इस्केमिक कोलाइटिस (Ischemic Colitis - आंतों में खून का प्रवाह रुकना)
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इस्केमिक कोलाइटिस (Ischemic Colitis): जब बड़ी आंत को नहीं मिलता पर्याप्त खून

परिचय

हमारे शरीर का हर अंग सही ढंग से काम करने के लिए ऑक्सीजन और पोषक तत्वों से भरे खून पर निर्भर रहता है। यह खून धमनियों (arteries) के जरिए पहुंचता है। जब किसी अंग तक खून की आपूर्ति कम हो जाती है या रुक जाती है, तो उस अंग की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। बड़ी आंत (large intestine या colon) के साथ ऐसा होने पर जो स्थिति बनती है, उसे इस्केमिक कोलाइटिस कहते हैं।

यह पाचन तंत्र की एक आम लेकिन अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली समस्या है। इसमें बड़ी आंत की दीवार में सूजन और घाव हो जाते हैं। ज्यादातर मामलों में यह हल्की होती है और अपने आप या सामान्य इलाज से ठीक हो जाती है। कुछ मामलों में यह गंभीर रूप ले सकती है और तुरंत इलाज की जरूरत पड़ती है। इसलिए इसके लक्षणों और कारणों की जानकारी होना जरूरी है।

इस्केमिक कोलाइटिस क्या है?

“इस्केमिया” का मतलब है किसी अंग में खून की कमी, और “कोलाइटिस” का मतलब है बड़ी आंत की सूजन। जब आंत की दीवार को पर्याप्त खून नहीं मिलता, तो उसकी भीतरी परत (mucosa) सबसे पहले प्रभावित होती है। उसमें सूजन, घाव और रक्तस्राव होने लगता है। अगर खून की कमी लंबे समय तक बनी रहे या बहुत ज्यादा हो, तो आंत की पूरी दीवार गल सकती है, जिसे गैंग्रीन कहा जाता है।

यह समस्या बड़ी आंत के किसी भी हिस्से में हो सकती है। सबसे ज्यादा मामले बाईं ओर के हिस्सों में दिखते हैं, खासकर “स्प्लेनिक फ्लेक्सर” और “डिसेंडिंग कोलन” में। इन जगहों पर दो प्रमुख धमनियों की सीमा मिलती है और खून की आपूर्ति स्वाभाविक रूप से कम रहती है। इन्हें “वाटरशेड एरिया” कहा जाता है।

यह किसे ज्यादा होती है?

इस्केमिक कोलाइटिस किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन 60 साल से ऊपर के लोगों में यह ज्यादा आम है। इसका कारण यह है कि उम्र बढ़ने के साथ रक्त वाहिकाएं सख्त और संकरी होने लगती हैं। महिलाओं में इसके मामले कुछ ज्यादा देखे जाते हैं। युवाओं में यह कम होती है, पर कुछ खास परिस्थितियों में हो सकती है, जैसे लंबी दूरी की दौड़ या कुछ दवाओं का सेवन।

इस्केमिक कोलाइटिस के मुख्य कारण

इसके कारणों को मोटे तौर पर दो हिस्सों में बांटा जा सकता है।

1. खून का प्रवाह कम होना (Non-occlusive): यह सबसे आम कारण है। इसमें धमनी पूरी तरह बंद नहीं होती, पर रक्तचाप गिरने या शरीर के किसी बड़े संकट के कारण आंत को पर्याप्त खून नहीं पहुंचता। उदाहरण:

  • गंभीर निर्जलीकरण (dehydration)
  • हृदय की कमजोरी (heart failure) या हृदय गति की गड़बड़ी
  • बड़ी सर्जरी के दौरान या बाद में रक्तचाप का गिरना
  • भारी रक्तस्राव या शॉक
  • गंभीर संक्रमण (सेप्सिस)

2. रक्त वाहिका में रुकावट (Occlusive): इसमें थक्का, प्लाक या किसी और कारण से धमनी या शिरा बंद हो जाती है। उदाहरण:

  • धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जमना (एथेरोस्क्लेरोसिस)
  • खून का थक्का बनना, खासकर अनियमित धड़कन (atrial fibrillation) में
  • एब्डॉमिनल एओर्टा की सर्जरी के बाद की जटिलताएं
  • खून के थक्के बनाने की प्रवृत्ति वाली बीमारियां

अन्य जोखिम कारक:

  • पुरानी कब्ज और आंत में अधिक दबाव
  • मधुमेह और उच्च रक्तचाप
  • धूम्रपान
  • कुछ दवाएं, जैसे हार्मोनल गोलियां, कुछ माइग्रेन की दवाएं, कीमोथेरेपी की दवाएं, कब्ज या दस्त की कुछ दवाएं और रक्तचाप घटाने वाली दवाएं
  • कोकेन जैसे नशीले पदार्थ
  • लंबी दूरी की दौड़ (मैराथन) में आंतों का खून कम होना
  • कुछ सूजन वाली रक्त वाहिका की बीमारियां (वास्क्युलाइटिस)

लक्षण: कैसे पहचानें?

इस्केमिक कोलाइटिस के लक्षण अचानक शुरू होते हैं। प्रमुख लक्षण ये हैं:

  • पेट में अचानक दर्द: यह अक्सर पेट के बाएं हिस्से में होता है और ऐंठन जैसा महसूस होता है। दर्द हल्के से लेकर तेज तक हो सकता है।
  • मल में खून: दर्द के कुछ घंटों के भीतर, आमतौर पर 24 घंटे के अंदर, मल के साथ हल्का लाल या गहरे लाल रंग का खून आ सकता है। खून की मात्रा अक्सर ज्यादा नहीं होती।
  • दस्त: पतले और बार-बार दस्त की शिकायत होती है।
  • मल त्यागने की तीव्र इच्छा: बार-बार शौच जाने की जरूरत महसूस होना।
  • पेट में हल्का दबाव या कोमलता: पेट छूने पर दर्द होना।
  • जी मिचलाना या उल्टी, कभी-कभी बुखार।

खतरे के संकेत जिन पर तुरंत ध्यान दें:

  • बहुत तेज और लगातार पेट दर्द
  • पेट का सख्त हो जाना या फूल जाना
  • तेज बुखार और तेज धड़कन
  • बहुत ज्यादा खून आना
  • चक्कर आना, बेहोशी या कमजोरी
  • काला, तारकोल जैसा मल

ये लक्षण गंभीर जटिलता का संकेत हो सकते हैं और इनमें देरी जानलेवा हो सकती है।

जांच कैसे होती है?

लक्षणों की समानता के कारण इस्केमिक कोलाइटिस को अन्य बीमारियों, जैसे संक्रमण वाला कोलाइटिस, अल्सरेटिव कोलाइटिस, क्रोन रोग या डाइवर्टिकुलाइटिस, से अलग करना जरूरी होता है। डॉक्टर आमतौर पर ये जांच करवाते हैं:

  1. शारीरिक जांच और इतिहास: उम्र, पुरानी बीमारियां, दवाएं और हाल की सर्जरी की जानकारी ली जाती है।
  2. खून की जांच: संक्रमण, एनीमिया, डिहाइड्रेशन और सूजन के संकेत देखे जाते हैं।
  3. मल की जांच: संक्रमण की संभावना खारिज करने के लिए।
  4. सीटी स्कैन (CT scan): आंत की दीवार की मोटाई, रक्त वाहिकाओं की स्थिति और जटिलताओं की जानकारी देता है। यह सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली जांच है।
  5. कोलोनोस्कोपी: इस जांच में कैमरे वाली पतली नली से आंत की भीतरी परत देखी जाती है। इसमें सूजन, नीले-काले धब्बे और घाव दिखते हैं। जरूरत पड़ने पर बायोप्सी भी ली जाती है। गंभीर या गैंग्रीन के संदेह वाले मामलों में इसे सावधानी से किया जाता है।
  6. एंजियोग्राफी: जब बड़ी धमनी में रुकावट का शक हो, तब।

इलाज

इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि स्थिति कितनी गंभीर है।

हल्के और मध्यम मामले: ज्यादातर मरीज 1 से 2 हफ्ते में बिना बड़े इलाज के ठीक हो जाते हैं। इसमें शामिल है:

  • अस्पताल में निगरानी
  • आंत को आराम देने के लिए कुछ समय तक खाना-पीना रोकना और नस से तरल पदार्थ (IV fluids) देना
  • दर्द की दवाएं (डॉक्टर की सलाह से; कुछ दर्द निवारक आंत के लिए नुकसानदेह हो सकती हैं)
  • संक्रमण से बचाव या उसके इलाज के लिए एंटीबायोटिक्स
  • मूल कारण, जैसे हृदय रोग या निर्जलीकरण, का इलाज
  • आंत में खून का प्रवाह घटाने वाली दवाओं को बंद या बदलना

गंभीर मामले: अगर आंत की दीवार गल जाए, छेद हो जाए (perforation) या गैंग्रीन हो जाए, तो सर्जरी जरूरी हो जाती है। इसमें आंत का प्रभावित हिस्सा काटकर निकाल दिया जाता है। कभी-कभी अस्थायी रूप से स्टोमा (पेट की दीवार में बनाया गया मल निकासी का रास्ता) बनाना पड़ता है। जहां बड़ी धमनी में थक्का हो, वहां थक्का हटाने या रक्त प्रवाह बहाल करने की प्रक्रिया की जाती है।

संभावित जटिलताएं

ज्यादातर मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, पर कुछ में ये जटिलताएं हो सकती हैं:

  • आंत में संकरापन (stricture), जिससे कब्ज या रुकावट हो सकती है
  • लंबे समय तक चलने वाला कोलाइटिस
  • बार-बार इस्केमिक कोलाइटिस होना
  • आंत में छेद और पेट में संक्रमण (पेरिटोनाइटिस)
  • गैंग्रीन और गंभीर रक्त संक्रमण

बचाव और जीवनशैली

इस्केमिक कोलाइटिस को पूरी तरह रोकना हमेशा संभव नहीं होता, पर जोखिम कम किया जा सकता है:

  • हृदय और रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखें: संतुलित आहार लें, नमक और तला-भुना कम खाएं, और नियमित व्यायाम करें।
  • ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखें, और नियमित जांच करवाएं।
  • धूम्रपान और नशीले पदार्थ छोड़ें। ये रक्त वाहिकाओं को सीधा नुकसान पहुंचाते हैं।
  • पर्याप्त पानी पिएं, खासकर गर्मी में, दस्त या उल्टी के दौरान और व्यायाम के समय।
  • कब्ज से बचें: रेशेदार भोजन (फल, सब्जियां, साबुत अनाज) लें।
  • दवाओं के बारे में सावधान रहें: कोई नई दवा शुरू करने से पहले डॉक्टर को अपनी पुरानी बीमारियों के बारे में बताएं और खुद से दवा न लें।
  • अनियमित हृदय गति का इलाज कराएं: जिन्हें एट्रियल फिब्रिलेशन है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार खून पतला करने की दवाएं लेनी चाहिए।
  • अत्यधिक लंबी दौड़ में सावधानी रखें: पानी और इलेक्ट्रोलाइट का ध्यान रखें और शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें।

कब डॉक्टर से मिलें?

अगर पेट में अचानक दर्द हो और उसके साथ मल में खून या लगातार दस्त हो, तो इसे हल्के में न लें। खासकर अगर आपकी उम्र 60 से ज्यादा है या आपको हृदय रोग, मधुमेह या उच्च रक्तचाप है, तो उसी दिन चिकित्सा सहायता लें। पेट में असहनीय दर्द, बुखार, बेहोशी या बहुत ज्यादा खून आने पर तुरंत आपातकालीन सेवा में जाएं।

निष्कर्ष

इस्केमिक कोलाइटिस बड़ी आंत में खून की आपूर्ति घटने से होने वाली बीमारी है, जो बुजुर्गों और हृदय या रक्त वाहिकाओं की बीमारियों से जूझ रहे लोगों में ज्यादा दिखती है। पेट दर्द के बाद मल में खून आना इसका सबसे अहम संकेत है। अधिकांश मरीज समय पर पहचान और सही इलाज से पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। देर होने या गंभीर रूप लेने पर सर्जरी और जानलेवा जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।

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