मस्से (Warts): कारण, प्रकार, इलाज और बचाव की पूरी जानकारी
परिचय
मस्से यानी वार्ट्स (Warts) त्वचा पर उभरे हुए छोटे, खुरदुरे उभार होते हैं जो शरीर के किसी भी हिस्से पर हो सकते हैं। ये हाथों, पैरों, चेहरे, गर्दन और यहां तक कि जननांगों के आस-पास भी दिखाई दे सकते हैं। बहुत से लोग मस्सों को लेकर परेशान रहते हैं क्योंकि ये देखने में अजीब लगते हैं और कभी-कभी दर्द भी पैदा करते हैं। हालांकि मस्से आमतौर पर गंभीर बीमारी नहीं होते, लेकिन ये संक्रामक (contagious) होते हैं यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकते हैं। इस लेख में हम मस्सों के कारण, उनके प्रकार, लक्षण, इलाज के तरीके और बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
मस्से क्या होते हैं?
मस्से त्वचा की ऊपरी परत में होने वाला एक सौम्य (benign) विकास है, जो ह्यूमन पैपिलोमावायरस (Human Papillomavirus – HPV) नामक वायरस के संक्रमण के कारण होता है। जब यह वायरस त्वचा में किसी कट, खरोंच या छोटी सी दरार के जरिए प्रवेश करता है, तो यह त्वचा की कोशिकाओं को तेजी से बढ़ने के लिए उत्तेजित करता है। इसी अत्यधिक वृद्धि के कारण त्वचा पर उभार बन जाता है, जिसे हम मस्सा कहते हैं।
एचपीवी (HPV) के 100 से भी अधिक प्रकार हैं, और अलग-अलग प्रकार के वायरस शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर अलग तरह के मस्से पैदा करते हैं। यही कारण है कि मस्सों की बनावट, रंग और स्थान अलग-अलग हो सकते हैं।
मस्सों के प्रकार
मस्सों को उनकी बनावट और शरीर पर स्थान के आधार पर मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकारों में बांटा जाता है:
1. सामान्य मस्से (Common Warts)
ये सबसे आम प्रकार के मस्से होते हैं, जो अक्सर उंगलियों, हाथों की पीठ और नाखूनों के आसपास दिखाई देते हैं। इनकी सतह खुरदुरी होती है और ये गोल या अनियमित आकार के उभार जैसे दिखते हैं।
2. तल्वे के मस्से (Plantar Warts)
ये मस्से पैरों के तलवों पर होते हैं। चूंकि इन पर लगातार शरीर का भार पड़ता रहता है, इसलिए ये अंदर की ओर बढ़ते हैं और चलते समय दर्द या चुभन जैसा एहसास दे सकते हैं। इनकी सतह पर कभी-कभी छोटे काले बिंदु भी दिखाई देते हैं, जो वास्तव में जमी हुई रक्त वाहिकाएं होती हैं।
3. चपटे मस्से (Flat Warts)
ये मस्से आकार में छोटे और चिकने होते हैं। ये आमतौर पर चेहरे, माथे, हाथों या पैरों पर एक साथ बड़ी संख्या में उभर आते हैं। बच्चों और युवाओं में यह प्रकार अधिक देखा जाता है।
4. फिलीफॉर्म मस्से (Filiform Warts)
ये मस्से लंबे, पतले और धागे जैसी संरचना वाले होते हैं। ये अक्सर चेहरे पर, खासकर आंखों, नाक या मुंह के आसपास पाए जाते हैं।
5. पेरिअंगुअल मस्से (Periungual Warts)
ये मस्से नाखूनों के नीचे या उनके किनारों पर विकसित होते हैं। इनसे नाखूनों की बनावट और वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
6. जननांग मस्से (Genital Warts)
ये मस्से यौन संपर्क से फैलने वाले एचपीवी के कारण होते हैं और जननांगों के आसपास दिखाई देते हैं। यह एक यौन संचारित संक्रमण (STI) माना जाता है और इसके लिए विशेष चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक होता है।
मस्से होने के कारण
मस्सों के पीछे मुख्य कारण HPV वायरस का संक्रमण होता है, लेकिन कुछ अन्य कारक भी इसके होने की संभावना बढ़ा देते हैं:
- सीधा संपर्क: किसी संक्रमित व्यक्ति के मस्से को छूने से वायरस फैल सकता है।
- त्वचा में कटाव या खरोंच: त्वचा पर छोटी सी भी दरार वायरस के प्रवेश का रास्ता बन जाती है।
- साझा वस्तुओं का उपयोग: तौलिया, नाखून काटने की कैंची, या जूते-चप्पल साझा करने से भी संक्रमण फैल सकता है।
- नम और गीली जगहें: स्विमिंग पूल, सार्वजनिक शावर या जिम के फर्श जैसी नम जगहों पर नंगे पैर चलने से तल्वे के मस्से होने का खतरा बढ़ जाता है।
- कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता: जिन लोगों की इम्यून सिस्टम कमजोर होती है, उनमें मस्से होने और बार-बार होने की संभावना अधिक होती है।
- नाखून चबाने की आदत: जो लोग नाखून चबाते हैं, उनकी उंगलियों और नाखूनों के आसपास त्वचा में सूक्ष्म दरारें बन जाती हैं, जिससे वायरस आसानी से प्रवेश कर सकता है।
मस्सों के लक्षण
मस्सों को पहचानना ज्यादातर मामलों में आसान होता है। इनके सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:
- त्वचा पर छोटा, खुरदुरा और उभरा हुआ हिस्सा
- रंग में हल्का भूरा, गुलाबी या त्वचा के रंग जैसा
- कभी-कभी सतह पर छोटे काले बिंदु दिखाई देना
- तल्वे के मस्सों में चलते समय दर्द या दबाव महसूस होना
- कुछ मस्सों में खुजली या हल्की जलन होना
- एक ही जगह पर कई मस्सों का समूह में उभरना
मस्सों का निदान
अधिकतर मामलों में डॉक्टर सिर्फ मस्से को देखकर ही उसकी पहचान कर लेते हैं। लेकिन अगर मस्से की बनावट असामान्य लगे या डॉक्टर को कैंसर जैसी किसी अन्य स्थिति की आशंका हो, तो वे बायोप्सी (त्वचा का एक छोटा नमूना लेकर जांच) की सलाह दे सकते हैं। जननांग मस्सों के मामले में सही निदान और उपचार के लिए डॉक्टर से मिलना बेहद जरूरी है।
मस्सों का इलाज
अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मस्से समय के साथ अपने आप ठीक हो जाते हैं, खासकर बच्चों में, क्योंकि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे वायरस को खत्म कर देती है। हालांकि अगर मस्सा दर्द दे रहा हो, बढ़ रहा हो, या दिखने में परेशान करने वाला हो, तो कई चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध हैं:
1. सैलिसिलिक एसिड (Salicylic Acid)
यह दवा की दुकानों पर आसानी से मिलने वाला एक सामान्य उपचार है, जो मस्से की ऊपरी परत को धीरे-धीरे हटाने में मदद करता है। इसे नियमित रूप से और लंबे समय तक इस्तेमाल करना पड़ता है।
2. क्रायोथेरेपी (Cryotherapy)
इस प्रक्रिया में डॉक्टर मस्से को तरल नाइट्रोजन से जमा देते हैं, जिससे वह सूखकर अपने आप गिर जाता है। यह क्लिनिक में की जाने वाली एक आम प्रक्रिया है।
3. इलेक्ट्रोकॉटरी और क्यूरेटेज (Electrocautery & Curettage)
इसमें मस्से को जलाकर या खुरचकर हटाया जाता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर स्थानीय एनेस्थीसिया के साथ की जाती है।
4. लेजर उपचार (Laser Treatment)
जिद्दी या बार-बार होने वाले मस्सों के लिए लेजर थेरेपी एक प्रभावी विकल्प है, जिसमें मस्से की रक्त आपूर्ति को नष्ट कर दिया जाता है।
5. इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy)
इस उपचार में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को वायरस से लड़ने के लिए उत्तेजित किया जाता है, जो खासकर उन मामलों में उपयोगी है जहां मस्से बार-बार वापस आ जाते हैं।
घरेलू नुस्खों का सहारा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है, क्योंकि गलत तरीके से मस्सा हटाने की कोशिश करने से त्वचा में संक्रमण या घाव हो सकता है। खासतौर पर जननांग मस्सों, चेहरे के मस्सों, या मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों के तल्वे के मस्सों का इलाज बिना डॉक्टरी सलाह के नहीं करना चाहिए।
मस्सों से बचाव के उपाय
मस्सों से बचने के लिए कुछ सरल सावधानियां अपनाई जा सकती हैं:
- मस्से को बार-बार छूने या खरोंचने से बचें, क्योंकि इससे वायरस शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल सकता है।
- सार्वजनिक स्थानों जैसे स्विमिंग पूल, जिम या साझा बाथरूम में हमेशा चप्पल पहनें।
- अपने तौलिये, मोजे, जूते और नाखून काटने की कैंची किसी और के साथ साझा न करें।
- हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोएं, खासकर सार्वजनिक स्थानों पर जाने के बाद।
- नाखून चबाने या त्वचा को नोचने की आदत से बचें।
- अगर परिवार में किसी को मस्से हों, तो उनके इस्तेमाल की चीजों को छूने के बाद हाथ जरूर धोएं।
- जननांग मस्सों से बचाव के लिए सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाएं और एचपीवी वैक्सीन के बारे में डॉक्टर से जानकारी लें।
कब डॉक्टर से मिलें?
हालांकि ज्यादातर मस्से हानिरहित होते हैं, लेकिन निम्नलिखित स्थितियों में डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है:
- मस्से से खून बह रहा हो, दर्द हो रहा हो या रंग बदल रहा हो
- मस्सा तेजी से बढ़ रहा हो या उसका आकार असामान्य हो
- चेहरे या जननांगों के आसपास मस्सा हो
- मधुमेह या कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति में मस्सा हो
- घरेलू या ओवर-द-काउंटर उपचार से कई हफ्तों बाद भी कोई सुधार न हो
निष्कर्ष
मस्से एक आम त्वचा समस्या है जो HPV वायरस के संक्रमण के कारण होती है। ये आमतौर पर खतरनाक नहीं होते और कई बार बिना इलाज के भी अपने आप ठीक हो जाते हैं। हालांकि सही जानकारी, स्वच्छता की आदतें और समय पर उपचार अपनाकर इनसे होने वाली परेशानी और फैलाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यदि मस्सा असामान्य दिखे, दर्द दे या लंबे समय तक ठीक न हो, तो बिना देर किए किसी त्वचा विशेषज्ञ (डर्मेटोलॉजिस्ट) से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
