चैंक्रॉइड (Chancroid): जननांगों में अल्सर पैदा करने वाला यौन संचारित रोग
परिचय
चैंक्रॉइड एक यौन संचारित संक्रमण (STI) है जो जननांगों के आसपास दर्दनाक अल्सर या घाव बनाता है। यह बीमारी बैक्टीरिया के कारण होती है और मुख्य रूप से असुरक्षित यौन संबंध के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है। सिफलिस और जननांग हर्पीज जैसी अन्य बीमारियों की तुलना में यह कम आम है, लेकिन विकासशील देशों के कुछ क्षेत्रों में, विशेष रूप से अफ्रीका, एशिया और कैरेबियन के कुछ हिस्सों में, यह अभी भी एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। भारत में भी समय-समय पर इसके मामले सामने आते रहे हैं, हालांकि एंटीबायोटिक दवाओं की उपलब्धता के कारण इसकी घटनाएं पहले की तुलना में कम हुई हैं।
चैंक्रॉइड को समझना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इसके घाव एचआईवी संक्रमण के जोखिम को काफी बढ़ा देते हैं। खुले घावों के माध्यम से एचआईवी वायरस के शरीर में प्रवेश करने की संभावना अधिक हो जाती है, इसलिए समय पर निदान और उपचार बहुत महत्वपूर्ण है।
चैंक्रॉइड का कारण
चैंक्रॉइड एक बैक्टीरिया के कारण होता है जिसका नाम है हीमोफिलस ड्यूक्रेई (Haemophilus ducreyi)। यह एक ग्राम-नेगेटिव बैसिलस (छड़ी के आकार का बैक्टीरिया) है, जो शरीर के बाहर लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकता, इसलिए यह मुख्य रूप से प्रत्यक्ष त्वचा-से-त्वचा या त्वचा-से-श्लेष्मा झिल्ली (mucous membrane) के संपर्क से ही फैलता है।
यह बैक्टीरिया त्वचा या श्लेष्मा झिल्ली में किसी छोटी सी दरार या खरोंच के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है और वहीं स्थानीय संक्रमण पैदा करता है, जो धीरे-धीरे अल्सर का रूप ले लेता है।
संक्रमण कैसे फैलता है
चैंक्रॉइड मुख्य रूप से निम्नलिखित तरीकों से फैलता है:
- असुरक्षित यौन संबंध – योनि, गुदा या मौखिक संभोग के दौरान संक्रमित व्यक्ति के घाव के सीधे संपर्क में आने से।
- त्वचा से त्वचा का संपर्क – संक्रमित घाव या स्राव के सीधे संपर्क से भी संक्रमण हो सकता है, भले ही पूर्ण संभोग न हुआ हो।
- स्व-संक्रमण (Autoinoculation) – यदि कोई व्यक्ति संक्रमित घाव को छूकर शरीर के दूसरे हिस्से को छूता है, तो वहां भी नया घाव बन सकता है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि चैंक्रॉइड शौचालय की सीट, तौलिये साझा करने, या हवा के माध्यम से नहीं फैलता। इसके फैलने के लिए सीधा शारीरिक संपर्क आवश्यक है।
लक्षण
चैंक्रॉइड के लक्षण संक्रमण के 3 से 10 दिनों के भीतर (कभी-कभी इससे भी अधिक समय बाद) दिखाई देने लगते हैं। पुरुषों और महिलाओं में लक्षण थोड़े अलग हो सकते हैं।
शुरुआती लक्षण
- जननांगों के क्षेत्र में एक छोटी, लाल, उभरी हुई गांठ (papule) बनती है।
- यह गांठ एक-दो दिनों के भीतर फूटकर एक दर्दनाक, खुले घाव या अल्सर में बदल जाती है।
अल्सर की विशेषताएं
चैंक्रॉइड के अल्सर की कुछ खास पहचान होती है:
- अल्सर की सीमाएं अनियमित और मुलायम होती हैं (सिफलिस के अल्सर के विपरीत, जो सख्त होता है, इसीलिए इसे “सॉफ्ट चैंक्र” भी कहा जाता है)।
- अल्सर के आधार पर धूसर या पीले रंग का मवाद जैसा पदार्थ जमा हो सकता है।
- अल्सर को छूने पर तेज दर्द होता है, जो चैंक्रॉइड की सबसे विशिष्ट पहचान है।
- एक से अधिक अल्सर भी बन सकते हैं, क्योंकि संक्रमण त्वचा के पास के हिस्सों में फैल सकता है।
पुरुषों में लक्षण
पुरुषों में अल्सर आमतौर पर लिंग पर, विशेष रूप से चमड़ी (foreskin), लिंग-मुंड (glans) या लिंग की बॉडी पर दिखाई देते हैं।
महिलाओं में लक्षण
महिलाओं में अल्सर योनि के बाहरी हिस्सों (labia), योनि द्वार, गुदा के आसपास, या जांघों के भीतरी हिस्से पर बन सकते हैं। कई बार महिलाओं में लक्षण हल्के होते हैं या बिल्कुल दिखाई नहीं देते, जिससे निदान में देरी हो सकती है।
लिम्फ नोड्स में सूजन
लगभग आधे मामलों में, संक्रमण के एक से दो सप्ताह बाद कमर (groin) के लिम्फ नोड्स में सूजन आ जाती है, जिसे बुबो (Bubo) कहा जाता है। यह सूजन दर्दनाक होती है और कई बार इतनी बढ़ जाती है कि त्वचा फटकर मवाद निकलने लगता है। यह एक तरफ या दोनों तरफ हो सकती है।
निदान (Diagnosis)
चैंक्रॉइड का निदान करना कई बार चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि इसके लक्षण सिफलिस और जननांग हर्पीज जैसी अन्य बीमारियों से मिलते-जुलते हैं। डॉक्टर आमतौर पर निम्नलिखित तरीके अपनाते हैं:
- शारीरिक परीक्षण – अल्सर की बनावट, दर्द और लिम्फ नोड्स की स्थिति की जांच।
- प्रयोगशाला परीक्षण – अल्सर से लिए गए नमूने की जांच कर बैक्टीरिया की पुष्टि की जाती है, हालांकि हीमोफिलस ड्यूक्रेई को कल्चर करना तकनीकी रूप से कठिन होता है।
- PCR टेस्ट (न्यूक्लिक एसिड एम्प्लिफिकेशन टेस्ट) – यह सबसे संवेदनशील और सटीक तरीका माना जाता है, हालांकि यह हर जगह उपलब्ध नहीं होता।
- अन्य बीमारियों को खारिज करना – चूंकि लक्षण मिलते-जुलते हैं, डॉक्टर सिफलिस और हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस की जांच भी करवाते हैं ताकि सही निदान हो सके।
- एचआईवी जांच – चैंक्रॉइड से पीड़ित व्यक्तियों को एचआईवी और अन्य यौन संचारित रोगों की जांच कराने की भी सलाह दी जाती है।
अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति में दर्दनाक जननांग अल्सर हो, सिफलिस और हर्पीज की जांच नकारात्मक आए, और लिम्फ नोड्स में सूजन के साथ अल्सर की नैदानिक तस्वीर चैंक्रॉइड से मेल खाती हो, तो इसे संभावित (probable) चैंक्रॉइड माना जा सकता है।
उपचार
चैंक्रॉइड का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं से किया जाता है, और सही उपचार से यह पूरी तरह ठीक हो जाता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार निम्नलिखित में से कोई एक एंटीबायोटिक दिया जा सकता है:
- एज़िथ्रोमाइसिन – एक ही खुराक में दी जाने वाली दवा।
- सेफ्ट्रिएक्सोन – इंजेक्शन के रूप में एक बार दी जाती है।
- सिप्रोफ्लोक्सासिन – कुछ दिनों तक दी जाने वाली दवा।
- एरिथ्रोमाइसिन – एक सप्ताह तक दी जाने वाली दवा।
उपचार शुरू होने के 3 से 7 दिनों के भीतर लक्षणों में सुधार दिखना शुरू हो जाता है। हालांकि, बड़े अल्सर को पूरी तरह ठीक होने में दो सप्ताह या उससे अधिक समय लग सकता है। यदि लिम्फ नोड्स में बहुत अधिक सूजन या मवाद जमा हो गया हो, तो डॉक्टर सुई की मदद से मवाद निकाल सकते हैं (एस्पिरेशन) या छोटी सर्जिकल प्रक्रिया अपना सकते हैं।
यह भी महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति के यौन साथी की भी जांच और आवश्यकता पड़ने पर इलाज किया जाए, भले ही उनमें लक्षण न दिखें, ताकि संक्रमण आगे न फैले।
जटिलताएं
यदि चैंक्रॉइड का समय पर इलाज न किया जाए, तो निम्नलिखित जटिलताएं हो सकती हैं:
- लिम्फ नोड्स का फटना और मवाद बहना, जिससे द्वितीयक जीवाणु संक्रमण (secondary bacterial infection) का खतरा बढ़ जाता है।
- फिमोसिस – पुरुषों में चमड़ी का सख्त होकर पीछे न खिंच पाना।
- जननांगों पर स्थायी घाव या निशान बनना।
- एचआईवी संक्रमण का बढ़ा हुआ खतरा – खुले घावों के कारण एचआईवी वायरस के प्रवेश और संचरण की संभावना काफी बढ़ जाती है।
बचाव के उपाय
चैंक्रॉइड से बचाव के लिए निम्नलिखित सावधानियां अपनाई जा सकती हैं:
- सुरक्षित यौन संबंध – कंडोम का सही और नियमित उपयोग संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम करता है, हालांकि यह पूरी तरह से सुरक्षा की गारंटी नहीं देता क्योंकि संक्रमण त्वचा के उन हिस्सों से भी फैल सकता है जो कंडोम से ढके नहीं होते।
- एक ही यौन साथी के साथ संबंध – कई यौन साथियों के साथ संबंध बनाने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
- नियमित स्वास्थ्य जांच – यौन सक्रिय व्यक्तियों को समय-समय पर यौन संचारित रोगों की जांच करानी चाहिए।
- लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क – जननांगों में किसी भी प्रकार के घाव, अल्सर या असामान्य लक्षण दिखने पर देरी न करें।
- संक्रमित होने पर यौन संबंध से परहेज – जब तक इलाज पूरा न हो जाए और डॉक्टर अनुमति न दें, तब तक यौन संबंध से बचना चाहिए।
निष्कर्ष
चैंक्रॉइड एक उपचार योग्य यौन संचारित रोग है, लेकिन समय पर पहचान और इलाज न होने पर यह गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है, जिसमें एचआईवी संक्रमण का बढ़ा हुआ खतरा भी शामिल है। जननांगों में किसी भी प्रकार का दर्दनाक अल्सर, घाव या असामान्य सूजन दिखाई देने पर तुरंत किसी योग्य चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाना और नियमित स्वास्थ्य जांच कराना इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
