टेस्टिकुलर टॉर्शन (Testicular Torsion - अंडकोष का मुड़ना)
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टेस्टिकुलर टॉर्शन (अंडकोष का मुड़ना): कारण, लक्षण, निदान और इलाज

परिचय

टेस्टिकुलर टॉर्शन एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें अंडकोष (टेस्टिस) अपनी धुरी पर घूम जाता है और उसकी रक्त आपूर्ति रुक जाती है। अंडकोष को रक्त पहुँचाने वाली नली को “स्पर्मेटिक कॉर्ड” कहते हैं। जब यह कॉर्ड मुड़ जाती है, तो अंडकोष तक खून पहुँचना बंद हो जाता है। खून न मिलने से अंडकोष के ऊतक (टिशू) धीरे-धीरे मरने लगते हैं।

यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन किशोरों और युवाओं में सबसे ज़्यादा देखी जाती है। इसमें हर घंटा कीमती होता है। यदि समय पर इलाज न मिले, तो अंडकोष हमेशा के लिए खराब हो सकता है और उसे निकालना पड़ सकता है। इसलिए इस स्थिति की जानकारी हर व्यक्ति, विशेषकर माता-पिता और किशोर लड़कों को होनी चाहिए।

अंडकोष और स्पर्मेटिक कॉर्ड की बनावट

पुरुषों में दो अंडकोष होते हैं, जो अंडकोश की थैली (स्क्रोटम) में स्थित रहते हैं। ये शुक्राणु (स्पर्म) और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन बनाते हैं। हर अंडकोष एक स्पर्मेटिक कॉर्ड से पेट से जुड़ा रहता है। इस कॉर्ड में रक्त वाहिकाएँ, नसें और शुक्राणु ले जाने वाली नली (वास डेफेरेंस) होती हैं।

सामान्यतः अंडकोष थैली की दीवार से एक निश्चित तरीके से जुड़ा होता है, जिससे वह अपनी जगह पर स्थिर रहता है। लेकिन कुछ लोगों में यह जुड़ाव कमज़ोर होता है, जिससे अंडकोष थैली के भीतर घूम सकता है। यही टॉर्शन का मूल कारण बनता है।

टेस्टिकुलर टॉर्शन के कारण

टॉर्शन के सटीक कारण हमेशा स्पष्ट नहीं होते, लेकिन कुछ कारक इसकी संभावना बढ़ाते हैं:

1. बेल क्लैपर डिफॉर्मिटी (Bell Clapper Deformity): यह सबसे आम कारण है। इसमें अंडकोष थैली की दीवार से मज़बूती से जुड़ा नहीं होता और घंटी के अंदर लटकी हुई घंटी की तरह स्वतंत्र रूप से झूलता है। ऐसे में वह आसानी से मुड़ सकता है। यह जन्मजात स्थिति है और अक्सर दोनों अंडकोषों में पाई जाती है।

2. तेज़ शारीरिक गतिविधि या चोट: खेलकूद, कसरत या अंडकोश पर चोट लगने से कभी-कभी टॉर्शन हो सकता है।

3. ठंड का मौसम: ठंड में अंडकोश की मांसपेशी (क्रेमैस्टर) सिकुड़ती है, जिससे अंडकोष ऊपर की ओर खिंचता है और मुड़ने का खतरा बढ़ सकता है।

4. तेज़ वृद्धि (यौवनारंभ): यौवन के दौरान अंडकोष का आकार तेज़ी से बढ़ता है, जिससे टॉर्शन की संभावना बढ़ जाती है।

5. नींद के दौरान: कई मामलों में यह रात को सोते समय अचानक शुरू होता है और दर्द से नींद खुल जाती है।

6. पारिवारिक इतिहास: यदि परिवार में किसी को यह समस्या हुई हो, तो जोखिम कुछ अधिक हो सकता है।

कई बार बिना किसी स्पष्ट कारण या ट्रिगर के भी टॉर्शन हो जाता है।

किसे अधिक खतरा है?

  • 12 से 18 वर्ष के किशोर (सबसे अधिक जोखिम)
  • नवजात शिशु (जन्म से पहले या जन्म के तुरंत बाद)
  • जिन्हें पहले टॉर्शन हो चुका हो
  • जिनके परिवार में यह समस्या रही हो
  • जिनके अंडकोष असामान्य रूप से क्षैतिज (हॉरिज़ॉन्टल) स्थिति में हों

हालाँकि यह किशोरों में अधिक आम है, लेकिन वयस्कों में भी हो सकता है, इसलिए किसी भी उम्र में अचानक अंडकोश का दर्द हल्के में नहीं लेना चाहिए।

लक्षण

टेस्टिकुलर टॉर्शन के लक्षण आमतौर पर अचानक शुरू होते हैं:

  • अंडकोश में अचानक तेज़ दर्द: यह सबसे प्रमुख लक्षण है। दर्द इतना तीव्र हो सकता है कि व्यक्ति चल-फिर न सके।
  • सूजन: प्रभावित तरफ़ का अंडकोश सूज जाता है।
  • लालिमा या रंग बदलना: त्वचा लाल या गहरी दिख सकती है।
  • अंडकोष का ऊपर खिंचना: प्रभावित अंडकोष सामान्य से ऊपर स्थित दिख सकता है।
  • अंडकोष का असामान्य कोण: वह तिरछा या आड़ा महसूस हो सकता है।
  • पेट के निचले हिस्से में दर्द: कई बार दर्द पेट या कमर तक फैलता है।
  • मतली और उल्टी: तेज़ दर्द के साथ जी मचलाना आम है।
  • बुखार: कभी-कभी हल्का बुखार भी हो सकता है।
  • पेशाब में बदलाव: कुछ मामलों में बार-बार पेशाब की इच्छा होती है।

महत्वपूर्ण: कई बच्चे शर्म या झिझक के कारण अपने माता-पिता को दर्द के बारे में नहीं बताते। यदि आपका बेटा पेट दर्द या उल्टी की शिकायत करे, तो अंडकोश की जाँच की संभावना पर भी ध्यान दें। कभी-कभी दर्द कुछ देर बाद कम हो जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि समस्या खत्म हो गई। टॉर्शन का मुड़ना-खुलना (इंटरमिटेंट टॉर्शन) भी होता है, जिसमें दर्द आता-जाता रहता है। इसकी भी जाँच ज़रूरी है।

यह इमरजेंसी क्यों है?

अंडकोष को खून की आपूर्ति रुकने के बाद उसे बचाने की एक सीमित समय-सीमा होती है:

  • 6 घंटे के भीतर: सर्जरी होने पर अंडकोष बचने की संभावना लगभग 90% या उससे अधिक रहती है।
  • 6 से 12 घंटे: बचने की संभावना घटने लगती है।
  • 12 से 24 घंटे: संभावना काफ़ी कम हो जाती है।
  • 24 घंटे के बाद: अंडकोष के बचने की उम्मीद बहुत कम रह जाती है।

इसलिए अंडकोश में अचानक तेज़ दर्द होने पर “थोड़ा इंतज़ार करके देखते हैं” वाला रवैया बेहद खतरनाक है। तुरंत अस्पताल पहुँचना ही सही कदम है।

निदान (डायग्नोसिस)

डॉक्टर निम्न तरीकों से जाँच करते हैं:

1. शारीरिक परीक्षण: डॉक्टर अंडकोश की जाँच करते हैं। टॉर्शन में अंडकोष ऊपर खिंचा हुआ और छूने पर बहुत दर्दनाक होता है। “क्रेमैस्टेरिक रिफ़्लेक्स” की जाँच भी की जाती है, जो टॉर्शन में अक्सर अनुपस्थित होता है।

2. अल्ट्रासाउंड (डॉप्लर): यह सबसे उपयोगी जाँच है। इससे पता चलता है कि अंडकोष में खून का प्रवाह हो रहा है या नहीं। टॉर्शन में रक्त प्रवाह कम या बंद दिखता है।

3. पेशाब की जाँच: इससे संक्रमण की संभावना जाँची जाती है, ताकि टॉर्शन को एपिडिडाइमाइटिस (संक्रमण) से अलग किया जा सके।

ध्यान रखें कि यदि डॉक्टर को टॉर्शन का पक्का संदेह हो, तो जाँच के इंतज़ार में समय गँवाए बिना सीधे सर्जरी की जाती है, क्योंकि देरी अंडकोष के लिए घातक हो सकती है।

टॉर्शन से मिलती-जुलती अन्य समस्याएँ

अंडकोश के दर्द के अन्य कारणों में शामिल हैं:

  • एपिडिडाइमाइटिस: अंडकोष के पीछे की नली में संक्रमण, जिसमें धीरे-धीरे दर्द बढ़ता है और अक्सर बुखार होता है।
  • ऑर्काइटिस: अंडकोष का संक्रमण, जैसे मम्प्स (कण्ठमाला) से।
  • हर्निया: आँत का अंडकोश में उतरना।
  • चोट या हाइड्रोसील: द्रव जमा होना।

इनमें फ़र्क करना घर पर संभव नहीं है, इसलिए डॉक्टरी जाँच आवश्यक है।

इलाज

1. मैनुअल डिटॉर्शन (हाथ से खोलना)

कुछ मामलों में आपातकालीन कक्ष में डॉक्टर हाथ से अंडकोष को घुमाकर खोलने की कोशिश करते हैं। यह केवल अस्थायी राहत है। इसके बाद भी सर्जरी आवश्यक रहती है। इसे घर पर स्वयं करने की कोशिश बिल्कुल न करें।

2. सर्जरी (ऑर्किडोपेक्सी)

यह मुख्य और निश्चित इलाज है। इसमें:

  • अंडकोश में एक छोटा चीरा लगाया जाता है।
  • मुड़ी हुई कॉर्ड को सीधा किया जाता है।
  • अंडकोष में रक्त प्रवाह लौटता है या नहीं, यह देखा जाता है।
  • यदि अंडकोष जीवित है, तो उसे थैली की दीवार से टाँकों द्वारा स्थायी रूप से जोड़ दिया जाता है, ताकि वह दोबारा न मुड़े।
  • आमतौर पर दूसरे अंडकोष को भी उसी समय जोड़ दिया जाता है, क्योंकि बेल क्लैपर डिफॉर्मिटी अक्सर दोनों तरफ़ होती है।

3. ऑर्किएक्टॉमी (अंडकोष निकालना)

यदि देरी के कारण अंडकोष पूरी तरह मृत हो चुका हो, तो उसे निकालना पड़ता है, ताकि संक्रमण या अन्य जटिलताओं से बचा जा सके। इसके बाद भी दूसरा अंडकोष सामान्यतः शुक्राणु और हार्मोन बनाता रहता है।

सर्जरी सामान्य एनेस्थीसिया में होती है और आमतौर पर मरीज़ उसी दिन या अगले दिन घर जा सकता है।

जटिलताएँ

समय पर इलाज न मिलने पर निम्न समस्याएँ हो सकती हैं:

  • अंडकोष की मृत्यु और उसे निकालने की ज़रूरत
  • प्रजनन क्षमता (फर्टिलिटी) में कमी
  • अंडकोष का सिकुड़ना (एट्रॉफ़ी)
  • संक्रमण या फोड़ा
  • मानसिक तनाव और शारीरिक बनावट को लेकर चिंता

एक अंडकोष निकलने पर भी अधिकांश पुरुष सामान्य जीवन जी सकते हैं और संतान उत्पन्न कर सकते हैं, लेकिन कुछ मामलों में प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है।

सर्जरी के बाद देखभाल

  • डॉक्टर द्वारा बताई गई दर्द निवारक दवाएँ लें।
  • कुछ हफ़्तों तक भारी व्यायाम, दौड़, साइकिलिंग और खेलकूद से बचें।
  • चीरे वाली जगह को साफ़ और सूखा रखें।
  • सहायक अंडरवियर (सपोर्टर) पहनने से आराम मिलता है।
  • सूजन, बुखार, मवाद या दर्द बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  • फॉलो-अप जाँच के लिए निर्धारित समय पर जाएँ।

क्या टॉर्शन से बचाव संभव है?

दुर्भाग्य से बेल क्लैपर डिफॉर्मिटी जन्मजात होती है और इसे पहले से रोकने का कोई तरीका नहीं है। लेकिन नुकसान से बचा जा सकता है:

  • जागरूकता: माता-पिता और किशोर इस बीमारी के बारे में जानें।
  • तुरंत कार्रवाई: दर्द होने पर बिना झिझक अस्पताल जाएँ।
  • खुलकर बात करना: बच्चों को सिखाएँ कि अंडकोश में दर्द होने पर शर्माने की ज़रूरत नहीं है।
  • पूर्व इतिहास: यदि पहले कभी मुड़ने-खुलने जैसा दर्द हुआ हो, तो डॉक्टर से सलाह लेकर निवारक सर्जरी पर विचार करें।

क्या न करें

  • दर्द के अपने-आप ठीक होने का इंतज़ार न करें।
  • घरेलू नुस्खे, सिकाई या मालिश में समय बर्बाद न करें।
  • खुद से अंडकोष घुमाने की कोशिश न करें।
  • दर्द कम होने पर डॉक्टर के पास जाना न टालें।
  • अंडकोश दर्द को शर्म या संकोच की वजह से छिपाएँ नहीं।

कब तुरंत अस्पताल जाएँ?

निम्न स्थितियों में बिना देर किए नज़दीकी अस्पताल के इमरजेंसी विभाग पहुँचें:

  • अंडकोश में अचानक और तेज़ दर्द
  • सूजन या लालिमा के साथ दर्द
  • दर्द के साथ उल्टी या मतली
  • चोट के बाद अंडकोश में दर्द जो कम न हो
  • बार-बार आने-जाने वाला अंडकोश का दर्द

निष्कर्ष

टेस्टिकुलर टॉर्शन एक ऐसी आपात स्थिति है जिसमें समय ही सबसे बड़ा कारक है। शुरुआती 6 घंटे में इलाज मिलने पर अंडकोष को लगभग पूरी तरह बचाया जा सकता है, जबकि देरी से वह हमेशा के लिए खराब हो सकता है। संकोच, शर्म या “अपने-आप ठीक हो जाएगा” की सोच सबसे बड़े खतरे हैं।

इसलिए यदि किसी लड़के या पुरुष को अंडकोश में अचानक तेज़ दर्द हो, तो उसे गंभीरता से लें और तुरंत डॉक्टर या इमरजेंसी विभाग से संपर्क करें। सही समय पर उठाया गया एक कदम अंडकोष, प्रजनन क्षमता और भविष्य के स्वास्थ्य को सुरक्षित रख सकता है।

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