एपिस्टेक्सिस (नकसीर फूटना): कारण, प्राथमिक उपचार और बचाव
नाक से अचानक खून बहने लगे तो अधिकतर लोग घबरा जाते हैं। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को एपिस्टेक्सिस (Epistaxis) कहा जाता है, जबकि आम बोलचाल में इसे नकसीर फूटना कहते हैं। यह एक बहुत सामान्य समस्या है। अनुमान है कि जीवन में हर दस में से लगभग आठ से नौ लोगों को कभी न कभी नकसीर का अनुभव होता है। ज़्यादातर मामले मामूली होते हैं और कुछ मिनटों में अपने आप या साधारण घरेलू उपाय से रुक जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। इसलिए इसके कारणों, प्राथमिक उपचार और बचाव के तरीकों की सही जानकारी होना ज़रूरी है।
नाक में खून बहने की वजह: नाक की बनावट
हमारी नाक की भीतरी परत (म्यूकोसा) बहुत पतली और नाज़ुक होती है। इसमें रक्त की अनेक छोटी-छोटी नलिकाओं का जाल फैला होता है, ताकि साँस के साथ अंदर जाने वाली हवा गर्म और नम हो सके। नाक के बीच की दीवार, जिसे नासा पट (सेप्टम) कहते हैं, के आगे वाले हिस्से में रक्त नलिकाओं का एक घना समूह होता है, जिसे किसलबैक प्लेक्सस (Kiesselbach’s plexus) कहते हैं। लगभग 90 प्रतिशत नकसीर इसी स्थान से शुरू होती है, क्योंकि यहाँ की नलिकाएँ सतह के बेहद पास होती हैं और हल्की चोट या सूखेपन से भी फट जाती हैं।
एपिस्टेक्सिस के प्रकार
खून बहने के स्थान के आधार पर नकसीर को दो मुख्य प्रकारों में बाँटा जाता है।
1. अग्र नकसीर (Anterior Epistaxis): यह सबसे आम प्रकार है, जो नाक के अगले हिस्से से शुरू होता है। इसमें खून आमतौर पर एक नथुने से बाहर टपकता है। यह बच्चों और युवाओं में अधिक देखा जाता है और अक्सर घर पर ही नियंत्रित हो जाता है।
2. पश्च नकसीर (Posterior Epistaxis): इसमें खून नाक के पिछले, गहरे हिस्से की बड़ी रक्त नलिकाओं से आता है। यह कम होता है, पर अधिक गंभीर होता है। खून अक्सर गले के पीछे की ओर बहता है और मुँह में आ जाता है, जिससे व्यक्ति को खून निगलने या उल्टी जैसा महसूस हो सकता है। यह प्रकार ज़्यादातर बुज़ुर्गों और उच्च रक्तचाप के रोगियों में पाया जाता है और इसमें तुरंत चिकित्सकीय सहायता की ज़रूरत पड़ती है।
नकसीर के प्रमुख कारण
नकसीर के कारणों को स्थानीय (नाक से जुड़े) और सामान्य (शरीर की अन्य स्थितियों से जुड़े) कारणों में बाँटा जा सकता है।
स्थानीय कारण
- नाक में उँगली डालना या कुरेदना: बच्चों में नकसीर का सबसे आम कारण यही है।
- शुष्क हवा: सर्दियों में हीटर या एयर कंडीशनर के कारण हवा सूखी हो जाती है और नाक की परत सूखकर फटने लगती है। गर्मियों में अत्यधिक लू और तापमान भी कारण बन सकते हैं।
- चोट: नाक पर चोट लगना, खेल में टक्कर, या नाक की हड्डी का टूटना।
- सर्दी-ज़ुकाम और साइनस संक्रमण: बार-बार नाक साफ़ करने या छींकने से परत में जलन होती है।
- एलर्जी: एलर्जिक राइनाइटिस में नाक की परत संवेदनशील हो जाती है।
- नाक की बनावट में दोष: टेढ़ा सेप्टम (Deviated septum) होने पर हवा का प्रवाह असमान रहता है और एक तरफ़ सूखापन बढ़ता है।
- नाक के स्प्रे और दवाएँ: स्टेरॉइड या डीकंजेस्टेंट नेज़ल स्प्रे का लंबे समय तक या गलत तरीके से उपयोग।
- नाक या साइनस की गाँठ या ट्यूमर: दुर्लभ मामलों में, खासकर जब एक ही तरफ़ से बार-बार खून आए।
- बाहरी वस्तु: छोटे बच्चों के नाक में कोई चीज़ फँस जाना।
सामान्य (प्रणालीगत) कारण
- उच्च रक्तचाप: यह सीधे नकसीर का कारण नहीं भी हो सकता, पर बढ़ा हुआ रक्तचाप खून बहने को बढ़ा देता है और रोकना कठिन बना देता है।
- रक्त पतला करने वाली दवाएँ: वारफेरिन, एस्पिरिन, क्लोपिडोग्रेल और नई एंटीकोगुलेंट दवाएँ।
- रक्त संबंधी रोग: हीमोफ़िलिया, वॉन विलेब्रांड रोग, प्लेटलेट्स की कमी (थ्रॉम्बोसाइटोपेनिया) और ल्यूकेमिया।
- लिवर और किडनी की बीमारियाँ: इनसे रक्त के थक्का बनने की क्षमता प्रभावित होती है।
- शराब का अधिक सेवन: यह लिवर और रक्त के थक्का बनने की प्रक्रिया पर असर डालता है।
- विटामिन K और विटामिन C की कमी।
- आनुवंशिक रोग: जैसे हेरिडिटरी हेमोरेजिक टेलैंजिएक्टेसिया (HHT), जिसमें रक्त नलिकाएँ जन्म से कमज़ोर होती हैं।
- गर्भावस्था: हार्मोनल बदलावों से नाक की नलिकाएँ अधिक फूल जाती हैं।
- ऊँचाई वाले स्थानों पर जाना: कम दबाव और शुष्क हवा के कारण।
लक्षण और पहचान
नकसीर का मुख्य लक्षण एक या दोनों नथुनों से खून बहना है। कभी-कभी यह कुछ बूँदों तक सीमित रहता है, तो कभी लगातार धार के रूप में बहता है। पश्च नकसीर में खून गले में उतरता महसूस होता है, मुँह में खून का स्वाद आता है या खून की उल्टी हो सकती है। अधिक खून बहने पर चक्कर आना, कमज़ोरी, पीलापन, तेज़ धड़कन और घबराहट जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं।
घर पर प्राथमिक उपचार: सही तरीका
नकसीर होने पर शांत रहना सबसे पहला कदम है, क्योंकि घबराहट से रक्तचाप बढ़ता है और खून और तेज़ी से बह सकता है। नीचे दिए गए चरणों का पालन करें।
- सीधे बैठ जाएँ और थोड़ा आगे की ओर झुकें। इससे खून गले में जाने के बजाय बाहर निकलता है।
- नाक का नरम हिस्सा दबाएँ। अँगूठे और तर्जनी उँगली से नाक के नीचे का मुलायम भाग, यानी नथुनों के ठीक ऊपर, मज़बूती से दबाएँ। हड्डी वाले कठोर हिस्से को दबाने से कोई लाभ नहीं होता।
- 10 से 15 मिनट तक लगातार दबाए रखें। बीच-बीच में छोड़कर देखने से बचें, क्योंकि इससे बन रहा थक्का टूट जाता है। समय का ध्यान घड़ी से रखें।
- मुँह से साँस लें।
- ठंडी सिकाई करें। नाक के ऊपर और गाल के आसपास बर्फ़ की पोटली या ठंडा कपड़ा रखने से रक्त नलिकाएँ सिकुड़ती हैं।
- मुँह में आया खून थूक दें, निगलें नहीं। निगलने से पेट में जाकर उल्टी हो सकती है।
यदि 15 मिनट बाद भी खून न रुके, तो एक बार फिर 10 से 15 मिनट तक यही प्रक्रिया दोहराएँ। उसके बाद भी न रुके तो तुरंत अस्पताल जाएँ।
ये गलतियाँ न करें
- सिर पीछे की ओर न झुकाएँ। यह एक प्रचलित भ्रम है। इससे खून गले में उतरकर साँस की नली में जा सकता है या उल्टी करा सकता है।
- लेटें नहीं, खासकर पीठ के बल। इससे सिर का रक्तचाप बढ़ता है।
- नाक में रुई या कपड़ा ज़ोर से न ठूँसें। इसे निकालते समय थक्का टूट जाता है और खून दोबारा बहने लगता है।
- खून रुकने के बाद कम से कम 24 घंटे तक नाक ज़ोर से न छिनकें, नाक न कुरेदें, भारी सामान न उठाएँ, झुककर काम न करें और गर्म चाय-कॉफ़ी या गर्म पानी से स्नान से बचें।
कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ
निम्नलिखित स्थितियों में बिना देर किए चिकित्सकीय सहायता लें:
- 20 से 30 मिनट तक दबाने के बाद भी खून न रुकना।
- बहुत अधिक मात्रा में खून बहना या खून गले से बहकर मुँह में आना।
- सिर या चेहरे पर गंभीर चोट के बाद नकसीर होना।
- चक्कर आना, बेहोशी, तेज़ धड़कन या साँस लेने में कठिनाई।
- खून पतला करने की दवा लेने वाले व्यक्ति को नकसीर होना।
- बार-बार नकसीर आना, विशेषकर हफ़्ते में कई बार।
- शरीर में अन्य जगह से भी आसानी से खून बहना, जैसे मसूड़ों से या त्वचा पर नीले निशान।
- दो वर्ष से छोटे बच्चे में नकसीर होना।
चिकित्सकीय उपचार
अस्पताल में डॉक्टर पहले खून बहने का स्थान ढूँढते हैं। इसके लिए नाक की जाँच की जाती है और ज़रूरत पड़ने पर एंडोस्कोप का उपयोग होता है। उपचार की विधि कारण और गंभीरता पर निर्भर करती है।
- नेज़ल पैकिंग: नाक में विशेष सोखने वाली पट्टी या फूलने वाला स्पंज रखा जाता है, जो रक्त नलिका पर दबाव बनाए रखता है।
- कॉटरी (Cautery): सिल्वर नाइट्रेट या विद्युत उपकरण से खून बहने वाली नलिका को दाग़कर बंद किया जाता है।
- दवाएँ: ट्रैनेक्सैमिक एसिड जैसी दवाएँ खून का थक्का बनाने में मदद करती हैं, और रक्तचाप नियंत्रित करने की दवाएँ दी जाती हैं।
- सर्जरी या एम्बोलाइज़ेशन: गंभीर और बार-बार होने वाली पश्च नकसीर में नलिका को बाँधा जाता है या विशेष प्रक्रिया से बंद किया जाता है।
- मूल रोग का इलाज: जैसे रक्त की कमी, लिवर रोग या दवाओं की मात्रा में बदलाव।
नकसीर से बचाव के उपाय
कुछ सरल आदतें अपनाकर नकसीर की संभावना काफ़ी हद तक कम की जा सकती है।
- नाक को नम रखें। सोने से पहले नाक के अंदर पेट्रोलियम जेली या डॉक्टर द्वारा सुझाया गया नेज़ल जेल हल्के हाथ से लगाएँ।
- सेलाइन नेज़ल स्प्रे या ड्रॉप्स का नियमित उपयोग करें, खासकर सर्दियों में।
- कमरे में नमी बनाए रखें। सूखे मौसम में ह्यूमिडिफ़ायर का उपयोग लाभदायक रहता है।
- बच्चों के नाखून छोटे रखें और उन्हें नाक कुरेदने की आदत से दूर रखें।
- नाक हल्के से साफ़ करें, एक बार में एक नथुना।
- छींकते समय मुँह खुला रखें।
- पर्याप्त पानी पिएँ और विटामिन C युक्त फल-सब्ज़ियाँ, जैसे आँवला, नींबू, संतरा और हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ खाएँ।
- रक्तचाप नियंत्रित रखें और नियमित जाँच कराएँ।
- एलर्जी और साइनस का समय पर इलाज कराएँ।
- धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें, क्योंकि ये नाक की परत को नुकसान पहुँचाते हैं।
- नेज़ल स्प्रे डॉक्टर की सलाह से ही और निर्देशित तरीके से इस्तेमाल करें।
बच्चों और बुज़ुर्गों में विशेष सावधानी
बच्चों में नकसीर आमतौर पर नाक कुरेदने, एलर्जी या सूखेपन से होती है और प्रायः चिंताजनक नहीं होती। फिर भी बार-बार होने पर बाल रोग विशेषज्ञ या ENT विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। बुज़ुर्गों में रक्त नलिकाएँ कठोर और कमज़ोर हो जाती हैं, साथ ही वे अक्सर रक्त पतला करने वाली दवाएँ लेते हैं, इसलिए उनमें नकसीर अधिक गंभीर रूप ले सकती है और उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
निष्कर्ष
एपिस्टेक्सिस या नकसीर देखने में भले डरावनी लगे, पर ज़्यादातर मामलों में यह गंभीर नहीं होती और सही प्राथमिक उपचार से कुछ ही मिनटों में नियंत्रित हो जाती है। याद रखने योग्य मुख्य बातें हैं: शांत रहना, सीधे बैठकर आगे झुकना, नाक का नरम हिस्सा 10 से 15 मिनट तक दबाए रखना और सिर को पीछे न झुकाना। यदि खून बार-बार आए, लंबे समय तक न रुके या साथ में अन्य लक्षण हों, तो देरी किए बिना ENT विशेषज्ञ या नज़दीकी अस्पताल से संपर्क करें। नाक की देखभाल, पर्याप्त नमी और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस समस्या से काफ़ी हद तक बचा जा सकता है।
