स्तनपान (Breastfeeding) कराने वाली माताओं के लिए सर्वाइकल और शोल्डर दर्द से बचाव
मां बनना जीवन का एक खूबसूरत अनुभव है, लेकिन प्रसव के बाद शरीर में कई शारीरिक बदलाव होते हैं। नवजात शिशु की देखभाल, बार-बार स्तनपान कराना, लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठना और बच्चे को उठाने जैसी गतिविधियों के कारण कई माताओं को गर्दन (Cervical) और कंधे (Shoulder) में दर्द की समस्या होने लगती है।
स्तनपान कराने वाली माताओं में सर्वाइकल और शोल्डर दर्द का मुख्य कारण अक्सर गलत पोस्चर, मांसपेशियों पर अधिक दबाव और आराम की कमी होता है। यदि शुरुआत में ही सही सावधानियां और फिजियोथेरेपी आधारित उपाय अपनाए जाएं, तो इस दर्द को काफी हद तक रोका जा सकता है।
स्तनपान के दौरान सर्वाइकल और शोल्डर दर्द क्यों होता है?
1. गलत बैठने की मुद्रा (Poor Posture)
स्तनपान कराते समय कई माताएं आगे की ओर झुक जाती हैं ताकि बच्चे को सही स्थिति में पकड़ सकें। इस दौरान:
- गर्दन आगे की ओर झुक जाती है।
- कंधे गोल (Rounded shoulders) हो जाते हैं।
- ऊपरी पीठ की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ जाता है।
लंबे समय तक यह स्थिति रहने से सर्वाइकल स्पाइन पर तनाव बढ़ सकता है।
2. लंबे समय तक एक ही पोजीशन में रहना
नवजात शिशु को दिन में कई बार दूध पिलाना पड़ता है। कई बार मां 20–40 मिनट तक एक ही स्थिति में बैठी रहती है।
इससे:
- गर्दन की मांसपेशियां थक जाती हैं।
- ट्रैपेजियस मसल (Trapezius muscle) में जकड़न हो सकती है।
- कंधों में भारीपन और दर्द महसूस हो सकता है।
3. बच्चे को गलत तरीके से पकड़ना
यदि बच्चा मां की ओर सही तरीके से न हो और मां को बार-बार झुकना पड़े, तो:
- कंधे की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है।
- हाथ और गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव हो सकता है।
4. प्रसव के बाद मांसपेशियों की कमजोरी
गर्भावस्था के दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव और वजन बढ़ने के कारण:
- पीठ और गर्दन की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं।
- शरीर का बैलेंस बदल सकता है।
- गलत पोस्चर की संभावना बढ़ जाती है।
5. नींद की कमी और तनाव
नवजात शिशु की देखभाल में मां को पर्याप्त नींद नहीं मिल पाती। नींद की कमी से:
- मांसपेशियों की रिकवरी धीमी होती है।
- दर्द की संवेदनशीलता बढ़ सकती है।
- शरीर में थकान अधिक महसूस होती है।
सर्वाइकल और शोल्डर दर्द के सामान्य लक्षण
स्तनपान कराने वाली माताओं में निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
- गर्दन में दर्द या अकड़न
- कंधों में भारीपन
- कंधे से हाथ तक दर्द जाना
- सिर दर्द, विशेषकर पीछे की ओर
- गर्दन घुमाने में परेशानी
- ऊपरी पीठ में जकड़न
- हाथों में झुनझुनी या कमजोरी (कुछ मामलों में)
यदि दर्द लगातार बढ़ रहा है या हाथों में कमजोरी महसूस हो रही है, तो विशेषज्ञ फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।
स्तनपान के दौरान सही पोस्चर कैसे रखें?
1. पीठ को सीधा रखें
स्तनपान करते समय:
- कुर्सी या सोफे पर आराम से बैठें।
- पीठ के पीछे तकिया लगाएं।
- कंधों को रिलैक्स रखें।
- आगे झुकने से बचें।
याद रखें — बच्चे को अपनी ओर लाएं, खुद बच्चे की ओर न झुकें।
2. ब्रेस्टफीडिंग पिलो का उपयोग करें
ब्रेस्टफीडिंग पिलो या सपोर्ट तकिया उपयोग करने से:
- बच्चे की ऊंचाई सही रहती है।
- मां को आगे झुकना नहीं पड़ता।
- गर्दन और कंधों पर दबाव कम होता है।
3. गर्दन की स्थिति सही रखें
स्तनपान करते समय बार-बार नीचे देखने से बचें।
सही तरीका:
- गर्दन को न्यूट्रल पोजीशन में रखें।
- लंबे समय तक सिर नीचे झुकाकर न रखें।
- बीच-बीच में गर्दन को आराम दें।
सर्वाइकल और शोल्डर दर्द से बचाव के लिए आसान व्यायाम
1. Neck Stretch (गर्दन स्ट्रेचिंग)
कैसे करें:
- सीधे बैठ जाएं।
- धीरे-धीरे सिर को दाईं ओर झुकाएं।
- 15–20 सेकंड रोकें।
- दूसरी तरफ दोहराएं।
दोहराव:
प्रत्येक तरफ 3–5 बार।
लाभ:
- गर्दन की जकड़न कम होती है।
- मांसपेशियों का तनाव घटता है।
2. Chin Tuck Exercise
यह सर्वाइकल पोस्चर सुधारने के लिए उपयोगी व्यायाम है।
कैसे करें:
- सीधे बैठें।
- ठुड्डी को हल्का पीछे की ओर ले जाएं।
- ऐसा महसूस करें जैसे गर्दन लंबी हो रही है।
- 5 सेकंड रोकें।
दोहराव:
10 बार।
लाभ:
- Forward head posture कम होता है।
- गर्दन की गहरी मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
3. Shoulder Roll Exercise
कैसे करें:
- दोनों कंधों को ऊपर उठाएं।
- पीछे की ओर घुमाएं।
- धीरे-धीरे नीचे लाएं।
दोहराव:
10–15 बार।
लाभ:
- कंधों की जकड़न कम होती है।
- रक्त संचार बेहतर होता है।
4. Chest Stretch
स्तनपान के दौरान कंधे आगे की ओर आने लगते हैं, इसलिए छाती की मांसपेशियों को स्ट्रेच करना जरूरी है।
कैसे करें:
- दरवाजे के फ्रेम पर हाथ रखें।
- शरीर को धीरे आगे ले जाएं।
- छाती में खिंचाव महसूस करें।
20 सेकंड तक रोकें।
5. Upper Back Strengthening Exercise
कमजोर ऊपरी पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए:
- Scapular squeeze करें।
- दोनों कंधों को पीछे खींचें।
- 5 सेकंड रोकें।
10–15 बार दोहराएं।
गर्म सिकाई और आराम के उपाय
यदि गर्दन और कंधे में दर्द हो तो:
- 15–20 मिनट तक गर्म सिकाई करें।
- हल्की मालिश कर सकते हैं।
- पर्याप्त पानी पिएं।
- आराम के लिए छोटे-छोटे ब्रेक लें।
गंभीर दर्द में बिना सलाह के दवा लेने से बचें, विशेषकर स्तनपान के दौरान।
रोजमर्रा की गतिविधियों में सावधानियां
बच्चे को उठाते समय
गलत तरीका:
- कमर और गर्दन झुकाकर बच्चे को उठाना।
सही तरीका:
- घुटनों को मोड़ें।
- शरीर को सीधा रखें।
- बच्चे को शरीर के पास लाकर उठाएं।
मोबाइल फोन का उपयोग
नवजात की देखभाल के दौरान मोबाइल का उपयोग बढ़ सकता है।
ध्यान रखें:
- मोबाइल को आंखों के स्तर तक रखें।
- लंबे समय तक गर्दन नीचे करके न देखें।
सोने की सही स्थिति
- आरामदायक तकिया इस्तेमाल करें।
- गर्दन को सपोर्ट मिलना चाहिए।
- एक ही तरफ लंबे समय तक सोने से बचें।
फिजियोथेरेपी की भूमिका
यदि दर्द बार-बार हो रहा है, तो फिजियोथेरेपी काफी लाभदायक हो सकती है।
फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा:
- पोस्चर असेसमेंट
- मांसपेशियों की जांच
- स्ट्रेचिंग प्रोग्राम
- स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज
- मैनुअल थेरेपी
- एर्गोनॉमिक सलाह
दी जा सकती है।
कब डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से संपर्क करें?
निम्न स्थितियों में विशेषज्ञ सलाह लें:
- दर्द 2–3 सप्ताह से अधिक समय तक रहे।
- हाथ में सुन्नपन या झुनझुनी हो।
- हाथों में कमजोरी महसूस हो।
- गर्दन हिलाने में अधिक परेशानी हो।
- दर्द लगातार बढ़ता जाए।
निष्कर्ष
स्तनपान कराने वाली माताओं में सर्वाइकल और शोल्डर दर्द एक सामान्य समस्या हो सकती है, लेकिन सही पोस्चर, नियमित स्ट्रेचिंग, हल्की एक्सरसाइज और उचित आराम से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है।
मां का स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना बच्चे का स्वास्थ्य। इसलिए स्तनपान के दौरान अपनी बैठने की मुद्रा, शरीर की देखभाल और मांसपेशियों की मजबूती पर ध्यान देना जरूरी है। नियमित फिजियोथेरेपी एक्सरसाइज अपनाकर मां दर्द से बचते हुए अपने बच्चे की बेहतर देखभाल कर सकती है।
