एपिडर्मॉइड सिस्ट (Epidermoid Cyst)
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एपिडर्मॉइड सिस्ट (Epidermoid Cyst): कारण, लक्षण, निदान और उपचार

परिचय

त्वचा पर अचानक उभरी हुई एक छोटी, गोल और कठोर गांठ अक्सर लोगों को चिंता में डाल देती है। कई बार यह गांठ वर्षों तक चुपचाप पड़ी रहती है, और कभी-कभी अचानक सूज जाती है, लाल पड़ जाती है और दर्द करने लगती है। ऐसी गांठों में से एक बहुत आम प्रकार है एपिडर्मॉइड सिस्ट।

एपिडर्मॉइड सिस्ट त्वचा के नीचे बनने वाली एक सौम्य (non-cancerous) थैलीनुमा संरचना है, जो आमतौर पर हानिरहित होती है। हालांकि यह जानलेवा नहीं होती, फिर भी इसके संक्रमित होने, बार-बार लौटने या सौंदर्य संबंधी परेशानी पैदा करने की स्थिति में इलाज की जरूरत पड़ सकती है। इस लेख में हम इसके बारे में विस्तार से जानेंगे।

एपिडर्मॉइड सिस्ट क्या है?

एपिडर्मॉइड सिस्ट त्वचा की ऊपरी परत, यानी एपिडर्मिस, की कोशिकाओं से बनी एक बंद थैली होती है। इस थैली की दीवार उसी तरह की कोशिकाओं से बनी होती है जैसी हमारी सामान्य त्वचा की सतह पर होती हैं। थैली के अंदर केराटिन नामक प्रोटीन जमा होता रहता है, जो एक गाढ़े, पनीर जैसे, पीले-सफेद पदार्थ के रूप में दिखाई देता है। इस पदार्थ से अक्सर एक अप्रिय गंध आती है।

आम बोलचाल में लोग इसे अक्सर “सेबेसियस सिस्ट” भी कह देते हैं, जबकि तकनीकी रूप से दोनों अलग हैं। सेबेसियस सिस्ट तेल ग्रंथियों से जुड़ी होती है, जबकि एपिडर्मॉइड सिस्ट त्वचा की ऊपरी परत की कोशिकाओं से बनती है। व्यवहार में दोनों के लक्षण और उपचार काफी मिलते-जुलते हैं।

यह कहां होती है?

एपिडर्मॉइड सिस्ट शरीर के किसी भी हिस्से पर हो सकती है, लेकिन ये स्थान ज्यादा आम हैं:

  • चेहरा, खासकर गाल, कान के पीछे और कान की लौ
  • गर्दन
  • पीठ और कंधे
  • छाती
  • खोपड़ी (सिर की त्वचा)
  • जननांग क्षेत्र
  • कभी-कभी हाथों और पैरों पर

यह उन जगहों पर अधिक दिखती है जहां बालों के रोमकूप (hair follicles) ज्यादा होते हैं। हथेलियों और तलवों पर होने वाली सिस्ट का कारण अक्सर चोट होती है।

एपिडर्मॉइड सिस्ट के कारण

इस सिस्ट के बनने के पीछे मुख्य कारण यह है कि त्वचा की कोशिकाएं सामान्य रूप से झड़ने के बजाय त्वचा के भीतर धंस जाती हैं और वहां बढ़ने लगती हैं। इसके संभावित कारण ये हैं:

1. बालों के रोमकूप का अवरोध: जब रोमकूप का मुंह बंद हो जाता है या उसमें सूजन आ जाती है, तो कोशिकाएं भीतर फंस जाती हैं और थैली का रूप ले लेती हैं।

2. त्वचा पर चोट या कटना: कोई चोट, घाव, सर्जरी का निशान या इंजेक्शन की जगह पर त्वचा की कोशिकाएं गहराई में चली जाएं तो सिस्ट बन सकती है।

3. मुंहासे (Acne) का इतिहास: गंभीर मुंहासों से क्षतिग्रस्त हुई त्वचा में सिस्ट बनने की संभावना बढ़ जाती है।

4. जन्मजात कारण: कुछ मामलों में भ्रूण के विकास के दौरान ही कोशिकाएं गलत जगह रह जाती हैं।

5. आनुवंशिक स्थितियां: गार्डनर सिंड्रोम जैसी कुछ दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों में एक साथ कई सिस्ट बन सकती हैं।

6. कुछ वायरल संक्रमण: ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) का संबंध कुछ विशेष स्थानों, जैसे तलवों, की सिस्ट से जोड़ा गया है।

यह जानना जरूरी है कि सिस्ट होने का कारण गंदगी या खराब सफाई नहीं है। यह एक आम गलतफहमी है।

जोखिम कारक

  • किशोरावस्था के बाद और वयस्क उम्र (20 से 50 वर्ष), क्योंकि यौवन के बाद ये अधिक बनती हैं
  • पुरुषों में अपेक्षाकृत ज्यादा आम
  • मुंहासों का इतिहास
  • त्वचा पर पूर्व चोट या सर्जरी
  • पारिवारिक इतिहास या आनुवंशिक सिंड्रोम

लक्षण

एपिडर्मॉइड सिस्ट के विशिष्ट लक्षण इस प्रकार हैं:

  • त्वचा के नीचे गोल, उभरी हुई और सख्त गांठ, जो उंगली से दबाने पर हिलती है
  • आकार कुछ मिलीमीटर से लेकर कई सेंटीमीटर तक हो सकता है
  • गांठ के ऊपर अक्सर एक छोटा काला बिंदु (punctum) दिखाई देता है, जो रोमकूप का अवरुद्ध मुंह होता है
  • सामान्यतः दर्द रहित और धीमी गति से बढ़ने वाली
  • त्वचा का रंग सामान्य या हल्का पीला-सा दिख सकता है

सूजन या संक्रमण होने पर:

  • गांठ लाल, गर्म और दर्दनाक हो जाती है
  • आसपास की त्वचा में सूजन
  • मवाद निकलना
  • बुखार (गंभीर संक्रमण में)
  • गाढ़ा, बदबूदार पदार्थ रिसना

निदान (Diagnosis)

अधिकतर मामलों में डॉक्टर केवल जांच करके ही सिस्ट की पहचान कर लेते हैं। वे गांठ का आकार, स्थान, केंद्र में मौजूद बिंदु और उसकी बनावट देखते हैं।

कुछ स्थितियों में अतिरिक्त जांच की जरूरत पड़ सकती है:

  • अल्ट्रासाउंड: जब गांठ की प्रकृति स्पष्ट न हो या वह गहराई में हो।
  • बायोप्सी या हिस्टोपैथोलॉजी: यदि गांठ असामान्य दिखे, तेजी से बढ़े, या कैंसर की आशंका हो। सर्जरी से निकाली गई सिस्ट को भी प्रायः जांच के लिए भेजा जाता है।
  • सीटी या एमआरआई: बहुत बड़ी या गहरी स्थित सिस्ट में, या जब आसपास की संरचनाओं से संबंध देखना हो।

उपचार

1. निगरानी (Observation)

यदि सिस्ट छोटी है, दर्द नहीं करती और कोई परेशानी नहीं दे रही, तो उपचार जरूरी नहीं है। कई सिस्ट बिना किसी हस्तक्षेप के सालों तक वैसी ही रहती हैं। केवल उन पर नजर रखना काफी हो सकता है।

2. दवाइयां

  • संक्रमित सिस्ट में डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाएं दे सकते हैं।
  • सूजन और दर्द कम करने के लिए दर्द निवारक या सूजन-रोधी दवाएं दी जाती हैं।
  • सूजी हुई सिस्ट में कभी-कभी स्टेरॉयड का इंजेक्शन लगाकर सूजन घटाई जाती है।

3. चीरा लगाकर निकासी (Incision and Drainage)

संक्रमित, दर्दनाक सिस्ट में डॉक्टर छोटा चीरा लगाकर मवाद निकाल देते हैं। इससे तुरंत राहत मिलती है, लेकिन थैली की दीवार वहीं रह जाने से सिस्ट के दोबारा बनने की संभावना रहती है।

4. सर्जरी द्वारा पूर्ण निष्कासन (Excision)

यह सबसे प्रभावी और स्थायी उपचार है। इसमें स्थानीय एनेस्थीसिया देकर पूरी थैली को उसकी दीवार सहित निकाला जाता है। यदि थैली का थोड़ा-सा भी हिस्सा रह जाए तो सिस्ट वापस बन सकती है। सूजन शांत होने के बाद सर्जरी करना बेहतर माना जाता है।

सर्जरी के विकल्पों में पारंपरिक एक्सिजन, छोटे चीरे वाली मिनिमल एक्सिजन तकनीक और कुछ चुनिंदा मामलों में लेजर शामिल हैं।

5. सर्जरी के बाद देखभाल

  • घाव को साफ और सूखा रखें
  • डॉक्टर की बताई ड्रेसिंग समय पर बदलें
  • दवाएं पूरी अवधि तक लें
  • टांकों की तय तारीख पर जांच करवाएं
  • संक्रमण के लक्षण, जैसे बढ़ता दर्द, लालिमा या मवाद, दिखें तो तुरंत संपर्क करें

घर पर क्या करें और क्या न करें

क्या करें:

  • संक्रमित या दर्द वाली सिस्ट पर गुनगुने पानी की सिकाई करें। इससे आराम मिल सकता है और कभी-कभी मवाद अपने आप निकल जाता है।
  • सिस्ट वाली जगह को साफ और सूखा रखें।
  • लक्षण बदलें तो चिकित्सक को दिखाएं।

क्या न करें:

  • सिस्ट को खुद दबाकर, निचोड़कर या सुई से फोड़ने की कोशिश न करें। इससे संक्रमण फैल सकता है, निशान पड़ सकता है और सिस्ट के दोबारा बनने का खतरा बढ़ता है।
  • घरेलू नुस्खों या अप्रमाणित लेपों पर निर्भर न रहें।
  • झोलाछाप से सर्जरी न करवाएं।

जटिलताएं

  • संक्रमण और फोड़ा (abscess): सबसे आम जटिलता
  • सिस्ट का फटना: थैली फटने पर आसपास के ऊतकों में तीव्र सूजन हो सकती है
  • पुनरावृत्ति: अधूरे निष्कासन के बाद सिस्ट फिर बन सकती है
  • निशान: खासकर संक्रमण या गलत तरीके से निकालने पर
  • दुर्लभ मामलों में कैंसरयुक्त परिवर्तन: बहुत लंबे समय तक रहने वाली, बार-बार संक्रमित होने वाली सिस्ट में स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा जैसे परिवर्तन के बेहद दुर्लभ मामले दर्ज हैं

डॉक्टर को कब दिखाएं?

इन स्थितियों में चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए:

  • गांठ तेजी से बढ़ रही हो
  • गांठ में दर्द, लालिमा, गर्माहट या मवाद हो
  • बुखार आए
  • सिस्ट चेहरे या ऐसे स्थान पर हो जहां वह दिखने में या चलने-फिरने में बाधा डाल रही हो
  • सिस्ट बार-बार संक्रमित होती हो
  • किसी नई गांठ की प्रकृति को लेकर संदेह हो
  • गांठ बहुत सख्त, अनियमित आकार की या आसपास की त्वचा से चिपकी हुई लगे

रोकथाम

सिस्ट को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, क्योंकि इसके कई कारण हमारे नियंत्रण में नहीं होते। फिर भी कुछ सावधानियां मददगार हो सकती हैं:

  • मुंहासों का समय पर और उचित इलाज करवाना
  • मुंहासों या फुंसियों को नोचने या फोड़ने से बचना
  • त्वचा पर चोट लगने पर घाव की उचित देखभाल करना
  • त्वचा को स्वच्छ रखना, लेकिन बहुत जोर से रगड़ने से बचना
  • उन जगहों पर सिस्ट बनने पर जल्दी इलाज करवाना जहां बार-बार घर्षण होता है

एपिडर्मॉइड सिस्ट और अन्य गांठों में अंतर

त्वचा पर होने वाली हर गांठ सिस्ट नहीं होती। लिपोमा (चर्बी की गांठ) अपेक्षाकृत नरम और रबर जैसी होती है और उसमें केंद्र बिंदु नहीं होता। फोड़े में तीव्र दर्द और तेजी से बढ़ती सूजन होती है। त्वचा के कैंसर या अन्य ट्यूमर कठोर, अनियमित और कभी-कभी घाव बनाने वाले हो सकते हैं। इसलिए किसी भी नई या असामान्य गांठ का सही निदान किसी योग्य डॉक्टर से ही करवाना चाहिए।

निष्कर्ष

एपिडर्मॉइड सिस्ट त्वचा की एक आम, सौम्य और आमतौर पर हानिरहित स्थिति है। यह त्वचा के नीचे केराटिन के जमाव से बनती है और ज्यादातर मामलों में धीरे-धीरे बढ़ती है। यदि यह दर्द या संक्रमण नहीं देती तो उपचार की जरूरत नहीं होती, लेकिन संक्रमित या परेशान करने वाली सिस्ट के लिए पूर्ण शल्य निष्कासन ही सबसे भरोसेमंद समाधान है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सिस्ट को कभी खुद निचोड़ने या फोड़ने की कोशिश न करें। किसी भी नई या बदलती हुई गांठ को नजरअंदाज न करें और त्वचा रोग विशेषज्ञ या सर्जन से सलाह लें। समय पर सही इलाज से न केवल जटिलताओं से बचा जा सकता है, बल्कि सिस्ट के दोबारा होने की संभावना भी काफी कम हो जाती है।

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