो यह दर्शाता है कि वायरस अभी भी नए क्षेत्रों में फैल रहा है।
भारत की स्थिति
भारत में भी मंकीपॉक्स के छिटपुट मामले सामने आते रहे हैं, विशेष रूप से विदेश यात्रा से लौटे व्यक्तियों में। भारत सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय समय-समय पर हवाई अड्डों पर निगरानी बढ़ाने, संदिग्ध मामलों की जांच और अस्पतालों में पृथक-वास (isolation) वार्ड तैयार रखने जैसे कदम उठाते रहे हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) इस पर नज़र बनाए हुए हैं।
निष्कर्ष
मंकीपॉक्स एक ऐसी बीमारी है जो अधिकांश मामलों में गंभीर नहीं होती, लेकिन सही समय पर सावधानी न बरतने पर यह तेजी से फैल सकती है, खासकर कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों और बच्चों में गंभीर परिणाम दे सकती है। जागरूकता, समय पर पहचान, स्वच्छता की आदतें, टीकाकरण और संक्रमित व्यक्तियों से उचित दूरी बनाए रखना ही इस बीमारी की रोकथाम के सबसे कारगर उपाय हैं। यदि किसी व्यक्ति में असामान्य दाने, बुखार या गिल्टियों में सूजन जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए और आत्म-निदान से बचना चाहिए।
