मैक्रोफेज एक्टिवेशन सिंड्रोम (Macrophage Activation Syndrome)
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मैक्रोफेज एक्टिवेशन सिंड्रोम (MAS): कारण, लक्षण, निदान और उपचार

परिचय

हमारा प्रतिरक्षा तंत्र शरीर को संक्रमण और बीमारियों से बचाता है। लेकिन कभी-कभी यही तंत्र नियंत्रण से बाहर होकर शरीर के अपने ही अंगों को नुकसान पहुँचाने लगता है। मैक्रोफेज एक्टिवेशन सिंड्रोम (Macrophage Activation Syndrome, MAS) ऐसी ही एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है। यह मुख्य रूप से ऑटोइम्यून और ऑटोइंफ्लेमेटरी बीमारियों के मरीजों में, खासकर बच्चों में, देखी जाती है। समय पर पहचान और इलाज न हो तो यह कुछ ही दिनों में कई अंगों को विफल कर सकती है। इसलिए इसके बारे में जागरूकता बहुत जरूरी है।

मैक्रोफेज एक्टिवेशन सिंड्रोम क्या है?

मैक्रोफेज सफेद रक्त कोशिकाओं का एक प्रकार है। इन्हें शरीर के “सफाईकर्मी” कहा जा सकता है, क्योंकि ये जीवाणुओं, मृत कोशिकाओं और बाहरी पदार्थों को निगलकर नष्ट करते हैं। ये प्रतिरक्षा संकेत भी भेजते हैं ताकि अन्य कोशिकाएँ सक्रिय हों।

MAS में मैक्रोफेज और टी-लिम्फोसाइट (विशेषकर साइटोटॉक्सिक टी-कोशिकाएँ) अत्यधिक और अनियंत्रित रूप से सक्रिय हो जाते हैं। इससे इंटरफेरॉन-गामा, इंटरल्यूकिन-1, इंटरल्यूकिन-6, इंटरल्यूकिन-18 और TNF-अल्फा जैसे सूजन पैदा करने वाले रसायन (साइटोकाइन) भारी मात्रा में निकलते हैं। इस स्थिति को “साइटोकाइन स्टॉर्म” कहते हैं। सक्रिय मैक्रोफेज अस्थि-मज्जा, यकृत और प्लीहा में खून की कोशिकाओं को निगलने लगते हैं, जिसे हीमोफैगोसाइटोसिस कहा जाता है।

MAS को हीमोफैगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस (HLH) का एक द्वितीयक रूप माना जाता है। यानी यह किसी अन्य रोग की पृष्ठभूमि में उत्पन्न होता है, जबकि प्राथमिक HLH आनुवंशिक दोष के कारण होता है।

किन रोगों से जुड़ा है?

MAS सबसे अधिक इन स्थितियों में होता है:

  • सिस्टेमिक जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस (sJIA): बच्चों में MAS का सबसे आम संबंधित रोग। अनुमान है कि लगभग 10 प्रतिशत sJIA मरीजों में स्पष्ट MAS होता है, और कई और मरीजों में इसका हल्का या छिपा रूप हो सकता है।
  • एडल्ट-ऑनसेट स्टिल्स डिजीज (AOSD): वयस्कों में sJIA जैसा रोग।
  • सिस्टेमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस (SLE)
  • कावासाकी रोग
  • संक्रमण: एपस्टीन-बार वायरस (EBV), साइटोमेगालोवायरस (CMV), डेंगू, तपेदिक, कालाजार (लीशमैनियासिस) और अन्य बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण।
  • कुछ कैंसर, खासकर लिम्फोमा।
  • कुछ दवाएँ या रोग की दवाओं में बदलाव।

भारत जैसे देशों में संक्रमण, जैसे डेंगू, कालाजार और टीबी, भी MAS के महत्वपूर्ण कारण हो सकते हैं। इसलिए यहाँ निदान के समय संक्रमणों की जाँच विशेष रूप से जरूरी है।

MAS क्यों होता है?

MAS का सटीक कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, पर माना जाता है कि यह कई कारकों का मिश्रण है:

  1. आनुवंशिक प्रवृत्ति: कुछ मरीजों में परफोरिन (PRF1), UNC13D, STX11 जैसे जीनों में परिवर्तन मिले हैं, जो साइटोटॉक्सिक कोशिकाओं के कार्य को प्रभावित करते हैं।
  2. दोषपूर्ण “ब्रेक” तंत्र: सामान्यतः प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया समय के साथ स्वयं शांत हो जाती है। MAS में सक्रिय कोशिकाओं को हटाने की व्यवस्था विफल हो जाती है।
  3. ट्रिगर: संक्रमण, रोग का तेज होना या दवा बदलना अक्सर इसे शुरू कर देता है।

लक्षण

MAS के लक्षण तेजी से बढ़ते हैं और अक्सर मूल बीमारी के लक्षणों से मिलते-जुलते होते हैं, इसलिए पहचान में देर हो सकती है। प्रमुख लक्षण हैं:

  • लगातार तेज बुखार, जो पहले से चल रहे बुखार के पैटर्न से अलग हो सकता है
  • थकान, कमजोरी और चिड़चिड़ापन
  • यकृत और प्लीहा का बढ़ना (हेपेटोस्प्लेनोमेगाली), लिम्फ नोड्स का बढ़ना
  • त्वचा पर चकत्ते, खून के धब्बे या नाक-मसूड़ों से रक्तस्राव
  • पीलिया और पेट दर्द
  • सिरदर्द, भ्रम, दौरे या बेहोशी, जो मस्तिष्क की भागीदारी दर्शाते हैं
  • साँस लेने में तकलीफ और निम्न रक्तचाप, जो गंभीर अवस्था में होते हैं

निदान

MAS का निदान चिकित्सकीय लक्षणों और प्रयोगशाला जाँचों के संयोजन से होता है। रोग तेजी से बढ़ता है, इसलिए सभी रिपोर्टों के आने का इंतजार किए बिना संदेह होते ही कार्रवाई जरूरी है।

प्रमुख प्रयोगशाला संकेत:

  • फेरिटिन का बहुत अधिक बढ़ना (अक्सर हजारों में)
  • प्लेटलेट्स और सफेद रक्त कोशिकाओं का गिरना
  • हीमोग्लोबिन में कमी
  • लिवर एंजाइम (AST, ALT) का बढ़ना, LDH में वृद्धि
  • ट्राइग्लिसराइड का बढ़ना और फाइब्रिनोजेन का घटना
  • ESR का अचानक गिरना, जबकि पहले यह ऊँचा रहता है। sJIA के मरीजों में यह एक महत्वपूर्ण संकेत है।
  • रक्त के थक्के जमने की जाँच (PT/aPTT) में गड़बड़ी

वर्गीकरण मानदंड: sJIA के मरीजों के लिए 2016 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय किए गए मानदंड प्रयोग होते हैं। इनमें बुखार के साथ फेरिटिन का 684 ng/mL से अधिक होना और प्लेटलेट्स में कमी, AST या ट्राइग्लिसराइड में वृद्धि, तथा फाइब्रिनोजेन में कमी में से कम से कम दो का होना शामिल है। HLH-2004 मानदंड भी उपयोग में आते हैं।

अस्थि-मज्जा जाँच: इसमें हीमोफैगोसाइटोसिस देखा जा सकता है, पर इसका न दिखना MAS को नकारता नहीं है।

इसके साथ मरीज के संक्रमणों, जैसे EBV, CMV, डेंगू, टीबी और कालाजार, की जाँच भी की जाती है, क्योंकि ये ट्रिगर भी हो सकते हैं और नकल भी कर सकते हैं। सेप्सिस और रोग के सामान्य तेज होने से भी MAS को अलग करना पड़ता है।

उपचार

MAS एक चिकित्सकीय आपातकाल है। इलाज आमतौर पर अस्पताल में, अक्सर आईसीयू में, रुमेटोलॉजिस्ट, हेमेटोलॉजिस्ट और संक्रामक रोग विशेषज्ञों की टीम द्वारा किया जाता है।

पहली पंक्ति की दवाएँ:

  • उच्च मात्रा में कॉर्टिकोस्टेरॉइड, जैसे इंट्रावेनस मिथाइलप्रेडनिसोलोन। यह प्रायः उपचार की पहली और सबसे महत्वपूर्ण दवा है।
  • साइक्लोस्पोरिन A: टी-कोशिकाओं की अतिसक्रियता को दबाने के लिए।
  • इंट्रावेनस इम्युनोग्लोबुलिन (IVIG): कुछ मामलों में सहायक।

यदि प्रतिक्रिया अपर्याप्त हो:

  • एनाकिन्रा (Anakinra): IL-1 को रोकने वाली दवा, जो sJIA से जुड़े MAS में विशेष रूप से उपयोगी मानी जाती है।
  • एमापैलुमैब (Emapalumab): इंटरफेरॉन-गामा को निशाना बनाने वाली एंटीबॉडी, जो कुछ मामलों में स्वीकृत या उपयोग में है।
  • रक्सोलिटिनिब जैसे JAK अवरोधक, जिन पर अध्ययन और अनुभव बढ़ रहे हैं।
  • एटोपोसाइड: गंभीर या प्रतिरोधी HLH-जैसे मामलों में, विशेषज्ञ की देखरेख में।

सहायक देखभाल भी उतनी ही जरूरी है, जैसे रक्त या प्लेटलेट चढ़ाना, तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन, संक्रमण का इलाज और अंगों के कार्य को सहारा देना। यदि कोई संक्रमण ट्रिगर है, तो उसका लक्षित इलाज भी साथ-साथ किया जाता है।

पूर्वानुमान

समय पर पहचान और उपचार से अधिकांश मरीज ठीक हो सकते हैं। फिर भी MAS में मृत्यु दर उल्लेखनीय रही है। विभिन्न अध्ययनों में यह कुछ प्रतिशत से लेकर दस-बीस प्रतिशत या उससे अधिक तक बताई गई है। यह मूल रोग, देरी और अंगों की क्षति पर निर्भर करती है। देर से निदान, मस्तिष्क या कई अंगों की भागीदारी और गंभीर रक्तस्राव जोखिम को बढ़ाते हैं। ठीक होने के बाद भी मरीजों में मूल बीमारी का इलाज जारी रखना पड़ता है, और MAS दोबारा हो सकता है।

रोकथाम और सावधानियाँ

MAS को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, पर जोखिम कम किया जा सकता है:

  • sJIA, AOSD, ल्यूपस जैसे रोगों में नियमित फॉलो-अप और दवाओं का सही पालन
  • डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएँ बंद या कम न करना
  • संक्रमण होने पर शीघ्र इलाज और टीकाकरण की सलाह का पालन
  • रोग के तेज होने के संकेतों, जैसे असामान्य बुखार या अत्यधिक थकान, को नजरअंदाज न करना
  • फेरिटिन, रक्त गणना और लिवर एंजाइम की समय-समय पर जाँच, जैसा चिकित्सक सुझाए

कब तुरंत चिकित्सक से मिलें?

यदि किसी ऐसे व्यक्ति में, जिसे ऑटोइम्यून या सूजन संबंधी रोग है, निम्न लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल जाएँ:

  • कई दिनों से तेज और लगातार बुखार
  • अचानक अत्यधिक कमजोरी, पीलापन या पीलिया
  • त्वचा पर नीले-लाल धब्बे या असामान्य रक्तस्राव
  • भ्रम, दौरे या बेहोशी
  • साँस फूलना या पेशाब का कम होना

निष्कर्ष

मैक्रोफेज एक्टिवेशन सिंड्रोम दुर्लभ लेकिन अत्यंत गंभीर स्थिति है, जिसमें प्रतिरक्षा तंत्र अपने ही शरीर के विरुद्ध हो जाता है। इसके लक्षण शुरुआत में सामान्य बुखार या मूल रोग के बढ़ने जैसे लगते हैं, इसलिए चिकित्सकों और परिवारों दोनों का सतर्क रहना जरूरी है। फेरिटिन, रक्त गणना और ESR जैसी सरल जाँचें शुरुआती संकेत दे सकती हैं। आज एनाकिन्रा, एमापैलुमैब और JAK अवरोधक जैसी नई दवाओं से परिणाम बेहतर हो रहे हैं, पर सबसे बड़ा कारक अब भी शीघ्र पहचान और तुरंत इलाज है। यदि आप या आपके परिवार का कोई सदस्य ऑटोइम्यून रोग से पीड़ित है, तो नियमित चिकित्सकीय निगरानी और चेतावनी संकेतों की जानकारी आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।

नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।


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