फैमिलियल मेडिटेरेनियन फीवर (FMF): एक आनुवंशिक सूजन विकार
परिचय
कल्पना कीजिए कि किसी बच्चे को अचानक तेज़ बुखार आता है और पेट में असहनीय दर्द उठता है। डॉक्टर अपेंडिसाइटिस की आशंका में ऑपरेशन तक कर देते हैं, पर कुछ दिनों में दर्द और बुखार अपने आप ठीक हो जाते हैं। कुछ हफ़्तों या महीनों बाद यही सब फिर लौट आता है। यह बार-बार दोहराने वाला चक्र फैमिलियल मेडिटेरेनियन फीवर (FMF) का एक विशिष्ट लक्षण हो सकता है।
FMF एक आनुवंशिक रोग है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बिना किसी संक्रमण के अचानक सक्रिय हो जाती है और सूजन के बार-बार आने वाले दौरे पैदा करती है। इसे “ऑटोइंफ्लेमेटरी” या स्व-सूजन संबंधी विकारों की श्रेणी में रखा जाता है। समय पर पहचान और सही इलाज से इसे बहुत अच्छी तरह नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन अनदेखी करने पर यह गुर्दों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है।
FMF क्या है?
FMF को “पीरियोडिक फीवर सिंड्रोम” भी कहा जाता है। इसमें बुखार के साथ पेट, छाती या जोड़ों में दर्द के दौरे पड़ते हैं। ये दौरे आमतौर पर 12 से 72 घंटे चलते हैं और फिर अपने आप ठीक हो जाते हैं। दो दौरों के बीच व्यक्ति सामान्यतः बिल्कुल स्वस्थ महसूस करता है, इसीलिए रोग की पहचान में अक्सर देरी हो जाती है।
नाम में “मेडिटेरेनियन” इसलिए जुड़ा है कि यह रोग पहले-पहल भूमध्य सागर के आसपास बसे समुदायों में पहचाना गया। इनमें तुर्क, अर्मेनियाई, अरब और सेफ़ार्डिक यहूदी समुदाय प्रमुख हैं। हालाँकि अब दुनिया के अन्य हिस्सों, भारत सहित, में भी इसके मामले दर्ज होते हैं।
आनुवंशिक कारण
FMF का कारण MEFV नामक जीन में बदलाव (म्यूटेशन) है, जो 16वें गुणसूत्र पर स्थित होता है। यह जीन “पाइरिन” नामक प्रोटीन बनाता है, जो मुख्य रूप से श्वेत रक्त कोशिकाओं (न्यूट्रोफिल और मोनोसाइट) में पाया जाता है। सामान्य अवस्था में पाइरिन सूजन की प्रक्रिया को नियंत्रित रखने में भूमिका निभाता है।
जब जीन में गड़बड़ी होती है, तो यह नियंत्रण कमज़ोर पड़ जाता है। “इन्फ्लेमेसोम” नामक प्रतिरक्षा संरचना ज़रूरत से ज़्यादा सक्रिय हो जाती है और इंटरल्यूकिन-1 बीटा (IL-1β) जैसे सूजन पैदा करने वाले रसायन अधिक मात्रा में निकलते हैं। इसी से बुखार और दर्द के दौरे पड़ते हैं।
FMF आमतौर पर ऑटोसोमल रिसेसिव तरीके से विरासत में मिलता है। इसका मतलब है कि बीमारी होने के लिए बच्चे को माता और पिता, दोनों से म्यूटेटेड जीन की एक-एक प्रति मिलनी चाहिए। माता-पिता प्रायः स्वयं स्वस्थ “वाहक” होते हैं और उन्हें पता भी नहीं होता। यदि दोनों माता-पिता वाहक हों, तो हर गर्भावस्था में बच्चे को रोग होने की संभावना लगभग 25 प्रतिशत होती है। कुछ मामलों में केवल एक म्यूटेशन होने पर भी हल्के लक्षण दिख सकते हैं, और रक्त संबंधियों में विवाह होने पर जोखिम बढ़ जाता है।
लक्षण
FMF के लक्षण आमतौर पर बचपन या किशोरावस्था में शुरू होते हैं। लगभग 90 प्रतिशत मामलों में पहला दौरा 20 वर्ष की उम्र से पहले आ जाता है। प्रमुख लक्षण ये हैं:
बुखार: दौरे के दौरान तापमान अक्सर 38 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है, जो कभी-कभी ठंड लगने के साथ आता है।
पेट दर्द: यह सबसे आम लक्षण है। पेट की झिल्ली (पेरिटोनियम) में सूजन के कारण तेज़ दर्द होता है, जो कभी-कभी “तीव्र पेट” जैसा लगता है। इसी कारण कई मरीज़ों की अनावश्यक सर्जरी हो जाती है।
छाती में दर्द: फेफड़ों की झिल्ली (प्लूरा) में सूजन से साँस लेते समय छाती में चुभने वाला दर्द होता है, जो आमतौर पर एक तरफ़ ज़्यादा होता है।
जोड़ों में दर्द और सूजन: आमतौर पर घुटने, टखने या कूल्हे जैसे बड़े जोड़ प्रभावित होते हैं। यह दर्द कुछ दिनों में ठीक हो जाता है, पर कभी-कभी लंबा भी खिंच सकता है।
त्वचा पर चकत्ते: पैरों, ख़ासकर टखने और पंजे के आसपास, लाल, गर्म और दर्दनाक चकत्ते दिख सकते हैं, जिन्हें “एरिसिपेलास जैसा दाना” कहा जाता है।
मांसपेशियों में दर्द: कुछ लोगों को, ख़ासकर पैरों में, तेज़ मांसपेशीय दर्द होता है।
दौरे किसी भी समय आ सकते हैं, पर कुछ लोगों में शारीरिक या मानसिक तनाव, थकान, ठंड, संक्रमण या महिलाओं में मासिक धर्म के आसपास इन्हें बढ़ावा मिलता है। दौरों की आवृत्ति हर व्यक्ति में अलग होती है। किसी को हफ़्ते में, तो किसी को साल में एक-दो बार दौरा आ सकता है।
जटिलताएँ
FMF की सबसे गंभीर जटिलता AA एमाइलॉइडोसिस है। बार-बार होने वाली सूजन के कारण “सीरम एमाइलॉइड A” नामक प्रोटीन अधिक बनता है, जो गुर्दों जैसे अंगों में जमा होने लगता है। इससे पेशाब में प्रोटीन आना (प्रोटीन्यूरिया), शरीर में सूजन और अंततः गुर्दे की विफलता हो सकती है। बिना इलाज के यह जोखिम काफ़ी अधिक रहता है, जबकि नियमित इलाज से इसे लगभग रोका जा सकता है।
अन्य संभावित समस्याओं में बार-बार पेट की सर्जरी से बनने वाले चिपकाव (एडहेशन), महिलाओं में प्रजनन संबंधी कठिनाइयाँ, लंबे समय तक जोड़ों की समस्याएँ और हृदय की झिल्ली में सूजन (पेरिकार्डाइटिस) शामिल हैं। साथ ही, बार-बार बीमार पड़ने से बच्चों की पढ़ाई, वयस्कों के काम और जीवन की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है।
निदान
FMF का निदान मुख्यतः क्लिनिकल होता है, यानी लक्षणों के पैटर्न और पारिवारिक इतिहास के आधार पर किया जाता है। डॉक्टर इन बातों पर ध्यान देते हैं:
- बुखार के साथ बार-बार आने वाले, छोटी अवधि के दौरे
- दौरों के बीच पूर्ण स्वास्थ्य
- परिवार में समान लक्षणों का इतिहास या संबंधित जातीय पृष्ठभूमि
- कोल्चिसिन दवा से दौरों में स्पष्ट सुधार
दौरे के समय रक्त जाँच में सूजन के संकेतक, जैसे CRP, ESR, श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या और सीरम एमाइलॉइड A, बढ़े हुए मिलते हैं। MEFV जीन की आनुवंशिक जाँच निदान की पुष्टि में मदद करती है, लेकिन यह जाँच सामान्य आने पर भी रोग को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता, क्योंकि कुछ मरीज़ों में म्यूटेशन पकड़ में नहीं आता। इसी तरह केवल जाँच में म्यूटेशन मिलना भी रोग की गारंटी नहीं है। इसलिए रिपोर्ट की व्याख्या अनुभवी रूमेटोलॉजिस्ट या बाल रोग विशेषज्ञ से करवाना बेहतर है।
निदान में सावधानी इसलिए ज़रूरी है कि FMF जैसे लक्षण अपेंडिसाइटिस, पेट के संक्रमण, गठिया-संबंधी रोगों, सूजन आंत्र रोग (IBD) और अन्य पीरियोडिक बुखार सिंड्रोम में भी हो सकते हैं।
उपचार
कोल्चिसिन: मुख्य दवा
FMF के इलाज की आधारशिला कोल्चिसिन है। यह दवा दौरों की संख्या और तीव्रता को काफ़ी घटा देती है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि एमाइलॉइडोसिस का ख़तरा लगभग समाप्त कर देती है। इसे आमतौर पर जीवन भर रोज़ाना लेना पड़ता है, भले ही व्यक्ति स्वस्थ महसूस कर रहा हो। खुराक उम्र, वज़न और रोग की गंभीरता के अनुसार डॉक्टर तय करते हैं। वयस्कों में यह प्रायः 1 से 2 मिलीग्राम प्रतिदिन के दायरे में होती है।
सबसे आम दुष्प्रभाव दस्त, मतली और पेट की परेशानी हैं, जो अक्सर खुराक धीरे-धीरे बढ़ाने या बाँटकर देने से कम हो जाते हैं। बहुत कम मामलों में रक्त कोशिकाओं की संख्या या मांसपेशियों पर असर पड़ सकता है, इसलिए समय-समय पर जाँच कराई जाती है। गुर्दे या लिवर की बीमारी हो, या कुछ अन्य दवाएँ (जैसे कुछ एंटीबायोटिक) चल रही हों, तो डॉक्टर को अवश्य बताएँ। अपने मन से दवा बंद या कम न करें।
जब कोल्चिसिन काफ़ी न हो
लगभग 5 से 10 प्रतिशत मरीज़ों में कोल्चिसिन से पूरा नियंत्रण नहीं मिलता या वे इसे सहन नहीं कर पाते। ऐसे मामलों में IL-1 को रोकने वाली जैविक दवाएँ, जैसे एनाकिनरा, कैनाकिनुमैब या रिलोनासेप्ट, विशेषज्ञ की देखरेख में दी जाती हैं। ये दवाएँ महँगी होती हैं और संक्रमण का जोखिम थोड़ा बढ़ा सकती हैं, इसलिए केवल चुने हुए मामलों में प्रयोग होती हैं।
दौरे के समय देखभाल
दौरे के दौरान दर्द निवारक (जैसे NSAIDs) और आराम से राहत मिल सकती है, पर इन्हें डॉक्टर की सलाह से ही लें।
गर्भावस्था, बच्चे और दैनिक जीवन
कोल्चिसिन आमतौर पर गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान भी जारी रखी जाती है, क्योंकि बिना इलाज के बीमारी का ख़तरा दवा के जोखिम से अधिक माना जाता है। फिर भी गर्भधारण की योजना बनाते समय अपने डॉक्टर से परामर्श ज़रूर करें।
बच्चों में सही खुराक के साथ इलाज से सामान्य विकास और स्कूल की पढ़ाई संभव है। माता-पिता को बच्चे के दौरों की तारीख़, अवधि और लक्षणों की डायरी रखनी चाहिए, जो डॉक्टर के लिए बहुत उपयोगी होती है।
दैनिक जीवन में नियमित दवा, पर्याप्त नींद, तनाव प्रबंधन, संतुलित आहार और नियमित जाँच (ख़ासकर पेशाब में प्रोटीन की जाँच और गुर्दों की निगरानी) बहुत मदद करती हैं।
रोग का पूर्वानुमान
सही समय पर निदान और नियमित कोल्चिसिन उपचार मिलने पर FMF के अधिकांश मरीज़ सामान्य, सक्रिय और लंबा जीवन जीते हैं। रोग की गंभीर जटिलताएँ मुख्यतः उन मामलों में दिखती हैं जहाँ निदान बहुत देर से होता है या इलाज अनियमित रहता है।
कब डॉक्टर से मिलें?
- बार-बार बिना कारण बुखार के साथ पेट, छाती या जोड़ों का दर्द हो
- परिवार में किसी को FMF या एमाइलॉइडोसिस का इतिहास हो
- पेशाब में झाग, पैरों या चेहरे पर सूजन दिखे
- बार-बार पेट दर्द के बावजूद जाँचों में कोई स्पष्ट कारण न मिले
निष्कर्ष
फैमिलियल मेडिटेरेनियन फीवर एक दुर्लभ लेकिन पूरी तरह प्रबंधन योग्य आनुवंशिक रोग है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती देर से पहचान है, क्योंकि इसके लक्षण कई सामान्य बीमारियों जैसे दिखते हैं। यदि बार-बार आने वाले बुखार और दर्द के दौरों का पैटर्न पहचानकर सही विशेषज्ञ से जाँच करा ली जाए, तो एक सस्ती और असरदार दवा, कोल्चिसिन, मरीज़ को गंभीर जटिलताओं से बचा सकती है। जागरूकता, नियमित इलाज और चिकित्सकीय निगरानी ही इस रोग के साथ स्वस्थ जीवन की कुंजी है।
नोट: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। निदान और उपचार के लिए हमेशा योग्य चिकित्सक से परामर्श करें।
