एसेंशियल थ्रोम्बोसाइटेमिया (Essential Thrombocythemia - प्लेटलेट्स का अत्यधिक बनना)
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एसेंशियल थ्रोम्बोसाइटेमिया (Essential Thrombocythemia)

परिचय

एसेंशियल थ्रोम्बोसाइटेमिया (Essential Thrombocythemia, ET) एक दुर्लभ रक्त विकार है, जिसमें अस्थि मज्जा (बोन मैरो) आवश्यकता से कहीं अधिक मात्रा में प्लेटलेट्स (रक्त की वे छोटी कोशिकाएँ जो रक्त का थक्का जमाने में मदद करती हैं) बनाने लगती है। इसे “मायलोप्रोलिफरेटिव नियोप्लाज्म” (Myeloproliferative Neoplasm) नामक बीमारियों के समूह में रखा जाता है, जिसमें अस्थि मज्जा में रक्त कोशिकाओं का निर्माण असामान्य रूप से बढ़ जाता है।

सामान्य स्थिति में एक स्वस्थ व्यक्ति के रक्त में प्रति माइक्रोलीटर लगभग 1.5 से 4.5 लाख प्लेटलेट्स होते हैं। लेकिन एसेंशियल थ्रोम्बोसाइटेमिया से पीड़ित व्यक्तियों में यह संख्या 6 लाख से लेकर कई बार 10 लाख से भी अधिक हो जाती है। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ने वाली (क्रॉनिक) होती है और अधिकतर मामलों में इसका पता संयोगवश किसी सामान्य रक्त जांच के दौरान चलता है।

एसेंशियल थ्रोम्बोसाइटेमिया के कारण

इस बीमारी का सटीक कारण अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन वैज्ञानिकों ने कुछ आनुवंशिक (जेनेटिक) परिवर्तनों की पहचान की है जो इस स्थिति से जुड़े होते हैं:

1. JAK2 जीन में उत्परिवर्तन (Mutation) लगभग 50-60% रोगियों में JAK2V617F नामक जीन में परिवर्तन पाया जाता है। यह जीन कोशिकाओं की वृद्धि को नियंत्रित करता है, और इसमें बदलाव आने से प्लेटलेट्स का उत्पादन अनियंत्रित हो जाता है।

2. CALR जीन में उत्परिवर्तन लगभग 20-25% मामलों में कैल्रेटिक्यूलिन (CALR) जीन में परिवर्तन देखा जाता है।

3. MPL जीन में उत्परिवर्तन कुछ रोगियों (लगभग 3-5%) में MPL जीन में परिवर्तन पाया जाता है, जो थ्रोम्बोपोइटिन नामक हार्मोन के रिसेप्टर को प्रभावित करता है।

4. ट्रिपल-नेगेटिव मामले कुछ रोगियों में उपरोक्त तीनों में से कोई भी जीन परिवर्तन नहीं पाया जाता, फिर भी उन्हें यह बीमारी होती है। इन्हें “ट्रिपल-नेगेटिव” ET कहा जाता है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह बीमारी आनुवंशिक रूप से माता-पिता से बच्चों में सीधे नहीं फैलती, बल्कि यह जीन परिवर्तन जीवन के दौरान अर्जित (एक्वायर्ड) होता है।

किसे अधिक खतरा होता है?

  • यह बीमारी अधिकतर 50 से 60 वर्ष की आयु के बाद अधिक देखी जाती है, हालांकि यह किसी भी उम्र में हो सकती है।
  • महिलाओं में यह पुरुषों की तुलना में थोड़ा अधिक पाई जाती है।
  • यह एक दुर्लभ बीमारी है और प्रति एक लाख जनसंख्या में लगभग 1-2 लोगों को प्रभावित करती है।

लक्षण

एसेंशियल थ्रोम्बोसाइटेमिया के लगभग आधे मामलों में शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखाई देते, और इसका पता किसी नियमित रक्त जांच में ही चलता है। जब लक्षण दिखाई देते हैं, तो वे मुख्यतः दो प्रकार की समस्याओं से जुड़े होते हैं – रक्त के थक्के जमना (थ्रोम्बोसिस) और असामान्य रक्तस्राव।

थ्रोम्बोसिस (रक्त के थक्के) से जुड़े लक्षण:

  • हाथ-पैरों की उंगलियों में झनझनाहट, जलन या नीलापन (एरिथ्रोमेल्जिया)
  • सिरदर्द और चक्कर आना
  • दृष्टि में धुंधलापन या अस्थायी अंधापन
  • सीने में दर्द
  • हाथ या पैर में सूजन और दर्द (डीप वेन थ्रोम्बोसिस)
  • गंभीर मामलों में स्ट्रोक या हार्ट अटैक

रक्तस्राव से जुड़े लक्षण:

  • नाक से खून आना
  • मसूड़ों से खून आना
  • त्वचा पर नील (चोट) के निशान आसानी से पड़ना
  • पाचन तंत्र में रक्तस्राव

अन्य सामान्य लक्षण:

  • कमजोरी और थकान
  • तिल्ली (स्प्लीन) का बढ़ना, जिससे पेट के बाईं ओर भारीपन महसूस होना
  • रात में पसीना आना
  • अनजाने में वजन कम होना
  • खुजली, विशेषकर गर्म पानी से नहाने के बाद

निदान (डायग्नोसिस)

एसेंशियल थ्रोम्बोसाइटेमिया का निदान कई चरणों में किया जाता है:

1. संपूर्ण रक्त गणना (Complete Blood Count – CBC) यह पहली जांच है जिसमें प्लेटलेट काउंट की असामान्य वृद्धि देखी जाती है (आमतौर पर 4.5 लाख से अधिक)।

2. रक्त फिल्म परीक्षण (Peripheral Blood Smear) इसमें माइक्रोस्कोप के नीचे रक्त कोशिकाओं की आकृति और संरचना की जांच की जाती है।

3. आनुवंशिक परीक्षण (Genetic Testing) JAK2, CALR और MPL जीन में परिवर्तन की जांच के लिए रक्त परीक्षण किया जाता है।

4. अस्थि मज्जा बायोप्सी (Bone Marrow Biopsy) यह निदान की पुष्टि के लिए सबसे महत्वपूर्ण जांच है। इसमें अस्थि मज्जा का एक छोटा नमूना लेकर उसकी सूक्ष्मदर्शी से जांच की जाती है, जिससे मेगाकैरियोसाइट्स (प्लेटलेट बनाने वाली कोशिकाओं) की असामान्य वृद्धि का पता चलता है।

5. अन्य कारणों को खारिज करना चूंकि प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ने के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं (जैसे संक्रमण, सूजन, आयरन की कमी, या कैंसर), डॉक्टर पहले इन कारणों को खारिज करते हैं। इसे “रिएक्टिव थ्रोम्बोसाइटोसिस” कहा जाता है, जो एसेंशियल थ्रोम्बोसाइटेमिया से अलग है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार निदान की पुष्टि की जाती है, जिसमें उपरोक्त सभी जांचों के परिणामों को मिलाकर देखा जाता है।

जटिलताएं (Complications)

यदि इस बीमारी का उचित प्रबंधन न किया जाए, तो निम्नलिखित गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं:

  • थ्रोम्बोसिस: रक्त के थक्के धमनियों या शिराओं में बनकर स्ट्रोक, हार्ट अटैक या फुफ्फुसीय एम्बोलिज्म (फेफड़ों में रक्त का थक्का) का कारण बन सकते हैं।
  • रक्तस्राव: विरोधाभासी रूप से, अत्यधिक प्लेटलेट्स होने पर भी असामान्य रक्तस्राव हो सकता है, क्योंकि अत्यधिक प्लेटलेट्स कभी-कभी ठीक से काम नहीं करते।
  • गर्भावस्था में जटिलताएं: गर्भवती महिलाओं में गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है।
  • बीमारी का रूपांतरण: दुर्लभ मामलों में (लगभग 5-10% रोगियों में, कई वर्षों बाद) यह बीमारी मायलोफाइब्रोसिस या एक्यूट मायलॉइड ल्यूकेमिया (रक्त कैंसर) में बदल सकती है।

उपचार (Treatment)

एसेंशियल थ्रोम्बोसाइटेमिया का उपचार व्यक्ति के जोखिम स्तर (रिस्क कैटेगरी) के अनुसार तय किया जाता है। जोखिम का आकलन उम्र, पहले थ्रोम्बोसिस का इतिहास, और JAK2 म्यूटेशन की उपस्थिति के आधार पर किया जाता है।

1. कम जोखिम वाले रोगी यदि रोगी की उम्र कम है और पहले कभी थक्का जमने की समस्या नहीं हुई है, तो अक्सर केवल कम मात्रा में एस्पिरिन दी जाती है, जो रक्त को पतला रखने में मदद करती है। नियमित निगरानी आवश्यक होती है।

2. उच्च जोखिम वाले रोगी यदि रोगी की उम्र अधिक है या पहले थ्रोम्बोसिस हो चुका है, तो प्लेटलेट काउंट कम करने वाली दवाएं दी जाती हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • हाइड्रोक्सीयूरिया (Hydroxyurea): यह सबसे सामान्य रूप से उपयोग की जाने वाली दवा है, जो अस्थि मज्जा में कोशिकाओं के उत्पादन को धीमा करती है।
  • एनाग्रेलाइड (Anagrelide): यह विशेष रूप से प्लेटलेट उत्पादन को कम करती है।
  • इंटरफेरॉन अल्फा (Interferon Alpha): यह विशेष रूप से युवा रोगियों और गर्भवती महिलाओं के लिए उपयुक्त मानी जाती है, क्योंकि इसका भ्रूण पर कोई ज्ञात नुकसानदायक प्रभाव नहीं है।
  • रुक्सोलिटिनिब (Ruxolitinib): यह JAK2 अवरोधक (इनहिबिटर) है, जिसका उपयोग कुछ विशेष मामलों में किया जाता है।

3. आपातकालीन स्थिति में यदि प्लेटलेट काउंट अत्यधिक बढ़ जाए और तुरंत कम करने की आवश्यकता हो, तो “प्लेटलेटफेरेसिस” नामक प्रक्रिया की जा सकती है, जिसमें मशीन के माध्यम से सीधे रक्त से अतिरिक्त प्लेटलेट्स निकाले जाते हैं।

जीवनशैली में सावधानियां

एसेंशियल थ्रोम्बोसाइटेमिया के रोगियों को अपने दैनिक जीवन में कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए:

  • धूम्रपान पूरी तरह से बंद करें, क्योंकि यह रक्त के थक्के बनने के खतरे को और बढ़ाता है।
  • शरीर का वजन नियंत्रित रखें और नियमित हल्का व्यायाम करें।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि रक्त गाढ़ा न हो।
  • लंबी यात्राओं के दौरान बीच-बीच में उठकर टहलें, ताकि पैरों में रक्त का थक्का न बने।
  • नियमित रूप से डॉक्टर से रक्त जांच कराते रहें।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा, विशेषकर दर्द निवारक दवाएं, न लें।

रोग का पूर्वानुमान (Prognosis)

अच्छी बात यह है कि उचित उपचार और निगरानी के साथ, एसेंशियल थ्रोम्बोसाइटेमिया से पीड़ित अधिकांश लोग सामान्य जीवन प्रत्याशा के साथ जी सकते हैं। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और सही प्रबंधन से इसकी जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। नियमित जांच, समय पर उपचार, और डॉक्टर के निर्देशों का पालन करना दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

एसेंशियल थ्रोम्बोसाइटेमिया एक दुर्लभ लेकिन प्रबंधनीय रक्त विकार है। यदि किसी व्यक्ति को असामान्य थकान, बार-बार सिरदर्द, हाथ-पैरों में झनझनाहट, या अनियमित रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। समय पर निदान और सही उपचार से इस बीमारी के साथ भी एक स्वस्थ और सामान्य जीवन जिया जा सकता है।

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