महिलाओं में हाई हील्स पहनने से होने वाले मोर्टन्स न्यूरोमा (Morton's Neuroma) का इलाज
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महिलाओं में हाई हील्स पहनने से होने वाला मोर्टन्स न्यूरोमा: कारण, लक्षण और इलाज

भूमिका

आज के दौर में हाई हील्स फैशन और आत्मविश्वास का प्रतीक बन चुकी हैं। ऑफिस मीटिंग से लेकर शादी-पार्टी तक, महिलाएं घंटों तक हाई हील्स पहनकर खड़ी रहती हैं या चलती हैं। लेकिन यह स्टाइलिश फुटवियर पैरों के लिए कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकता है, जिनमें से एक गंभीर समस्या है – मोर्टन्स न्यूरोमा (Morton’s Neuroma)। यह पैर की एक ऐसी स्थिति है जिसमें पैर की उंगलियों के बीच स्थित नसों पर दबाव पड़ने से दर्द, जलन और सुन्नपन महसूस होता है। यह समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में 8 से 10 गुना ज्यादा पाई जाती है, और इसका बड़ा कारण हाई हील्स और नुकीले जूतों का लगातार इस्तेमाल है। इस लेख में हम मोर्टन्स न्यूरोमा के कारण, लक्षण, निदान और इलाज के बारे में विस्तार से जानेंगे।

मोर्टन्स न्यूरोमा क्या है?

मोर्टन्स न्यूरोमा पैर के तलवे में, आमतौर पर तीसरी और चौथी उंगली के बीच, स्थित एक नस (नर्व) के मोटे होने की स्थिति है। यह कोई ट्यूमर नहीं है, बल्कि नस के आसपास के ऊतकों (टिशू) में सूजन और मोटापन आ जाता है, जिससे नस पर दबाव बढ़ जाता है। जब पैर की हड्डियों के बीच बार-बार दबाव या घर्षण होता है, तो शरीर उस नस के चारों ओर सुरक्षा के रूप में रेशेदार ऊतक (fibrous tissue) बना देता है। यही मोटी हुई नस दर्द का मुख्य कारण बनती है। सबसे ज्यादा यह समस्या तीसरी और चौथी उंगली के बीच होती है, हालांकि यह दूसरी और तीसरी उंगली के बीच भी हो सकती है।

हाई हील्स मोर्टन्स न्यूरोमा का कारण कैसे बनती हैं?

हाई हील्स पहनने से पैर की बनावट और उस पर पड़ने वाले दबाव में बड़ा बदलाव आता है। इसे समझना जरूरी है ताकि इस समस्या से बचाव किया जा सके।

  1. पंजों पर बढ़ा हुआ दबाव – जब एड़ी ऊंची होती है, तो शरीर का पूरा भार पैर के अगले हिस्से (पंजों) पर स्थानांतरित हो जाता है। सामान्य फ्लैट जूतों में यह दबाव पूरे पैर में बंटा रहता है, लेकिन हील्स में यह दबाव कई गुना बढ़ जाता है।
  2. नुकीले टो-बॉक्स (Pointed Toe Box) – अधिकतर हाई हील्स के आगे का हिस्सा संकरा और नुकीला होता है, जिससे उंगलियां आपस में दब जाती हैं। इससे उंगलियों के बीच की नसों पर सीधा दबाव पड़ता है।
  3. पैर की अप्राकृतिक स्थिति – हील्स पहनने पर पैर एक अप्राकृतिक कोण में रहता है, जिससे मेटाटार्सल हड्डियां (पैर की लंबी हड्डियां) आपस में करीब आ जाती हैं और नस दब जाती है।
  4. लंबे समय तक खड़े रहना या चलना – अगर महिलाएं रोजाना घंटों तक हाई हील्स में खड़ी रहती हैं या चलती हैं, तो नस पर बार-बार दबाव पड़ने से सूजन बढ़ती जाती है।
  5. तंग और संकरे जूते – सिर्फ हील्स ही नहीं, बल्कि तंग फिटिंग वाले जूते भी इस समस्या को बढ़ावा देते हैं क्योंकि वे उंगलियों को स्वाभाविक रूप से फैलने नहीं देते।

मोर्टन्स न्यूरोमा के प्रमुख लक्षण

मोर्टन्स न्यूरोमा के लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं और समय के साथ बढ़ते जाते हैं। इनमें शामिल हैं:

  • पैर के तलवे में, खासकर उंगलियों के बीच, तेज दर्द या जलन महसूस होना
  • ऐसा लगना जैसे जूते के अंदर कोई कंकड़ या सिलवट है
  • उंगलियों में सुन्नपन या झनझनाहट (tingling sensation)
  • चलते समय या खड़े होते समय दर्द का बढ़ जाना
  • जूते उतारने और पैर को मालिश करने से आराम मिलना
  • लंबे समय तक चलने पर दर्द का तेज होना और आराम करने पर कम होना
  • कभी-कभी सूजन भी महसूस हो सकती है, हालांकि बाहरी रूप से यह हमेशा दिखाई नहीं देती

शुरुआती दौर में यह दर्द रुक-रुक कर आता है, लेकिन अगर इलाज न किया जाए तो यह स्थायी और लगातार बना रह सकता है।

निदान (Diagnosis)

अगर आपको उपरोक्त लक्षण महसूस हों, तो सबसे पहले किसी ऑर्थोपेडिक डॉक्टर या पोडियाट्रिस्ट (पैर रोग विशेषज्ञ) से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर आमतौर पर निम्नलिखित तरीकों से निदान करते हैं:

  1. शारीरिक परीक्षण – डॉक्टर पैर को दबाकर देखते हैं कि दर्द कहां और कितना तेज है। इसके लिए वे पंजे को दोनों तरफ से दबाकर एक विशेष तकनीक (Mulder’s Click Test) का इस्तेमाल करते हैं।
  2. अल्ट्रासाउंड – नस की मोटाई और सूजन को देखने के लिए अल्ट्रासाउंड बहुत उपयोगी होता है।
  3. एमआरआई (MRI) – जटिल मामलों में या सटीक स्थिति जानने के लिए एमआरआई कराई जा सकती है।
  4. एक्स-रे – यह हड्डियों की स्थिति देखने और अन्य समस्याओं (जैसे फ्रैक्चर) को खारिज करने के लिए किया जाता है, हालांकि यह न्यूरोमा को सीधे नहीं दिखा सकता।

मोर्टन्स न्यूरोमा का इलाज

मोर्टन्स न्यूरोमा का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या कितनी गंभीर है। ज्यादातर मामलों में शुरुआती चरण में गैर-सर्जिकल (non-surgical) उपायों से ही राहत मिल जाती है।

1. जूतों में बदलाव

सबसे पहला और सबसे जरूरी कदम है सही फुटवियर का चुनाव करना।

  • हाई हील्स और नुकीले टो-बॉक्स वाले जूते पहनना बंद करें या कम से कम करें
  • चौड़े टो-बॉक्स वाले, आरामदायक और कुशन युक्त जूते पहनें
  • एड़ी की ऊंचाई 1 से 2 इंच से ज्यादा न रखें
  • ऐसे जूते चुनें जो पंजों को स्वाभाविक रूप से फैलने की जगह दें

2. पैडिंग और ऑर्थोटिक्स (Orthotic Inserts)

डॉक्टर अक्सर मेटाटार्सल पैड या कस्टम-मेड ऑर्थोटिक इनसोल की सलाह देते हैं। ये पैड पंजों के नीचे लगाए जाते हैं और मेटाटार्सल हड्डियों को अलग रखने में मदद करते हैं, जिससे नस पर दबाव कम होता है।

3. आराम और बर्फ की सिकाई (Rest and Ice Therapy)

जब भी दर्द महसूस हो, पैर को आराम दें और प्रभावित हिस्से पर बर्फ से सिकाई करें। यह सूजन कम करने में मदद करता है। दिन में 2-3 बार, 15-20 मिनट तक बर्फ लगाना फायदेमंद होता है।

4. दवाइयां

डॉक्टर की सलाह पर दर्द और सूजन कम करने के लिए नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाइयां (NSAIDs) दी जा सकती हैं। गंभीर मामलों में कॉर्टिकोस्टेरॉयड इंजेक्शन भी दिए जाते हैं, जो सूजन और दर्द को तेजी से कम करते हैं।

5. फिजियोथेरेपी और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज

पैर और पंजों की मांसपेशियों को मजबूत और लचीला बनाने के लिए विशेष स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज कराई जाती हैं। इससे नस पर दबाव कम होता है और भविष्य में समस्या दोबारा होने की संभावना घटती है।

6. न्यूरोमा मसाज और मैनुअल थेरेपी

हल्के हाथों से पैर की मालिश करने और उंगलियों को धीरे-धीरे खींचने से भी रक्त संचार बेहतर होता है और दर्द में राहत मिलती है।

7. एडवांस थेरेपी – स्क्लेरोसिंग इंजेक्शन

कुछ मामलों में अल्कोहल स्क्लेरोसिंग इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है, जो नस के ऊतकों को धीरे-धीरे सिकोड़ने में मदद करता है।

8. सर्जरी (Surgical Treatment)

अगर उपरोक्त सभी उपाय असफल हो जाएं और दर्द असहनीय हो जाए, तो सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। सर्जरी में आमतौर पर दो तरीके अपनाए जाते हैं:

  • न्यूरेक्टॉमी (Neurectomy) – इसमें प्रभावित नस के हिस्से को हटा दिया जाता है। यह सबसे आम सर्जिकल तरीका है और इसकी सफलता दर काफी अच्छी होती है।
  • डिकम्प्रेशन सर्जरी (Decompression Surgery) – इसमें आसपास के लिगामेंट को काटकर नस पर पड़ रहे दबाव को कम किया जाता है, जिससे नस को हटाने की जरूरत नहीं पड़ती।

सर्जरी के बाद रिकवरी में आमतौर पर कुछ हफ्तों का समय लगता है, और ज्यादातर मरीज कुछ ही हफ्तों में सामान्य गतिविधियों में लौट आते हैं।

बचाव के उपाय (Prevention Tips)

मोर्टन्स न्यूरोमा से बचाव के लिए महिलाओं को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • हाई हील्स का इस्तेमाल सीमित अवसरों तक ही रखें, रोजाना पहनने से बचें
  • ऑफिस या लंबे समय तक चलने-फिरने के लिए फ्लैट या कम एड़ी वाले आरामदायक जूते चुनें
  • जूते खरीदते समय टो-बॉक्स की चौड़ाई जरूर जांचें
  • हील्स पहनने के दौरान बीच-बीच में पैरों को आराम दें
  • नियमित रूप से पैरों की स्ट्रेचिंग और मसाज करें
  • वजन नियंत्रित रखें, क्योंकि अतिरिक्त वजन भी पैरों पर दबाव बढ़ाता है
  • पैर में हल्का सा भी दर्द महसूस होने पर उसे नजरअंदाज न करें और समय रहते डॉक्टर से सलाह लें

निष्कर्ष

मोर्टन्स न्यूरोमा एक ऐसी समस्या है जो शुरुआत में मामूली लग सकती है, लेकिन अगर इसे नजरअंदाज किया जाए तो यह लंबे समय तक असहनीय दर्द का कारण बन सकती है। हाई हील्स फैशन का हिस्सा जरूर हैं, लेकिन इनका अत्यधिक और लगातार इस्तेमाल पैरों की सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। समय रहते सही फुटवियर का चुनाव, नियमित एक्सरसाइज और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेकर इस समस्या से आसानी से बचा जा सकता है और इसका सफल इलाज भी संभव है। अगर आपको पैर में लगातार दर्द, जलन या सुन्नपन महसूस हो रहा है, तो इसे हल्के में न लें और जल्द से जल्द किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलें।

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