ब्रुक्सिज्म (नींद में दांत पीसना): कारण, लक्षण और उपचार
ब्रुक्सिज्म क्या है?
ब्रुक्सिज्म (Bruxism) वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति अनजाने में ऊपर और नीचे के दांतों को कसकर भींचता, घिसता या पीसता है। जब यह नींद के दौरान होता है, तो इसे आम भाषा में “नींद में दांत पीसना” कहते हैं। कई लोगों को इसका पता तब चलता है जब जीवनसाथी या परिवार का कोई सदस्य रात में आने वाली किटकिटाहट की आवाज़ के बारे में बताता है।
अनुमान है कि लगभग 8 से 10 प्रतिशत वयस्क नींद में दांत पीसते हैं, जबकि बच्चों में यह समस्या और भी आम है। हल्का ब्रुक्सिज्म अक्सर नुकसान नहीं पहुँचाता, लेकिन लगातार बने रहने पर यह दांतों, जबड़े और नींद की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
ब्रुक्सिज्म के प्रकार
ब्रुक्सिज्म मुख्यतः दो प्रकार का होता है।
- स्लीप ब्रुक्सिज्म: यह नींद के दौरान, खासकर हल्की नींद के चरणों में होता है। व्यक्ति को इसका पता नहीं चलता।
- अवेक ब्रुक्सिज्म: यह दिन में जागते हुए होता है, जैसे काम करते समय, गाड़ी चलाते समय या तनाव में दांत भींच लेना। इसमें पीसने से ज़्यादा भींचना देखा जाता है।
दोनों प्रकार एक साथ भी हो सकते हैं। नींद वाला प्रकार अधिक नुकसानदेह माना जाता है, क्योंकि सोते समय जबड़े की मांसपेशियाँ जागने की तुलना में कहीं अधिक ज़ोर लगा सकती हैं और व्यक्ति उन्हें नियंत्रित नहीं कर पाता।
ब्रुक्सिज्म के लक्षण
नींद में दांत पीसने वाले अधिकतर लोग शुरुआत में लक्षण पहचान नहीं पाते। सामान्य संकेत ये हैं:
- सुबह उठने पर जबड़े में दर्द, जकड़न या थकान
- कान के पास या कनपटी के आसपास दर्द
- सुबह के समय सिरदर्द, खासकर माथे और कनपटी में
- दांतों में ठंडा-गर्म लगना (सेंसिटिविटी)
- दांतों का घिसना, चपटा होना, चटकना या टूटना
- गाल के अंदर या जीभ के किनारों पर दांतों के निशान
- मुँह खोलते-बंद करते समय जबड़े से आवाज़ आना
- नींद पूरी न होना और दिनभर थकान
- रात में दांत किटकिटाने की आवाज़, जो साथ सोने वाला व्यक्ति सुन सकता है
यदि आपको इनमें से कई लक्षण दिखें, तो इन्हें नज़रअंदाज़ न करें।
ब्रुक्सिज्म के कारण
ब्रुक्सिज्म का कोई एक निश्चित कारण नहीं है। आमतौर पर कई कारक मिलकर इसे पैदा करते हैं।
मानसिक कारण: तनाव, चिंता, गुस्सा और दबी हुई भावनाएँ सबसे आम कारण माने जाते हैं। दिनभर का तनाव रात में जबड़े की मांसपेशियों पर निकल सकता है।
नींद संबंधी विकार: स्लीप एपनिया (नींद में साँस रुकना), खर्राटे, नींद में बोलना और रेस्टलेस लेग सिंड्रोम का ब्रुक्सिज्म से संबंध पाया गया है। साँस का रास्ता खुला रखने की कोशिश में जबड़े की गति से भी दांत घिस सकते हैं।
दांतों और जबड़े की बनावट: दांतों का टेढ़ापन, ऊपर-नीचे के दांतों का ठीक से न मिलना या अनुचित डेंटल फिलिंग भी कारण बन सकते हैं।
दवाएँ और पदार्थ: कुछ अवसादरोधी दवाएँ (जैसे SSRI वर्ग की), कैफीन, शराब, तंबाकू और कुछ नशीले पदार्थ ब्रुक्सिज्म को बढ़ा सकते हैं।
अन्य कारण: गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स (GERD) और कुछ तंत्रिका संबंधी स्थितियाँ भी इससे जुड़ी पाई गई हैं।
जोखिम कारक
कुछ स्थितियों में ब्रुक्सिज्म का खतरा बढ़ जाता है:
- उम्र: बच्चों में अधिक आम है और अक्सर किशोरावस्था तक अपने आप ठीक हो जाता है।
- तनावपूर्ण जीवनशैली: काम का दबाव, परीक्षा, आर्थिक या पारिवारिक चिंता।
- स्वभाव: अत्यधिक प्रतिस्पर्धी, जल्दी गुस्सा करने वाले या हमेशा सक्रिय रहने वाले लोगों में यह अधिक देखा गया है।
- पारिवारिक इतिहास: परिवार में किसी को यह समस्या होने पर संभावना बढ़ती है।
- कैफीन, शराब और धूम्रपान: इनका अधिक सेवन, खासकर शाम और रात में, जोखिम बढ़ाता है।
अनुपचारित ब्रुक्सिज्म की जटिलताएँ
हल्के मामलों में इलाज की ज़रूरत नहीं पड़ती, लेकिन लंबे समय तक अनदेखी करने पर ये समस्याएँ हो सकती हैं:
- दांतों को क्षति: इनेमल घिसना, दांत चटकना या टूटना। गंभीर मामलों में क्राउन, रूट कैनाल या दांत निकालने की नौबत आ सकती है।
- जबड़े का विकार (TMD): जबड़े के जोड़ में दर्द, जबड़ा जाम होना, मुँह पूरा न खुलना और क्लिक की आवाज़।
- लगातार सिरदर्द और चेहरे का दर्द: मांसपेशियों पर बार-बार पड़ने वाले दबाव से।
- चेहरे की बनावट में बदलाव: जबड़े की मांसपेशियाँ अत्यधिक विकसित होने से चेहरा चौड़ा या चौकोर दिख सकता है।
- नींद में खलल: आपकी और साथ सोने वाले व्यक्ति की, दोनों की नींद प्रभावित हो सकती है।
निदान कैसे होता है
निदान आमतौर पर डेंटिस्ट करते हैं। वे आपके लक्षणों, दवाओं और जीवनशैली के बारे में पूछते हैं, फिर मुँह की जाँच करते हैं। इसमें दांतों के घिसाव के निशान, जबड़े की मांसपेशियों में कोमलता और जबड़े की गति देखी जाती है। ज़रूरत पड़ने पर एक्स-रे कराया जा सकता है।
अगर डॉक्टर को स्लीप एपनिया जैसे नींद संबंधी विकार का संदेह हो, तो वे स्लीप स्टडी (पॉलीसोम्नोग्राफी) की सलाह दे सकते हैं। इसमें रात भर नींद, साँस और मांसपेशियों की गतिविधि दर्ज की जाती है। साथ सोने वाले व्यक्ति से यह पूछना भी उपयोगी है कि क्या उसे रात में दांत पीसने की आवाज़ सुनाई देती है।
उपचार के विकल्प
उपचार इस पर निर्भर करता है कि समस्या कितनी गंभीर है और उसका कारण क्या है।
1. नाइट गार्ड या स्प्लिंट: यह सबसे आम उपाय है। रात में पहना जाने वाला यह प्लास्टिक का कवर दांतों को आपसी घिसाव से बचाता है। डेंटिस्ट से बनवाया गया कस्टम गार्ड बाज़ार के तैयार गार्ड से अधिक आरामदायक और टिकाऊ होता है। ध्यान रखें कि यह दांतों को बचाता है, पीसने की आदत को खत्म नहीं करता।
2. तनाव का प्रबंधन: यदि कारण तनाव है, तो परामर्श, संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (CBT), ध्यान, योग और बायोफीडबैक मददगार हो सकते हैं।
3. दंत उपचार: टूटे या घिसे दांतों की मरम्मत और ज़रूरत होने पर दांतों के आपसी मेल को ठीक करना।
4. दवाएँ: कुछ मामलों में डॉक्टर थोड़े समय के लिए मांसपेशियों को आराम देने वाली दवा दे सकते हैं। इन्हें केवल चिकित्सक की सलाह पर ही लें।
5. बोटॉक्स इंजेक्शन: गंभीर मामलों में, जब अन्य उपाय काम न करें, जबड़े की मांसपेशियों में बोटुलिनम टॉक्सिन लगाया जाता है। इससे मांसपेशियों का ज़ोर घटता है, पर यह विशेषज्ञ की निगरानी में ही होना चाहिए।
6. अंतर्निहित रोग का इलाज: स्लीप एपनिया या एसिड रिफ्लक्स का इलाज होने से अक्सर ब्रुक्सिज्म भी कम हो जाता है।
घरेलू उपाय और जीवनशैली में बदलाव
इन आदतों से लक्षणों में राहत मिल सकती है:
- सोने से पहले आराम करें: गुनगुने पानी से स्नान, हल्का संगीत, किताब पढ़ना या गहरी साँसों का अभ्यास करें।
- कैफीन और शराब कम करें: चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक शाम के बाद न लें। धूम्रपान से भी बचें।
- जबड़े को आराम दें: दिन में खुद देखते रहें कि दांत भींच तो नहीं रहे। सही स्थिति यह है कि होंठ बंद हों, ऊपर-नीचे के दांतों के बीच थोड़ी जगह रहे और जीभ तालू पर टिकी हो।
- गर्म सेक और हल्की मालिश: जबड़े और कनपटी पर गुनगुना सेक और धीरे-धीरे मालिश करने से मांसपेशियों की जकड़न कम होती है।
- सख्त चीज़ों से परहेज़: च्युइंगम, पेन या नाखून चबाने की आदत छोड़ें और बहुत सख्त या चिपचिपा खाना कम खाएँ।
- नियमित नींद: रोज़ एक ही समय पर सोएँ और जागें, और 7 से 8 घंटे की नींद लें।
- व्यायाम: नियमित शारीरिक गतिविधि तनाव घटाने में सहायक है।
बच्चों में ब्रुक्सिज्म
बच्चों में नींद में दांत पीसना काफी आम है और अधिकतर मामलों में चिंता की बात नहीं होती। दूध के दांत या स्थायी दांत निकलने के समय, कान के दर्द या एलर्जी के कारण भी बच्चे दांत पीस सकते हैं। स्कूल बदलना, परीक्षा या घर का तनावपूर्ण माहौल भी कारण बन सकता है।
ज़्यादातर बच्चे उम्र के साथ इसे अपने आप छोड़ देते हैं। लेकिन यदि दांत घिस रहे हों, बच्चे को जबड़े या सिर में दर्द की शिकायत हो या उसकी नींद खराब हो रही हो, तो बाल दंत चिकित्सक को दिखाएँ। सोने से पहले शांत दिनचर्या और बच्चे से उसकी चिंताओं पर बात करना मददगार होता है।
कब डॉक्टर से मिलें
दंत चिकित्सक से सलाह लें यदि:
- सुबह जबड़े या चेहरे में दर्द बार-बार होता हो
- दांत घिसे, चटके या ज़्यादा संवेदनशील हों
- जबड़ा जाम हो जाए या मुँह पूरा न खुले
- सिरदर्द या कान का दर्द हफ्तों तक बना रहे
- साथी रात में तेज़ दांत पीसने, खर्राटों या साँस रुकने की शिकायत करे
नियमित दंत जाँच से शुरुआती घिसाव समय रहते पकड़ में आ जाता है।
निष्कर्ष
ब्रुक्सिज्म एक आम समस्या है, जो अक्सर चुपचाप दांतों और जबड़े को नुकसान पहुँचाती रहती है। इसका सबसे बड़ा कारण तनाव माना जाता है, पर नींद के विकार, दवाएँ और रोज़मर्रा की आदतें भी भूमिका निभाती हैं। अच्छी बात यह है कि समय पर पहचान हो जाए तो नाइट गार्ड, तनाव प्रबंधन और जीवनशैली में सुधार से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। यदि आपको या आपके बच्चे को ऐसे लक्षण दिखें, तो खुद इलाज करने के बजाय दंत चिकित्सक से सलाह लें।
