एक्यूट और क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस (Acute & Chronic Pancreatitis - अग्न्याशय की सूजन)
|

एक्यूट और क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस (अग्न्याशय की सूजन): कारण, लक्षण, जाँच और उपचार

परिचय

हमारे शरीर में पेट के ऊपरी हिस्से में, आमाशय (पेट) के पीछे एक छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण अंग होता है, जिसे अग्न्याशय (Pancreas) कहते हैं। यह लगभग 15 से 20 सेंटीमीटर लंबा होता है और दो मुख्य काम करता है:

  1. पाचन एंजाइम बनाना: यह ऐसे रस (एंजाइम) बनाता है जो भोजन में मौजूद प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट को पचाते हैं।
  2. हार्मोन बनाना: यह इंसुलिन और ग्लूकागॉन जैसे हार्मोन बनाता है, जो रक्त में शर्करा (ब्लड शुगर) को नियंत्रित रखते हैं।

जब किसी कारण से अग्न्याशय में सूजन आ जाती है, तो इस स्थिति को पैंक्रियाटाइटिस कहते हैं। यह दो प्रमुख रूपों में पाया जाता है: एक्यूट (तीव्र) और क्रॉनिक (दीर्घकालिक)। दोनों की प्रकृति, कारण और उपचार में अंतर है, इसलिए इन्हें समझना ज़रूरी है।

अग्न्याशय में सूजन कैसे होती है?

सामान्य स्थिति में अग्न्याशय के एंजाइम निष्क्रिय अवस्था में बनते हैं और छोटी आँत में पहुँचकर ही सक्रिय होते हैं। लेकिन पैंक्रियाटाइटिस में ये एंजाइम अग्न्याशय के भीतर ही समय से पहले सक्रिय हो जाते हैं और अंग के ऊतकों को ही नुकसान पहुँचाने लगते हैं। इसे एक तरह से “स्वयं को पचाने की प्रक्रिया” कहा जा सकता है। इससे सूजन, दर्द और कोशिकाओं की क्षति होती है।

एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस (तीव्र अग्न्याशय शोथ)

यह क्या है?

एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस में अग्न्याशय में अचानक सूजन आती है। यह कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ्तों तक रह सकती है। अधिकांश मामलों में उचित इलाज से मरीज पूरी तरह ठीक हो जाता है, लेकिन गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी हो सकता है।

प्रमुख कारण

  • पित्ताशय की पथरी (Gallstones): भारत सहित दुनिया भर में यह सबसे आम कारणों में से एक है। पथरी पित्त नली या अग्न्याशय की नली को बंद कर देती है।
  • अत्यधिक शराब का सेवन: लंबे समय तक या एकसाथ बहुत अधिक शराब पीना दूसरा सबसे बड़ा कारण है।
  • रक्त में ट्राइग्लिसराइड्स (वसा) का बहुत अधिक स्तर
  • कुछ दवाइयाँ: जैसे कुछ मूत्रवर्धक, स्टेरॉयड, कुछ एंटीबायोटिक और मिर्गी की दवाएँ
  • पेट पर चोट या सर्जरी
  • ERCP जैसी जाँच प्रक्रिया के बाद जटिलता
  • संक्रमण: जैसे मम्प्स (कण्ठमाला) जैसे वायरल संक्रमण
  • हाइपरकैल्सीमिया: रक्त में कैल्शियम का अधिक होना
  • अज्ञात कारण: कुछ मामलों में कारण पता नहीं चल पाता

लक्षण

  • पेट के ऊपरी हिस्से में अचानक तेज़ दर्द, जो अक्सर पीठ की ओर जाता है
  • दर्द खाने के बाद, खासकर तला-भुना या वसायुक्त भोजन करने पर बढ़ जाना
  • लेटने पर दर्द का बढ़ना और आगे की ओर झुकने पर कुछ राहत मिलना
  • मतली और बार-बार उल्टी
  • पेट फूलना और छूने पर दर्द होना
  • बुखार और तेज़ धड़कन
  • गंभीर मामलों में साँस लेने में तकलीफ, रक्तचाप का गिरना और शरीर में पानी की कमी

जटिलताएँ

गंभीर एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस में निम्नलिखित समस्याएँ हो सकती हैं:

  • अग्न्याशय में द्रव का जमाव (स्यूडोसिस्ट)
  • अग्न्याशय के ऊतकों का मृत हो जाना (नेक्रोसिस) और संक्रमण
  • गुर्दों का काम बंद होना
  • फेफड़ों में समस्या (ARDS)
  • रक्त शर्करा का असंतुलन

क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस (दीर्घकालिक अग्न्याशय शोथ)

यह क्या है?

क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस में अग्न्याशय में लंबे समय तक सूजन बनी रहती है, जिससे धीरे-धीरे अंग में स्थायी क्षति, घाव (फाइब्रोसिस) और कभी-कभी कैल्शियम के जमाव (पथरी) हो जाते हैं। समय के साथ अग्न्याशय अपना काम ठीक से नहीं कर पाता। यह स्थिति आमतौर पर वर्षों में विकसित होती है।

प्रमुख कारण

  • लंबे समय तक शराब का सेवन: पश्चिमी देशों में यह मुख्य कारण है
  • धूम्रपान और तंबाकू: यह जोखिम को काफी बढ़ाता है
  • आनुवंशिक कारण: परिवार में यह बीमारी होने पर जोखिम अधिक रहता है
  • बार-बार होने वाला एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस
  • ट्रॉपिकल कैल्सिफिक पैंक्रियाटाइटिस: यह दक्षिण भारत, खासकर केरल जैसे क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक देखा जाता है और कम उम्र के लोगों को भी प्रभावित करता है
  • ऑटोइम्यून कारण: जब शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली अग्न्याशय पर हमला करती है
  • नली में रुकावट या संरचनात्मक दोष

लक्षण

  • पेट के ऊपरी भाग में बार-बार होने वाला या लगातार बना रहने वाला दर्द, जो पीठ तक जाता है
  • खाने के बाद दर्द बढ़ना, जिसके कारण मरीज खाने से डरने लगता है
  • वजन में कमी, भूख कम लगना
  • चिकना, बदबूदार और तैरता हुआ मल (स्टीटोरिया): वसा के ठीक से न पचने के कारण
  • पेट में गैस, फूलना और अपच
  • कमज़ोरी और पोषण की कमी
  • बाद के चरणों में मधुमेह (डायबिटीज) का होना, क्योंकि इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाएँ भी प्रभावित होती हैं

जटिलताएँ

  • पाचन की कमी और कुपोषण
  • मधुमेह
  • स्यूडोसिस्ट और नली में रुकावट
  • पित्त नली का संकुचन, जिससे पीलिया हो सकता है
  • लंबे समय तक दर्द की समस्या और दर्द निवारकों पर निर्भरता
  • अग्न्याशय के कैंसर का जोखिम बढ़ना

एक्यूट और क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस में मुख्य अंतर

पहलूएक्यूटक्रॉनिक
शुरुआतअचानकधीरे-धीरे, वर्षों में
अवधिदिनों से हफ्तों तकलंबे समय तक, स्थायी
क्षतिअक्सर ठीक हो जाती हैस्थायी क्षति होती है
आम कारणपथरी, शराबशराब, धूम्रपान, आनुवंशिक
दर्दतेज़ और अचानकबार-बार या लगातार
मुख्य समस्यासूजन और जटिलताएँपाचन विफलता और मधुमेह

जाँच और निदान

डॉक्टर लक्षणों, शारीरिक जाँच और कुछ परीक्षणों के आधार पर निदान करते हैं:

  • रक्त जाँच: एमाइलेज़ और लाइपेज़ एंजाइम का स्तर (एक्यूट में ये बढ़े होते हैं), साथ ही ब्लड शुगर, कैल्शियम, ट्राइग्लिसराइड्स और लिवर व किडनी की जाँच
  • अल्ट्रासाउंड: पित्ताशय की पथरी का पता लगाने के लिए
  • सीटी स्कैन (CT Scan): अग्न्याशय की स्थिति, सूजन, नेक्रोसिस और कैल्शियम जमाव देखने के लिए
  • एमआरआई / MRCP: नलियों की विस्तृत तस्वीर के लिए
  • एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS): क्रॉनिक मामलों में सूक्ष्म बदलाव पहचानने के लिए
  • मल की जाँच: क्रॉनिक में वसा के अवशोषण की जाँच के लिए

उपचार

एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस का उपचार

अधिकांश मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है। उपचार में शामिल हैं:

  • नसों के माध्यम से तरल पदार्थ (IV Fluids): शरीर में पानी की कमी रोकने के लिए, यह सबसे ज़रूरी कदम है
  • दर्द की दवा: दर्द नियंत्रित करने के लिए
  • पोषण: पहले कुछ समय आराम दिया जाता है, लेकिन जैसे ही उल्टी और दर्द नियंत्रण में आए, डॉक्टर की सलाह से जल्दी हल्का भोजन शुरू किया जाता है
  • मूल कारण का उपचार: पथरी हो तो ERCP या बाद में पित्ताशय निकालने की सर्जरी (कोलेसिस्टेक्टॉमी); शराब कारण हो तो उसे पूरी तरह बंद करना; वसा का स्तर अधिक हो तो उसे नियंत्रित करना
  • संक्रमण या नेक्रोसिस होने पर: एंटीबायोटिक और कभी-कभी ड्रेनेज या सर्जरी

क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस का उपचार

  • शराब और धूम्रपान पूरी तरह बंद करना: यह उपचार की नींव है
  • दर्द प्रबंधन: डॉक्टर की देखरेख में दर्द की दवाएँ; कुछ मामलों में नर्व ब्लॉक
  • पैंक्रियाटिक एंजाइम सप्लीमेंट: भोजन के साथ ये कैप्सूल लेने से पाचन बेहतर होता है और स्टीटोरिया व वजन घटने में राहत मिलती है
  • मधुमेह का प्रबंधन: आवश्यकता होने पर इंसुलिन या अन्य दवाएँ
  • विटामिन सप्लीमेंट: वसा में घुलनशील विटामिन (A, D, E, K) की कमी पूरी करना
  • एंडोस्कोपिक या सर्जिकल उपचार: नली में पथरी या संकुचन होने पर स्टेंटिंग या सर्जरी

आहार और जीवनशैली

सही खान-पान इस रोग के प्रबंधन और रोकथाम में बड़ी भूमिका निभाता है।

क्या करें:

  • थोड़ी-थोड़ी मात्रा में, दिन में 5 से 6 बार भोजन करें
  • कम वसा वाला भोजन लें, जैसे दाल, फल, सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज और उबला या हल्का पका भोजन
  • पर्याप्त पानी पिएँ
  • प्रोटीन का संतुलित सेवन करें
  • नियमित हल्का व्यायाम और स्वस्थ वजन बनाए रखें

क्या न करें:

  • शराब बिल्कुल न पिएँ
  • धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह बचें
  • तला-भुना, मसालेदार और बहुत चिकना भोजन, फास्ट फूड और अधिक मिठाई से परहेज़ करें
  • खाली पेट दर्द की दवाएँ बिना डॉक्टर की सलाह के न लें

रोकथाम के उपाय

  • शराब का सेवन बंद करें या अत्यंत सीमित रखें
  • धूम्रपान छोड़ें
  • पित्ताशय की पथरी के लक्षण दिखें तो समय पर इलाज कराएँ
  • कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को नियंत्रण में रखें
  • संतुलित आहार और नियमित व्यायाम अपनाएँ
  • कोई भी दवा बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक न लें

डॉक्टर के पास कब जाएँ?

निम्नलिखित स्थितियों में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें:

  • पेट के ऊपरी हिस्से में तेज़ दर्द जो कुछ घंटों में कम न हो
  • लगातार उल्टी, जिसमें पानी भी न रुके
  • बुखार के साथ पेट दर्द
  • त्वचा या आँखों का पीला पड़ना
  • साँस फूलना, चक्कर आना या बेहोशी जैसा महसूस होना
  • बिना कारण वजन का तेज़ी से घटना और चिकना मल

निष्कर्ष

पैंक्रियाटाइटिस अग्न्याशय की एक गंभीर बीमारी है, जो एक्यूट रूप में अचानक हमला करती है और क्रॉनिक रूप में धीरे-धीरे अंग को स्थायी नुकसान पहुँचाती है। समय पर पहचान और सही इलाज से एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस के अधिकांश मरीज ठीक हो जाते हैं, जबकि क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस में जीवनशैली में बदलाव, एंजाइम सप्लीमेंट और नियमित निगरानी से जीवन की गुणवत्ता बेहतर रखी जा सकती है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शराब और तंबाकू से दूरी, संतुलित और कम वसा वाला आहार तथा पेट के ऊपरी हिस्से में बार-बार होने वाले दर्द को नज़रअंदाज़ न करना, इन सरल कदमों से इस रोग के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *